NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
झारखंड : हेमंत सरकार पर दबाव बनाने के लिए बजट सत्र के दौरान 'नागरिकता बचाओ मार्च'
सीएए और एनआरसी के खिलाफ झारखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी और नागरिक समाज प्रतिनिधियों ने 22 फरवरी को रांची में ‘पीपुल्स कन्वेन्शन’ का आयोजन किया। इस दौरान हेमंत सरकार पर दबाव बनाने के लिए बजट सत्र के दौरान नागरिकता बचाओ मार्च निकालने का निर्णय लिया गया।
अनिल अंशुमन
24 Feb 2020
Jharkhand

सीएए, एनपीआर और एनआरसी थोपे जाने के खिलाफ पूरे देश में सड़कों का प्रतिवाद निरंतर जारी है। झारखंड में भी कई स्थानों पर दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर प्रतिवाद अभियान चल रहा है। इसे वामपंथी संगठनों समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का सक्रिय समर्थन मिल रहा है।

हालांकि अब भी मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को मतिभ्रम का शिकार बनाया जा रहा है। झारखंड में भी 1 अप्रैल से एनपीआर की प्रक्रिया शुरू किए जाने की विधिवत घोषणा के मद्देनजर आदिवासी संघर्ष मोर्चा व ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम समेत कई अन्य सामाजिक जन संगठानों ने जनता को जमीनी तौर पर सक्रिय बनाने की पहल शुरू की है।

इसे लेकर 22 फरवरी को राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित संगम गार्डन बैंकवेट हॉल में आयोजित ‘पीपुल्स कन्वेन्शन’ का आयोजन किया गया। कन्वेन्शन की शुरुआत देश के संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ और राष्ट्रीय गान से की गयी। दिनभर चले इस कन्वेन्शन में वक्ताओं ने प्रदेश की वर्तमान सरकार के ढुलमुल रवैये पर चिंता जताया। उन्होंने कहा कि केरल व पश्चिम बंगाल इत्यादि प्रदेशों की भांति झारखंड में भी एनपीआर ना लागू करने की घोषणा नहीं किए जाने से व्यापक झारखंडी समाज इस सरकार पर संदेह करने लगा है।
कन्वेन्शन 3.jpg 
इस दौरान दो दर्जन से भी अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने तर्कपूर्ण विचारों और सुझावों से स्पष्ट किया कि किस तरह से देश की जनता को गुमराह बनाकर मोदी शासन एनआरपी और सीएए के बहाने चोर दरवाज़े से एनआरसी थोपने का कुचक्र कर रही है। कन्वेन्शन ने सर्वसम्मति से सीएए – एनपीआर – एनआरसी को अविलंब रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि मोदी शासन कि यह कवायद संविधान विरोधी-देश विरोधी और गरीब विरोधी होने के साथ साथ पूरे देश को फिर से उन्मादी सांप्रदायिक विभाजन की आग में झोंककर बहुरंगी भारत को धर्म विशेष राष्ट्र में पतित करने की सुनियोजित चाल है।

कन्वेन्शन से पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव के तहत ये मांग की गयी कि हेमंत सोरेन सरकार आगामी 28 फरवरी से शुरू होनेवाले विधान सभा के बजट सत्र में केरल व पश्चिम बंगाल इत्यादि गैर भाजपा सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों के अनुरूप झारखंड में भी उक्त काले क़ानूनों को नहीं लागू करने का अविलंब फैसला ले। इस मांग पर संज्ञान के लिए बजट सत्र के दौरान ही विधानसभा सत्र के समक्ष ‘नागरिकता बचाओ मार्च’ संगठित करने का भी निर्णय लिया गया। साथ ही व्यापक जन अभियान खड़ा करने हेतु प्रदेश के सभी प्रमंडलों में ज़ोनल पीपुल्स कन्वेन्शन आयोजित कर अन्य सभी छोटे बड़े स्थानीय सामाजिक जन संगठनों को सक्रिय तौर से भागीदार बनाने का कार्यभार लिया गया। जिसके प्रथम चरण का समापन अप्रैल में मोरहाबादी मैदान में विशाल जनसभा के आयोजन से किया जाना तय हुआ।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकान्त सहाय , पूर्व सांसद फुरकान अंसारी तथा भाकपा माले झारखंड राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, सीपीएम सचिव जीके बक्शी तथा सीपीआई नेता केडी सिंह के अलावा कांग्रेस व राजद पार्टियों के नेताओं ने भी कन्वेन्शन को संबोधित किया। वरिष्ठ अर्थशास्त्री व एक्टिविष्ट ज्यां द्रेज, आदिवासी बुद्धिजीवी प्रो. कर्मा उरांव, प्रो. फिरोज अहमद (पूर्व कुलपति), प्रेमचंद मुर्मू, झारखंड आंदोलनकारी बशीर अहमद, दयामनी बारला तथा फादर महेंद्र पीटर तिग्गा सहित कई अन्य वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों ने भी अपने विचार रखे।  
कन्वेन्शन 4.jpg
कन्वेन्शन में आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच, एआईपीएफ, आदिवासी जन परिषद सहित पचास से भी अधिक सामाजिक–सांस्कृतिक और आदिवासी जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने कन्वेन्शन में सक्रिय भागीदारी निभाई।  

बिहार : भाकपा माले का 25 फरवरी को विधानसभा मार्च

विगत 2 महीनों से पूरे देश की तरह बिहार में भी सीएए-एनआरसी और एनपीआरसी खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चल रहा है। आम लोग विगत 1 महीने से जगह-जगह अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर हैं। इसे लेकर भाकपा-माले ने 31 जनवरी को पटना में आयोजित राज्यस्तरीय जन एकता सम्मेलन से 25 फरवरी को एनपीआर रोकने के सवाल पर विधानसभा मार्च का आह्वान किया था। भाकपा माले के नेताओं ने दावा किया है कि एक महीने तक बिहार के गांव-गांव में इसकी तैयारी की गई है।
कन्वेन्शन 1.jpg
उनके अनुसार विधानसभा मार्च के कार्यक्रम में बिहार के हजारों दलित-गरीब और अकलियत समुदाय के लोगों की भागीदारी हो रही है। विधान सभा के सामने प्रदर्शन करके बिहार सरकार से मांग करेंगे कि एनपीआर पर तत्काल रोक लगाए और सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करे। इस प्रकार, यह विधानसभा मार्च सीएए-एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जारी आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने वाला है।

माले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 25 फरवरी को ही विधानसभा के अंदर भी सरकार को इस सवाल पर घेरने की योजना बनाई गई है। पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और हम (सेकुलर) को आमंत्रण भेज कर अपील की है कि उस दिन विपक्ष का संयुक्त कार्यस्थगन लाया जाए और एनपीआर के खिलाफ बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने का दबाव सरकार पर बनाया जाए।

Jharkhand
Hemant Soren
Hemant Sarkar
नागरिकता बचाओ मार्च
CAA
NRC
NPR
Social organizations
Aadiwasi Sangharsh Morcha
Tribal Intelligence Forum
AIPF
CPM
CPI

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार


बाकी खबरें

  • RELIGIOUS DEATH
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़
    27 Jan 2022
    कथित रूप से 'जबरन धर्मांतरण' के बाद एक किशोरी की हालिया खुदकुशी और इसके ख़िलाफ़ दक्षिणपंथी संगठनों की प्रतिक्रिया ने राज्य में धर्मांतरण विरोधी क़ानून की मांग को फिर से केंद्र में ला दिया है।
  • cb
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बीजेपी-कांग्रेस दोनों को पता है कि विकल्प तो हम दो ही हैं’
    27 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में 2000, 2007 और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। जबकि 2002 और 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस ही बारी-बारी से यहां शासन करते आ रहे…
  •  नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    27 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • सोनिया यादव
    यूपी: महिला वोटरों की ज़िंदगी कितनी बदली और इस बार उनके लिए नया क्या है?
    27 Jan 2022
    प्रदेश में महिलाओं का उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन आधी आबादी चुनाव जिताने का पूरा मददा जरूर रखती है। और शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सभी पार्टियां उन्हें लुभाने…
  • यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    27 Jan 2022
    यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License