NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
भूख लोगों को खा जाएगी, जागो सरकार!
भूख की महामारी का दायरा कितना व्यापक है इसे समझने के लिए हम आपको कोरोना से ग्रस्त भारत नहीं, बल्कि कोरोना से पहले के भारत की तस्वीर दिखाते हैं। यानी तथाकथित 'नॉर्मल' भारत।
राज कुमार
29 May 2020
hunger
'प्रतीकात्मक तस्वीर' फोटो साभार: Quora

आपने इन दिनों, लोगों के ये खूब कहते सुना होगा कि कोरोना तो बाद में मारेगा, पहले भूख से मर जाएंगे। सिर्फ कोरोना से नहीं बल्कि भूख से भी मौतें हो रही हैं। सरकार जहां एक तरफ कोरोना से लड़ाई में पिछड़ती जा रही है वहीं दूसरी तरफ भूख को एक गंभीर समस्या की तरह रेखांकित भी नहीं कर रही है। भारत में कोरोना के केस डेढ लाख से ज्यादा हो चुके हैं और अब तक साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्तर पर भारत अब 10वें नंबर पर पहुंच गया है।

भूख एक भयानक महामारी की तरह जनता को निगलने के लिये खड़ी है। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी सरकार का एक साल पूरा होने पर जश्न की तैयारी कर रही है। भूख एक वास्तविक समस्या है और महामारी की हद तक पहुंच चुकी है। लेकिन सरकार इसे अनदेखा करके लाखों लोगों को भूख से मरने के लिये उनके हाल पर छोड़ रही है। भूख की महामारी का दायरा कितना व्यापक है इसे समझने के लिए हम आपको कोरोना से ग्रस्त भारत नहीं, बल्कि कोरोना से पहले के भारत की तस्वीर दिखाते हैं। यानी तथाकथित 'नॉर्मल' भारत।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 को एक बार फिर से देखिये और उसके बाद 20 लाख करोड़ के पैकेज़ पर नज़र डालिये। सड़कों पर पूरे परिवार समेत दर्दानाक मौत मर रहे मज़दूरों की हृद्य विदारक तस्वीरें देखिये और अपना माथा पीट लीजिये। गलोब्ल हंगर इंडेक्स के अनुसार भारत में भूख का संकट गंभीर है। 117 देशों में से भारत 102 वें नंबर पर है। और ये कोविड-19 से पहले की स्थिति है। यानी ‘नॉर्मल’ भारत की तस्वीर 

‘विश्वगुरू’ भारत की भूख से जूझ रही संतानों में सबसे पहली क़तार में बच्चे, महिलाएं और ग़रीब लोग हैं। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में पांच साल से कम उम्र के 8 लाख 80 हज़ार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार थे। यानी हर रोज लगभग 1687 बच्चों की मौत होती है। कुपोषण और भूख के बीच का अंतर भी बड़ी दिलचस्प है। आमतौर पर सरकारें भूख से मौतों का नकारती रहती हैं। इसलिये पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट में कुपोषण लिखा होता है।

नेशलन फैमिली हैल्थ सर्वे की रिपोर्ट पर भी नज़र डालिये। जो बताती है कि 6-23 महीने के बच्चों में सिर्फ 9.6 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त पोषण मिल पाता है। 38.4 प्रतिशत बच्चों का शारीरिक विकास कुपोषण की वजह से नहीं हो पाता। 35.8 प्रतिशत बच्चे कम वज़नी यानी अंडरवेट हैं। महिलाओं के पोषण के हालात भी भयावह हैं। 53.1 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं। मात्र महिलाएं ही नहीं बल्कि 22.7 प्रतिशत पुरुष भी खून की कमी के शिकार हैं।

कोविड से पहले भी भारत में करोड़ों लोगों को रोज कुआं खोदकर पानी पड़ता था। यानी रोज मज़दूरी करके ही रोज का भोजन खा सकते थे। लेकिन कोरोना के बाद तो स्थिति और भी भयावह हो गई है। जिसे सरकार ने और भी भयंकर बना दिया है। भारत में कोरोना का पहला केस जनवरी में आया था और अभी मई बीत रहा है। लेकिन कोरोना की रोकथाम तो छोड़िये सरकार अभी मज़दूरों को उनके घर तक नहीं पहुंचा पाई है।

गौरतलब है कि कोरोना के बाद पोषण और भूख की ये स्थिति और भी बदतर हुई है। लोगों का रोज़गार जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार श्रम शक्ति में 35.4 प्रतिशत की गिरावट है। ये संख्या करोड़ों में हैं। अकेले प्रवासी मज़दूरों की संख्या का 8 करोड़ का अनुमान है। ये बेरोज़गार भारत क्या खायेगा? भूख की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। लेकिन सरकार इसे स्वीकर करने में आनाकानी कर रही है। ठीक उसी तरह, जिस तरह राज्य सरकारें भूख से हुई मौतों को मानने से इंकार करती रही हैं।

सरकार के बदइंतज़ाम ने आग में घी का काम किया है। बिना किसी भी तैयारी के लॉकडाउन की घोषणा। मज़दूरों को सड़कों पर मरने के लिये छोड़ देना। ट्रेनों का कहीं से कहीं पहुंच जाना। पानी और खाने की कोई व्यवस्था ना होना। ये सब दिखाता है कि किस तरह सरकार ने ग़रीब लोगों को कोरोना और भूख से मरने के लिये अपने हाल पर ‘आत्मनिर्भर’ छोड़ दिया है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Lockdown
poverty
Hunger Crisis
deaths due to hunger
malnutrition in children
malnutrition
State Government
Central Government
Narendra modi
modi sarkar
Economic package
20 lakh Crore

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश

मनरेगा: ग्रामीण विकास मंत्रालय की उदासीनता का दंश झेलते मज़दूर, रुकी 4060 करोड़ की मज़दूरी

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License