NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
गाज़ा हमले और अल-अक़्सा हमलों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने पर इज़रायल ने फ़िलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया
इज़रायल ने 24 मई से अब तक "लॉ एंड ऑर्डर" के अपने तथाकथित अभियान में 1,700 से अधिक फ़िलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया है।
पीपल्स डिस्पैच
01 Jun 2021
गाज़ा हमले और अल-अक़्सा हमलों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने पर इज़रायल ने फ़िलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया

सोमवार 31 मई को इजरायली सुरक्षा बलों ने 24 मई को शुरू किए गए "ऑपरेशन लॉ एंड ऑर्डर" के तहत उत्तरी इजरायल के शहर कफ्र कन्ना से इजरायल के कम से कम छह और फिलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया। उत्तरी इजरायली शहर अरारा और अरा में अज्ञात संख्या में फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया।

पिछले महीने की शुरुआत में शुरू हुए कब्जे वाले क्षेत्रों में इजरायल के अत्याचारों के खिलाफ विरोध के मौजूदा दौर के बाद गठित एक समूह अरब एमर्जेंसी कमेटी के अनुसार अभियान की शुरुआत के बाद से कम से कम 1,700 फिलिस्तीनी इजरायलियों को इजरायली बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया है। इसी अवधि में इजरायली बलों को फिलिस्तीनियों के खिलाफ हमले के कम से कम 300 मामलों में भी शामिल पाया गया।

इजरायल ने पूर्वी येरुशेलम, वेस्ट बैंक और गाजा में उत्पीड़न की इजरायल की नीतियों के विरोध में फिलिस्तीनी नागरिकों द्वारा किए गए व्यापक विरोध के बाद इजरायल ने अपना तथाकथित "ऑपरेशन लॉ एंड ऑर्डर" शुरू किया। कई इजरायली शहरों में मई में गाजा पर इजरायल के हमले के बीच विरोध प्रदर्शनों ने बड़े पैमाने पर सेटलर और सरकारी हिंसा को जन्म दिया जिससे कम से कम दो फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तेल अवीव के पास लोद (लिद) शहर में एक जेविश सेटलर द्वारा एक फिलिस्तीनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाइफा में एक अन्य फ़लस्तीनी मारा गया।

इजरायली सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि भविष्य में इस तरह के विरोध के खिलाफ "हतोत्साहित करने" के लिए ये अभियान 48 घंटे तक चलेगा। हालांकि, इसे एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और गिरफ्तारी अभी भी जारी है।

विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए फिलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ्तार करने के अभियान की इजरायल और इसके बाहर मानवाधिकार समूहों द्वारा निंदा की गई है। इन समूहों ने इसे विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार का एक स्पष्ट उल्लंघन और इजरायल के मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के सामान्य रिकॉर्ड को जारी रखना करार दिया है।

9मिलियन की कुल आबादी में लगभग 21% इजरायली नागरिक या लगभग 1.9मिलियन फिलिस्तीनी हैं जो मैंडेट फिलिस्तीन के अरब निवासियों के वंशज हैं जो नकबा में बचे थे। उनके साथ हमेशा इजरायल द्वारा भेदभाव किया गया है और देश में समान अधिकारों से वंचित किया गया है। इजरायली दक्षिणपंथी इन फ़िलिस्तीनी नागरिकों को फिफ्त कॉलमनिस्ट (देश के दुश्मनों को मदद करने वाला) मानते हैं और चाहते हैं कि वे अपने नागरिकता के अधिकारों से वंचित रहें।

Israel
Palestine
Gaza
Al-Aqsa mosque

Related Stories

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License