NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़म के परिवार से जयंत की मुलाकात के क्या मायने निकाले जाएं?
रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी की आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म खान से मुलाकात के बाद तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक अटकल ये है कि आज़म खान सपा छोड़ सकते हैं तो दूसरी तरफ़ यह भी कि शायद जयंत अखिलेश की तरफ़ से ही मनाने-समझाने गए हों।
रवि शंकर दुबे
20 Apr 2022
आज़म के परिवार से जयंत की मुलाकात के क्या मायने निकाले जाएं?

एक ओर जहां देश सांप्रादायिक दंगों की आग में झुलस रहा है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी शांत होती नहीं दिख रही है। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ बग़ावती तेवर अपनाए बैठे आज़म खान को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। अब राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी ने उनके परिवार से मुलाकात की है।

जैसा कि सभी जानते हैं कि आज़म खान इन दिनों सीतापुर जेल में सज़ा काट रहे हैं। जिसे अनदेखा करने का आरोप लगाकर अखिलेश यादव के खिलाफ आज़म खेमा बग़ावत कर चुका है, इसी बीच जयंत चौधरी आज़म के घर रामपुर पहुंचे और उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला आज़म खान से मुलाकात की।

आज़म के परिवार से मुलाकात को जयंत चौधरी पारिवारिक बता रहे हैं, लेकिन ऐसे वक्त पर जब देश में मुसलमानों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का दौर चल रहा हो, और प्रदेश का दिग्गज मुस्लिम नेता जेल में बंद हो। तब सवाल राजनीतिक ही होंगे। यही कारण है कि मुलाकात के तुंरत बाद आज़म के समाजवादी पार्टी को अलविदा कहने की अटकलों ने ज़ोर पकड़ लिया।

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह जी ने रामपुर में पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान जी के परिजनों से मुलाकात की#chaudharyjayantsingh #RLD pic.twitter.com/r3NHWrav9Y

— Rashtriya Lok Dal (@RLDparty) April 20, 2022

 

आपको बता दें कि विधानसभा में आज़म खान को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने के बाद से ही मुस्लिम समाज के लोगों से लेकर आज़म खान के करीबियों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। आज़म के मीडिया प्रभारी ने यहां तक कह दिया था कि अखिलेश को हमारे कपड़ों से बदबू आने लगी है।  

आज़म खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू के बयान के बाद से रोजाना आज़म खां के समर्थक कहीं न कहीं कोई प्रदर्शन कर रहे हैं, खून से खत लिख रहे हैं और बयान जारी कर रहे हैं। ऐसे में आज़म खान के सपा का साथ छोड़ने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। इन्हीं नाज़ुक मौके पर स्वार से विधायक अब्दुल्ला आज़म खान से जयंत चौधरी ने मुलाकात की है। अब इसे बग़ावत को बढ़ाना समझा जाए या समझाना, ये समझ का विषय है।  

जयंत चौधरी ने सीधे तौर पर अखिलेश के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि ‘’काफी कुछ ऐसा है जिसका सामना आज़म खान का परिवार कर रहा है। मेरी ज़िम्मेदारी थी कि मैं उनके परिवार से मिलूं। मुलाकात के दौरान परिजनों ने उम्मीद जताई कि आज़म को जल्द ज़मानत मिल जाएगी।”

जयंत चौधरी से जब आज़म के रालोद में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि— ‘’मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं है’’ हालांकि इसी दौरान जयंत एक नए विकल्प के बारे में अपनी राय ज़रूर रख दी। और उन्होंने कहा कि नौजवानों को सड़क पर उतरकर महंगाई, बेरोज़गारी के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए ताकि प्रदेश को भाजपा के खिलाफ एक नया विकल्प मिल सके।

पिछले कई दिनों से आज़म खेमे की बग़ावत और जयंत का नया विकल्प वाला राग... कहीं न कहीं लोकसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी की मुश्किलें ज़रूर बढ़ा सकता है।

न्यूज़क्लिक ने जब आज़म खान के परिवार के साथ जयंत चौधरी की मुलाकात को लेकर सपा के प्रवक्ता अब्दुल हफीज़ गांधी से बातचीत की तो उन्होंने भी इस मुलाकात को पारिवारिक ही करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी को किसी के परिवार से मिलने की पूरी आज़ादी है, जो जब चाहे मिल सकता है। वहीं आज़म खान के आरएलडी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आरएलडी अभी सपा के साथ गठबंधन का हिस्सा है, ऐसे में सिर्फ फिज़ूल की बातों को तूल दिया जा रहा है। हालांकि जब हमने सवाल किया आज़म खेमे से अखिलेश के खिलाफ बग़ावती सुर उठ रहे हैं, और पिछले दिनों अब्दुल्ला आज़म ने कुछ ट्वीट किए थे, तो उन्होंने अब्दुल्ला आज़म खान का नाम तो नहीं लिया लेकिन आज़म खान के मीडिया सलाहकार को ज़रूर इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया। इसके अलावा नए विकल्प की बात पर अब्दुल हफीज़ गांधी ने कहा कि जयंत भाजपा के विकल्प की बात कर रहे होंगे।

आपको बता दें कि हाल ही बीते उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी और रालोद ने मिलकर लड़ा था। जिसमें सपा गठबंधन की कुल 125 सीटे आई थीं। सपा के खाते में 111 और रालोद को 8 सीटों पर जीत मिली थी। जो साल 2017 के लिहाज़ से दोनों ही पार्टियों का बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि गठबंधन की सरकार प्रदेश में बन सकी। जिसके बाद से ही समाजवादी पार्टी में टूट की लगातार ख़बरे सामने आ रही हैं। पहले अखिलेश के चाचा शिवपाल की नाराज़गी और अब आज़म खान के परिवार की बगावत। ये कहना ग़लत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में प्रदेश के भीतर बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

आपको बता दें कि आज़म के परिवार से मुलाकात के बाद जयंत ने सांप्रादायिक उन्माद को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सबका उद्देश्य लोकतंत्र को बचाए रखना है। बुलडोजर के इस्तेमाल पर जयंत ने कहा कि यह गैरकानूनी और असंवैधानिक है। जब तक कानून किसी को दोषी सिद्ध नहीं कर देता, इस तरह की कार्रवाई को संवैधानिक नहीं कहा जा सकता है।

इसे भी पढ़ें-- https://hindi.newsclick.in/AZAM-KHAN-CAN-QUIT-SAMAJWADI-PARTY

Jayant Chaudhary
AZAM KHAN
RLD
Abdullah Azam Khan
AKHILESH YADAV

Related Stories

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

रालोद के सम्मेलन में जाति जनगणना कराने, सामाजिक न्याय आयोग के गठन की मांग

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी बवाल

‘साइकिल’ पर सवार होकर राज्यसभा जाएंगे कपिल सिब्बल

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

27 महीने बाद जेल से बाहर आए आज़म खान अब किसके साथ?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

सवर्णों के साथ मिलकर मलाई खाने की चाहत बहुजनों की राजनीति को खत्म कर देगी

सपा प्रतिनिधिमंडल को न, दूसरे दलों को हां... आख़िर आज़म का प्लान क्या है?


बाकी खबरें

  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    09 Mar 2022
    जो चैनल भाजपा गठबंधन को बहुमत से 20-25 सीट अधिक दे रहे हैं, उनके निष्कर्ष को भी स्वयं उनके द्वारा दिये गए 3 से 5 % error margin के साथ एडजस्ट करके देखा जाए तो मामला बेहद नज़दीकी हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License