NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इज़रायली सुप्रीम कोर्ट ने शेख़ जर्राह जबरन बेदख़ली मामले पर फ़ैसला स्थगित किया
अदालत ने फ़िलिस्तीनियों को एक समझौते की पेशकश की जिसके अनुसार फ़िलिस्तीनी इस भूमि के यहूदी स्वामित्व को स्वीकार करने के बदले में अगली तीन पीढ़ियों के लिए अपने घरों में रह सकते हैं।
पीपल्स डिस्पैच
03 Aug 2021
इज़रायली सुप्रीम कोर्ट ने शेख़ जर्राह जबरन बेदख़ली मामले पर फ़ैसला स्थगित किया

इज़रायल के सुप्रीम कोर्ट ने कब्जे वाले पूर्वी येरुशेलम के पास शेख जर्राह के फिलिस्तीनी निवासियों के जबरन बेदखली के मामले में अंतिम फैसला देने को स्थगित कर दिया है। कई मीडिया संस्थानों ने सोमवार 2 अगस्त ये रिपोर्ट प्रकाशित किया। लगभग 70 लोगों वाले चार फिलिस्तीनी परिवारों ने इजरायली अधिकारियों द्वारा उन्हें अवैध तरीके से खाली कराने के खिलाफ एक अपील दायर किया था। चरमपंथी इजरायली सेटलर समूह ने दावा किया था ये भूमि मूल रुप से यहूदियों की है।

इज़रायल में निचली अदालतों ने बेदखली के लिए हरी झंडी दे दी थी जिससे यह आशंका पैदा हो गई थी कि शेख जर्राह और पूर्वी येरुशेलम के आसपास के सैकड़ों अन्य परिवारों को अगली बार निशाना बनाया जाएगा जिसको लेकर फिलिस्तीन समर्थक एक्टिविस्टों और मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि इजरायल का लक्ष्य धीरे-धीरे और लगातार नस्लीय रूप से फिलिस्तीनियों के क्षेत्र को साफ करना और इस क्षेत्र को 'यहूदी क्षेत्र बनाना' है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपनी टिप्पणी में कहा कि इस मामले में अंतिम निर्णय लेने के लिए उसे और समय चाहिए और उसे इस मामले में दोनों विरोधी पक्षों की और दलीलें सुनने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक सात दिनों के बाद एक और सुनवाई निर्धारित की गई है। इस फैसले को स्थगित करने का निर्णय तब भी आया जब अदालत ने एक 'समझौता' प्रस्ताव के रूप में पेश किया था, जिसमें फिलिस्तीनियों को अपनी जमीन का स्वामित्व नहलत शिमोन सेटलर समूह को देने और 'संरक्षित किरायेदारों' की स्थिति प्राप्त करने के बदले में प्रतीकात्मक किराए का भुगतान करने के लिए कहा गया था। इस स्थिति से फिलिस्तीनी परिवार बेदखली से सुरक्षित रहेंगे और उनकी अगली तीन पीढ़ियों को उनके घरों में रहने की अनुमति होगी। फिलीस्तीनियों ने फौरन और पूरी तरह से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इस मामले में मौलिक फैसला मई में दिया जाना था। इस साल अप्रैल और मई के महीनों में, इजरायली सुरक्षा बलों और चरमपंथी यहूदी सेटलर्स द्वारा फिलिस्तीनियों को जबरन बेदखल करने और उन्हें डराने के लिए हिंसक प्रयास किए गए, जिसके कारण उनके घरों की रक्षा करने के लिए हजारों अन्य लोगों के साथ-साथ फिलिस्तीनी निवासियों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और धरना प्रदर्शन किया गया।।

Israel
Sheikh Jarrah
Israeli Supreme Court

Related Stories

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार

2021: अफ़ग़ानिस्तान का अमेरिका को सबक़, ईरान और युद्ध की आशंका


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    देश भर में निकाली गई हनुमान जयंती की शोभायात्रा, रामनवमी जुलूस में झुलसे घरों की किसी को नहीं याद?
    16 Apr 2022
    एक धार्मिक जुलूस से पैदा हुई दहशत और घायल लोगों की चीख़-पुकार अभी फ़िज़ा में मौजूद है कि राजधानी दिल्ली सहित देश भर में एक और त्योहार के जुलूस निकाले गए। और वह भी बाक़ायदा सरकारी आयोजन की तरह। सवाल…
  • पलानीवेल राजन सी
    अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष करते ईरुला वनवासी, कहा- मरते दम तक लड़ेंगे
    16 Apr 2022
    पिल्लूर में स्थानीय समुदायों की लगभग 24 बस्तियां हैं, जो सामुदायिक वन अधिकारों की मांग कर रही हैं, जैसा कि एफआरए के तहत उन्हें आश्वस्त किया गया था।
  • रूबी सरकार
    बुलडोज़र की राजनीति पर चलता लोकतंत्र, क्या कानून और अदालतों का राज समाप्त हो गया है?
    16 Apr 2022
    जिस तरह एक ख़ास धर्म के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए भाजपा की राज्य सरकारें बुलडोज़र को आगे कर रही हैं उससे लोकतंत्र हर रोज़ मरणासन्न स्थिति की ओर जा रहा है। 
  • सत्यम श्रीवास्तव
    कन्क्लूसिव लैंड टाईटलिंग की भारत सरकार की बड़ी छलांग
    16 Apr 2022
    देश में मौजूद ज़मीन के हर एक पीस/प्लॉट का एक आधार नंबर दिया जाना जिसे इस बजट भाषण में यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) कहा गया है। इसके लिए बाज़ाब्ता ज़मीन के हर टुकड़े के अक्षांश और देशांत…
  • विजय विनीत
    पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन
    16 Apr 2022
    पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज बलिया में ऐतिहासिक बंदी है। बलिया शहर के अलावा बैरिया, बांसडीह, बेलथरा रोड, रसड़ा और सिकंदरपुर समेत ज़िले के सभी छोटे-बड़े बाज़ार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License