NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
पंजाब में प्रवासी मज़दूरों को बंधुआ बनाने के दावों में कितनी सच्चाई?
ख़ुद प्रवासी मज़दूरों के संगठन का कहना है, “हमारा प्रवासी मज़दूरों का भाईचारा खेती क़ानूनों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे किसानों के साथ पूरी तरह खड़ा है। हमें शक़ है कि यह रिपोर्ट किसान संघर्ष के कारण ही जारी की गई है।”
शिव इंदर सिंह
09 Apr 2021
केंद्र के गृह मंत्रालय के ख़िलाफ़ पंजाब के सरहदी इलाके में काम कर रहे प्रवासी मज़दूरों ने 4 अप्रैल को अमृतसर में रोष प्रदर्शन किया।
केंद्र के गृह मंत्रालय के ख़िलाफ़ पंजाब के सरहदी इलाके में काम कर रहे प्रवासी मज़दूरों ने 4 अप्रैल को अमृतसर में रोष प्रदर्शन किया।

भारत के गृह मंत्रालय ने पंजाब के मुख्य सैक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस को 17 मार्च को लिखी चिट्ठी में कहा है कि पंजाब के सरहदी जिलों में प्रवासी मज़दूरों को नशे की लत लगाकर उनसे बंधुआ मज़दूरी करवाई जाती है। चिट्ठी में यह भी लिखा है, “मज़दूरों से ज्यादा काम करवाने के बाद भी मेहनताना नहीं दिया जाता। पंजाब के सरहदी जिलों में काम कर रहे मज़दूरों में ज्यादातर उत्तर प्रदेश व बिहार के पिछड़े इलाकों के गरीब परिवारों से सम्बन्ध रखते हैं। मानव तस्करी करने वाले गैंग उन्हें अच्छी मज़दूरी का लालच देकर पंजाब लेकर आते हैं पर पंजाब पहुंचने पर उनका बेहद शोषण व अमानवीय व्यवहार किया जाता है”।

केंद्रीय गृह विभाग का कहना है कि यह जानकारी बीएसफ द्वारा अमृतसर, गुरदासपुर, अबोहर और फिरोजपुर में की गई तफ़्तीश पर आधारित है। केंद्र की इस चिट्ठी के बाद पंजाब में माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य में भाजपा को छोड़कर पंजाब की सारी सियासी पार्टियाँ व किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र पंजाब को बदनाम करने, किसान आंदोलन को खत्म करने और किसानों व प्रवासी मज़दूरों की आपसी सांझ को तोड़ने के लिए ये हथकंडे अपना रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस विरोध के बाद दोबारा स्पष्टीकरण देना पड़ा कि उसकी मंशा गलत नहीं है।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के अनुसार, “पंजाब सरकार ने पड़ताल करवाई है और यह जानकारी तथ्यों पर आधारित नहीं है।” मुख्यमंत्री ने कहा है कि केंद्र का पत्र किसानों की साख खराब करने वाला है। भाजपा ने पहले किसानों को आतंकवादी, शहरी नक्सली और गुंडे आदि के नाम से पुकारा है ताकि किसान आंदोलन को लीक से हटाया जा सके। अन्तराष्ट्रीय सीमा के पास से पकड़े गए व्यक्तियों की सूचना को निराधार अनुमानों से जोड़ दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेक मामले में उचित कार्यवाही पहले ही शुरू की जा चुकी है। ज्यादातर मज़दूर अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं। केंद्रीय पत्र के तथ्यों के  अनुसार बीएसफ अधिकारियों द्वारा न ही ये आंकड़े और न ही यह रिपोर्ट जमा करवाई गई है। गृह मंत्रालय का पत्र अबोहर इलाके में बंधुआ मज़दूरों की बात करता है जबकि अबोहर व फाज़िल्का जिलों में कोई भी ऐसा केस सामने नहीं आया। अमरिंदर सिंह का कहना है कि यह बीएसएफ का काम नहीं है कि वह ऐसे मामलों की जाँच करे। उनकी जिम्मेदारी सिर्फ सरहद पर संदेहास्पद हालात में घूम रहे किसी व्यक्ति को पकड़कर स्थानीय पुलिस के हवाले करना होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में आये सभी 58 केसों की गहराई से जाँच की गई है इनमें ऐसा कुछ सामने नहीं आया है।

भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के नेता बूटा सिंह बुरजगिल ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा,“पंजाब के किसानों व प्रवासी मज़दूरों का रिश्ता लगभग पांच दशक पुराना है, अगर पंजाब के किसान व प्रवासी मज़दूरों में बंधुआ मज़दूरी वाला रिश्ता होता तो इतना लम्बा समय न निकलता। धान लगाने के समय किसान खुद प्रवासी मज़दूरों को शहर के रेलवे स्टेशनों से न्यूनतम मज़दूरी का वादा करके अपने गांवों में लाते हैं और वे इस वादे को पूरा भी करते हैं। पंजाबी किसानों के अच्छे व्यवहार कारण ही बहुत सारे प्रवासी मज़दूर यहाँ पक्के तौर पर रहने लगे हैं। मज़दूर व मालिक के रिश्ते में तनाव होना स्वभाविक है पर रिश्ता लम्बें समय तक तभी निभता है जब दोनों पक्ष वाजिब व्यवहार करें।”

सरहदी इलाके में किसान व मज़दूरों में काम करने वाले संगठन किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के प्रधान सतनाम सिंह पन्नू ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा “मोदी सरकार पंजाब के किसानों और प्रवासी मज़दूरों के अच्छे सम्बन्धों को खत्म करने की चाल चल रही है। केंद्र सरकार ने किसानी संघर्ष को खत्म करने के लिए हर हथकंडा अपनाया है, यह भी उसकी नई चाल है। हमारे संगठन का सरहदी इलाक़े में भी काम है। हमारे पास कभी कोई ऐसा केस नहीं आया।”

पेंडू मज़दूर यूनियन के नेता कश्मीर सिंह घुगसर हमें बताते हैं, “हम अपने मुल्क से अभी तक बंधुआ मज़दूरी खत्म नहीं कर सके, हो सकता है कि पंजाब में भी एक आधा प्रतिशत यह मौजूद हो पर जिस ढंग से केंद्र दोष लगा रहा है वह शक पैदा करने वाला है क्योंकि सरहदी इलाक़े के ज्यादातर किसान अपनी खेती समस्याओं में घिरे हुए हैं। जिस तरह के खेती संकट से वे जूझ रहे हैं उससे पता लगता है कि वो बंधुआ मज़दूरी करवाने जैसे कदम नहीं उठा सकते। इधर ज्यादातर किसान अपनी खेती खुद करते हैं।”

दूसरी तरफ़ केंद्र के गृह मंत्रालय के ख़िलाफ़ पंजाब के सरहदी इलाके में काम कर रहे प्रवासी मज़दूरों ने गत 4 अप्रैल को अमृतसर में रोष प्रदर्शन किया, केंद्र सरकार का पुतला जलाया और केंद्र सरकार व गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह प्रवासी मज़दूरों और पंजाबी भाईचारे के बीच फूट डालने की कोशिश है।

प्रवासी मज़दूरों के संगठन के नेता महेश वर्मा ने कहा, “पंजाब में कई दशकों से यूपी, बिहार व अन्य राज्यों से लोग आकर यहाँ बसे हैं जिन्होंने यहाँ कामकाज करके न सिर्फ यहाँ मकान बनाये हैं बल्कि अपने कारोबार भी शुरु कर लिए हैं। आज भी बाहरी राज्यों से लोग आकर पंजाब में बस रहे हैं। हमारा प्रवासी मज़दूरों का भाईचारा खेती कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों के साथ पूरी तरह खड़ा है। हमें शक है कि यह रिपोर्ट किसान संघर्ष के कारण ही जारी की गई है।”

सरहदी इलाक़े गुरदासपुर के गांव में काम करने वाले प्रवासी मज़दूर रामलाल ने हमें बताया कि वह चालीस साल से पंजाब में काम कर रहा है, यहाँ मज़दूरी करने आया था, अब उसका अपना छोटा बिज़नेस है और बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। रामलाल का कहना है यदि बंधुआ मज़दूरी वाली बात सच होती तो मैं यहाँ तक तरक्की नहीं कर पाता।

पंजाब में बंधुआ मज़दूरी पर रिसर्च करने वाले नामवर समाजशास्त्री प्रोफेसर मनजीत सिंह हमें जानकारी देते हैं, “बंधुआ मज़दूरी सिस्टम उन्मूलन एक्ट 1976 अनुसार जिस मज़दूर को समय पर मज़दूरी न दी जाये, न्यूनतम मज़दूरी से कम दी जाये और उसे मर्जी मुताबिक काम छोड़ने से रोका जाये यह सब इस क़ानून के तहत गैर-कानूनी है। पंजाब में हरित-क्रांति के समय मज़दूरों की आवश्यकता थी, उस समय ऐसे बहुत सारे प्रवासी मज़दूर पंजाब में आये जिनको हम उपरोक्त कानून के अनुसार बंधुआ मज़दूरों की श्रेणी में शामिल कर सकते हैं। करीब 20 साल पहले भी पंजाब में बंधुआ मज़दूर बहुत गिनती में थे। अगर हम इस क़ानून की रोशनी में देखें तो सारे भट्ठा मज़दूर बंधुआ मज़दूरों की श्रेणी में आते हैं। पंजाब में ढाई लाख के करीब भट्ठा मज़दूर हैं। इसलिए बंधुआ मज़दूरों का कोई न कोई रूप पूरे देश में है और पंजाब में भी इनके होने से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकारों को चाहिए था कि वे बंधुआ मज़दूरी को खत्म करते। मौजूदा मोदी सरकार मज़दूर विरोधी क़ानून लाकर अपनी मज़दूर विरोधी मानसिकता को प्रकट कर रही है। पंजाब में जो यह बंधुआ मज़दूरों का मुद्दा केंद्र की चिट्ठी से गरमाया है इसमें मेरे कई सवाल हैं। मोदी सरकार को किसान आंदोलन के दौरान ही यह मुद्दा क्यों याद आया, जब पंजाब के किसान और मज़दूर मिलकर दिल्ली घेरे बैठे हैं। बंधुआ मज़दूरी तो भारत के अन्य राज्यों में भी मौजूद है वहां केंद्र क्या कर रहा है? ये तमाम सवाल केंद्र की मंशा पर शक करने को मजबूर करते हैं। सरकारों का काम सवाल खड़े करना नहीं बल्कि सवाल को हल करना होता है।”

पंजाब में सामन्ती समय से बंधुआ मज़दूरी का इतिहास रहा है, यहाँ बहुत से मज़दूर संघर्ष भी हुए हैं। समय-समय पर दलित मज़दूरों और धनी किसानों के बीच में तल्खी वाले मामले सामने आते रहे हैं लेकिन किसान संघर्ष के दौरान आई केंद्र विभाग की चिट्ठी का विरोध जहाँ तमाम राजनीतिक पार्टियाँ कर रही हैं वहीं किसान और मज़दूर संगठन भी इसे केंद्र की एक चाल के तौर पर देख रहे हैं।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

punjab
Migrant workers
BJP
home ministry
Captain Amarinder Singh
Congress
Workers and Labors

Related Stories

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

उनके बारे में सोचिये जो इस झुलसा देने वाली गर्मी में चारदीवारी के बाहर काम करने के लिए अभिशप्त हैं

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License