NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
जेएनयू के छात्र रहे अभिजीत बनर्जी को मिला अर्थशास्त्र का नोबेल
भारतीय अमेरिकी अभिजीत बनर्जी, फ्रांस की एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से  वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें वैश्विक गरीबी कम किए जाने के प्रयासों के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Oct 2019
Abhijit Banerjee
Image courtesy: NDTV

भारतीय अमेरिकी अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। प्रोफेसर बनर्जी के साथ एमआईटी में ही प्रोफेसर अभिजीत की पत्नी एस्थर डुफ्लो और हार्वर्ड में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल क्रेमर को भी यह सम्मान दिया गया। 21 साल बाद किसी भारतीय मूल के व्यक्ति  को अर्थशास्त्र का नोबेल मिला है। अभिजीत से पहले हार्वर्ड में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अमर्त्य सेन को 1998 में यह सम्मान दिया गया था।  

नोबेल पुरस्कार एक देश का नहीं लेकिन पूरी दुनिया का होता है। जिन्हें मिलता है उनका योगदान पूरी दुनिया को बेहतर बनाने से जुड़ जाता है। इसलिए भारतीय अमेरिकी अभिजीत बनर्जी को साल 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिलना उनके जीवन से जुड़े हर सार्थक किरदार के लिए गौरव की बात है। इनके जीवन के सार्थक किरदार में उनकी पढ़ाई के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविधालय भी एक किरदार की तौर पर जुड़ता है। इसलिए प्रोफ़ेसर बनर्जी को नोबेल मिलना सबके लिए ख़ुशी की बात हो लेकिन मौजूदा सत्ता को दुनिया की तरफ से मिला एक जवाब है कि जवाहर लाला नेहरू विश्वविधालय देशद्रोहियों का गढ़ नहीं बल्कि दुनिया को बेहतर बनाने की एक संस्था है।

अभिजीत, एस्थर और माइकल क्रेमर को वैश्विक गरीबी कम किए जाने के प्रयासों के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया। इन तीनों ने अपने इम्प्रिकल रिसर्च यानी अनुभवजनित शोधों के जरिये  यह बताया है कि गरीबी के कारण क्या है? और इन कारणों को जानकर गरीबी से लड़ने के लिए कैसी नीति बनाई जानी चाहिए ? अभिजीत ब्यूरो ऑफ द रिसर्च इन इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट के पूर्व प्रेसिडेंट हैं। वे सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के फेलो और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स-साइंसेज एंड द इकोनॉमिक्स सोसाइटी के फेलो भी रह चुके हैं। डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स के क्षेत्र में उनके द्वारा लिखी गयी 'पुअर इकोनॉमिक्स' की किताब विश्वप्रसिद्ध है।

नोबेल समिति के सोमवार को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई। इस पुरस्कार पर नोबेल समिति  का यह बयान है कि‘इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं का शोध वैश्विक स्तर पर गरीबी से लड़ने में हमारी क्षमता को बेहतर बनाता है। मात्र दो दशक में उनके नये प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। विकास अर्थशास्त्र वर्तमान में शोध का एक प्रमुख क्षेत्र है। बनर्जी संयुक्तराष्ट्र महासचिव की ‘2015 के बाद के विकासत्मक एजेंडा पर विद्वान व्यक्तियों की उच्च स्तरीय समिति’ के सदस्य भी रह चुके हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने प्रमुख चुनावी वादे "न्याय योजना' के लिए अभिजीत समेत दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों से राय ली थी। न्याय योजना के तहत हर गरीब के खाते में साल में 72 हजार रुपए डालने का वायदा किया गया था, यानि 6 हजार रुपए/महीना।

अभिजीत विनायक बनर्जी 21 फरवरी 1961 में कलकत्ता में जन्में थे। 58 वर्षीय बनर्जी ने भारत में कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में अपनी पढ़ाई की। इसके बाद 1988 में उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की।

वर्तमान में वह मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन अंतरराष्ट्रीय प्रोफेसर हैं। अभिजीत की पहली शादी एमआईटी की प्रोफेसर डॉ. अरुंधति बनर्जी से हुई थी। दोनों साथ-साथ कलकत्ता में पले-बढ़े। हालांकि, 1991 में तलाक हो गया। इसके बाद 2015 में अभिजीत ने एस्थर डुफ्लो से शादी की। अभिजीत के साथ नोबेल जीतने वाली एस्थर भी एमआईटी में प्रोफेसर हैं।

नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद डुफ्लो ने कहा- "एक महिला के लिए कामयाब होना और कामयाबी के पहचान बनाना संभव है। मुझे उम्मीद है कि इससे कई अन्य महिलाएं अच्छा काम जारी रखने के लिए और पुरुष उन्हें उचित सम्मान देने के लिए प्रेरित होंगे।"

(समाचार एजेन्सी भाषा इनपुट के साथ)

JNU
Abhijit Banerjee
Nobel prize for Economy
Global Poverty Reduction
Indian American Abhijeet Banerjee

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

जेएनयू छात्र झड़प : एबीवीपी के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

जेएनयू में फिर हिंसा: एबीवीपी पर नॉनवेज के नाम पर छात्रों और मेस कर्मचारियों पर हमले का आरोप

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

दिल्ली दंगे: जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को जमानत देने से अदालत का इनकार


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    एजाज़ अशरफ़
    एमएसपी भविष्य की अराजकता के ख़िलाफ़ बीमा है : अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह
    26 Nov 2021
    न्यूनतम समर्थन मूल्य और इसके आसपास के विवाद के बारे में आपके सभी संभावित प्रश्नों के जवाब।
  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा निकाय चुनाव: विपक्ष का सत्तारूढ़ भाजपा-आईपीएफटी पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप
    26 Nov 2021
    सीपीआई (एम), टीएमसी द्वारा कानून-व्यवस्था के उल्लंघन की शिकायत मिलने के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गृह मंत्रालय को केंद्रीय बलों की 2 अतिरिक्त कंपनियां भेजने के निर्देश के बावजूद हिंसा की…
  • Uttar Pardesh West
    तारिक अनवर
    उत्तरप्रदेश: मेंथे की खेती में अब पैसे नहीं, किसानों का सरकार पर अनदेखी का आरोप  
    26 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश में मेंथा की खेती ने अपना आकर्षण इसलिए खो दिया है, क्योंकि किसान स्थिर मूल्य, एमएसपी और सरकारी समर्थन के बिना ही संघर्ष कर रहे हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 10,549 नए मामले, 488 मरीज़ों की मौत
    26 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 45 लाख 55 हज़ार 431 हो गयी है।
  • women and children are suffering from anemia
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    NFHS-5 : तक़रीबन 50 फ़ीसदी औरतें और बच्चे ख़ून की कमी की बीमारी से जूझ रहे हैं!
    26 Nov 2021
    सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 78% महिलाओं का बैंक खाता है तो 50% महिलाएं ख़ून की कमी से जूझ रही हैं। साल भर काम और काम का नगद मेहनताना महज़ 23 प्रतिशत महिलाओं को मिल रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License