NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जम्मू-कश्मीर: राज्य में लागू कड़े प्रतिबंधों के बीच जल्दबाज़ी में प्रशासन ने गिलानी का अंतिम संस्कार किया
हुर्रियत नेता के परिवार में कई लोगों का आरोप है कि उन्हें गिलानी के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने से रोका गया, जबकि कई दोस्त और रिश्तेदारों का कहना है कि वे देर रात को उन्हें दफ़न किए जाने के कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।
अनीस ज़रगर
03 Sep 2021
जम्मू-कश्मीर: राज्य में लागू कड़े प्रतिबंधों के बीच जल्दबाज़ी में प्रशासन ने गिलानी का अंतिम संस्कार किया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के लोग गुरुवार को सुबह उठे तो उन्होंने पाया कि पूरे राज्य में प्रशासन ने आवाजाही और संचार पर प्रतिबंध लगा रखा है। यह प्रतिबंध हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के निधन के बाद लगाए गए थे। 

92 साल के गिलानी का बुधवार रात को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। इसके बाद प्रशासन ने श्रीनगर के हैदरपोरा में उनके घर तक जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया था, ताकि लोग उनकी अंतिम क्रिया में ना जा पाएं।

पुलिस और अर्द्धसैनिक बल लोगों को कश्मीर घाटी में जाने से रोकते रहे, जबकि दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान और कार्यालय बंद रहे। सुरक्षा संस्थानों को अंदेशा था कि गिलानी के निधन के बाद हिंसा भड़क सकती है। लेकिन कड़ी सख़्ती के बीच कहीं से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई। 

गिलानी के परिवार में कई लोगों को उनके अंतिम क्रियाकर्म में हिस्सा लेने से रोका गया, वहीं उनके कई दोस्त और संबंधी उन्हें दफ़न करने के दौरान नहीं पहुंच पाए। बता दें गिलानी को जल्दबाजी में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आधी रात को उनके परिवार की मंशा के खिलाफ़ दफ़न किया है।

लेकिन परिवार के इन दावों को पुलिस ने खारिज किया है। IGP कश्मीर ने कश्मीर जोन पुलिस ट्विटर हैंडल के ज़रिए कहा, "पुलिस के खिलाफ़ लगाए गए कथित आरोप निराधार हैं। बल्कि पुलिस ने शव को घर से कब्रिस्तान तक लाने में मदद की क्योंकि तब ऐसी चिंताएं जताई जा रही थीं कि कुछ आसामाजिक तत्व स्थिति का फायदा उठाने की फिराक में हैं। रिश्तेदारों ने गिलानी की अंतिम क्रिया में हिस्सा लिया था।" 

विधानसभा के तीन बार सदस्य रहे गिलानी ने अपने अंतिम वक्तव्यों में से एक में खुद को मजार-ए-शोहदा में दफ़नाए जाने की इच्छा जताई थी। मज़ार-ए-शोहदा श्रीनगर में शहीदों का कब्रिस्तान है। लेकिन पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में गिलानी को हैदरपोरा के जामा मस्जिद परिसर में दफ़नाया गया, जो उनके निवास के करीब था।

कई लोग जिन्होंने गिलानी की अंतिम क्रिया में हिस्सा लेने की इच्छा जताई थी, उन्हें सरकार के फ़ैसले से निराशा हुई। श्रीनगर में चानपोरा के एक स्थानीय निवासी ने कहा, "वह एक अहम शख्सियत थे, जो कश्मीर की राजनीति और समाज में 6 दशकों तक केंद्र में थे। मैं उनकी अंतिम क्रिया में हिस्सा लेना चाहता था। हमें रोका जाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।" इस शख़्स ने खुद का नाम ज़ाहिर ना करने की अपील की है, उसे पुलिस प्रशासन की तरफ से प्रतिक्रिया का डर है।

गिलानी के निधन के बाद लगाए गए प्रतिबंध कई लोगों के लिए अभूतपूर्व लॉकडाउन की याद बनकर आए, जो अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद लगाया गया था। इस लॉकडाउन से कश्मीर में बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक नुकसान हुआ था। स्थानीय लोगों ने पुलिस पर आपात स्थिति में भी यात्रियों को यात्रा ना करने देने का आरोप लगाया, जिससे काफ़ी समस्या पैदा हुई। 

अनंतनाग में टैक्सी ड्राईवर तुफैल ने न्यूज़क्लिक को बताया, "बाबा ऋषि में मेरा एक पर्यटक समूह इंतज़ार कर रहा था। मुझे उन्हें उठाना था। मैं अब उनतक नहीं पहुंच पाऊंगा। उन्हें बहुत चिंता हो रही होगी।"

1993 में ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे गिलानी के निधन पर कई मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं ने दुख जताया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती भी शामिल रहीं।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "गिलानी साहब के गुजरने से दुखी हूं। हम कई चीजों पर एकमत नहीं थे, लेकिन मैं उनकी दृढ़ता और अपने विश्वासों पर टिके रहने की इच्छाशक्ति का सम्मान करती हूं। अल्ला ताला उन्हें जन्नत दें, उनके परिवार वालों और शुभचिंतकों के लिए संवेदनाएं।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

J&K Govt Carries out Hurried Funeral for Geelani Amid Clampdown Across Kashmir

Geelani funeral
Geelani Family
Hurriyat Leader
J&K Government
J&K clampdown

Related Stories

क्या सैयद शाह गिलानी राष्ट्रीय मीडिया से श्रृद्धांजलि मिलने के भी पात्र नहीं थे?

दो महीने में 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान : कश्मीर चैंबर

बारामूला की रातें : वो ख़त लिखे जा रहे हैं जिनको भेजना मुमकिन ही नहीं है!


बाकी खबरें

  • राशन वितरण के दौरान वृद्ध, विधवा, विकलांग और अभावग्रस्त व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। फोटो: नरेश बिस्वास
    शिरीष खरे
    कोरोना लॉकडाउन में घने वनों से घिरे बैगाचक में बांटा गया परंपरागत खाद्य पदार्थ, दिया पोषण-सुरक्षा का मॉडल
    22 Jul 2021
    आदिवासी बहुल बैगाचक में काम करने वाले राहत-कार्य समूह से जुड़े लोगों ने डिंडौरी और पड़ोसी जिले अनूपपुर के लगभग साढ़े चार सौ जरूरतमंद परिवारों को जो राशन-किट दी उसमें मुख्य रुप से कोदो-कुटकी रखी गई थी।
  • उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    कुमुदिनी पति
    उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    22 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश में 2015 में 31 लाख 52 हजार महिलाओं ने गर्भपात रिपोर्ट किया था। संख्या इससे कहीं अधिक होगी क्योंकि केवल 11 प्रतिशत ने स्वास्थ्य केंद्र में गर्भपात करवाया था।
  • लोकसभा
    अनिल जैन
    दलबदल विरोधी क़ानून का मखौल उड़ाने में अब लोकसभा अध्यक्ष भी शामिल!
    22 Jul 2021
    जन-प्रतिनिधियों के दल-बदल और खरीद-फरोख्त के रोकथाम के लिए कोई साढ़े तीन दशक पहले दलबदल निरोधक कानून अस्तित्व में आया था। उम्मीद जताई गई थी कि इस कानून के जरिए भारतीय लोकतंत्र इस बीमारी से निजात पा…
  • सड़क संसद में किसान। भास्कर पर इनकम टैक्स छापे।
    न्यूज़क्लिक टीम
    सड़क संसद में किसान, भास्कर पर इनकम टैक्स छापे
    22 Jul 2021
    मोदी सरकार ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। सत्ता से सवाल पूछने वाले अखबार दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश स्थित भारत समाचार पर इनकम टैक्स रेड मारी गयी है। याद रहे ऐसे ही न्यूज़ क्लिक के दफ्तर पर भी ED ने…
  • दैनिक भास्कर और भारत समाचार चैनल के परिसरों पर आयकर विभागने मारे छापे, लोगों ने कहा डारने की साज़िश
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दैनिक भास्कर और भारत समाचार चैनल के परिसरों पर आयकर विभाग ने मारे छापे, लोगों ने कहा डराने की साज़िश
    22 Jul 2021
    "...सरकार की छापेमारी इसलिए हुई है क्योंकि उसने “कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान सरकार की अक्षमता की सही तस्वीर देश के सामने रखी थी।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License