NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड में आदिवासियों को लेकर अलग धर्म कोड की मांग फिर तेज़ हुई
भाजपा समर्थित राजधानी रांची की मेयर आशा लकड़ा ने आदिवासियों के लिए अलग श्रेणी का कॉलम बनाने की मांग की है जिसमें हिन्दू या ईसाई का स्पष्ट उल्लेख हो। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर चल रहा है।
अनिल अंशुमन
20 Mar 2020
झारखंड
Image courtesy: Social Media

आदिवासी क्या हैं अथवा उनका धर्म क्या है। इसे लेकर जारी सामाजिक चर्चा इन दिनों झारखंड प्रदेश में फिर से सरगर्म हो उठी है। इसमें आग में घी का काम भाजपा समर्थित राजधानी रांची की मेयर आशा लकड़ा के दिये सार्वजनिक बयान ने किया है। 16 मार्च को रांची नगर निगम में आयोजित पाँच दिवसीय फील्ड ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने मांग किया कि आदिवासियों के लिए अलग श्रेणी का कॉलम बने। जिसमें हिन्दू या ईसाई का स्पष्ट उल्लेख हो।

17 मार्च को इस बयान कि खबर मीडिया में प्रकाशित होते ही सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया– आदिवासी सिर्फ आदिवासी है! आदिवासी को हिन्दू–ईसाई में न बांटें, आदिवासी को सिर्फ आदिवासी कि श्रेणी में ही रखें! आदिवासी को हिन्दू बनाने की संघी साजिश नहीं चलेगी! प्रकृतिपूजक आदिवासी को हिन्दू घोषित करनेवाले संघ परिवार के आदिवासी एजेंटों का सामाजिक बहिष्कार करो! संघ परिवार से जुड़े आदिवासी, सही आदिवासी नहीं हैं! होश में आओ .... इत्यादि।

adidharm 2.jpg

आदिवासी सवालों पर निरंतर सक्रिय रहनेवाले आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के वरिष्ठ प्रतिनिधि वाल्टर कंडुलना ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया में लिखने के साथ साथ बताया, 'आरएसएस–भाजपा ने जिस प्रकार से नागरिकता के सवाल पर सीएए–एनआरसी लाकर समाज को हिन्दू मुसलमान में बांटने की सांप्रदायिक साजिश रची है, झारखंड में वही खेल अब झारखंड के आदिवासी समाज में हिन्दू-ईसाई का विभाजन पैदा करके किया जा रहा है। वैसे आरएसएस द्वारा यह खेल झारखंड में आदिवासी सामाज की एकता तोड़ने के लिए काफी पहले से ही खेला जा रहा है। आशा लकड़ा द्वारा दिये बयान में सिर्फ मुंह उनका है, शब्द संघ परिवार से निर्धारित हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि विधान सभा चुनाव में आदिवासी समाज ने भाजपा के जन विरोधी नीतियां को जिस तरीके से हराया है। संघ परिवार उससे काफी बौखलाया हुआ है। हिन्दू–ईसाई का विभाजन का कार्ड उसी की भरपाई के लिए खेला जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले 20 फरवरी को सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा झारखंड दौरे के क्रम में दिये गए बयान–आगामी जनगणना के धर्म वाले कॉलम में आदिवासी अपना धर्म हिन्दू लिखें पर झारखंड व दिल्ली समेत कई राज्यों के आदिवासियों ने सड़कों पर उतर कर कड़ा विरोध प्रदर्शित किया था। साथ ही उनके इस बयान कि ईसाई संगठन चाहता है कि सारे आदिवासी ईसाई बन जाएं इसलिए हिन्दू संगठन उन्हें अपने पाले में लाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहें हैं पर भी तीखा विरोध प्रकट किया।
 
वरिष्ठ आदिवासी चिंतक और शिक्षाविद पद्मश्री रामद्याल मुंडा लिखित “आदि धर्म” समेत अनेकों देशी–विदेशी समाजशास्त्री और नृविश्लेषकों द्वारा लिखित किताबों और अनगिनत शोध आलेखों में यह बात प्रमुखता से लायी गयी है कि सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया के आदिवासियों की बाकी समाज से एक पृथक व भिन्न अपनी अलग पहचान, भाषा-संस्कृति– परंपरा व जीवनशैली रही है। मानव समाज शास्त्र के उपलब्ध तथ्यों–शोध साक्ष्यों के मुताबिक भी आदिवासी समाज आदिवासी रहें हैं।

हाल में झारखंड समेत देश के कई हिस्सों के आदिवासी समाज के लोग जनसंख्या गणना समेत सभी सरकारी कार्यों में अपने लिए अलग धार्मिक कोड की मांग को लेकर निरंतर आवाज़ उठा रहें हैं। चंद महीने पहले दिल्ली के जंतर मंतर में झारखंड के कई आदिवासी संगठनों के लोग अपने लिए ‘सरना कोड’ की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। झारखंड में तो इस मांग को लेकर अनेकों कार्यक्रम हुए हैं और अभी भी जारी हैं।
 
16 मार्च को आदिवासी विधायक बंधु तिर्की समेत कई आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर चालू विधान सभा के सत्र से सरना धर्म कोड को मान्यता देने संबधी प्रस्ताव विधान सभा से पारित करने के लिए ज्ञापन भी दिया। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा द्वारा तैयार इस ज्ञापन में विस्तृत आंकड़े पेश कर कहा गया है कि किस प्रकार से देश के 12 करोड़ से भी अधिक आबादी वाले आदिवासी समुदाय के लोग अलग धार्मिक कोड नहीं होने से अपनी अलग पहचान खो रहें हैं।

झारखंड के 70 लाख से भी अधिक आदिवासियों को अलग धार्मिक कोड नहीं होने के कारण उन्हें हिन्दू या ईसाई धर्म कॉलम में अपना नाम डालने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस बार तो मोदी शासन ने 2021 के जनगणना पपत्र से अगल धर्म ( others religions) का कॉलम हटाकर हमारे स्वतंत्र अस्तित्व के अधिकार को ही छीन लिया है।
 
उक्त संदर्भों में देखा जाय तो झारखंड समेत देश के सभी आदिवासियों द्वारा अपने स्वतंत्र धार्मिक पहचान की मांग करना देश के सभी नागरिकों की भांति उनका भी संवैधानिक–लोकतान्त्रिक अधिकार तो बनता ही है। देश की आज़ादी के संघर्षों से लेकर बाद के समयों में देश के विकास और राष्ट्रनिर्माण में आदिवासी समुदायों की भूमिका किसी भी समुदाय अथवा संप्रदाय से कम नहीं रही है। चर्चा है कि वर्तमान झारखंड सरकार प्रदेश के आदिवासियों के लिए अलग धार्मिक कोड के रूप में ‘सरना कोड ’ लागू करने का प्रस्ताव विधान सभा के चालू सत्र से पारित करनेवाली है।

बावजूद इसके यदि कोई पार्टी विशेष अथवा संघ–संस्था आदिवासी समाज को जबरन अपना अंग बनाने अथवा अपने अंदर समाहृत करने की कवायद में निरंतर संलग्न है तो यह कहाँ तक न्याय संगत कहा जाएगा?  सबसे बढ़कर जब 2021 की राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया चलेगी तो देश के सभी नागरिकों के लिए उनका अपना धार्मिक कोड होगा, लेकिन देश के लाखों लाख आदिवासी किस धार्मिक कॉलम में रहेंगे ..... एक बड़ा संवैधानिक नागरिक सवाल है!   

Jharkhand
Jharkhand government
aadiwasi
Aadiwasi's Right
Aadiwasi Religion Code
Census 2021
JMM
Hemant Soren
BJP
Amit Shah
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    नया ज्ञान : 2014 में मिली असली आज़ादी!
    21 Nov 2021
    वैसे कंगना ठीक ही कह रहीं हैं। किसी भी सरकार को इतनी आज़ादी आज से पहले, 2014 से पहले कभी भी नहीं मिली थी जितनी 2014 में बनी इस सरकार को मिली हुई है।
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'आसमान में धान जमेगा!'
    21 Nov 2021
    किसान आंदोलन की पहली जीत के मौक़े पर इतवार की कविता में आज पढ़िये रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की कविता 'नई खेती...
  • Kashmir
    अनीस ज़रगर
    हैदरपुरा मामला : कश्मीर में शटडाउन के बीच तीसरे निवासी के शव की मांग तेज़
    21 Nov 2021
    मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और मसर्रत आलम के नेतृत्व में हुर्रियत समूहों द्वारा की गई हड़ताल के मद्देनज़र सभी दुकानें, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हुर्रियत समूहों ने हैदरपुरा घटना के पीड़ितों के…
  • kisan andolan
    अजय कुमार
    कृषि क़ानूनों के वापस होने की यात्रा और MSP की लड़ाई
    21 Nov 2021
    कृषि क्षेत्र में सुधार होने चाहिए। लेकिन तीन कृषि कानून कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र को गुलाम बनाने के लिए लाए गए थे। 
  • Putin
    एम. के. भद्रकुमार
    तूफ़ान के केंद्र में यूक्रेन और बेलारूस
    21 Nov 2021
    काला सागर में टकराव के घुमड़ते काले बादलों के बीच आशा की चमकती किरण यह है कि मास्को एवं वाशिंगटन के बीच रणनीतिक संवाद-संचार फिर से शुरू हो गया है तथा विभिन्न कार्य स्तरों पर उनमें आदान-प्रदान हो रहा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License