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कोविड-19
भारत
राजनीति
भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण
नए अध्ययन के मुताबिक भारत में 2020 में अपेक्षित मृत्यु दर से कम की तुलना में 2021 में उच्च कोविड मृत्यु दर इस विषय में और अधिक शोध की मांग करता है।
दित्सा भट्टाचार्य
11 Jan 2022
covid
चित्र साभार: ट्रिब्यून इंडिया 

7 जनवरी, 2022 को साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, भारत में हुई कुल कोविड-19 मौतें आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट की गई संख्या की तुलना में छह से सात गुना अधिक थीं। 

विश्लेषण के लेखकों का कहना है, “हमारे अध्ययन में पाया गया है कि भारत में कोविड से हुई मौतें आधिकारिक रिपोर्टों के अनुमान से काफी अधिक संख्या में हैं। यदि हमारे निष्कर्षों की पुष्टि हो जाती है तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के संचयी वैश्विक कोविड मृत्यु दर के अनुमानों में अच्छे-खासे उर्ध्वगामी संशोधन की जरूरत पड़ सकती है, जो कि 1 जनवरी, 2022 तक के लिए 54 लाख आंकी गई थी। 

भारत की कुल राष्ट्रीय कोविड मौतें अभी भी अनिर्धारित बनी हुई हैं। 2021 के अंत तक, भारत ने सार्स-सीओवी-2 संक्रमण से लगभग 4,80,000 मौतों की पुष्टि की है। 1.4 लाख वयस्कों के एक स्वतंत्र राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व वाले सर्वेक्षण का उपयोग करते हुए, लेखकों ने 2020 और 2021 में आई कोविड वायरल लहरों के दौरान कोविड मृत्यु दर की तुलना सभी वजहों से होने वाली अपेक्षित मृत्यु-दर से की है।

1 जनवरी, 2021 तक, भारत ने सार्स-सीओवी-2 से संबंधित 3.5 करोड़ से अधिक मामलों की सूचना दर्ज की है, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत की आधिकारिक रूप से संचयी कोविड मौतों की संख्या 4.8 लाख का अर्थ है कि प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर कोविड मृत्यु दर लगभग 345 है, जो अमेरिकी मृत्यु दर का लगभग सातवाँ हिस्सा बैठता है।

हालाँकि, अध्ययन के लेखकों ने एक स्वतंत्र पोलिंग एजेंसी के आंकड़े को खंगाला है, जिसने समूचे देश भर के करीब 1,40,000 लोगों से फोन के द्वारा सर्वेक्षण किया, जिसमें हरेक से यह सवाल किया गया कि क्या प्रत्येक परिवार में किसी की मृत्यु कोविड-19 से हुई है। उनके द्वारा अस्पतालों और इसी प्रकार की सुविधाओं से प्राप्त होने वाली सरकारी रिपोर्टों का भी विश्लेषण किया गया और आधिकारिक तौर पर पंजीकृत मौतों की पड़ताल की गई है। इस अध्ययन से वे बेहद उच्च अनुमान पर पहुंचे हैं – जो कि सितंबर 2021 तक प्रति दस लाख पर 2,300 से 2,500 मौतों के बीच है, जो कि अमेरिका की मृत्यु दर से तुलनीय है, जिसमें यहाँ से एक-तिहाई जितने लोग हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड की वजह से जून 2020 से जुलाई 2021 तक 29% मौतें हुई थीं, जो कि इस बीच में हुई 32 लाख मौतों के अनुरूप थीं। इसमें से 27 लाख मौतें अप्रैल-जुलाई 2021 में हुई थीं (जब कोविड ने सभी वजहों से होने वाली मौतों की दर को दोगुना कर दिया था)। 57,000 वयस्कों के एक उप-सर्वेक्षण ने भी कोविड और गैर-कोविड मौतों के साथ मृत्यु दर में समान अस्थाई वृद्धि को दर्ज किया है। दो सरकारी आंकड़ों के स्रोतों में पाया गया है कि महामारी से पूर्व की अवधि की तुलना में, 2 लाख स्वास्थ्य सुविधाओं में सभी वजहों से होने वाली मृत्यु दर 27% अधिक थी और दस राज्यों में नागरिक पंजीकरण मौतें 26% अधिक थीं। और ये दोनों बढोत्तरी अधिकांशतः 2021 में हुई हैं। विश्लेषणों से इस बात का पता चलता है कि सितंबर 2021 तक भारत की कुल कोविड मौतें आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट किये गये आंकड़े की तुलना में छह से सात गुना अधिक थीं।

अध्ययन में कहा गया है, “भारत में रिपोर्ट की गई कोविड मौतों के कुल योग को व्यापक तौर पर अंडर-रिपोर्ट माना जाता है, क्योंकि कोविड मौतों के अधूरे प्रमाणीकरण एवं असाध्य बीमारियों के गलत आरोपण के कारण और चूँकि अधिकाँश मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं, जिनमें से अधिकांश मामले बिना चिकित्सकीय देखभाल के थे। 2020 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या विभाग (यूएनडीपी) के अनुमान के मुताबिक भारत में हुई कुल 1 करोड़ मौतों में से, लगभग 30 लाख से अधिक मौतों को पंजीकृत नहीं किया गया था और अस्सी लाख से अधिक मौतों को चिकत्सकीय प्रमाणीकरण से नहीं गुजरना पड़ा था।”

विश्लेषण के लेखकों में से एक, टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रभात झा का कहना है कि कोविड-19 मौतों की कम रिपोर्टिंग के पीछे की एक वजह राजनीति रही है। उनके विचार में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने महामारी की असली तस्वीर पर पर्दा डाल दिया है। झा ने कहा, “भारतीय सरकार ने जिस प्रकार से कोविड मौतों का संकेतीकरण किया है उसके जरिये काफी हद तक संख्या को दबाने की कोशिश की जा रही है।” उनके सहित अन्य लोगों भी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) से आंकड़े जारी नहीं किये जाने के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं, जो नियमित तौर पर भारत की आबादी के 1% जन्म एवं मृत्यु को ट्रैक करने के लिए सर्वेक्षण करता है। उन्होंने कहा, “मेरे विचार में राजनीतिक दबाव इतना अधिक था कि उन्होंने कहा होगा, ‘जो कुछ भी निकल कर बाहर आयेगा वह शर्मसार करने वाला ही साबित होगा।”

अध्ययन ने इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 2020 और 2021 दोनों वायरल लहर में व्यापक पैमाने पर संचरण को चिन्हित किया है, और 2021 में तो यह अधिकांश तौर पर अनियंत्रित था, घरों के भीतर कई पीढ़ियों तक वायरस के संचरण में उच्च स्तर पर एंटीबाडीज का पता चला है। 

इसमें कहा गया है कि 2020 में हुई अपेक्षित मृत्यु दर की तुलना में 2021 में भारत की उच्च कोविड मृत्यु दर में और अधिक शोध की जरूरत है।

अध्ययन में कहा गया है, “2021 में ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण का प्रसार एक कारक रहा है, लेकिन 2020 के मूल वायरस (वुहान) और 2021 में अधिकांश वायरल वेव (26) के लिए जिम्मेदार अल्फा और डेल्टा वैरिएंट के मिश्रण के बीच रोगजनकता का अंतर भी हो सकता है, या अन्य गंभीर संक्रमण के जैविक भविष्यवक्ता जो इन दो लहरों के बीच बदल गये, भी एक वजह हो सकती है। इसी प्रकार से, वर्तमान में भारत में वर्तमान में जारी ओमिक्रोन लहर के प्रभावों या भविष्य में वायरल वैरिएंट के प्रभावों को समझने के लिए मृत्यु दर पर नजर बनाये रखना भी आवश्यक होगा।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

India’s COVID-19 Deaths 6-7 Times Higher Than Official Figures, Comparable to US: Analysis

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