NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विश्लेषण : यूपी-एमपी समेत 13 राज्यों में छुट्टा गोवंश में भारी बढ़ोतरी
2012 की पशुगणना से 2019 के बीच इन 13 राज्यों में छुट्टा गोवंश की संख्या में 36 प्रतिशत की वृद्धि है, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि दर 5 प्रतिशत निगेटिव में रही है।
पीयूष शर्मा
05 Mar 2020
stray cattle in 2019

देश में राष्ट्रीय स्तर पर छुट्टा गोवंश में पिछली पशुगणना से 5.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट आयी है, जबकि देश के कई राज्यों में छुट्टा पशुओं की संख्या में बेहताशा वृद्धि है, छुट्टा गोवंश की यह संख्या 20वीं पशुगणना से है जो मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी की गयी है ।

पशुगणना के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में कुल पशुधन 53.67 करोड़ है जिसमें 2012 की पिछली पशुगणना से 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वर्तमान में देश में कुल पशुधन का 95.78 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में है और मात्र 4.22 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में हैं । इसके साथ ही देश में 19.35 करोड़ गोवंश यानी गाय-बैल हैं, जिनकी संख्या में पिछली पशु गणना से 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल गोवंश की संख्या में विदेशी नस्ल की संख्या 5.13 करोड़ है जिसमे पिछली पशुगणना से 29.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और देश में 14.21 करोड़ देशी नस्ल की गाय-बैल है, जिनमे पिछली पशुगणना से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है ।

छुट्टा गोवंश की संख्या में राष्ट्रीय स्तर पर जरूर मामूली कमी आयी है परन्तु कई राज्यों में छुट्टा गोवंश की संख्या में भारी वृद्धि आयी है, जिसमे उत्तर प्रदेश (17.34% ), राजस्थान (34.5%), मध्य प्रदेश (95%), असम (77%), आंध्र प्रदेश  (73.7%), पंजाब(38.7%), छत्तीसगढ़ (33.9%), झारखंड (25.8%), गुजरात (17.6%), हिमाचल प्रदेश (12.9%), हरियाणा (9.1%), उत्तराखंड (103.30%) और कर्नाटक (19.%) है जिनमें 2012 की पशुगणना के मुकाबले 2019 की पशुगणना में भारी वृद्धि दर्ज हुई है ।

इसके साथ ही कुछ राज्यों, ओडिशा (-86.7%), पश्चिम बंगाल (73.6%), बिहार (67.5%), तमिलनाडु (23.9%) और केरल (22.5% ) में छुट्टा गोवंश की संख्या में गिरावट हुई है।

Stray Cattle in 2012 and 2019 Livestock Census.jpg

Source:
19th Livestock Census, 2012
20th Livestock Census, 2019

कुल मिलाकर 13 राज्यों में छुट्टा गोवंश की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है, यदि हम केवल इन 13 राज्यों के जिनके नाम ऊपर दिए है उनका विश्लेषण करें तो पता चलता है कि इन 13 राज्यों में देश के कुल छुट्टा पशुओं का 88 प्रतिशत इन्हीं राज्यों में है, जबकि पिछली पशुगणना जो 2012 में हुई थी उसमें यह संख्या 61 प्रतिशत थी। और 2012 की पशुगणना से 2019 के बीच इन 13 राज्यों में छुट्टा गोवंश की संख्या में 36 प्रतिशत की वृद्धि है, आपको याद दिला दें इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि दर 5 प्रतिशत निगेटिव में रही है।

लेख में ऊपर दिए गए आंकड़े तो मात्र छुट्टा गोवंश के हैं इसके अलावा अगर हम छुट्टा गोवंश की संख्या के साथ अनुपयोगी गोवंश जिसमे बूढ़ी गायें जो दूध नहीं दे रही हैं, वह गाय जो एकबार भी नहीं ब्याही है, खेती के लिए अनुपयोगी बैल, बूढ़े बैल को शामिल कर ले तो 20वीं पशुगणना के ही आंकड़ों के अनुसार अनुपयोगी गोवंश की संख्या 1.29 करोड़ हो जाएगी।

किसान के लिए अनुपयोगी गोवंश पालना एक बड़ा आर्थिक बोझ है जिसको वह वहन कर पाने में असमर्थ है जिसके कारण वह उसे खुला छोड़ दे रहा है जिसके कारण बड़े स्तर पर सभी जगह झुंड में गोवंश दिखाई दे रहे हैं और वह खड़ी फसलों को खराब कर रहे हैं और सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकार जिन्होंने अपने यहाँ गोकशी पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया है उनसे यह समझ पाने में चूक हो गयी कि उनके इस कदम से किसानों को कितना नुकसान होगा। आज सड़कों पर इतनी बड़ी संख्या में गोवंश जो भूखा है वह खुले में घूम रहा है। अब यहाँ छुट्टा गाय और बैल किसानों और आम जनता का सिरदर्द बन गए हैं।

किसान पर पहले से ही बीज, खाद, पानी बिजली और दवाई के बढ़े हुए दामों का आर्थिक बोझ है और अब छुट्टा गोवंश से सुरक्षा के लिए किसानों को तार बाड़ व पहरेदारी के लिए अतिरिक्त खर्च करने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। बड़े और संपन्न किसान तो छुट्टा गोवंश से सुरक्षा के उपाय कर ले रहे हैं परन्तु छोटे किसान जिनकी संख्या और खेती का क्षेत्रफल ज्यादा है वो अतिरिक्त आर्थिक बोझ को उठा पाने में असमर्थ हैं। जिसके कारण उनका उत्पादन कम हो रहा है और उनकी आय भी घट रही है। कुल मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है कि प्रतिबंध के इस निर्णय से खेती-किसानी पर बुरा असर पड़ रहा है, और इसके दुष्प्रभाव ग्रामीण-शहरी जनजीवन पर पड़ने शुरू हो गये हैं और अगर इस समस्या का जल्द ही कोई स्थायी समाधान न निकाला गया तो इसके और ज्यादा दुष्परिणाम सामने आयेंगे।

जिन राज्यों में छुट्टा गोवंश की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है उनमे से अधिकांश राज्यों में बीजेपी की सरकार रही है। बीजेपी की राजनीति हमेशा से जाति और मज़हब के इर्द-गिर्द घूमती रही है और इसके लिए बीजेपी ने गाय को एक बड़ा हथियार बनाया हुआ है। बीजेपी अच्छे से जानती है कि गाय खुद तो वोट नहीं दे सकती है पर वोट दिला जरूर सकती है। गौ हत्या पर प्रतिबंध पहले से रहा है परन्तु केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार के आने के बाद से गाय के नाम पर की गयी सियासत का ख़ामियाज़ा आम जनता को कई तरह से भुगतना पड़ रहा है। इस दौरान गौ रक्षा के नाम पर गौरक्षकों की अतिसक्रियता ने सांप्रदायिक माहौल तो बिगाड़ा ही है इसके साथ ही गौवंश-कृषि आधारित आर्थिक व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है।

जितनी तेजी से छुट्टा गोवंश की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है वह दर्शाता है कि छुट्टा गोवंश की समस्या को लेकर ज्यादा हल्ला होने पर जो कदम केंद्र और राज्य सरकारों ने उठाये वह नाकाफ़ी रहे हैं और समस्या से निजात मिलने के बजाय समस्या और बढ़ी है। और अगर जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में और दुष्परिणाम सामने आएँगे।

Livestock Census
Govt Data
Hate Crimes
Stray Cattle
Animal Shelter
Cow Shelter
Cattle Shelter
cow cess
farmer
cow

Related Stories

कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!

धांधली जब लोगों के दिमाग़ के साथ हो जाती है, तभी उत्तर प्रदेश के नतीजे इस तरह आते हैं

यूपी विधानसभा चुनाव : लाभार्थी वर्ग पर भारी आहत वर्ग

ग्राउंड रिपोर्ट: जंगीपुर-ज़हूराबाद में आवारा पशु, बेरोज़गारी खा गई मोदी-योगी का प्रचार

यूपी चुनाव 2022 : आवारा पशु हैं एक बड़ा मुद्दा

यूपी चुनाव: क्यों हो रहा है भाजपा मतदाता का हृदय परिवर्तन

यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी

यूपी: छुट्टा पशुओं की समस्या क्या बनेगी इस बार चुनावी मुद्दा?

एमएसपी कृषि में कॉर्पोरेट की घुसपैठ को रोकेगी और घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी

यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 


बाकी खबरें

  • नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु के ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों में डीएमके एकतरफ़ा जीत हासिल की
    15 Oct 2021
    एआईएडीएमके और बीजेपी की बेहद अपमानजनक हार।
  • Ram
    शंभूनाथ शुक्ल
    सबके अपने-अपने राम!
    15 Oct 2021
    राम के चरित्र का उज्ज्वल पक्ष क्या है और स्याह पक्ष कौन-सा है, जब तक यह नहीं समझा जाएगा, तब तक इस तरह लकीर पीटने से क्या फ़ायदा! नौ दिन तक राम लीला हुई और दसवें दिन रावण फुँक गया। बस क़िस्सा ख़त्म।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    डीयू शिक्षक संघ चुनाव, बनारस में छात्रों पर FIR और अन्य ख़बरें
    14 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के चुनाव, बनारस में छात्रों पर FIR अन्य ख़बरों पर।
  • bsf
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बॉर्डर राज्यों में केंद्र ने बढ़ाया BSF का दायरा, पंजाब-पश्चिम बंगाल ने बताया राज्यों पर हमला
    14 Oct 2021
    पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगे हुए राज्यों में BSF अब 50 किलोमीटर तक के दायरे में गिरफ्तारी कर सकती है, तलाशी कर सकती है, जांच कर सकती है, सामान जब्त कर सकती है। पहले बॉर्डर राज्यों पर सुरक्षा की…
  • stop
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!
    14 Oct 2021
    यह सिर्फ इसी मामले की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे देश की स्थिति है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है लेकिन जब मामले दर्ज होते हैं तो अदालतों में उन पर सुनवाई पूरी होने में सालों लग जाते हैं और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License