NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
बढ़ते अपराध : एनसीआरबी के मुताबिक महानगरों में दिल्ली की स्थिति सबसे ख़राब
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ें बता रहे हैं कि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली राजधानी दिल्ली की कानून व्यवस्था की स्थिति सबसे ख़राब है। सभी महानगरों के कुल आपराधिक मामलों में केवल दिल्ली की हिस्सेदारी 40 फीसदी है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Oct 2019
crimes in delhi
Image courtesy: Google

सरकारें सत्ता से जितना मोह रखती हैं, उतनी ही अपनी जिम्मेदारी से कतराती हैं। सरकारें नहीं चाहती हैं कि ऐसा कुछ सामने आए जिससे उनकी ज़िम्मेदारी या योग्यता पर सवालिया निशान खड़ा हो। इसलिए बहुत सारे आंकड़ों में फेरबदल के साथ पिछले दो सालों से मौजूदा सरकार अपराध का ब्योरा देने वाले आंकड़ें छुपा रही थी। लेकिन अब जाकर साल 2017 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ें उजागर कर दिए गए हैं। इस रिपोर्ट से उजागर हुआ है कि साल 2017 में देशभर में अपराध के 50 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। 2016 के मुकाबले 3.6% आपराधिक मामले बढ़े हैं।

इसे पढ़ें :एनसीआरबी: मॉब लिचिंग के आंकड़े गायब, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी

इन आंकड़ों को देखने पर सवाल बनता है कि शहरीकरण के जरिये विकास की यात्रा तय करने वाली सरकारें क्या शहरों को सुरक्षित बनाने में कामयाब हो पा रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ें इसका सीधा जवाब दे रहे हैं। जवाब यह है कि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली दिल्ली की कानून व्यवस्था की स्थिति सबसे ख़राब है।

इस कानून व्यवस्था के अंतर्गत भारत के सभी 19 महानगरों में दिल्ली में सबसे अधिक कुल 2, 13, 141 आपराधिक मामलें दर्ज हुए हैं।

सभी महानगरों के कुल आपराधिक मामलों में केवल दिल्ली की हिस्सेदारी 40 फीसदी है।

साल 2016 से 2017 में दिल्ली के आपराधिक  मामलों में यह इजाफा 6.87 फीसदी की है।

दिल्ली के बाद महानगरों में अपराध की बुरी स्थिति बेंगलुरु की है। यहां के आपराधिक मामलों की कुल मामलों में 8.7 फीसदी की हिस्सेदारी रही।

इसके बाद मुंबई का नंबर आता है जिसके कुल मामलों में 7.4 फीसदी की हिस्सेदारी है। दिल्ली की कुल आबादी तकरीबन 163. 1 लाख है जबकि मुंबई की 184.1 लाख है।  

अंग्रेजी अख़बार हिन्दू में दिल्ली के डिप्टी  कमिश्नर राजन भगत का बयान छपा है। राजन का कहना है कि दिल्ली में ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करने की सहूलियत है। यहां पर अधिक मामले दर्ज होते हैं। इसलिए आंकड़ों के लिहाज से दिल्ली की उन शहरों से तुलना ग़लत है जहां पर ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करने की सहूलियत नहीं है।

उधर, दिल्ली क्राइम ब्रांच के रिटायर्ड चीफ अशोक चंद ने टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में लिखा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी पुलिस एफआईआर दर्ज करने से खुद को रोकती है। अपने रजिस्टरों से वह साबित करना चाहती है कि अपराध को उसने काबू मे रखा है।  
     
साल 2017 में महानगरों में सबसे अधिक दिल्ली में हत्या के 400 मामले दर्ज हुए। इसके बाद बेंगलरु में हत्या के 235 और पटना में 135 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा साल 2017 में दिल्ली में लूट के 2838 मामले दर्ज किए गए और डकैती के 32 मामले।

औरतों से जुड़े अपराध के मामले में भी दिल्ली दूसरे महानगरों के मुकाबले आगे है। आंकड़ें कहते हैं कि दिल्ली में 102 महिलाओं ने  दहेज की वजह से अपनी जान गंंवा दी। तमाम दावों और वादों के बाद भी इस दौरान दिल्ली में बलात्कार के 1168 मामले सामने आए। स्टॉकिंग यानी पीछा करने की वारदात के 472, उत्पीड़न के 892 , यौन शोषण के 613 मामले, काम करने की जगहों पर यौन शोषण से जुड़े 25 मामले दर्ज हुए। हालांकि बलात्कार के मामले मुंबई में दिल्ली से अधिक दर्ज हुए।
 
इसके अलावा आंकड़ें दिखाते हैं कि दिल्ली में 2902 लोगों की सड़क हादसे में मौत हो गई।

इस रिपोर्ट में जातिगत, सांप्रदायिक और नफ़रती हिंसा से होने वाले मौतों का जिक्र नहीं है।

जानकारों का कहना है कि  दिल्ली की कानून व्यवस्था दिल्ली सरकार के अधीन न होकर केंद्र सरकार के अधीन है। उनके मुताबिक यह बात सही है दिल्ली की स्थिति दूसरे राज्यों से अलग है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चुनी हुई सरकार से कानून व्यवस्था ही छीन लिया जाए।  कुछ जरूरी जगहों को छोड़कर दूसरे जगहों की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को सौंप देनी चाहिए।

प्रशासनिक सिद्धांत भी यही बात कहता है कि नागरिकों द्वारा चुनी हुई सरकार ही नागरिकों की सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ले।  ताकि नागरिक सरकार के दूसरे  विभागों के साथ कानून व्यवस्था भी सही तरह से समायोजन बिठा कर काम कर पाए। आज स्थिति यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की भिड़ंत में दिल्ली की आम जनता पिस रही है। 

National Crime Records Bureau
Crimes in New Delhi
Law and order in delhi
delhi police
Increasing crime rate in Delhi
home ministry

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

दिल्ली: सिविल डिफेंस वालंटियर की निर्मम हत्या शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलती है!

न्यायपालिका को बेख़ौफ़ सत्ता पर नज़र रखनी होगी

दिल्ली बच्ची दुष्कर्म और हत्या मामला: चारों आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर

दिल्ली बलात्कार कांड: जनसंगठनों का कई जगह आक्रोश प्रदर्शन; पीड़ित परिवार से मिले केजरीवाल, राहुल और वाम दल के नेता

दिल्ली में महिलाओं से बलात्कार एवं उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी

मस्जिद में नाबालिग से बलात्कार, सुरक्षा के असल मुद्दे को सांप्रदायिकता का ऐंगल देने की कोशिश!


बाकी खबरें

  • उत्तर बंगाल को अलग राज्य बनाने की मांग क्यों है ग़लत?
    संदीप चक्रवर्ती
    उत्तर बंगाल को अलग राज्य बनाने की मांग क्यों है ग़लत?
    15 Jul 2021
    उत्तर बंगाल को अलग राज्य बनाने की मांग, प्रमुखत: भाजपा सांसद जॉन बारला उठा रहे हैं। याद रहे कि इस क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को लेकर हिंसक आंदोलनों का इतिहास रहा है।
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 41,806 नए मामले, 581 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 41,806 नए मामले, 581 मरीज़ों की मौत
    15 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 41,806 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4 लाख 32 हज़ार 41 हो गयी है।
  • एमएसएमईज़ (MSMEs) के मदद के लिए अपनाई गई लोन की नीति रही बेअसर: सर्वे
    बी. सिवरामन
    एमएसएमईज़ (MSMEs) के मदद के लिए अपनाई गई लोन की नीति रही बेअसर: सर्वे
    15 Jul 2021
    बैंक जब अपना ही एनपीए नहीं संभाल पा रहे तो नए MSMEs को लोन कैसे देंगे? बैंक के बड़े अधिकारियों का कहना है कि MSMEs को देने में बड़ा ‘क्रेडिट रिस्क’ है।’
  • न्यायमूर्ति डीवाइ चंद्रचूड़ 
    संगम
    असहमति कुचलने के लिए आतंक-निरोधक क़ानून का दुरुपयोग हरगिज़ न हो : जस्टिस डीवाइ चंद्रचूड़
    15 Jul 2021
    हाल ही में, यूएपीए के तहत निरुद्ध किए गए और जेल में वर्षों से रह रहे अनेक लोगों को रिहा कर दिया गया है।
  • म्यांमार की पुरानी रिपोर्ट कोलकाता में रोहिंग्या मुसलमानों द्वारा हिंदुओं की हत्या के नाम पर शेयर की
    कलीम अहमद
    म्यांमार की पुरानी रिपोर्ट कोलकाता में रोहिंग्या मुसलमानों द्वारा हिंदुओं की हत्या के नाम पर शेयर की
    15 Jul 2021
    ज़ी न्यूज़ के प्राइम टाइम शो DNA के एक एपिसोड की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है. वायरल पोस्ट के अनुसार, ‘कोलकाता के एक छोटे से गांव से हज़ारों हिंदू गायब हैं और 45 हिंदू मार दिए गए’. साथ ही पोस्ट में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License