NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
कोरोना काल में भूख कॉरपोरेट की तिजोरी में बंद, सरकार मौन ! 
तीन कृषि कानूनों की गहनता से पड़ताल की जाए तो हम पाते है की यह पूरी प्रक्रिया वर्चूअल सप्लाई चेन को स्थापित करने की है जहां पूर्ति की हर कड़ी पर, चाहे वो उत्पादक हो या फिर वितरक, मुख्य कंपनी की पकड़ होती है।
शमशेर सिंह
29 Apr 2021
दिल्ली के अलग अलग बॉर्डरों पर किसानों को आंदोलन करते हुए

दिल्ली के अलग अलग बॉर्डरों पर किसानों को आंदोलन करते हुए 150 दिन हो चले है. इस दौरान उन्होंने भयंकर ठंड, बारिश का मुक़ाबला किया. कुछ दिनों में गर्म मौसम अपने चरम पर होगा. इन सारी विकट परिस्थितियों के बावजूद वे पूरी दृढ़ता के साथ एक ही बात कह रहे है कि हालिया क़ानून अपने मौजूदा स्वरूप में देश की खाद्य सुरक्षा को ख़तरे में डाल देंगे. पिछले 7 दशकों के लंबे अंतराल में पंचवर्षीय योजनाओं से विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान तकनीक की मदद से राष्ट्र के 52 करोड़ किसान एवं मजदूर वर्ग ने हमें यह खाद्य सुरक्षा प्रदान की और देश को स्वावलंबी बनाया. किसान नेता अपने भाषणों में बार बार ज़ोर देते रहे है कि भूख को तिजोरी में क़ैद किया रहा है. शब्दों से परे हम इस कथन को बिना पृष्ठभूमि के नहीं समझ सकते. 2013 मे 132 करोड़ नागरिकों को आगामी 3 वर्षों के खाद्यान्न सुरक्षा एवं  मांग आपूर्ति संतुलन में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं भूमि अर्जन कानून का  पास होना ऐतिहासिक पल थे. लेकिन बाद के सालों की घटनाओं ने संघर्षों से हासिल इन अधिकारों को कुचलने का काम किया. इसकी पहली शुरुआत कोरोना काल में तीनों बिलों को अध्यादेश के रूप में लाने से हुई. 

इसके साथ साथ गौर में लाने वाली बात यह भी है कि कृषि में बिल गेट्स जैसे पूँजीपति भी अपने प्रयोग कर रहे है जहाँ हज़ारों एकड़ में खेती मशीनों के मदद से की जानी है. इन प्रयोगों की ख़ासियत यह है कि अनाज के दामों में बेतहाशा वृद्धि होगी. हम पहले ही देख चुके है कि विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका, कनाडा और ब्राज़ील जैसे देश भारत में सब्सिडी देने की शिकायत कर चुके है. इस इंटरनेशनल गिरोह की साज़िशों का ही नतीजा है कि देश में TPDS यानी टार्गेट पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के माध्यम से देश के सबसे पिछड़े वर्गों तक राशन पहुँचाने वाली व्यवस्था अब ध्वस्त हो चुकी है. इस जर्जर हो चुके ढाँचे में आख़िरी चोट तीन कृषि क़ानूनों ने की है जहाँ सीधा सीधा फ़ायदा भंडारण के क्षेत्र में बड़ी कॉरपोरेट कंपनी को होना है. सबसे पहले सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) की आर्थिक सेहत को नज़रअंदाज़ करते हुए भंडारण की चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी अड़ानी को दी जहां भुगतान की शर्तें एकतरफ़ा झुकती हुई नज़र आती है. इस पूरी व्यवस्था में दिलचस्प बात देखने वाली यह रही है कि कंपनी को 800 करोड़ के क़रार का विरोध अपने आप को किसान हितैषी बताने वाली कांग्रेस ने कभी नहीं किया. 

यहाँ ये बताना भी ज़रूरी हो जाता है कि भंडारण के लिए कंपनी के इन साइलोज़ का निर्माण सारे नियम क़ानूनों को दरकिनार करते हुए किया जा रहा है. साइलोज़ स्टील के बड़े सिलेंडरनुमा भंडार होते है जहां अनाज तापमान व नमी की मार से बचा रहता है. अगर मैं हरियाणा का अनुभव साझा करूँ क्यूँकि मैं यहाँ का निवासी भी हूँ तो पाता हूँ कि लोगों को सरासर झूठ बोल कर ज़मीन अधिग्रहित की गई कि किसानों के बच्चों को रेलवे जैसे सरकारी उपक्रमों में नौकरी दी जाएगी. इस छल के माध्यम से किसानों की 987 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की गई. जबकि क़ानून इसके बारे में स्पष्ट है कि अधिग्रहण की शर्तें, भुगतान, सामाजिक और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की जाएगी पर धरातल पर ऐसा कुछ होता नज़र नहीं आया. हमें यह बात, जिसके दस्तावेज सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है, भी पता चली कि अधिग्रहण की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए लैंड यूज़ की शर्तों को भी बदला गया जिसकी मंज़ूरी टाउन और कंट्री प्लानिंग की ओर दो गयी. किसानों ने जब व्यवस्था की पैदल यात्रा के माध्यम से पोल खोली तो उन पर क़ानून की तमाम संगीन धाराएँ लगा दी गई. बलराज कुंडू जैसे स्वतंत्र विधायकों पर दबाव बनाया गया कि विधानसभा के अंदर ख़ामोश रहे. इसका प्रत्यक्ष नुक़सान ये रहा कि किसानों पर व्यक्तिगत तौर पर ज़मीन बेचने का दबाव बनाया जिसके लिए प्रक्रिया पहले से निर्धारित है. अतः ये संघर्ष ज़मीन और रोटी दोनों को बचाने का है.

पर क्या ये सारे प्रयोग नए है जिनकी उत्पत्ति अचानक हो गयी ! गहनता से पड़ताल की जाए तो हम पाते है की यह पूरी प्रक्रिया वर्चूअल सप्लाई चेन को स्थापित करने की है जहां पूर्ति की हर कड़ी पर, चाहे वो उत्पादक हो या फिर वितरक, मुख्य कंपनी की पकड़ होती है. अमेरिका में वॉलमार्ट जैसे उदाहरण हमारे सामने है जो न सिर्फ़ बेचने का काम अपने मॉल से करती है जबकि किसानों से उत्पादन तक करवाती है. इसी मॉडल की बदौलत वॉलटन परिवार लगभग सारा मुनाफ़ा खुद अपने पास रख लेता है. एक ऐसी व्यवस्था जिसने अमेरिका के किसानों को 45 अरब डॉलर के क़र्ज़े के तहत दबा रखा हो, ऐसे में उसे कॉरपोरेट के मुनाफ़े के लिए उसे जारी रखना कितना उचित होगा ये हमारे हुक्मरानों को सोचना होगा !

( यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक एक किसान नेता है)

corporate
Farm Bills
Farm Laws
farmers protest
TPDS
FCI
Protest on Delhi Border

Related Stories

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

एमएसपी कृषि में कॉर्पोरेट की घुसपैठ को रोकेगी और घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

कृषि क़ानूनों के निरस्त हो जाने के बाद किसानों को क्या रास्ता अख़्तियार करना चाहिए


बाकी खबरें

  • भाजपा की पार्टनर वीआईपी को यूपी चुनाव से पहले क्यों आई फूलन की याद?
    विजय विनीत
    भाजपा की पार्टनर वीआईपी को यूपी चुनाव से पहले क्यों आई फूलन की याद?
    27 Jul 2021
    “भाजपा पहले निषादों को लेकर चिंतित नहीं थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की सीट पर अजेयता के मिथक के टूट जाने के बाद भाजपा अब रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है।"
  • मिशन यूपी 2022ः योगी के ख़िलाफ़ बिगुल फूंका किसानों ने
    न्यूज़क्लिक टीम
    मिशन यूपी 2022ः योगी के ख़िलाफ़ बिगुल फूंका किसानों ने
    27 Jul 2021
    खास पेशकश में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की किसान नेताओं से उनकी आगे की रणनीति, मिशन यूपी 2022 और मिशन उत्तराखंड 2022 के बारे में बात की। जंतर-मंतर पर चल रही किसान संसद के दौरान ही भारतीय किसान…
  • Raj Kundra
    भाषा
    अश्लील फिल्म मामले में अदालत ने राज कुंद्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
    27 Jul 2021
    कुंद्रा की पुलिस रिमांड समाप्त होने पर उन्हें मंगलवार को यहां एक मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कुंद्रा ने जमानत के लिए अदालत में…
  • तियांगोंग स्पेस स्टेशन: डार्क मैटर से लेकर कैंसर अनुसंधान तक के वैज्ञानिक परीक्षणों की योजना
    संदीपन तालुकदार
    तियांगोंग स्पेस स्टेशन: डार्क मैटर से लेकर कैंसर अनुसंधान तक के वैज्ञानिक परीक्षणों की योजना
    27 Jul 2021
    प्रस्तावित शोध विषयों में डार्क मैटर और गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अध्ययन से लेकर कैंसर पर अनुसंधान और रोगजनक बैक्टीरिया तक का अध्ययन शामिल है।
  • पेगासस प्रोजेक्ट: बीएसएफ़ के पूर्व प्रमुख, रॉ और ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केजरीवाल के क़रीबी का नाम निगरानी सूची में
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पेगासस प्रोजेक्ट: बीएसएफ़ के पूर्व प्रमुख, रॉ और ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केजरीवाल के क़रीबी का नाम निगरानी सूची में
    27 Jul 2021
    रिपोर्ट के मुताबिक़, आरएसएस के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद बीएसएफ के पूर्व प्रमुख शर्मा राडार में आए थे। आधिकारिक वर्दी में आरएसएस के कार्यक्रम में शर्मा के हिस्सा लेने के चलते विवाद भी खड़ा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License