NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
भारत की पड़ोसी को प्रथम मानने वाली नीति अपने अवसान कि ओर
बीजेपी की विचारधारा यह नहीं समझ पा रही है कि यह कोई कूटनीतिक असफलता नहीं है, बल्कि यह एक बेकार "स्टेट क्राफ़्ट"  से जुड़ा मुद्दा है।
एम. के. भद्रकुमार
23 Jan 2020
Anti CAA rally at kochi, kerala

दक्षिण एशिया के दो अहम लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम और इससे जुड़े मुद्दों पर आलोचनात्मक टिप्पणी की है।  आलोचना इसलिए अहम नहीं है कि यह अभूतपूर्व है, बल्कि इसलिए क्योंकि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने हमेशा भारत के प्रति अच्छी भावना रखी है और वे भारत को अपना दूसरा घर मानते रहे हैं। उन्होंने जैसी बात कही, वैसी ही भावना ख़ुद हिंदुस्तान में भी कई लोगों की है।

शेख हसीना ने कहा, "हम नहीं जानते कि भारत सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम क्यों लाई। यह ज़रूरी नहीं था। भारत से बांग्लादेश के लिए कोई प्रवास नहीं होने वाला है। लेकिन भारत में ही लोगों को इसकी वजह से कई दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है।"

शेख हसीना ने साफ़ किया कि "यह क़ानून भारत का अंदरूनी मामला है। बांग्लादेश हमेशा से कहता आया है कि सीएए और एनआरसी भारत का आंतरिक मामला है। भारत सरकार ने अपनी तरफ़ से लगातार कहा है कि एनआरसी उनकी आंतरिक एक्सरसाइज़ है, नई दिल्ली यात्रा के दौरान ख़ुद प्रधानमंत्री ने मुझसे यह कहा था।"

एक भारतीय अख़बार को दिए इंटरव्यू में हामिद करज़ई ने नागरिकता संशोधन क़ानून के आधार को ही ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यक नहीं है। पूरा देश ही प्रताड़ित है। हम लंबे वक़्त से जंग लड़ रहे हैं। अफ़ग़ानिस्तान में मुस्लिम, हिन्दू और सिख, सभी धर्मों को तकलीफ़ उठानी पड़ी है। भारत में लोग जो भी सोचते हों, पर अफ़ग़ानिस्तान में लोगों की भावनाएं बहुत अलग हैं। मैं आशा करता हूं कि भारत में भी मुस्लिम समेत सभी धर्मों के अफ़ग़ानी लोगों के लिए वही भावना झलके।"

अपने ख़ास अंदाज़ में करज़ई ने साफ़ किया कि भारत का नया क़ानून मुस्लिमों के लिए अलग नज़रिया रखता है।

सरकार के दावे के उलट, ऐसी आलोचना क़ानून की ग़लत जानकारी या विरोध प्रदर्शनों से उपजी कथित नकारात्मकता से पैदा नहीं होती। यह सच्चाई है और संकेत करती है कि भारत का हिन्दू राष्ट्रवाद की ओर झुकाव  हमारे पड़ोसी मुस्लिम देशों में चिंता पैदा कर रहा है।

हमारे आसपास जो हो रहा है, हमारा उस पर ध्यान ही नहीं है, इस क़िस्म के व्यवहार से हम इसे दूर नहीं कर सकते। बल्कि हसीना और करज़ई राज्य और धर्म के मुद्दे पर अपने देश की उदार आवाज़ें हैं। दोनों देशों का बहुसंख्यक नज़रिया इस्लामिक संस्कृति और विरासत में गहरा धंसा हुआ है। भारत में मुस्लिमों कि प्रताड़ना के ख़िलाफ़ वहां आवाज़ें ज़्यादा उग्र तरीक़े से उभर सकती हैं।

निकट भविष्य में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी के साथ शरिया क़ानून लागू हो सकता है। भारत में मुस्लिम विरोधी राजनीति से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है। चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ बिपिन रावत के "डि - रेडिकलाइजेशन" कैंप  संबंधी बयान को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नोटिस किया गया है। कुल मिलाकर बाहर एक ऐसा नज़रिया बन रहा है, जिसमें लगता है कि भारत में मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

भारत बांग्लादेश को ख़ुश करने के लिए भले ही दर्जन भर सामुदायिक क्लीनिक या वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट देता रहे, ढाका में विवेकानंद सेंटर बनाए या अपने यहां नेशनल नॉलेज नेटवर्क। सच्चाई यह है कि जब आप बांग्लादेश के राष्ट्रीय मान और आत्मसम्मान को चोट पहुंचाते हो, तो यह सब पानी में मिल जाता है। ऊपर से बंटवारे के पहले और बाद का हमारा बुरा इतिहास रहा है।

सिर्फ़ देखिए की किस तरह हमारे नेता बांग्लादेश का अपमान कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेता दिलीप घोष ने कोलकाता में रविवार को कहा, "बांग्लादेश से हज़ारों की संख्या में हिन्दुओं को निकाला गया... दूसरी तरफ़ घुसपैठिए सरकारी योजनाओं में हमारा हिस्सा खा रहे हैं। हम इन एक करोड़ घुसपैठियों को यहां नहीं रहने देंगे। वो हमें बंगाल के दूसरे तरफ़ नहीं रहने देते, हम उन्हें इस तरफ़ नहीं रहने देंगे।"

अब शेख हसीना को मनाना मुश्किल है, बल्कि नामुमकिन के बराबर है। क्योंकि इन बातों और क़दमों से वो मान चुकी होंगी कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह खोखले आदमी हैं। वो जानती हैं कि मोदी और शाह की सत्ता का रिकॉर्ड बताता है कि अब वो नागरिकता क़ानून और एनआरसी पर आगे बढ़ेंगे, जिसका लक्ष्य "बांग्लादेशी दीमकों" को भारतीय ज़मीन से बाहर निकालना है।

एक कुशल राजनेता के तौर पर हसीना जानती हैं की सीएए और एनआरसी  का प्रोजेक्ट हिंदुत्व विचारधारा के लिए ज़रूरी है, जिससे बीजेपी संबंधित है। ऊपर से वो अपने देश में मुस्लिम  भावनाओं को भी नज़रंदाज़ नहीं कर पाएंगी।

बीजेपी के नीति निर्माता यह नहीं जानते कि यह कूटनीति की असफलता नहीं है। दरअसल यह बेहद ख़राब "स्टेट क्राफ़्ट" की बात है। यह कोई क़दम पीछे खींचना नहीं है, यह रणनीतिक असफलता की ओर हमें ढकेल रही है। एशियाई शताब्दी के शुरू होने से पहले ही भारत का क्षेत्रीय नेतृत्व के तौर पर उभार ख़त्म हो रहा है। क्या आप ग्वादर से हंबनटोटा और चिटगांव से क्याकफाऊ तक का शोरगुल नहीं सुन सकते?

बल्कि यहां एक आधारभूत विरोधभास है: हिंदुत्व की विचारधारा और "पड़ोसी प्रथम" की सरकारी नीति आपस में कभी मिल ही नहीं सकतीं। 

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आधे  दक्षिण एशियाई देशों - पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान में इस्लाम मुख्य धर्म है। वहीं श्रीलंका और नेपाल में यह तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। अगर हम इस तथ्य को नज़रंदाज़ करते हैं कि दक्षिण एशिया में  60 करोड़ की आबादी के साथ इस्लाम दूसरा बड़ा धर्म है, जो यहां की एक तिहाई आबादी बनाता है, तो भारत बहुत घाटे में रहेगा।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

India’s Neighbourhood First Policy Crumbles

CAA
Anti CAA Protests
BJP
Pakistan
Bangladesh

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

पाकिस्तान में बलूच छात्रों पर बढ़ता उत्पीड़न, बार-बार जबरिया अपहरण के विरोध में हुआ प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License