NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
भारत को चीन-विरोधी गठजोड़ में नहीं शामिल होना चाहिए
ध्यान देने की बात है कि जापान और आस्ट्रेलिया बहुत लंबे समय से अमेरिका के सैन्य सहयोगी हैं। इन दोनों देशों में अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं। क्या अब अगली बारी भारत की है?
अजय सिंह
26 Oct 2020
Malabar Naval Exercise
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : The New Indian Express

नवंबर 2020 के अंत में शुरू होनेवाला मालाबार नौसैनिक अभ्यास अमेरिका के आक्रामक सैन्यवाद और भारत के आक्रामक हिंदुत्व फ़ासीवाद के बीच बढ़ते गठजोड़ का नतीज़ा है। इसका मक़सद हैः चीन को घेरना और भारत में अमेरिकी सैनिक अड्डों की स्थापना की राह आसान बनाना। चीन के ख़िलाफ़ किसी संभावित युद्ध में अमेरिका भारत को अपना साझीदार बनाना चाहता है। लंबे समय से एशिया में अमेरिकी साम्राज्यावाद की यह रणनीति रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी इस रणनीति को लगातार युद्धोन्मादी बनाने में लगी है।

द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति (1945) और चीन लोक गणराज्य की स्थापना (1949) के बाद से ही अमेरिका विश्व स्तर पर चीन-विरोधी धुरी बनाने में लगा हुआ है। हिंदुत्व फ़ासीवाद के अलमबरदार नरेंद्र मोदी के राज में भारत इस ख़तरनाक चाल में तेज़ी से फंस रहा है।

भारत की समुद्री सीमा में अरब सागर व बंगाल की खाड़ी में शुरू होनेवाले मालाबार नौसैनिक अभ्यास में चार देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी। ये देश हैः अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया। इस समूह को चौगुट या क्वाड (QUAD) कहा जाता है।

ध्यान देने की बात है कि जापान और आस्ट्रेलिया बहुत लंबे समय से अमेरिका के सैन्य सहयोगी हैं। इन दोनों देशों में अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं। क्या अब अगली बारी भारत की है?

मालाबार नौसैनिक अभ्यास श्रृंखला की शुरुआत 1990  वाले दशक में हुई थी। तब भारतीय और अमेरिकी नौसेनाएं इस अभ्यास में हिस्सा लेती थीं। बाद में इसमें जापान को शामिल कर लिया गया, और अब आस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल हो गया है। अमेरिका के नेतृत्व में यह चौगुट शुरू से ही आक्रामक चीन-विरोधी रुख़ अख़्तियार किये हुए है।

1990 से लेकर 2020 तक केंद्र में कई पार्टियों/गठबंधनों की सरकारें रहीं : कांग्रेस, विपक्षी गठबंधन, भाजपा गठबंधन, कांग्रेस गठबंधन, और 2014 से अब तक भाजपा गठबंधन या एनडीए। सभी सरकारें अमेरिका के रणनीतिक उद्देश्य और सामरिक हित के साथ भारत की नियति को अनिवार्य रूप से जोड़ती रही हैं। मालाबार नौसैनिक अभ्यास श्रृंखला इसी की महत्वपूर्ण कड़ी रही है। यह ज़रूर है कि 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने अमेरिका की जी-हुजूरी करने में बड़ी तेज़ी से छलांग लगायी है।

नरेंद्र मोदी सरकार भारत को अमेरिका का जूनियर पार्टनर बनाने पर तुली है। उसे इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं कि भारत के किसी भी पड़ोसी देश ने इस चौगुट में शामिल होने के लिए उत्सुकता नहीं दिखायी। उसे इस बात की ज़रा भी चिंता नहीं कि अमेरिका को फ़ायदा पहुंचाने के लिए इस चौगुट का ख़तरनाक ढंग से सैन्यीकरण किया जा रहा है।

अमेरिका ऐलानिया कहता रहा है कि यह चौगुट चीन-विरोधी गठजोड़ है। इन चारों देशों—भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया—के विदेश मंत्रियों की बैठक टोक्यो (जापान) में 6 अक्तूबर 2020 को हुई थी। उसमें अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा : ‘पहले कभी के मुक़ाबले आज यह ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि चौगुट के साझीदार के नाते हम अपनी जनता और साझीदारों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शोषण, भ्रष्टाचार व तानाशाही से बचाने के लिए मिलजुलकर काम करें।’

भारत का हित इसी में है कि वह किसी चीन-विरोधी गठजोड़ का हिस्सा हरगिज न बने। यह चौगुट बनाया ही इसलिए गया है कि हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिका के वर्चस्व को कायम किया जा सके। भारत को यह काम क्यों करना चाहिए? लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार इस ओर से भी घनघोर बेपरवाह नज़र आ रही है। वह हर हाल में अमेरिकी ताबेदारी मंज़ूर कर लेने पर आमादा है।

(लेखक वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

India
China
indo-china
japan
australia
America
US Army
Donand Trump
Narendra modi
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • मुकुल सरल
    विचार: क्या हम 2 पार्टी सिस्टम के पैरोकार होते जा रहे हैं?
    14 Mar 2022
    कला हो या संस्कृति या फिर राजनीति, मैं तो इसी बात का कायल हूं कि “सौ फूलों को खिलने दो—सौ विचारों में होड़ होने दो”, हां बस इसमें इतना और जोड़ना चाहूंगा कि...
  • परमजीत सिंह जज
    पंजाब में आप की जीत के बाद क्या होगा आगे का रास्ता?
    14 Mar 2022
    जब जीत का उत्साह कम हो जाएगा, तब सत्ता में पहुंचे नेताओं के सामने पंजाब में दिवालिया अर्थव्यवस्था, राजनीतिक पतन और लोगों की कम होती आय की क्रूर समस्याएं सामने खड़ी होंगी।
  • एम.ओबैद
    बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 
    14 Mar 2022
    "बिहार में 70 वर्षों से दबे-कुचले भूमिहीन परिवार ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हमारा भी एक दिन आएगा कि जिस चटाई पर हम सोएंगे उसके नीचे की ज़मीन हमारी होगी।।" 
  • शशि शेखर
    यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 
    14 Mar 2022
    यूपी चुनाव परिणाम ऐसे नेताओं के लिए दीर्घकालिक नुकसान का सबब बन सकता है, जिनका आधार वोट ही “माई(MY)” रहा है।
  • maths
    समीना खान
    इसलिए मैथ्स से बेदख़ल होती जा रही हैं लड़कियाँ
    14 Mar 2022
    आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा किये गए शोध में बताया गया है कि गणित पढ़ने में लैंगिक असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। क्या हैं इसकी वजहें?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License