NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
अंतरराष्ट्रीय
इसलिए मैथ्स से बेदख़ल होती जा रही हैं लड़कियाँ
आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा किये गए शोध में बताया गया है कि गणित पढ़ने में लैंगिक असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। क्या हैं इसकी वजहें?
समीना खान
14 Mar 2022
maths

अपने ही शहर की एक कोचिंग में ग्यारहवीं क्लास के बच्चे मैथ्स की पढ़ाई कर रहे हैं। 25 बच्चों में लड़कियों की संख्या 5 है। किसी सवाल को टीचर ने बोर्ड पर हल करने के बाद बच्चों से पूछा कि ये तरीका आप सबको क्लियर हुआ? इनमे से एक बच्ची ने अपनी कॉपी आगे करते हुए सवाल किया - 'लेकिन मेरी स्कूल टीचर ने इसे इस तरीके से हल करवाया है। आप इसे भी देख लें।' टीचर का झल्लाया हुआ जवाब आया- 'एक तो ये औरतों को पता नहीं कौन मैथ्स पढ़ने की सलाह दे देता है!' सवाल हल करने का तरीका कितना सही और कितन गलत था नहीं पता मगर 80 फीसद लड़कों और 20 फीसद लड़कियों को ये सन्देश मिल गया कि मैथ्स की पढ़ाई पर सिर्फ लड़कों का ही अधिकार है।

महिला के मैथ्स पढ़ने को लेकर ये जवाब एक पढ़े लिखे वर्ग की मानसिकता दर्शाता है तो ऐसे में अशिक्षित समाज की सोच का अंदाज़ा लगाना आसान है। हालांकि हर साल जब दसवीं और बारहवीं के नतीजे आते हैं तो ये राज़ भी खुलता है कि लड़कियों ने बाज़ी मारी, मगर जल्दी ही ये लड़किया हमारी सोसाइटी की संकुचित संरचना में अपना विलय करते हुए इन खूबियों से कट जाती हैं।अच्छे अंकों के चढ़े ग्राफ कई क्षेत्रों में बिखर कर अपना अस्तित्व उसी संकुचित सोसाइटी में विलय होने के साथ ये मुद्दा भी गायब हो जाता है।

आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा की जाने वाली एक रिसर्च कुछ ऐसे ही पहलुओं को उजागर करती है। शोध से पता चलता है कि गणित सीखने के मामले में विकसित देशों में महिलाओं के लिए प्रतिकूल स्थिति बनी रहती है। सामाजिक परिस्थितियों के तहत सांस्कृतिक मानदंड, शिक्षक पूर्वाग्रह और माता-पिता का नजरिया इसका सबसे बड़ा कारण है। शोध के तहत तैयार इस लेख में भारत के राष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधिक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। शोध के नतीजे बताते हैं कि विभिन्न आयु वर्गों में गणित सीखने में लैंगिक असमानता सामने आई है। साथ ही ये भी पता चलता है कि समय के साथ इसके कम होने के कोई प्रमाण भी नहीं मिलते हैं।

शोध के बारे में

आईआईएम अहमदाबाद के करण सिंघल और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के उपासक दास का वर्तमान शोध (दास और सिंघल 2021) के अंतर्गत ग्रामीण भारत में 08 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों के गणित सीखने में लैंगिक अंतर की व्यापकता और निरंतरता पर काम किया है। दोनों ने इस अंतर को पाटने की दिशा में जानकारी जुटाई गई है। शोध में वर्ष 2010 से 2018 तक के शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) के लिए बीस लाख से अधिक बच्चों की बुनियादी शिक्षा और गणितीय क्षमताओं को आधार बनाया गया है। इस सम्बन्ध में जमा की गई जानकारी राष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधि शिक्षण परिणाम के आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित कराती है।

इसमें 2004-05 और 2011-12 में एकत्र किए गए भारत मानव विकास सर्वेक्षण (आईएचडीएस) की दो चरणों के आंकड़ों और 2015-16 में एकत्र किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के चौथे दौर से ग्रामीण भारत के लिए सीखने के परिणामों के आंकड़ों को पूरक बनाया गया है। आईएचडीएस का डेटासेट समूह में सीखने के परिणाम, एएसईआर परीक्षण के परिणाम के समान ही हैं, साथ ही यह परिवारों की सामाजिक आर्थिक और जनसांख्यिकीय विशेषताओं पर विस्तृत आंकड़े प्रदान करते हैं। विभिन्न विशेषताओं वाले परिवारों में सीखने के परिणामों में अंतर को समझने की दिशा में मदद मिलती है। शोध में परिवार एवं जिला स्तर पर मौजूदा पितृसत्तात्मक प्रथाओं और मानदंडों के साथ लैंगिक भिन्नता के संबंध को समझने के लिए एनएफएचएस-4 और आईएचडीएस के पहले चरण के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

गणित सीखने में लैंगिक अंतर

वर्ष 2010-18 तक के सभी एएसईआर के सर्वेक्षणों के डेटा महिलाओं के गणित सीखने के आंकड़ों में महत्वपूर्ण प्रतिकूलता दर्शाते हैं जो उनकी शिक्षा के सन्दर्भ में नहीं है। आईएचडीएस डेटा से पता चलता है कि ये अंतर विभिन्न प्रकार के स्कूल प्रबंधन (सार्वजनिक या निजी), सामाजिक समूहों (धर्म और जाति), आर्थिक समूहों (आय समूहों का उपयोग करके) और बच्चों के जन्म क्रम में भी बना रहता है।

(ग्राफ में 2010-18 तक के एएसईआर सर्वेक्षणों से 8-16 वर्ष की आयु के बच्चे शामिल हैं।)

वर्ष 2010 से 2018 तक के लिए विभिन्न आयु-वर्गों में किये गए विश्लेषण को इस ग्राफ के माध्यम से देखें तो पता चलता है कि गणित विषय में लड़कियों और लड़कों दोनों के प्रदर्शन में गिरावट आई है और महिलाओं के लिए यह प्रतिकूल स्थिति समय के साथ जारी है। शोध के दौरान रिसर्चर्स को समय के साथ इस अंतर के कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है। इसके बावजूद ये तथ्य सामने आता है कि आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों (2018) में पढ़ने के परीक्षणों में लड़कियों ने लड़कों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

अंतर-राज्यीय भिन्नताएँ

शिक्षा में लैंगिक असमानता के मामले में पड़ताल का दायरा बढ़ाने पर ये तथ्य भी सामने आता है कि राज्यों में इस अंतर में पर्याप्त भिन्नता है। एएसईआर आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लगभग आधे राज्यों में इस सन्दर्भ में महिलाओं के लिए स्थिति काफी प्रतिकूल है। इन राज्यों में मुख्य रूप से देश के उत्तरी और मध्य राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड आदि हैं।

दूसरी ओर केरल और तमिलनाडु जैसे भारतीय राज्यों में एक 'रिवर्स' गैप देखने को मिला जहां परिस्थितियां पुरुषों के लिए प्रतिकूल देखी गई है। हालांकि इसके लिए और अधिक शोध की ज़रूरत है। फिर भी ये कह सकते हैं कि उत्तरी राज्यों की तुलना में महिलाओं की बेहतर स्थिति विशेष रूप से आश्चर्यजनक नहीं है। यहाँ पर संदर्भों की भिन्नता और शिक्षा से संबंधित निवेश इसे ऐसा बनाते हैं। एक अन्य शोध से पता चलता है कि उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रासंगिक भिन्नताओं को दर्ज किया है- उदाहरण के लिए उत्तर क्षेत्र में महिलाओं की कम श्रम-शक्ति भागीदारी, उच्च लैंगिक भेदभाव, और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मातृवंशीय संरचनाओं की मौजूदगी देखने को मिलती है। इनमे पंजाब एक अपवाद है। यहां लैंगिक असमानता होने के बावजूद शिक्षा में पुरुषों के लिए प्रतिकूल स्थिति देखने को मिलती है जो कि अन्य उत्तरी राज्यों जैसे बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के समान है।

(वर्ष 2010 -18 के बीच 8-16 आयु वर्ग के बच्चों के सीखने के परिणामों के सन्दर्भ में एएसईआर आंकड़ों का उपयोग किया गया है।)

शोध के दौरान तैयार नक्शा हालात का स्पष्ट खुलासा करता है। परिणाम बताते हैं कि जिन राज्यों पितृसत्तात्मक माहौल, खराब लैंगिक अनुपात जैसे कारक हावी है वहां खराब प्रदर्शन देखने को मिला।

महिलाओं के लिए प्रतिकूल स्थिति का जायज़ा लेने पर इस शोध से जो तथ्य सामने आये उनके साथ स्वायत्तता से जुड़ी कुछ पारिवारिक प्रथायें देखने को मिलीं। जिनमे महिलाओं के लिए घूंघट या पर्दा और पुरुषों के खाना खाने के बाद महिलाओं के खाने की प्रथा जैसी परम्पराओं का बरक़रार रहना शामिल है। इसके अलावा अन्य सामाजिक कारण भी देखने को मिले। जैसे पति पैसे कमाने पर अपनी पत्नी पर भरोसा नहीं करता है, वह अपनी पत्नी के संपर्क को सीमित करने की कोशिश करता है, अन्य पुरुषों से बात करने पर उसका ईर्ष्या करना, महिला को अपने दोस्तों से मिलने की अनुमति नहीं देना तथा इस प्रकार के कई और संकेत। ये कारक गणित के विषय में लैंगिक अंतर से महत्वपूर्ण रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे परिवारों में महिलाओं के लिए प्रतिकूल स्थिति बहुत अधिक है।

एनसीईआरटी 2005 द्वारा स्थापित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा में इन अंतरों और संभावित कारणों को स्वीकार किया गया है। इन कारणों में लड़कों को बेहतर प्रदर्शन के लिए 'बुद्धिमत्ता' और लड़कियों को 'कड़ी मेहनत' को स्वीकार किया गया है। इस पर चर्चा भी की गई है। इन सबके बावजूद इस पर प्रभावी नीतियों की कमी पर बहुत ज़्यादा काम किये जाने की ज़रूरत है। असम और गुजरात में गुणोत्सव और मध्य प्रदेश में प्रतिभा पर्व द्वारा राज्यों ने बच्चों के सीखने के परिणामों पर आंकड़े जुटाने की क्षमताएं विकसित की हैं। इसके बावजूद यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि नीति निर्माण के लिए ये आकलन कितने विश्वसनीय साथ ही प्रभावी नीतियों की कमी पर बहुत ज़्यादा काम किये जाने की ज़रूरत है।

Maths
International Day of Mathematics
Girls and Maths

Related Stories


बाकी खबरें

  • Crimes against women
    भाषा
    शर्मनाक: अवैध संबंध के आरोप में पति, गांव वालों ने आदिवासी महिला को निर्वस्त्र कर घुमाया
    14 Jul 2021
    घटना गुजरात के दाहोद जिले की है। पीड़ित महिला के पति और 18 अन्य आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है।
  • Chardham protest
    सत्यम कुमार
    चारधाम परियोजना में पर्यावरण और खेती-किसानी को हो रहे नुकसान की भारी अनदेखी
    14 Jul 2021
    “हम सड़क चौड़ीकरण के विरोध में नहीं है, लेकिन सड़क चौड़ीकरण में अंनियमितताओं के चलते कई समस्याएं पैदा हुई हैं। जैसे डम्पिंग जोन में जो क्षमता से अधिक मलवा डाला जा रहा है, वह नीचे खेतों और पर्यावरण की…
  • Delhi riots: Court terms police investigation 'senseless and ridiculous', imposes a fine of Rs 25,000
    भाषा
    दिल्ली दंगे: अदालत ने पुलिस की जांच को ‘संवेदनहीन और हास्यास्पद’ करार दिया, 25 हज़ार का जुर्माना लगाया
    14 Jul 2021
    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि भजनपुरा थाने के प्रभारी और उनके निरीक्षण अधिकारियों से वसूली जाए क्योंकि वे अपना संवैधानिक दायित्व निभाने में बुरी तरह से विफल…
  • Supreme Court notice to Center and states on UP government's decision to allow Kanwar Yatra
    भाषा
    कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के यूपी सरकार के फ़ैसले पर केंद्र व राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
    14 Jul 2021
    शीर्ष अदालत ने केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस जारी किए और मामले की सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया।
  • सोनिया यादव
    यूपी: रोज़गार के सरकारी दावों से इतर प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
    14 Jul 2021
    योगी सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामें में 51 हजार शिक्षकों के पद खाली होने की बात कही थी। वहीं, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से आए आरटीआई के जवाब का हवाला देते हुए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License