NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
केवल 60 हज़ार करोड़ की धोखाधड़ी ही नहीं बल्कि पूरा बैंकिंग क्षेत्र सड़ रहा है!
साल 2008 में जहां भारत का कुल एनपीए कुल कर्ज़े का तक़रीबन 2.3 फ़ीसदी था। वही एनपीए का आंकड़ा बढ़कर साल 2019 में कुल कर्ज़े का तक़रीबन 9.3 फ़ीसदी हो चुका था।
अजय कुमार
06 Jan 2021
Bank scam

देश में लूट और सड़न का सबसे बजबजाता कारोबार बैंकिंग क्षेत्र में चल रहा है। साल 2020 में सीबीआई ने बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी के 190 मामले दर्ज किए हैं। और इन धोखाधड़ी के मामलों में बैंकिंग क्षेत्र में तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपए की धांधली हुई है। दर्जनों मामले ऐसे हैं जहां पर बैंकों से 1 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज लिया गया और फिर उसे चुकाया नहीं गया।

साल 2020 के अगस्त महीने में आरबीआई की रिपोर्ट थी कि वित्त वर्ष 2019-20 में धोखाधड़ी की वजह से बैंकों के तकरीबन 1.86 लाख करोड़ रुपए की लूट हुई। इनमें से तकरीबन 80 फ़ीसदी हिस्सा सरकारी बैंकों से जुड़ा हुआ था। धोखाधड़ी से जुड़ी इन खबरों के बीच चलिए एक बार फिर से भारत की खस्ताहाल स्थिति में पहुंचती बैंकिंग क्षेत्र पर नज़र डालते हैं।

पिछले कुछ सालों की बैंकिंग क्षेत्र की सुर्खियां उठाकर देखें तो बैंकिंग क्षेत्र किसी ना किसी बहाने अपनी बर्बादी को दिखाता हुआ मिला है। बैंकों के ज़रिए दिए गए बड़े-बड़े कर्ज़ों का डूब जाना-इसकी वजह से बैंकों का बढ़ता हुआ एनपीए, धोखाधड़ी के मामले, क्रोनी कैपोटिलिजम और न जाने क्या-क्या। यह सब बैंकिंग क्षेत्र की सुर्खियां रही है। और यह सुर्खियां बढ़ती चली जा रही हैं। केवल सरकारी बैंक की नहीं बल्कि निजी बैंक में भी जमकर धांधलियाँ बढ़ी हैं।

जून 2019 में एनपीए बढ़ कर 9.4 लाख करोड़ हो गया था। भारत के स्वास्थ्य बजट से तकरीबन चार गुना अधिक। यानी बैंकों द्वारा दिया गया यह कर्ज़ा फिर से बैंक में आने की उम्मीद न के बराबर हो चली है।

कई अर्थशास्त्रियों ने लिखा कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र डूबते चले जा रहा है। कर्ज़ वापस न लौटने की वजह से उसके कर्ज़ देने की ताकत कमज़ोर हो रही है। अगर इस परितंत्र पर लगाम नहीं लगती है तो भारत में पूंजी निर्माण की प्रक्रिया बहुत धीमी होगी और अर्थव्यवस्था ठप्प होती चली जाएगी। ऐसे में अर्थव्यवस्था की बहाली मुश्किल होती है। अर्थव्यवस्था बड़ी मुश्किल से पटरी पर लौटती है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार भारत की अर्थव्यवस्था अपनी क्षमता के मुताबिक खुद को संभालने में नाकामयाब रही है।

रिज़र्व बैंक के मुताबिक बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी बैंक की हिस्सेदारी तकरीबन 65 फ़ीसदी है। कैपिटल इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारतीय सरकारी बैंकिंग का कामकाज दुनिया के सबसे ज्यादा नुकसान सहने वाले संगठनों में से एक था।

साल 2008 के वित्तीय संकट के बाद भारत के बैंकों ने जमकर कंपनियों को कर्ज़ बांटे। भारत सरकार को लगा कि कंपनियों को पैसे मिलेंगे तो निवेश होगा। ब्याज दरें कम की गई और कंपनियों ने पैसे लिए। रीयल स्टेट और टेलीकॉम सेक्टर में जमकर पैसे लगे। लेकिन पैसे वापस लौटकर नहीं आए। बैंकों की बहुत बड़ी देन डूब गई।

डूबे हुए कर्ज़े में सबसे बड़ा हिस्सा सार्वजनिक बैंक यानी सरकारी बैंक का है। तकरीबन 85 फ़ीसदी एनपीए सार्वजनिक बैंक से जुड़ा है। केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए तकरीबन 2.23 लाख करोड़ रुपए का है।

साल 2008 में जहां भारत का कुल एनपीए कुल कर्ज़े का तकरीबन 2.3 फ़ीसदी था। वही एनपीए का आंकड़ा बढ़कर साल 2019 में कुल कर्ज़े का तकरीबन 9.3 फ़ीसदी हो चुका है।

इन सभी के बीच नीरव मोदी विजय माल्या आईसीआईसीआई बैंक पंजाब नेशनल बैंक से जुड़ी आपसी धांधलीयों का इशारा साफ था कि सरकार और बैंक के बोर्ड के सदस्यों के बीच ज़बरदस्त किस्म का आपसी सांठगांठ चलने की प्रवृत्ति है। एक तरह से कह लीजिए तो यह क्रोनी कैपिटलिज़म है। जहां पर नेता और बड़े-बड़े कारोबारी आपसी सांठगांठ से बैंकों में जमा जनता का पैसा अपने नाम करवा कर अपनी दुकान चलाने का व्यापार करते रहते हैं। जब इनकी चोरी पकड़ी जाती है तो दूसरे देशों में भाग जाते हैं।

साल 2020 में बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में तकरीबन 1.28 लाख करोड़ रुपए की लूट हुई है। जो पिछले साल से तकरीबन 28 फ़ीसदी अधिक है। इसमें भी सरकारी बैंकों का हिस्सा सबसे अधिक है। इस लूट में तकरीबन 80 फ़ीसदी हिस्सा सरकारी बैंकों का है।

जानकारों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में ऐसी लूटें व्यवस्था गत खामियों की वजह से संभव हो पाती हैं। साल 2014 में व्यवस्था गत खामियों को दूर करने के लिए पी जे नायक समिति बनाई गई थी। इस समिति ने तकरीबन 82 सिफारिशें मौजूदा गवर्नर रघुराम राजन को सौंपी थी। अभी तक इन सिफारिशों में केवल चार-पांच सिफारिशें ही लागू हो पाई है। अगर यह सिफारिशें लागू होती तो संभव था कि इतनी बड़ी मात्रा में धोखाधड़ी न होती।

इन सिफारिशों का संक्षेप में समझा जाए तो यह सिफारिश थी कि किसी भी बैंक में धोखाधड़ी की संभावना तब बनती है जब बिना किसी छानबीन के ग्राहकों को कर्ज़ दे दिया जाता है। छानबीन की प्रक्रिया बहुत कमज़ोर होती है। छानबीन करने वाले लोगों और कर्ज़ लेने वाले लोगों के बीच आपसी सांठगांठ होती है। जब बैंक अंदरूनी बाहरी और किसी तीसरे पक्ष से करवाई गई ऑडिट में धांधली होती है। नीरव मोदी और पंजाब नेशनल बैंक के ऊंचे अधिकारियों के बीच के आपसी सांठगांठ की वजह से ही नीरव मोदी कर्ज़ में डूबता भी चला गया और पंजाब नेशनल बैंक से कर्ज़ लेता भी चला गया। यह तभी संभव हो पाया जब बैंक द्वारा दिए जाने वाले लोन से जुड़ी प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में काम करने वाली सभी तरह की छानबीन में भ्रष्ट व्यवहार होता रहा। जब तक ऐसे व्यवहारों को रोकने के ठोस उपाय को बैंक नहीं अपनाएंगे तब तक धोखाधड़ी से निजात पाना बहुत मुश्किल है।

हद दर्जे की अविश्वसनीय बात तो यह हुई कि आरबीआई की ऑडिट टीम भी पंजाब नेशनल बैंक की ऑडिटिंग करते समय घोटाला नहीं पकड़ पाई। कहने का मतलब यह है की भ्रष्ट व्यवहार बैंकों को घुन की तरह चाटे जा रहा है। इसके ऊपर आरबीआई की कार्यकारी समिति की सिफारिश है कि भारत में अब कॉरपोरेट भी बैंकिंग के क्षेत्र में शामिल हो जाएं। अगर यह होगा तब समझिए बैंकिंग के नाम पर कितनी बड़ी धांधली का परनाला खुल जाएगा। लूटने वाले बैंकिंग के नाम पर पैसे लेंगे और लूट कर किसी दूसरे देश में चले जाएंगे। धोखाधड़ी के आरोप में प्रत्यर्पण की कार्यवाही सालों साल चलती रहेगी। जनता पिसती रहेगी।

निष्कर्ष यह है कि बैंकिंग क्षेत्र की धोखाधड़ी नहीं रोकी गई। बैंकों के कारोबार पर ढंग से लगाम नहीं लगाई गई तो बैंक पर से जनता का भरोसा टूटने लगेगा। और ऐसी स्थिति दुनिया की किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बुरी स्थिति होती है कि लोगों का उसके बैंकों पर ही भरोसा न रहे।


बाकी खबरें

  • देवरिया की घटना महज़ पहनावे की कहानी नहीं, पितृसत्‍ता की सच्‍चाई है!
    सोनिया यादव
    देवरिया की घटना महज़ पहनावे की कहानी नहीं, पितृसत्‍ता की सच्‍चाई है!
    26 Jul 2021
    घर की लड़कियों और औरतों को नियंत्रण में रखना और उनके नियंत्रण से बाहर चले जाने पर उन्‍हें जान से मार डालना ऑनर किलिंग है, जो अक्सर घर की सो कॉल्ड 'इज्‍जत' बचाने के नाम पर किया जाता है, लेकिन हैरानी…
  • आर्थिक उदारीकरण के तीन दशक
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक उदारीकरण के तीन दशक
    26 Jul 2021
    नव-उदारवाद मेहनतकश जनता को तब भी निचोड़ रहा था जब वह ऊंची वृद्घि दर हासिल करने में समर्थ था। संकट में फंसने के बाद से उसने निचोड़ने की इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
  • कई प्रणाली से किए गए अध्ययनों का निष्कर्ष :  कोविड-19 मौतों की गणना अधूरी; सरकार का इनकार 
    ऋचा चिंतन
    कई प्रणाली से किए गए अध्ययनों का निष्कर्ष :  कोविड-19 मौतों की गणना अधूरी; सरकार का इनकार 
    26 Jul 2021
    हालिया अनुमानों के मुताबिक, भारत में कोविड-19 की वजह से मरने वाले लोगों की तादाद 22 लाख से लेकर 49 लाख के बीच हो सकती है। इनके आधार पर वास्तविक मौतों की संख्या आधिकारिक स्तर पर दर्ज की गई और बताई जा…
  • कैसे ख़त्म हो दलितों पर अत्याचार का अंतहीन सिलसिला
    राज वाल्मीकि
    कैसे ख़त्म हो दलितों पर अत्याचार का अंतहीन सिलसिला
    26 Jul 2021
    दलितों पर अत्याचार और दलित महिलाओं से बलात्कार का अंतहीन सिलसिला चलता ही रहता है। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के ही कानपुर के अकबरपुर में दलित युवक को सवर्ण समाज की लड़की से प्रेम करने की सज़ा उसे पेड़…
  • यूके ने अमेरिका के लिए रचा नया अफ़गान कथानक  
    एम. के. भद्रकुमार
    यूके ने अमेरिका के लिए रचा नया अफ़गान कथानक  
    26 Jul 2021
    अमेरिका, ब्रिटेन और पश्चिमी ताकतों को उम्मीद है कि वे तालिबान को अपने खुद के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ जाने के बजाय उनके साथ काम करने का फायदा उठा सकने की स्थिति में हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License