NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है
जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मंगलवार को वे उप कुलपति से उनके कार्यालय में नहीं मिल सके। यह लोग जेएनयू में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
रवि कौशल
13 Apr 2022
Jnu

नई दिल्ली: जेएनयू प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए यूनिवर्सिटी के छात्र प्रतिनिधियों ने मंगलवार को कहा कि हॉस्टर में खाने को लेकर हिंसा करने वाले "अपराधियों पर मुक़दमा करने के लिए" यूनिवर्सिटी अधिकारी बहुत ज़्यादा गंभीर नहीं हैं। रविवार को हुए इस हिंसा में यूनिवर्सिटी के कई छात्र घायल हो गए थे।

जैसा बताया गया, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पदाधिकारी, मंगलवार को उपकुलपति से उनके नहीं मिल सके। छात्रों ने कहा कि वे हिंसा की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने, जेएनयू के वक्तव्य को वापस लेने जिसमें एकतरफा विमर्श को गढ़ने की कोशिश की गई थी और आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा कैंपस में की जाने वाली राजनीतिक हिंसा को खत्म करने की मांग के साथ इकट्ठा हुए हैं। 

छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि "जेएनयू प्रशासन की कार्रवाई या तो छात्र समुदाय की अपेक्षा से कमतर रही है या इसकी प्रवृत्ति पक्षपात भरी रही है।

जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आएशी घोष ने कहा कि कावेरी हॉस्टल में हुई हिंसा की शुरुआत हॉस्टल मेस में एक छात्र समूह द्वारा मनमाफ़िक ढंग से मांसाहारी खाने पर प्रतिबंध की मांग के साथ हुई थी। उन्होंने कहा, "संबंधित हॉस्टल समिति और मेस समिति के सदस्यों द्वारा भी इस चीज की पुष्टि की गई है। लेकिन यही एबीवीपी से संबंधित लोग जिन्होंने मांग उठाई, हिंसात्मक ढंग से मेस का काम रोका, उन्होंने हॉस्टल परिसर में हवन में बाधा पहुंचाने का विमर्श फैलाया। जबकि इस दावे का ना तो हॉस्टल और ना ही मेस समिति ने समर्थन किया है। 

घोष ने कहा कि एबीवीपी ने अपने प्रेस वक्तव्य और मीडिया में दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि पूजा शाम पांच बजे शुरू हो गई थी और उसी वक़्त इफ़्तार भी जारी थी। यह तथ्यात्मक तौर पर गलत है, क्योंकि इफ़्तार 5 बजे नहीं, बल्कि 6 बजकर 45 मिनट पर हुई थी। इस दौरान दूसरे एबीवीपी सदस्यों ने मीडिया के सामने यह भी माना है कि विवाद हॉस्टल में मांसाहारी खाना बनाने को लेकर हुआ, ना कि पूजा को लेकर विवाद हुआ था, क्योंकि पूजा और हवन बिना किसी बाधा के चलते रहे। इस तरह एबीवीपी के कई झूठों का खुलासा हो चुका है।

जेएनयूएसयू की अध्यक्ष ने कहा कि हॉस्टर वार्डन की सदस्यता वाली समिति के साथ बातचीत से भी यह पुष्टि हो चुकी है कि हिंसा एबीवीपी ने भड़काई थी। उन्होंने कहा, "इन स्थितियों में यह बेहद शर्मनाक है कि जेएनयू प्रशासन ने मीडिया में 11 अप्रैल को जो वक्तव्य जारी किया है, उसमें बिना किसी जांच के एबीवीपी की बात को बढ़ावा दिया गया है। एक विमर्श का ऐसा एकतरफा समर्थन किसी यूनिवर्सिटी के प्रशासन को शोभा नहीं देता, इसलिए हम इस वक्तव्य को तुरंत वापस लिए जाने की भी मांग करते हैं।"

लेकिन यूनिवर्सिटी ने अपने वक्तव्य में कहा था कि हिंसा की शुरुआत कावेरी हॉस्टल में हो रहे एक अनुष्ठान में बाधा पहुंचाने के साथ हुई थी। लेकिन घायल छात्रों ने इस बात का मुखरता से विरोध किया है।

भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के संयोजक आदर्श कुमार ने एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, उन्होंने कहा कि छात्रों को चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय द्वारा निषप्क्ष जांच करवाए जाने और दोषियों को सजा दिलवाए जाने पर शंका है। 

उन्होंने कहा, "हम जेएनयू प्रशासन से मांग करते हैं कि मामले में या तो न्यायिक जांच करवाई जाए या एक समिति का गठन किया जाए, जिसमें एक मौजूदा या रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को अध्यक्षता दी जाए। समिति द्वारा सभी तरह की गवाहियों और सबूतों को जमा करने का आह्वान करना चाहिए और पीड़ित पक्षों से मिलना चाहिए। इसके बाद समिति को एक निश्चित समय में अपनी रिपोर्ट और सुझाव देने चाहिए।"

मामले में कार्रवाई ना होने से बेहद तनाव में नजर आ रहे आदर्श ने कहा, "यह लगातार देखा जा रहा है कि राजनीतिक मंशा पर आधारित हिंसा यूनिवर्सिटी कैंपस में अपवाद के बजाए एक नियमित घटना बनती जा रही है। यह भी देखा गया है कि कुछ छात्र, जो सभी एबीवीपी के सदस्य और पदाधिकारी हैं, उन्होंने हिंसा को भड़काने और उसमें हिस्सा लेने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, हाल में हुआ मामला भी कोई अपवाद नहीं है।

आदर्श ने कहा कि यह बात जेएनयू छात्र संघ ने कई बार पिछले उप कुलपति को बताई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। वह कहते हैं, "कैंपस को अपनी शांति बनाए रखने के लिए, जेएनयू प्रशासन को नियम-कानूनों के मुताबिक़ कार्रवाई करने और पहले उल्लेखित समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ में, मामला सुलझाने के लिए जेएनयू प्रशासन को सभी पक्षों से बातचीत करना चाहिए, जिनमें छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधि और शिक्षक समुदाय भी शामिल हों।"

मांस आपूर्तिकर्ता के स्टॉफ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि जब कावेरी हॉस्टर से मांस वापस भेजा गया, तो इसे खुदरा बेचने का अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। यह आउटलेट, यूनिवर्सिटी के अलग-अलग हॉस्टर को 260 किलोग्राम मांस की आपूर्ति करता है। नाम ना छापने की शर्त पर स्टॉफ के एक सदस्य ने बताया, "हम पिछले 25 साल से संस्थान को मांग आपूर्ति कर रहे हैं, तब मेरे चाचा यह दुकान चलाते थे।" जब हमने उनसे भविष्य में आपूर्ति को लेकर पूछा, तो उन्होंने कहा, "हम अपनी रोजी-रोटी मुर्गे का मांग बेचकर ही चला रहे हैं। अगर दूसरे हॉस्टर भी इसी प्रवृत्ति का पालन करते हैं, तो निश्चित तौर पर बिक्री प्रभावित होगी।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

JNU Administration’s Conduct Partisan, say Students After Officials Skip Meet

JNU
JNUSU
SFI
Chicken
Food Choice
Food Imposition
Ram Navami
Kaveri Hostel

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में एक व्यक्ति गिरफ़्तार, GSCASH बहाली की मांग

डीयू: कैंपस खोलने को लेकर छात्रों के अनिश्चितकालीन धरने को एक महीना पूरा

उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं

नहीं पढ़ने का अधिकार


बाकी खबरें

  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License