NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
मोदी की 9*9 इमरजेंसी से भारतीय ग्रिड को आख़िरकार बचा लिया गया, लेकिन...
हालांकि ग्रिड बच गया, और ऐसा सिर्फ़ इसलिए हो पाया, क्योंकि POSOCO और सभी बिजली कर्मचारियों ने इसकी व्यापक तैयारी की थी। मगर, इन सबके बीच सवाल यही रहा जाता है कि क्या प्रधानमंत्री को ग्रिड के सामने यह आपातकाल पैदा करना चाहिए था?
प्रबीर पुरकायस्थ
11 Apr 2020
Power Grid

प्रधानमंत्री मोदी ने रात 9 बजे, 9 मिनट तक के लिए बत्ती गुल करने का ग़ैरज़िम्मेदाराना आह्वान किया था। इस आह्वान के चलते जिस तरह भारतीय ग्रिड का इम्तिहान लिया गया, वैसा इम्तिहान अबतक दुनिया में किसी भी ग्रिड का नहीं लिया गया है। लोड में 27% या 32 गीगा वॉट (GWs) की एक अभूतपूर्व गिरावट आयी और 10-12 मिनट के भीतर पूरा लोड फिर वापस आ गया।

कहीं भी किसी भी ग्रिड ने कभी भी लोड में इस बड़े पैमाने की गिरावट या बढ़ोत्तरी को नहीं देखा है। यह सही मायने में उन भारतीय अधिकारियों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं था, जो राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ग्रिडों को संचालित करते हैं। यह ग्रिड अधिकारियों, बिजली इंजीनियरों और बिजली कर्मचारियों का मिले-जुले प्रयास का नतीजा था, जिन्होंने हमें उन परेशानियों से उबरने में मदद की, जो आसानी से किसी आपदा में बदल सकती थीं। अगर, भारतीय ग्रिड नाकाम हो गया होता- जैसा कि ठोस आधार पर आशंका जतायी जा रही थी, तो Covid-19 महामारी की वजह से मौजूदा लॉकडाउन से गुज़र रहे देश और अस्पतालों के सामने एक आपदा पैदा हो गयी होती।

सवाल है कि आख़िर मोदी ने इस तरह का आह्वान क्यों किया, जिससे बिजली ग्रिड के लिए ही ख़तरा पैदा हो गया? क्या इस आह्वान का मक़सद लोगों को अपने बारे में केवल अच्छा महसूस कराना था, और यह कि लोगों को महसूस कराया जाय कि प्रधानमंत्री 'कुछ कर रहे हैं', या फिर यह केवल प्रतीकात्मक था? या यह कुछ अजीब अंक विज्ञान या ज्योतिषीय कर्मकांड था, जिसमें इस "नौ की शक्ति" को वायरस के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था? सोशल मीडिया मोदी भक्तों की अजीबो-ग़रीब दलीलों से अटी-पड़ी थी कि कोरोनोवायरस अंधे होने के बाद कैसे भागेंगे और इसके बाद अचानक मोदी के 9 * 9 आह्वान से कैसे सबकुछ रौशन हो जायेगा !

कुछ बकवास या प्रकाश से जुड़ी जो भी धारणा मोदी के इस आह्वान के पीछे के कारण रहे हों, सच्चाई तो यही है कि इससे जो ग्रिड के सामने ख़तरा पैदा होने वाला था, वह बहुत वास्तविक था। अचानक कुछ ही मिनटों में हमने सिस्टम पर 32 गीगा वाट या 27% लोड को घटा दिया। इससे पहले कि हम इस झटके से ग्रिड को सम्भाल पाते, 10 मिनट के भीतर फिर से लोड वापस आ गया, जिससे ग्रिड को एक दूसरा झटका लगा। ग्रिड अधिकारियों को तब सिस्टम में पैदा हुई इस नयी अस्थिरता से जूझना पड़ा था।

graph 1_1.png

पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (POSOCO) की शुरुआती रिपोर्ट से देखा जा सकता है कि इस घटना के दौरान फ़्रीक्वेंसी में आया 0.56% का बदलाव या ग्रिड में आये अनुमानित 0.15%  फ़्रीक्वेंसी का बदलाव, सामान्य बदलाव से लगभग 4 गुना अधिक था। मोदी निर्मित इस घटना का ग्रिड के लोड पर पड़े इस विशाल असर को पोस्को रिपोर्ट के आवृत्ति चार्ट में देखा जा सकता है। यह विद्युत मंत्रालय के इस झूठ को उजागर करने का यह एक संकेत है कि इतनी विशाल परिमाण में बिजली गुल करना और उसे चालू करना ग्रिड के सामान्य संचालन सीमा के बाहर नहीं है।

आख़िर ग्रिड में आवृत्ति को इस हद तक क्यों बदला गया, जो इसकी सामान्य परिचालन सीमा से लगभग 4 गुना तक ज़्यादा थी? फ़्रीक्वेंसी में आया बदलाव असल में आपूर्ति और मांग के बीच के संतुलन में आयी कमी को दिखाता है। जब आपूर्ति, मांग से अधिक हो जाती है, तब फ़्रीक्वेंसी बढ़ जाती है; जब मांग, आपूर्ति से अधिक हो जाती है, तब फ़्रीक्वेंसी में गिरावट आती है। अगर ग्रिड को रात 9 बजे की घटना से पहले चालू रखा गया होता, तो 0.56 की आवृत्ति की बढ़ोत्तरी, जिसे हमने रोशनी के बाद देखी थी, बंद कर दिया गया होता, वह बढ़ोत्तरी ग्रिड फ़्रीक्वेंसी को 50.56 तक ले जा सकती थी, या 50.5 ऊपरी सीमा को भी पार कर सकती थी। इससे ज़रूरी तौर पर हाई फ़्रीक्वेंसी से उपकरणों की रक्षा, फिर से संचालन और कुछ जनरेटर के तेज़ चलने में अलग-अलग तरह की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती। ऐसे हालात में जब प्रकाश व्यवस्था फिर से सिस्टम में वापस आ जाती, तो ग्रिड को बचाना अधिक मुश्किल होता।

यही वजह थी कि ग्रिड अधिकारियों ने ऑपरेटिंग फ़्रीक्वेंसी बैंड को बदल दिया और इस घटना से पहले ग्रिड की फ़्रीक्वेंसी को 49.7 पर रखा। चार्ट से, हम देख सकते हैं कि सुबह 8.45 बजे ग्रिड के सामान्य निचली परिचालन सीमा, फ़्रीक्वेंसी 49.7 पर या 49.9 से 0.2 अंक नीचे आ गयी थी। इसने अतिरिक्त मार्जिन मिली, जिसने ग्रिड को बचाने में मदद की। 1,200-1,500 मेगावाट के असंतुलन के लिए, फ़्रीक्वेंसी में 0.1% का बदलाव आयेगा। बत्ती गुल करने की पूरे अवधि के दौरान फ़्रीक्वेंसी कर्व में दिखाया गया है कि ग्रिड की फ़्रीक्वेंसी लगातार बढ़ रही थी, क्योंकि लोड में आयी गिरावट ग्रिड को संतुलित करने के लिए नाकाफ़ी थी और इसीलिए, फ़्रीक्वेंसी लगातर बढ़ रही थी।

फ़्रीक्वेंसी में इस तरह की बढ़ोत्तरी का मतलब यह भी है कि ग्रिड से जुड़े हर उपकरण, जिसमें हमारे घरों में लगे मोटर, पंखे, रेफ़्रीजरेटर में लगे कंप्रेशर, एयर कंडीशनर भी शामिल हैं, ग्रिड की अधिशेष ऊर्जा को खपाने के लिए थोड़ा तेज़ चले होंगे। सिस्टम और ग्रिड से जुड़े सभी उपकरणों पर दबाव पड़ा होगा, हालांकि बिना किसी नुकसान के ग्रिड बच गया।

अब आइये, हम इस बात पर नज़र डालें कि ग्रिड के लोड में आयी अचानक गिरावट और बढ़ोत्तरी को कैसे सम्भाला गया। POSOCO ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में जो चार्ट दिया है, उससे हम कुछ ही मिनटों के बाद मांग में गिरावट और इसके वापस आने को देख सकते हैं।

अब सवाल उठता है कि ग्रिड ने लोड में आयी इस भारी गिरावट और बढ़ोत्तरी का सामना कैसे किया, और वह भी कुछ ही मिनटों के भीतर ? POSOCO ने इस आपात स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्रीय और राज्य लोड डिस्पैच सेंटर की सलाह से एक व्यापक 26-सूत्रीय योजना तैयार की थी। मोटे तौर पर, उन्होंने तय किया था कि वे थर्मल पावर स्टेशनों के उस लोड को नीचे ले आयेंगे, जो धीरे-धीरे प्रतिक्रिया करते हैं, और हाइड्रो और गैस-आधारित उत्पादन को बढ़ाते जायेंगे, जो कि मांग में आये बदलाव को लेकर बहुत तेज़ी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

POSOCO के डेटा पर आधारित नीचे दिये गये हमारे चार्ट से पता चलता है कि हाइड्रो और गैस आधारित स्टेशनों ने 32 गीगावॉट लोड ड्रॉप में से क़रीब 20 गीगावॉट लिया, बाकी थर्मल आधारित स्टेशनों से लिया। ग्रिड ने विंड टरबाइन आपूर्ति से लगभग 2 गीगावॉट भी लिया ताकि 9 बजे बत्ती गुल करने के दरम्यान आने वाली लोड की गिरावट के साथ अधिशेष बिजली का प्रबंधन किया जा सके। बड़े पैमाने पर हुई इन सभी बाज़ीगरी की एक ही क़ीमत चुकानी पड़ी और यह कि ट्रिपिंग यानी तेज़ बढ़ोत्तरी-गिरावट से बचाने के लिए ग्रिड को प्रदर्शन करना पड़ा, ऐसा दोनों ही समय हुआ, जब रोशनी चली गयी और जब रोशनी वापस आ गयी। जनरेटर,  ख़ास तौर पर हाइड्रो और गैस-आधारित स्टेशनों ने इस क़ीमत के अहम हिस्से को चुकाया, और उनके उपकरणों पर दबाव पड़ा।

graph 2_1.png

POSOCO के साथ-साथ हमने भी उस लोड को कम करके क्यों आंका, जो उस रात 9 बजे ग्रिड को झटका दिया था? POSOCO का अनुमान था कि 9 बजे लोड में क़रीब 12-14 गीगा वाट की गिरावट आयेगी और फिर लोड वापस आ जायेगा। इसका एक कारण तो 9 मिनट के ब्लैकआउट आह्वान को लागू करने वाले मोदी भक्तों की बत्ती गुल की जा रही कॉलोनियों और हाउसिंग सोसाइटियों में एक बड़ी संख्या का होना है। इसके अलावा, ग्रिड में आयी अस्थिरता के दौरान उपकरणों को नुकसान पहुंचने को लेकर लोगों के एक वर्ग में भय देखा गया कि लोड 9 बजे के निर्धारित समय से पहले ही सिस्टम में कहीं गड़बड़ी न आ जाये। इससे हममें से किसी की उम्मीद से कहीं ज़्यादा लोड की शेडिंग हुई।

विद्युत मंत्रालय ने 4 अप्रैल को एक बयान जारी करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री के 5 अप्रैल के आह्वान पर सामान्य सीमा के भीतर अच्छी तरह से सब कुछ संपन्न हो जायेगा और इसे ग्रिड के मानक संचालन प्रोटोकॉल से नियंत्रित किया जायेगा। यह सरासर झूठ था। सभी बिजली ऑपरेटरों को जारी अपने 26-सूत्रीय एडवाइज़री में POSOCO ने इस घटना को "अभूतपूर्व" बताया और विशेष रूप से इस मोदी इवेंट को संभालने को लेकर असाधारण उपाय किये गये थे। और सिर्फ़ रिकॉर्ड के लिए, POSOCO की कार्रवाई की 26 प्वाइंट वाली सूची में जो आख़िरी प्वाइंट था, वह यह था- "सेवाओं की बहाली के लिए एक ‘ब्लैक स्टार्ट’ की तैयारी"। ब्लैक स्टार्ट की ज़रूरत तब होती है, जब किसी पावर स्टेशन को बिना ग्रिड पावर के उपलब्ध होते हुए शुरू करना होता है, जैसा कि किसी ग्रिड के ध्वस्त होने के बाद ग्रिड सेवाओं की बहाली की ज़रूरत होती है। ज़ाहिर है, मोदी द्वारा 5 अप्रैल को शुरू होने वाले उस "अभूतपूर्व" इवेंट में पेश आने वाले ग्रिड के जोखिम को लेकर जानकारों को अच्छी तरह पता था।

हालांकि ग्रिड बच गया, और ऐसा सिर्फ़ इसलिए हो पाया, क्योंकि POSOCO, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य लोड डिस्पैच सेंटर, जनरेटिंग स्टेशनों और सभी बिजली कर्मचारियों ने इसकी व्यापक तैयारी की थी। मगर, इन सबके बीच सवाल यही रहा जाता है कि क्या प्रधानमंत्री को ग्रिड के सामने यह आपातकाल तब पैदा करना चाहिए था, जब हम पहले से ही महामारी और राष्ट्रीय लॉकडाउन का सामना कर रहे हैं ?

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

Indian Grid Survives Modi’s 9*9 PM Emergency

POSOCO
Narendra modi
grid collapse
9 minutes at 9
Modi events
COVID-19
National lockdown.

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी


बाकी खबरें

  • varansi ghat
    कुशाल चौधरी
    बनारस घाट के नाविकों को अब भी कोविड-19 की तबाही से उबरना बाक़ी
    21 Oct 2021
    पर्यटकों की आवाजाही पर महीनों का लॉकडाउन और मानसून में गंगा के स्तर में वृद्धि से त्रस्त नाविकों को काम, दैनिक मज़दूरी की कमी का सामना करना पड़ रहा है और वे भारी क़र्ज़ में हैं। इस बीच सरकारी मदद…
  • IGDTUW
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय के सफ़ाई कर्मचारियों ने कपड़े उतार कर मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन!
    21 Oct 2021
    सफाई कर्मचारियों ने कहा कि वो दिल्ली सरकार की बर्बर उदासीनता के खिलाफ आज यानी गुरुवार को दलित महिला कर्मचारी सूर्यास्त के समय मुख्यमंत्री आवास पर अपने बाल मुंडवा कर उनका त्याग करेंगी। विश्वविद्यालय…
  • Bangladesh Violence
    एजाज़ अशरफ़
    बांग्लादेश हिंसा: अल्पसंख्यकों के लिए असहनीय जगह में तब्दील होता भारतीय उपमहाद्वीप
    21 Oct 2021
    अतीत की उथल-पुथल से सबक सीखने के बजाय, बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत में विभाजन की पूनरावृति देखी जा रही है।
  • patna
    राहुल कुमार गौरव
    पटना मेट्रो: पुनर्वास का इंतिज़ाम नहीं, अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस के डंडे से हुई चाय वाले की मौत!
    21 Oct 2021
    पटना के कंकड़बाग इलाका के मलाही पकड़ी चौराहे के दोनों तरफ की सड़कों के बीच में खाली पड़ी जमीन पर पिछले कई सालों से दर्जनों परिवार 50 सालों से रह रहे हैं। पटना में मेट्रो निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा…
  • Patna
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार: कश्मीर में प्रवासी बिहारी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ पटना सहित पूरे राज्य में मनाया गया विरोध दिवस
    21 Oct 2021
    माले के मुताबिक़ राजधानी पटना के साथ-साथ बिहारशरीफ, बेगूसराय, अरवल, नवादा, रोहतास, डुमरांव, समस्तीपुर, भोजपुर, सिवान, दरभंगा आदि जिलों में भी विरोध मार्च निकाले गए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License