NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू छात्र आंदोलन : पुलिस ने स्ट्रीट लाइट्स बंद कर छात्रों को भगाया, कई छात्र गंभीर रूप से घायल
पुलिस ने स्ट्रीट लाइट बंद कर के छात्रों को पीछे की ओर खदेड़ना शुरू कर दिया है। इसके अलावा पुलिस छात्रसंघ के नेताओं को कड़ी सुरक्षा के बीच मांग पत्र के साथ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ले कर गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Nov 2019
JNU

दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) के छात्र जो फीस वृद्धि के खिलाफ पिछले 22 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं , उन्होंने 18 नम्बर को संसद मार्च का ऐलान किया था। उसीके तहत छात्रों ने  सोमवार सुबह  संसद मार्च शुरू हुआ और  शाम को सफदरगंज के इलाके के पास पुलिस ने रोक लिया । देर शाम होने के बाद भी छात्र वही डटे रहे।

उन्होंने मांग रखी थी कि वे तब तक नहीं हटेंगे जब तक जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष समेत सभी नेताओ को जिन्हे पुलिस हिरासत से छोड़ा नहीं जाता है। इसके साथ ही पुलिस लाठी चार्च करने के लिए माफ़ी मांगे लेकिन इस बिच पुलिस ने इलाके की स्ट्रीट लाइट बंद करते हुए छात्रों को पीछे की ओर खदेड़ना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने छात्रसंघ नेताओ को कड़ी सुरक्षा के बीच कुछ छात्र मांग पत्र के साथ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ले गए।  

प्रदर्षनकारी छात्रों ने कहा कि पुलिस ने बड़ी ही छल से हम छात्रों पर हमला किया, हम कोई अपराधी नहीं हम अपने शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ रहे है लेकिन वो हमे लाठियां दे रहे है।

पुलिस के इस लाठी चार्च में विकलांग और महिला छात्रों को घसीटा गया और उन्हें बुरी तरह से पिटा गया हैं। नेत्रहीन छात्र शशिभूषण समद  जो अभी जेएनयू के काउंसलर भी है। छात्रों के मुताबिक उनके छाती पर पुलिस ने अपने बूट से मार जिससे उनकी हालत गंभीर है और अभी उनका एम्स में इलाज़ चल रहा है।

1_1.PNG

आपको बात दे इससे पहले सुबह फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जेएनयू के  छात्र संसद मार्च कर शुरू किया। इनकी संख्या हजारों में थी इस बिच पुलिस ने छात्रों का रास्ता रोकने की कोशिश की जहाँ छात्रों की पुलिस से झड़प भी हुई जिसमें कई छात्र घायल हो गए। जेएनयू गेट पर लगाए गए तीन बैरिकेड को छात्रों ने तोड़ दिया, इसके बाद करीब दो घंटे के संघर्ष के बाद छात्रों ने बेर सराय के बैरिकेड को भी तोड़ दिया।

इसके बाद छात्रों का मार्च भीकाजी कामा प्लेस फ्लाईओवर तक पहुंचा। छात्र संसद की ओर बढ़ रहे थे तभी पुलिस ने  छात्रों को सफदरजंग टॉम्ब के पास रोक जहाँ पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्च और पत्रकारों के साथ बदसलूकी भी की ,इस दौरन कई पत्रकारों के साथ धक्का मुक्की भी हुई। इसमें न्यूज़क्लिक के पत्रकार वी अरुण को गंभीर  चोट आई है। उन्होंने बताय कि  "पुलिस का व्यवहार बहुत की बुरा था ,मैने अपना परिचय पत्र दिखाया उसके बाद भी उन्होंने मेरे सर पर डंडे से मारा है। "

IMG-20191118-WA0029.jpg

आज के इस विरोध के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव के साथ बैठक के लिए गए हैं।

दिल्ली मेट्रो ने उद्योग चौक, पटेल चौक पर प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए थे। अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किए गए ट्वीट में, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने जेएनयू छात्रों के विरोध के बीच पुलिस से चर्चा के बाद येलो लाइन स्टेशनों को बंद करने का निर्णय लिया।

आज का पूरा घटनाक्रम

सोमवार को  प्रदर्शन के दौरन कम से कम 100 जेएनयू छात्रों को सोमवर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। जब से वे रिहा नहीं किए गए हैं।

जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष महासचिव सहित कई अन्य लोगो को गिरफ़्तार किया। जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष्य अइशी घोष ने कहा कि पुलिस छात्रों को हिरासत में नहीं ले रही है बल्कि उन्हें एक गुण्डे की तरह मार रही है। महिलाओ के साथ बदसलूकी की गई है।महिला छात्रों को पुरुष पुलिसकर्मियों ने पकड़ा ,इस तरह कई महिला छात्रों को पुलिस ने सड़क पर घसीटा जो पूरी तरह गलत हैं।

जेएनयू छात्रसंघ पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने संसद भवन की तरफ जा रहे शांतिपूर्ण मार्च को रोक दिया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, समिति गठित कर छात्रों को मूर्ख बना रहा है। जब तक बातचीत हो रही है तब तक के लिए समिति शुल्क वृद्धि को खत्म क्यों नही कर देती है? हम लोग शुल्क वृद्धि को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।’

उन्होंने और सैकड़ों अन्य लोगों ने संसद में मार्च निकालकर नारेबाजी की और नारे लगाए और पोस्टर और तख्तियां लिए हुए थे। जिनपर सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। छात्रसंघ नेताओ  ने कहा कि  आज का मार्च एक "सांसदों से अपील करने का तरीका था जो संसद के अंदर हमारी ओर से लड़ने के लिए हैं "।

एक तरफ जहाँ छात्र संसदकूच को तैयार थे वही इसके खिलाफ पुलिस अधिकारी भी पूरी तरह तैयार थे।उन्होंने संसद भवन के बाहर और जेएनयू कैंपस के बाहर, और दक्षिण दिल्ली के सफदरजंग मकबरे के पास बैरिकेड्स लगा दिए, ताकि उन्हें आगे बढ़ाने से रोका जा सके। आज संसद ने आज शीतकालीन सत्र का पहला दिन शुरू किया ।

छात्रो को भी समझ आ गया था की आज वो संसद तक नहीं पहुँच पाएंगे लेकिन वो जितना आगे बढ़ सकते है वहां तक जरुर जाएंगे। क्योंकि यह मार्च सरकार को संदेश देने के लिए है की अभी भी समय है बढ़ी फीस को वापस ले लें नहीं तो यह अंदोलन रुकने वाला नहीं है।  

छात्र फीस वृद्धि का विरोध कर रहे हैं जो हाल ही में जारी मसौदा हॉस्टल मैनुअल के बाद समाने आया था। पिछले हफ्ते, विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दिन सैकड़ों  पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्च और पानी की बौछड़ की थी।

विश्वविद्यालय के छात्र छात्रावास नियमावली के खिलाफ पिछले तीन सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस नियमावली में छात्रावास के शुल्क में वृद्धि, ड्रेस कोड और आने-जाने का समय तय करने के नियम वाले प्रावधान हैं। इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने तीन सदस्यीय एक समिति गठित की थी जो विश्वविद्यालय में सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने के तरीकों की सिफारिश करेगी।

विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत ने कहा, ‘समिति गठित करने के बारे में मंत्रालय ने छात्रसंघ को कोई सूचना नहीं दी। प्रशासनिक अधिकारी और समिति को इस मुद्दे को सुलझाने के लिए निर्वाचित छात्रसंघ से बात करनी चाहिए।’ 

छात्रों ने बैनर और तख्तियां भी ले रखी हैं जिनमें ‘फीस वृद्धि वापस लो’, ‘ सभी के लिए छात्रावास सुनिश्चित करो’ और ‘सरकारी शिक्षा को बचाओ’ जैसे नारे लिखे हैं।

वहीं, एक अन्य छात्रा प्रियंका ने कहा, ‘शुल्क वृद्धि को आंशिक तौर पर वापस लेकर हमें लॉलीपॉप थमाया जा रहा है। मैं अपने परिवार में पहली ऐसी लड़की हूं जो विश्वविद्यालय पहुंची हूं। मेरी तरह कई अन्य हैं, शिक्षा कुछ धनी लोगों का ही अधिकार नहीं है।’

JNU
JNUSU
JNU Fee Hike
JNUTA
SFI
AISA
DSF
AISF
Aishe Ghosh
Police lathicharge on students
DMRC
Student Protests

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License