NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू: प्रशासन ने एकबार फिर दी आंशिक राहत, छात्रों ने कहा यह सब नाटक है
छात्रों का कहना है कि आंशिक नहीं बढ़ी हुई फीस की संपूर्ण वापसी हो। जेएनयू शिक्षक संघ ने भी इसका समर्थन किया है। इसी के साथ जेएनयूएसयू  ने बुधवार, 27 नवंबर को सस्ती और सुलभ शिक्षा के लिए होने वाले देशव्यापी विरोध दिवस  में सबसे शामिल होने की अपील की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Nov 2019
JNU

जेएनयू प्रशासन ने एकबार फिर छात्रों को हॉस्टल में हुई फीस वृद्धि में आंशिक राहत देने की बात कही है, लेकिन छात्रों ने इसे मानने से साफ इंकार किया है। छात्रों का कहना है कि आंशिक नहीं बढ़ी हुई फीस की संपूर्ण वापसी हो। फीस वृद्धि की आंशिक वापसी का फ़ैसला जेएनयू द्वार गठित एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई  सिफारिश के आधार पर किया गया है।

यह समिति रविवार को गठित की गई थी।  इस समिति  ने छात्रो से भी सुझाव मांगे थे। इसके लिए उन्होंने छात्रों को कुल '6 घंटे' का समय दिया था। इसके बाद सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यी उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट से पहले ही सोमवार को देर शाम सर्विस और यूटिलिटी चार्ज में 50% की कमी करने और गरीबी रेखा से नीचे  (बीपीएल) परिवार के छात्रों के लिए 75% की कमी करने का फैसला किया है।

समिति की सिफारिश के मुताबिक सभी छात्रों के लिए सर्विस और यूटिलिटी फीस  प्रति माह 2,000 रुपये से 1,000 रुपये प्रति माह और बीपीएल परिवारों के  छात्रों से प्रति माह 2,000 रुपये के स्थान पर 500 रुपये लिए जाएंगे।
 
एक बात स्पष्ट है कि यह रिपोर्ट सरकार द्वार गठित उच्च स्तरीय कमेटी की नहीं बल्कि जेएनयू द्वारा गठित एक अन्य समिति की है।  सरकार द्वार गठित समिति की रिपोर्ट जल्द ही समाने आने की उम्मीद है।
 
सोमवार को जेएनयू प्रशासन द्वारा गठित समिति ने जो सिफारिश दी है। उसको लेकर जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा कि यह नाटक से ज्यादा कुछ नहीं है,यह समिति वैध नहीं है। क्योंकि इसमें छात्रों की कोई राय नहीं हैं।  उन्होंने कहा कि हमें आंशिक नहीं संपूर्ण वापसी चाहिए हम उसी के लिए संघर्ष कर रहे है न कि आंशिक वापसी के लिए।

पूरे मामले पर शिक्षक संघ का क्या कहना है?

इस पूरे मामले पर जेएनयू शिक्षक संघ ने भी बयान जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी हैं। शिक्षक संघ भी नए बदलावों से असंतुष्ट है और पूर्ण वापसी की मांग की है।

जेएनयूटीए ने अपने बयान में 'इस आंशिक वृद्धि वापसी को महत्वहीन कहा और कहा की इस कमी के बाद भी नई फीस 1500 प्रतिमाह अधिक होगी'। आगे उन्होंने कहा कि यूटिलिटी और सर्विस चार्ज के नाम पर जो फीस वृद्धि की जा रही है वो स्व-वित्तपोषण मॉडल (सेल्फ फाइनेंसिंग मॉडल) की ओर एक कदम है, जहाँ  विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारियों का बोझ छात्रों पर डाल रहा है।  

कुलपति पर हमला बोलते हुए शिक्षक संघ ने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से से वो  अपनी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने के कोशिश कर रहे हैं। परन्तु इस कदम ने एकबार फिर स्थापित कर दिया कि वो  जेएनयू के कुलपति के रूप में अपनी  जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।  

उन्होंने छात्रों के संघर्ष को लेकर कहा कि यह संघर्ष विशेष रूप से एक समावेशी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के रूप में जेएनयू के चरित्र को बचाने के लिए है।  जेएनयूटीए ने कहा कि संघर्ष किसी भी तरह से खत्म नहीं हुआ है। जेएनयूटीए ने अपनी स्थिति को दोहराया कि हॉस्टल शुल्क में संशोधन पूरी तरह से वापस लिया जाना चाहिए और हॉस्टल मैनुअल में किसी भी बदलाव को सभी छात्र प्रतिनिधियों की पूर्ण भागीदारी के साथ वैधानिक निकायों में उचित विचार-विमर्श और चर्चा के बाद ही माना जाना चाहिए।

देशव्यापी  विरोध दिवस  

जेएनयूएसयू  ने देशभर के छात्रों और अकादमिक समुदाय के सदस्यों  से  27 नवंबर, बुधवार को सस्ती और सुलभ शिक्षा  के लिए देशव्यापी विरोध दिवस  में शमिल होने की अपील की है।  

जैसा कि आप जानते हैं कि जेएनयू के छात्र  लगातार जेएनयू प्रशासन द्वारा पेश किए गए एक प्रतिगामी हॉस्टल मैनुअल और बड़े पैमाने पर फीस वृद्धि के खिलाफ विश्वविद्यालय के भीतर और बाहर दोनों जगह लगातार आंदोलन कर रहे हैं, जो 28 अक्टूबर को छात्र समुदाय पर बिना किसी परामर्श के अवैध रूप से पारित किया गया था।

29 अक्टूबर के बाद से, कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार चल रहा है। नए हॉस्टल मैनुअल और फीस वृद्धि में प्रस्तावित बदलावों को अगर पूरी तरह मान लिया जाता तो जेएनयू भारत के सबसे महंगे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक बन जाता। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि  छात्रावासों में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / पीडब्ल्यूडी को आरक्षण की जो व्यवस्था है उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। जिससे सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाले छात्रों के लिए शिक्षा के द्वार बंद हो जाएंगे।

छात्र संघ ने कहा कि मीडिया और वर्तमान सरकार के पिछलगू संगठनों द्वारा प्रेरित जेएनयू  विरोधी अभियान के बावजूद, हमें देश भर में छात्रों और आम नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। जो प्रत्येक दिन अपने स्वयं का संघर्ष भी कर रहे हैं। हमें महसूस होता है कि यह आंदोलन केवल जेएनयू तक ही सीमित नहीं है। यह भारत में सार्वजनिक शिक्षा पर सबसे महत्वपूर्ण संघर्ष है, जो प्रत्येक छात्र या अध्ययन के इच्छुक व्यक्तियों को प्रभावित करता है। दो रास्ते हमारे सामने हैं, एक, निजीकरण का रास्ता ,जो सबसे गरीब और हाशिए के लोगो को शिक्षा से बाहर करता है। दूसरा, यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक मार्ग कि सबको अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले।

उन्होंने कहा कि हमें एक न्यू इंडिया बनाने के लिए चुनना होगा  जहाँ इस देश के मेहनतकश लोगों के बच्चे, इस देश के हाशिए पर रहने वाले वर्गों से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालयों में सुलभ और सस्ती शिक्षा का अधिकार मिले। शिक्षा का निजीकरण आज भारत में शिक्षा की गंभीर सच्चाई है। ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, फाइनेंशियल ऑटोनॉमी और HEFA लोन जैसी नीतियों ने फंड कटौती और फीस बढ़ोतरी को सभी विश्वविद्यालयों में आदर्श बना दिया है ।  इन सबके खिलाफ हम लड़ेंगे।

जेएनयू छात्र संघ की इस अपील को जेएनयू शिक्षक संघ ने भी समर्थन दिया हैं। जेएनयू के समर्थन में और ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के खिलाफ आइसा,एसएफआई, छात्र आरजेडी,एनएसयूआई सहित तमाम छात्र संगठनो ने भी 27 नवंबर को सड़कों पर उतरने का फ़ैसला किया है।

JNU
JNU Administration
JNU Student Protest
Fee Hike
Partial rollback
Demands no fee hike
JNUSU
JNU Teachers Association

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

प्रत्यक्ष कक्षाओं की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का रोष प्रदर्शन, जेएनयू, डीयू और जामिया करेंगे  बैठक में जल्द निर्णय

दिल्ली : विश्वविद्यालयों को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में  लिया

2020 : जेएनयू हिंसा, दंगों, सीएए-एनआरसी और किसान आंदोलन पर पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में!

"क्या ख़ता है मेरी?" उमर ख़ालिद का गिरफ़्तारी से ठीक पहले का वीडियो


बाकी खबरें

  • Mannu Bhandari
    भाषा
    प्रख्यात लेखिका मन्नू भंडारी का निधन
    15 Nov 2021
    ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसे प्रसिद्ध उपन्यासों की रचनाकार मन्नू भंडारी पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं।
  • air pollution
    भाषा
    वायु प्रदूषण को काबू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को आपात बैठक करने का निर्देश
    15 Nov 2021
    प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब और दिल्ली के संबंधित सचिवों को अदालत की तरफ से बनाई गई समिति के समक्ष अपने प्रतिवेदन देने के लिए बैठक में भाग लेने का…
  • ALTAF
    शिवम चतुर्वेदी
    कासगंज: क्या अल्ताफ़ पर लड़की भगाने का आरोप झूठा था? 
    15 Nov 2021
    लड़की के पिता पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटी को कहीं भेजकर, अल्ताफ़ के ऊपर लड़की भगाने का आरोप मढ़ दिया।
  • Annapurna
    विजय विनीत
    स्पेशल रिपोर्टः बनारस में अन्नपूर्णा की खंडित मूर्ति की ब्रांडिंग, काशी विश्वनाथ के भक्त आहत
    15 Nov 2021
    बनारस में अन्नपूर्णा की खंडित मूर्ति स्थापित करने के मंसूबों को देखें तो साफ पता चलता है कि इसे स्थापित करने और कराने वाले लोग हिन्दू समाज के लोगों के सैंटिमेंट को भुनाने का मकसद रखते हैं।
  • salman khurshid book
    अनिल जैन
    हिंदुत्व की तुलना बोको हरम और ISIS से न करें तो फिर किससे करें?
    15 Nov 2021
    सलमान खुर्शीद की किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने विवाद खड़ा कर दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License