NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
डॉक्टर भर्ती किए नहीं, महामारी से कैसे निपटेंगे योगी जी!
एम सी आई (मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया ) के मुताबिक यूपी में एलोपैथी डॉक्टर 78476 हैं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एक हजार लोगों पर एक डाक्टर होना चाहिए पर हालात यह है कि यहां 19000 आबादी पर एक डाक्टर है।
सरोजिनी बिष्ट
01 Apr 2020
डॉक्टर भर्ती
Image Courtesy: Hindustan Times

शुक्र है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस का संक्रमण अभी काबू में है, वरना राज्य के के सरकारी चिकित्सा तंत्र के जो हालात हैं उसे देखते हुए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में इस तरह की महामारी से कितनी बड़ी तबाही मच सकती है। यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में डॉक्टरों के पांच हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। अगर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ती है तो बड़े-बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों का लंबा-चौड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर डॉक्टरों के अभाव में किस काम आयेगा?

 बीते कई सालों से, चिकित्सा के क्षेत्र में सरकार अपने कदम पीछे खींचते जा रही है, और निजी क्षेत्र का दबदबा उसमें बढ़ता जा रहा है। लेकिन यह आजमाई हुई हकीकत है कि जब-जब कोई महामारी या अन्य  चिकित्सकीय आपदा आई है, तो हालात को सरकारी चिकित्सा तंत्र ने ही संभाला है। निजी क्षेत्र के अस्पताल तो केवल वहीं तक सीमित रहते हैं जहां मुनाफा कमाने के भरपूर मौके होते हैं। यह जानते-समझते हुए भी, सरकार में बैठे लोग, निजी क्षेत्र से सांठगांठ के चलते, सरकारी चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त करने में लगे हैं। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन इस अवधि में डॉक्टरों का अभाव दूर करने के लिए वह कुछ करते नजर नहीं आए। और, अब इस विपत्ति के समय इसमें और देरी ही होनी है।

एम सी आई (मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया ) के मुताबिक यूपी में एलोपैथी डॉक्टर 78476 हैं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एक हजार लोगों पर एक डाक्टर होना चाहिए पर हालात यह है कि यहां 19000 आबादी पर एक डाक्टर है। डॉक्टरों का अभाव दूर करने के लिए जब सरकार पर दबाव ज्यादा बढ़ जाता है तो वह कांट्रैक्ट पर कुछ भर्ती कर खानापूर्ति कर लेती है। लेकिन अक्सर देखने को मिलता है कि ये डॉक्टर कांट्रैक्ट अवधि पूरी होने से पहले ही काम छोड़ देते हैं। इसकी दो बड़ी वजहें हैं। एक, उन्हें नियमित डॉक्टरों के मुकाबले काफी कम वेतन मिलता है और काम कहीं ज्यादा लिया जाता है। दूसरा, कई बार उन्हें वेतन भी समय पर नहीं मिलता। कुछ दफा तो कई-कई महीने वेतन नहीं मिलने की शिकायतें आयी है।
 
बीते फरवरी महीने में ही यह खबर अखबारों की सुर्खियां बनी थी कि प्रदेश भर के सीएचसी और अर्बन पीएचसी पर तैनात संविदा ( कांट्रैक्ट वाले) डॉक्टरों और कर्मचारियों को करीब तीन माह से वेतन नहीं मिला है। बांदा के एक संविदा डॉक्टर ने क्षुब्ध होकर इस्तीफा तक दे दिया था। एनएचएम के तहत कांट्रैक्ट पर रखे गए करीब पांच हजार आयुष डॉक्टरों और 75 हजार पारा-मेडिकल कर्मियों को अक्सर यह भुगतना पड़ता है। इसी तरह, कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों, नॉन-पीजी जूनियर डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को छह महीने से उनका स्टाइपेंड व वेतन नहीं मिला था।

आख़िरकार नाराज स्टाफ नर्सों ने काम रोक दिया, तब जाकर इस मार्च महीने में सभी को भुगतान हुआ। वेतन में फर्क की बात करें, तो कई मेडिकल कॉलेजों में लेक्चरर ग्रेड के संविदा डॉक्टरों का वेतन पीजी जूनियर डाक्टरों के स्टाइपेंड से भी कम है। ऐसे में बहुत से पद खाली ही पड़े रह जाते हैं, और अगर लोग ज्वाइन करते भी हैं तो हमेशा असंतुष्ट रहते हैं और नयी नौकरी की तलाश में लगे रहते हैं।

डॉक्टरों का अभाव दूर करने के लिए कोई स्थाई योजना बनाने की जगह, सरकार कांट्रैक्ट पर नियुक्ति का पैबंद लगाकर काम चलाना चाहती है। पर अब यह यह तरीका पूरी तरह फेल हो चुका है। सरकार ने अपने चिकित्सकीय तंत्र के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार किए नहीं। इस कमी को पूरा करने के लिए वह निजी क्षेत्र से डॉक्टरों को ला रही है तो वे मोटा वेतन देने पर भी टिक नहीं रहे। स्वास्थ्य विभाग ने एक साल पहले 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों की डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपए महीने पर, कांट्रैक्ट पर भर्ती की थी।

लेकिन इनमें से 17 डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। आखिर सरकारी को छोड़ क्यूं प्राईवेट सेक्टर की नौकरी डॉक्टर करना पसंद के रहे हैं तो इसके जवाब में एक डाक्टर ने बताया निजी क्षेत्र के मोटे वेतन और चमक-दमक ने उन्हें वापस अपनी ओर खींच लिया।  सरकारी अस्पतालों मेंदरअसल, 'प्रवासी पक्षियों' के जरिए अपने बाग को गुलजार करने की कोशिश ही दोषपूर्ण है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ, उत्तर प्रदेश के एक पदाधिकारी ने बताया कि सरकारी डॉक्टरों पर काम के ज्यादा बोझ और समय पर प्रमोशन न मिलने के कारण डॉक्टरों को निजी क्षेत्र की चकाचौंध ज्यादा लुभाती है।

मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के अभाव का सवाल मीडिया में बार-बार उठने पर, प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डॉ. के. के. गुप्ता प्रक्रिया चल रहे होने का वही घिसा-पिटा बयान दोहराते हैं। फिलहाल, उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।  यूपीपीसीएस को 691 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए पत्र भेजा गया है। सरकारी अस्पतालों में पारा-मेडिकल स्टाफ जैसे फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्स रे टेक्नीशियन,  स्टाफ नर्स आदि की भारी कमी है। बड़े दिनों के बाद, फार्मासिस्ट के 190 पदों पर भर्ती का मुहूर्त बना, लेकिन लॉकडाउन के चलते काउंसलिंग की प्रक्रिया खटाई में पड़ गई है।

इन हालात से योगी सरकार कोई सबक लेगी ऐसा लगता नहीं है। वह चिकित्सा क्षेत्र को निजी हाथों में ही देने को आमादा है। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों- रामपुर, बदायूं, बागपत, कासगंज, मैनपुरी, हाथरस, महाराजगंज, बलिया, संतकबीर नगर, शामली, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, मऊ, श्रवस्ती, संभल- में अभी कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। हाल ही में, मुख्यमंत्री ने इन जिलों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने का एलान किया है। यहां के सरकारी जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में बदला जाएगा। यानी, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्राइवेट सेक्टर मलाई काटेगा और जनता के हाथ केवल महंगा इलाज और कोरोना जैसी आपदा के समय बेबसी आनी है।

novel coronavirus
COVID-19
UttarPradesh
WHO
Medical student
Medical Council of India
Coronavirus Epidemic
yogi sarkar
Yogi Adityanath

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License