NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड: हेमंत सरकार ने आदिवासी समूहों की मानी मांग, केंद्र के ‘ड्रोन सर्वे’ कार्यक्रम पर लगाईं रोक
‘ड्रोन सर्वे’ और ‘ज़मीन की डिजिटल मैपिंग’ कार्यक्रम के खिलाफ आवाज़ उठा रहे सभी आदिवासी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
अनिल अंशुमन
15 Mar 2022
Jharkhand

राजधानी रांची से महज 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित खूंटी जिला, प्रदेश में आदिवासी सवालों को लेकर सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है। विगत कुछ महीनों से प्रशासन द्वारा आदिवासी गावों में चोरी छुपे व जबरन कराये जा रहे ‘ड्रोन सर्वे और ज़मीन की डिजिटल मैपिंग सर्वे’ के हो रहे विरोध से एक बार फिर अशांत सा हो चला है। विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा पर रोक लगाए जाने की घोषणा के बाद स्थिति संभलने के आसार बनने लगे हैं।

सनद रहे कि अतीत में यही जिला बिरसा मुंडा के ‘उलगुलान’ का केंद्र रहा है। पिछले रघुवर दास शासन काल में सरकार द्वारा सीएनटी एक्ट में संसोधन किये जाने के विरोध में आदिवासी समुदाय के जुझारू प्रतिवादों के कारण चर्चा में आया था। उसके बाद ‘पत्थलगड़ी अभियान’ विवाद प्रकरण में भी यह जिला चर्चाओं में रहा। 

उक्त प्रकरण में रघुवर दास सरकार ने भीषण राज्य दमन चलाकर अनेकों आदिवासी गावों के सैकड़ों लोगों पर थोक के भाव में ‘राजद्रोह’ जैसे संगीन मुक़दमे लाद दिया था। पिछले कुछ महीनों में ‘ड्रोन सर्वे’ विरोध मामले को लाकर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति बनने लगी है। गाँव-गाँव आदिवासी सामाजिक संगठनों की सभाओं से ड्रोन सर्वे के बहिष्कार को लेकर हो रही घोषणाओं को प्रशासन अपने साथ टकराव मान रहा है।    

विधान सभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान 11 मार्च को भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने तारांकित प्रश्न के रूप में ‘ड्रोन सर्वे विरोध प्रकरण’ को सदन में उठाते हुए कहा कि- खूंटी जिला जो सीएनटी एक्ट व पांचवी अनुसूची लागू क्षेत्र है, वहाँ ग्राम सभा की अनुमति के बिना प्रशासन द्वारा जबरन कराये जा रहे ‘ड्रोन सर्वे तथा ज़मीन के डिजिटल मैपिंग सर्वे’ को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय में काफी असंतोष और आशंकाएं हैं। जिसे लेकर मौजूदा बजट सत्र के दौरान क्षेत्र के आदिवासियों ने विधान सभा के समक्ष प्रदर्शन भी किया है। जिले के सभी आदिवासी संगठनों तथा इस समुदाय के लोगों को पूरी आशंका है कि सीएनटी एक्ट के रहने के बावजूद यहाँ की काफी आदिवासी ज़मीनों को प्रशासनिक सांठ गाँठ कर अवैध तरीके से हड़पा जा चुका है, ड्रोन सर्वे की आड़ में कहीं फिर से उनकी ज़मीनों को छीनने की साजिश तो नहीं की जा रही है? 

जवाब में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ‘ड्रोन सर्वे’ कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में  ‘स्वामित्व/प्रोपर्टी कार्ड योजना’ के तहत चलाया जा रहा है। जिसके पायलट प्रोजेक्ट के तहत खूंटी जिला के भी गावों में ड्रोन सर्वे कराया गया है। जो कई गावों में पूरा हो चुका है और कई गांवों में अभी बाकी है। इस सर्वे के खिलाफ क्षेत्र के स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों में काफी विरोध और संशय है। जिसकी जानकारी हमें भी मिली है। इसलिए लोगों के विरोध और संशय को देखते हुए झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार की उक्त स्वामित्व योजना पर झारखंड में फिलहाल रोक दी है। बाद में स्थिति की समीक्षा कर आगे की कार्यवाही की जायेगी। 

‘ड्रोन सर्वे’ और ‘ज़मीन की डिजिटल मैपिंग’ कार्यक्रम के खिलाफ आवाज़ उठा रहे सभी आदिवासी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

वहीँ, ‘ड्रोन सर्वे’ विरोध के मुद्दे को लेकर पिछले कई महीनों से खूंटी जिला के गाँव-गाँव में लोगों को जागरूक बनाने में दिन रात एक कर सक्रीय रहने वाली आदिवासी आन्दोलनकारी दयामनी बारला जी ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। साथ ही, अपने संगठन आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, मुंडारी खुंटकट्टी परिषद्, आदिवासी एकता मंच, संयुक्त पड़हा समिति एवं सभी ग्राम सभाओं की ओर से माले विधायक विनोद सिंह को भी विशेष धन्यवाद दिया है। सोशल मिडिया मंच से दिए बयान में यह भी कहा है कि-राज्य के बेहद संवेदनशील सवाल को गंभीरता से लेकर ‘ड्रोन सर्वे और ज़मीन की डिजिटल मैपिंग सर्वे पर रोक लगाने के आदेश के लिए खूंटी की जनता और पूरे राज्य के आदिवासी समुदाय की ओर से विशेष तौर पर धन्यवाद है। साथ ही यह भी उम्मीद जताई है कि राज्य के सभी लोग झारखंड को बचाने और उसकी बेहतरी के लिए आगे भी जागरूक भूमिका निभाएंगे। 

ड्रोन सर्वे विरोध मामले में फैक्ट फाइंडिंग की ज़मीनी रिपोर्ट व मांगपत्र राज्य सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री को सौंपकर खूंटी क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के लोगों की मांगों का समर्थन का रहे ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम की झारखण्ड इकाई ने भी ‘जन दबाव’ से हेमंत सोरेन सरकार के फैसले की सराहना की है। 

इस मुद्दे को लेकर आदिवासी अधिकार संघर्ष मोर्चा समेत कई अन्य सामाजिक जन संगठनों ने भी मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया है।

आदिवासी आंदोलनकारी दयामनी बारला जी द्वारा राज्य के जागरूक लोगों द्वारा झारखंड के आदिवासी समुदायों की बेहतरी के लिए राज्य के जागरूक लोगों से अपील करना काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि दो वर्ष पूर्व ही जब राज्य की तत्कालीन भाजपा-रघुवर दास की सरकार ने तो जल जंगल ज़मीन व प्राकृतिक संसाधनों की बेलगाम लूट के खिलाफआवाज़ उठाने वाले आदिवासी समुदाय के खिलाफ मानो अघोषित युद्ध सा छेड़ रखा था। इस बार आदिवासी ज़मीनों के मुद्दे को लेकर हेमंत सोरेन सरकार का रवैया भी बहुत कुछ नया नहीं दिखा है। इसीलिए इस सरकार के खिलाफ भी अब सड़कों पर आवाजें उठाने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है।

गौर करने लायक एक अहम् पहलू यह भी है कि राज्य गठन के समय से लेकर अभी तक में ये पहला मौक़ा है जब राज्य की विधान सभा के साथ साथ यहाँ की सरकार ने भी आदिवासी समुदाय के लोगों के सवालों पर विशेष संज्ञान लिया है।  मुख्यमंत्री ने भी मामले की गंभीरता को थोड़ा समझने का प्रयास किया है। अन्यथा इसके पहले का आलम यही था कि जिस किसी ने भी राज्य के जल जंगल ज़मीन व खनिज तथा आदिवासी अधिकारों का मामला उठाया तो सरकार-प्रशासन ने एक स्वर से उसे ‘विकास विरोधी, माओवादी’ करार दे दिया है। 

ये भी पढ़ें: झारखंड: खूंटी के आदिवासी गांवों में ‘ड्रोन सर्वे’ को लेकर विरोध, प्रशासन के रवैये से तनाव

Jharkhand
Drone survey
Protest over drone survey
adiwasi
AIPF
Hemant Soren

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला


बाकी खबरें

  • voting
    स्पंदन प्रत्युष
    विधानसभा चुनाव: एक ख़ास विचारधारा के ‘मानसिक कब्ज़े’ की पुष्टि करते परिणाम 
    13 Mar 2022
    पंजाब में सत्ता विरोधी लहर ने जहां कांग्रेस सरकार को तहस-नहस कर दिया, वहीं उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस पहेली का उत्तर मतदाताओं के दिमाग पर असर डालने वाली पार्टी की विचारधारा की भूमिका में…
  • सोनिया यादव
    विधानसभा चुनाव 2022: पहली बार चुनावी मैदान से विधानसभा का सफ़र तय करने वाली महिलाएं
    13 Mar 2022
    महिला सशक्तिकरण के नारों और वादों से इतर महिलाओं को वास्तव में सशक्त करने के लिए राजनीति में महिलाओं को अधिक भागीदार बनाना होगा। तभी उनके मुद्दे सदन में जगह बना पाएंगे और चर्चा का विषय बन पाएंगे।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में हिन्दुत्व की जीत नहीं, ये नाकारा विपक्ष की हार है!
    12 Mar 2022
    देश के सबसे बड़े राज्य-यूपी में भाजपा की सत्ता में दोबारा वापसी को मीडिया और राजनीति के बड़े हिस्से में 'हिन्दुत्व' की जीत के तौर पर देखा जा रहा है. क्या यह सच है? क्या यह यूपी में विपक्ष का…
  • cpim
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति और मकान किराए के 525 करोड़ रुपए दबाए बैठी है शिवराज सरकार: माकपा
    12 Mar 2022
    माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार की ओर से 2.80 लाख अनुसूचित जाति के छात्रों के खाते में पहुंचने वाली 425 करोड़ की छात्रवृत्ति, मात्र 206 छात्रों के…
  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License