NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
कोरोना के इस बुरे वक़्त में डॉक्टरी की महंगी पढ़ाई पर भी सोचिए!
 डॉक्टरी की पढ़ाई का सिस्टम ही ऐसा है कि अगर कोई  इसे भेदते हुए बाहर निकले तो इसकी बहुत कम संभावना है कि वह सेवा भाव के साथ डॉक्टरी का पेशा अपनाएगा।
अजय कुमार
27 May 2021
कोरोना के इस बुरे वक़्त में डॉक्टरी की महंगी पढ़ाई पर भी सोचिए!
Image courtesy : The Indian Practitioner

आप सबने महसूस किया होगा कि बीमारी आपके शरीर को तोड़ रही होती है और डॉक्टर महज 3- 4 मिनट देखता है और दवा देकर आपको लौटा देता है। डॉक्टर इसके बदले में 500 से लेकर ₹1000 तक की फीस लेता है।

अगर आप किसी गांव से हैं तो आप 1,2 ऐसी घटनाओं को जरूर जानते होंगे जहां पर 25 से 30 किलोमीटर दूर किसी हॉस्पिटल तक पहुंचते-पहुंचते कोई गर्भवती महिला मर गई या किसी की स्थिति बहुत खराब थी तो उसने अपने शरीर का साथ छोड़ दिया।

अखबारों में छपी उन खबरों को भी आपने बड़े चाव से पढ़ा होगा, जिन खबरों में यह लिखा होता है कि चार-पांच दिन के इलाज में लाखों रुपए खर्च हो गए। एक व्यक्ति जिंदगी भर के लिए कर्जदार बन गया। कोरोना के समय में एक डर आपको हमेशा सताता होगा कि अगर खुदा न खस्ता आप कोरोना की चपेट में आ गए हैं तो क्या आपको सही समय पर डॉक्टर मिल पाएगा? 

लेकिन इन सारे अनुभव और एहसासों से गुजरने के बाद भी आप यह नहीं सोचते हैं कि आखिरकार ऐसा क्यों होता है? ऐसा होने के पीछे बहुत सारी वजह है। लेकिन इनमें एक सबसे बड़ी वजह यह है कि हमारे देश में डॉक्टरी की पढ़ाई बहुत महंगी है। इतनी महंगी कि भारत की 80 फ़ीसदी से अधिक आबादी की आमदनी इतनी अधिक नहीं है की वह अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के बारे में सोचे? 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। इस लिहाज से देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। फिलहाल देश में 11,082 की आबादी पर मात्र एक डॉक्टर है। इस लिहाज से देखें तो यह अनुपात तय मानकों के मुकाबले 11 गुना कम है। केवल बिहार की बात करें तो एक एक अनुमान के मुताबिक 43 हजार की आबादी पर एक डॉक्टर है। 27 फ़ीसदी मरीजों की मौत डॉक्टर की कमी की वजह से होती है। 

डॉक्टर के पेशे से जुड़े एक सजग नागरिक कहते हैं कि भारत की स्थिति को थोड़े से भी कुरेद कर देखा जाए तो यह बात सबको नजर आती है कि भारत में डॉक्टरों की बहुत अधिक कमी है। बड़ी संख्या में डॉक्टर चाहिए। इस लिहाज से असल नीति तो यह होती कि इस संख्या को भरने की कोशिश की जाती। इससे डॉक्टरों की संख्या पूरी होती और बेरोजगारी की तरफ बढ़ रहे भारतीय नौजवानों को एक गरिमा पूर्ण रोजगार भी मिलता। लेकिन सोचने वाली बात है कि ऐसा क्यों नहीं होता है?

तकरीबन 13 से 14 लाख विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में एंट्री पाने के लिए नीट परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। तकरीबन 70 से 80 हजार सीटें भरी जाती हैं। यानी एक बहुत बड़ी आबादी जो मेडिकल में दिलचस्पी लेते हुए उसकी पढ़ाई के लिए किसी कॉलेज में दाखिला लेना चाहती है, उस आबादी की छटनी हो जाती है। एक कायदे का सिस्टम तो वही होता है जहां पर कुछ बुनियादी योग्यताओं की जांच परख कर के सबको वह पढ़ाने की व्यवस्था की जाए जो वह पढ़ना चाहते हैं। लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था छंटनी वाली है। 

70 हजार सीटों में से 30 हजार सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जरिए भरी जाती है। इसमें से सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 5 साल की अधिकतम फीस तकरीबन चार लाख के आसपास होती है। दिल्ली के एम्स जैसे कॉलेज तो ऐसे हैं जहां पर पांच साल में पांच - छह हजार के खर्चे पर एमबीबीएस की डिग्री मिल जाती है। बाकी NEET की परीक्षा क्वालीफाई करने वाले 5 लाख से अधिक उम्मीदवार होते हैं। यानी इनका दाखिला प्राइवेट कॉलेज में होता है। और प्राइवेट कॉलेज की 1 साल की फीस ₹3 लाख से लेकर ₹20 लाख तक होती हैं। यानी 5 साल की पढ़ाई के लिए एक करोड़ से अधिक का खर्चा आ सकता है। 

इसके अलावा डोनेशन, कोचिंग की फीस, स्कूल की पढ़ाई सब जोड़ लीजिए तो आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि भारत की बहुत बड़ी आबादी अपने बच्चों को डॉक्टर बनवाने के बारे में नहीं सोच सकती है।

इतनी महंगी पढ़ाई के बाद क्या किसी डॉक्टर से सेवा भाव के तहत काम करने की अपेक्षा की जा सकती है? क्या किसी डॉक्टर से अपेक्षा की जा सकती है कि वह सस्ता इलाज करेगा? क्या किसी डॉक्टर से अपेक्षा की जा सकती है कि वह गांव देहात में जाकर अपनी क्लीनिक खोलेगा, जहां पर लोगों को दो जून की रोटी का जुगाड़ करने के लिए शहरों की तरह भागना पड़ता है? क्या कोई डॉक्टर भ्रष्टाचार के हथकंडों से दूर रह पाएगा?

कहने का मतलब यह है कि डॉक्टरी की पढ़ाई का सिस्टम ही ऐसा है, जिसे भेदते हुए अगर कोई बाहर निकले तो वह सेवा भाव के साथ डॉक्टरी का पेशा अपनाए इसकी बहुत कम संभावना है। 

मशहूर डॉ देवी शेट्टी इंडियन एक्सप्रेस के अपने एक इंटरव्यू में कहते हैं कि भारत को जितने मेडिकल स्टाफ की जरूरत है उसका केवल 20 फ़ीसदी हिस्सा काम कर रहा है। डॉक्टरों की घनघोर कमी है। इस परेशानी की जड़ यही है कि जितने डॉक्टर चाहिए उतने सीट नहीं हैं। इसी वजह से मेडिकल एजुकेशन में भ्रष्टाचार भी जमकर होता है। 60 से 70 हजार मेडिकल सीट के लिए अगर 10 लाख से अधिक बच्चे फॉर्म भर रहे हैं तो भ्रष्टाचार स्वभाविक है। यह बात समझ से बाहर है कि भारत में एक मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए ₹400 करोड़ खर्चा क्यों होता है? 140 सदस्य वाले मेडिकल कॉलेज 100 लोगों को पढ़ाए तो यह घटिया व्यवस्था है। जरूरत यह है कि 140 सदस्य वाले मेडिकल कॉलेज 1000 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाएं। पूरी दुनिया बदल रही है लेकिन पता नहीं क्यों हम नहीं बदलना चाहते हैं।

हमारी डॉक्टरी की पढ़ाई अभिजात्य वर्गीय है। गरीब घर के लड़के डॉक्टर नहीं बनना चाहते। इसके बहुत बुरे परिणाम झेलने पड़ते हैं। डॉक्टरी की पढ़ाई लिखाई पर इतना खर्चा क्यों होता है? जबकि दुनिया के अधिकतर मुल्कों में डॉक्टरी की पढ़ाई लिखाई मुफ्त में होती है। यह सरकार की कमी नहीं है। बल्कि भारत के विशेषाधिकार हासिल किए हुए वर्ग की भी कमी है जो सरकार से सही सवाल नहीं पूछती।

यह सारी बातें हमारे जीवन की बुनियादी बातें है। बुनियादी परेशानियों का हल इन सारी बातों में है। इन सारी बातों का हल इसमें है कि लोगों को इन सब बातों पर सोचने के लिए हर वक्त मजबूर किया जाए। बार-बार उन्हें हकीकत से रूबरू करवाया जाए। ताकि वह यह तय कर पाएं कि उन्हें अपने समाज को नियंत्रित करने के लिए कैसी सरकार चाहिए? 

Coronavirus
COVID-19
doctors
Medical student
Medical Degrees
Medical Studies
education in india
health sector in India
Shortage of Doctor
Paramedical staff
Hospital shortage
Health sector collapse

Related Stories

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

कर्नाटक: वंचित समुदाय के लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों, सूदखोरी और बच्चों के अनिश्चित भविष्य पर अपने बयान दर्ज कराये

लॉकडाउन में लड़कियां हुई शिक्षा से दूर, 67% नहीं ले पाईं ऑनलाइन क्लास : रिपोर्ट

सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !

शिक्षा बजट: डिजिटल डिवाइड से शिक्षा तक पहुँच, उसकी गुणवत्ता दूभर

शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 

विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट

ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान


बाकी खबरें

  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 1.15 फ़ीसदी हुए
    17 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 25,166 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.15 फ़ीसदी यानी 3 लाख 69 हज़ार 846 हो गयी है।
  • असम डिटेंशन कैंप में रह रहे विदेशी नागरिकों के 22 बच्चे!
    सबरंग इंडिया
    असम डिटेंशन कैंप में रह रहे विदेशी नागरिकों के 22 बच्चे!
    17 Aug 2021
    बच्चे अपनी मां के साथ रह रहे हैं - नौ महिलाएं जिनके बारे में माना जाता है कि वे म्यांमार और बांग्लादेश से हैं - छह में से तीन डिटेंशन कैंपों में बंद हैं
  • पीएम मोदी
    सोनिया यादव
    पीएम मोदी की 15 अगस्त पर सैनिक स्कूल की घोषणा महिला सशक्तिकरण के लिए काफ़ी है?
    16 Aug 2021
    प्रधानमंत्री ने अपने एक घंटे और अट्ठाइस मिनट के लंबे भाषण में सैनिक स्कूल के अलावा आधी आबाधी के लिए कोई खास बात नहीं की। उन्होंने देश को नहीं बताया कि उनकी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ में महिलाएं बेख़ौफ़…
  • SC
    भाषा
    पेगासस विवाद: केंद्र ने कोर्ट में कही समिति बनाने की बात, कांग्रेस ने कहा- ‘बिल्ली दूध की रखवाली कैसे कर सकती है’
    16 Aug 2021
    सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि केंद्र का हलफनामा यह नहीं बताता कि क्या सरकार या उसकी एजेंसियों ने जासूसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया? उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि सरकार, जिसने पेगासस…
  • “मानवता के लिए कोड रेड”: जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट
    न्यूज़क्लिक टीम
    “मानवता के लिए कोड रेड”: जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट
    16 Aug 2021
    संयुक्त राष्ट्र संघ की छठी जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर तमाम देशों की सरकारों ने जलवायु संकट को बढ़ने से रोकने के लिए अभी कदम नहीं उठाये तो आने वाले समय में पृथ्वी पर जीवन बहुत कठिन हो…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License