NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जामिया हिंसा मामला: मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से छात्र निराश, एकतरफ़ा और पक्षपाती बताया
छह पेज की इस रिपोर्ट में NHRC ने जामिया हिंसा के लिए छात्रों को ही दोषी बताया और मामूली आलोचना के साथ पुलिसिया कार्रवाई को उचित ठहराने का प्रयास किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Jun 2020
जामिया हिंसा मामला
image courtesy : The Hindu

दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर अपनी रिपोर्ट पेश की है। हिंसा के कई महीनो बाद यह रिपोर्ट जारी की गई है। जिसमे NHRC ने कहा कि है छात्र बिना परमिशन के विरोध- प्रदर्शन कर रहे थे, इसके साथ ही उनका विरोध शांतिपूर्ण नहीं था। इसके साथ ही पुलिस की लाइब्रेरी में घुसने की निंदा की गई परन्तु इसके साथ ही पुलिस के कैंपस में घुसने को लेकर कहा गया कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं था।

आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले साल दिंसबर में दिल्ली के जामिया में कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन चल रहे थे। परन्तु 15 दिंसबर को यह अंदोलन हिंसक हो गया। 15 दिसंबर की रात दिल्ली पुलिस जामिया विश्वविद्यालय में बिना अनुमति के दाखिल हुई। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने लाइब्रेरी में घुसकर तोड़फोड़ की और छात्रों को बुरी तरह से पीटा। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने लाइब्रेरी में आंसू गैस के गोले भी दागे।

छह पेज की इस रिपोर्ट में NHRC ने जामिया हिंसा के लिए छात्रों को ही दोषी बताया और मामूली आलोचना के साथ पुलिसिया कार्रवाई को उचित ठहराने का प्रयास किया है।

इस रिपोर्ट के मुतबिक़ प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद छात्र नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध कर रहे थे। इस दौरान ट्रैफिक भी प्रभावित किया गया। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में आरोप लगया कि छात्रों का 15 दिसंबर का विरोध शांतिपूर्ण नहीं था। उन्होंने सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और पुलिस अधिकारियों पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके। इस प्रकार प्रदर्शनकारियों ने संवैधानिक रूप से गारंटीकृत शांतिपूर्ण एकत्रित होने और विरोध करने के अधिकार से खुद को बाहर कर लिया था।

इसके साथ ही इस रिपोर्ट में इस हिंसा के पीछे एक बड़ी साज़िश की आशंका जताई गई। NHRC का यह भी कहना है कि जामिया में हिंसा के पीछे असली गुनहगारों और उद्देश्यों को उजागर करने की आवश्यकता है, जो छात्रों के बीच में घुसे और इस घटना को अंजाम दिया।

हालांकि NHRC की यह जाँच कैंपस में हुई पुलिस हिंसा के लिए की गई शिकायत पर की गई थी। इस रिपोर्ट में उन्होंने पुलिस द्वारा लाइब्रेरी में छात्रों को पीटने और टियर गैस के सेल मिलने पर पुलिस को गैरज़िम्मेदार बताया और कहा इसे टाला जा सकता था।

पुलिस की हल्की आलोचना के साथ ही विस्तार से बताया गया है कि कैसे इस हिंसा के लिए छात्र खुद जिम्मेदार हैं।

एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस को निर्देश के साथ ही कई सिफारिश भी की हैं। मुख्य सिफारिश इस प्रकार हैं:-

० दिल्ली सरकार, घायल छात्रों को मुआवजा प्रदान करे।

० आयोग ने दिल्ली पुलिस के आयुक्त एसएन श्रीवास्तव और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक अरुण कुमार को निर्देश दिया है कि वो सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन पुलिसकर्मियों की पहचान करें, जिन्होंने यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।

० दिल्ली पुलिस और आरएएफ के शीर्ष अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए सलाह दी गई है कि सुरक्षा बलों को संवेदनशील बनाया जाए और इस तरह के कानून और व्यवस्था से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाए।

० कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी के अंदर पुलिस की कार्रवाई की प्रशासनिक जांच में तेजी लाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

० पुलिस आयुक्त, दिल्ली, को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि अपराध शाखा की एसआईटी, दिल्ली पुलिस सभी संबंधित मामलों की जांच मेरिट पर और समयबद्ध तरीके से करे। हिंसक विरोध के पीछे असली अपराधियों की पहचान और गिरफ्तार करे।

० जामिया मिलिया इस्लामिया के पुस्तकालय के अंदर पुलिस द्वारा 15.12.2019 को कथित अत्याचारों की प्रशासन की जांच में तेजी लाने के लिए लाने के लिए कहा गया है।

० पुलिस आयुक्त, दिल्ली और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सुधारने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत खुफियातंत्र स्थापित करने के लिए कहा गया है।

० जामिया विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों को छात्र बिरादरी के साथ बेहतर संचार का एक तंत्र स्थापित करने की सिफारिश करता है ताकि वे बाहरी लोगों और स्थानीय गुंडों या राजनीतिज्ञों से प्रभावित न हों।

छात्र इस रिपोर्ट से निराश

जामिया के छात्र और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करने वाले छात्र महफूज़ आलम ने कहा कि यह रिपोर्ट निराशजनक है। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया। यही नहीं लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों को भी बुरी तरह से पीटा और टियर गैस से हमला किया। कई छात्रों को मार-मार कर अधमरा कर दिया। फिर भी यह रिपोर्ट छात्रों को ही दोषी बता रही है।

कैंपेन अगेंस्ट विच-हंट ऑफ़ एंटी-सीएए एक्टविस्ट ने भी NHRC की रिपोर्ट को खारिज किया। सोशल मीडिया पर उनके द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि " यह एनएचआरसी नहीं बोल रहा था बल्कि गृह मंत्रालय की ज़बान लगती है।”

CAA (1).PNG

छात्र संगठन एसएफआई ने भी इस रिपोर्ट की आलोचना की और इसे पक्षपातपूर्ण बताया। एसएफआई ने कहा कि वो इस रिपोर्ट के खिलाफ जामिया के छात्रों के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। एनएचआरसी ने जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस द्वारा 15 दिसंबर को किए गए हमलों के बारे में जो रिपोर्ट पेश की है, वह बिल्कुल पक्षपाती है।

रिपोर्ट को एक और साज़िश बताते हुए कहा कि जब सारे सबूत और गवाह साफ दिखा रहे हैं कि किस तरह से पुलिस द्वारा हिंसा की गई है, उसके बाद भी हमलों के लिए यह रिपोर्ट छात्रों को दोषी ठहरा रही है।

मानवाधिकार आयोग की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखे

Jamia Milia Islamia
Jamia Violence
Anti CAA
delhi police
NHRC
Human Rights Commission report

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला

नफ़रती भाषण: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को ‘बेहतर हलफ़नामा’ दाख़िल करने का दिया निर्देश


बाकी खबरें

  • cartoon
    सोनिया यादव
    यूपी चुनाव : क्या ग़ैर यादव ओबीसी वोट इस बार करेंगे बड़ा उलटफेर?
    14 Jan 2022
    2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर में कुर्मी और कोइरी के साथ-साथ नॉन डॉमिनेंट ओबीसी ने भी भारी संख्या योगदान दिया था। हालांकि इस बार समाजवादी पार्टी की ग़ैर यादव ओबीसी वोट…
  • North Bengal
    डॉ सुखबिलास बर्मा
    उत्तर बंगाल के राजबंशियों पर खेली गई गंदी राजनीति
    14 Jan 2022
    भाजपा और टीएमसी दोनों ही राजबंशी के उच्च मध्यम वर्ग के एक तबके की भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अक्सर राजनीतिक नेताओं द्वारा निभाए गए झांसों में विश्वास करते हैं। 
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफरती धर्म संसद पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
    14 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं कि जिस तरह धर्म संसद में नफरती बयान दिए गए और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया, सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साध रखी है ?
  • Michael Lobo Resignation
    राज कुमार
    गोवा चुनावः डेढ़ महीने में एक चौथाई विधायकों का इस्तीफ़ा
    14 Jan 2022
    गोवा में दिसंबर 2021 से लेकर अब तक 10 विधायक इस्तीफा देकर दल बदल कर चुके हैं। इस समय गोवा में क्या चुनावी हलचल है? क्या घटनाक्रम चल रहा है? आइये! नज़र डालते हैं।
  • south africa
    पवन कुलकर्णी
    श्रमिक संघों ने दक्षिण अफ्रीकी डेयरी दिग्गज पर पेट्रोल बम हमले करवाने और धमकाने के आरोप लगाये
    14 Jan 2022
    इन धमकियों और खतरों के बीच, क्लोवर में श्रमिकों की कार्यवाई को कर्मचारी एकजुटता के साथ-साथ नागरिक समाज की ओर से इसके बहिष्कार अभियान को मिलते बढ़ते समर्थन से और अधिक मजबूती प्राप्त हुई है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License