NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
अनिल अंशुमन
28 Feb 2022
jharkhand

हेमंत सोरेन सरकार द्वारा राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति के विरोध में झारखंडी छात्र युवाओं के प्रचंड विरोध के कारण सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा। लेकिन मामला यहीं थमता नहीं दीख रहा है और अब यह राज्य में ‘स्थानीयता और नियोजन नीति’ बनाने की मांग को लेकर तीखा सियासी रंग लेता जा रहा है। जिसमें एक ओर, भाजपा-आजसू  व उसके नेता विधायक पूरी मुखरता के साथ हेमंत सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहें हैं। तो दूसरी ओर, झामुमो व इसके नेता भी पलटवार जवाब दे रहें हैं। जबकि भाकपा माले समेत सभी वामपंथी दल राज्य के मूलवासी छात्र युवाओं की हो रही हकमारी के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए ‘खतियान आधारित स्थानीय और नियोजन नीति’ बनाने की मांग कर रहें हैं।  

जिसका प्रत्यक्ष नज़ारा 25 फ़रवरी से शुरू हुए झारखण्ड विधान सभा के बजट सत्र के पहले ही दिन दीखा। एक ओर, भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ‘ भाजपा सरकार की स्थानीय नीति रद्द करो, मूलवासियों और स्थानीयों के हक में नियोजन नीति बनाओ’ की मांग लिखित पोस्टर लेकर सदन के बाहर गेट पर बैठे। वहीँ,  कुछ भाजापा विधायक भी हेमंत सरकार द्वारा विवादित क्षेत्रीय भाषा आधारित नियोजन नीति वापस लेने का विरोध करते हुए पोस्टर प्रदर्शित किये। 

विधान सभा की कार्यवाही कवर करने गए मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए माले विधायक ने कहा कि- अभी जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतारा राज्य के छात्र युवाओं का आक्रोश प्रदर्शित हो रहा है, राज्य में सही नियोजन नीति बनाने की मांग को लेकर है। जो तबतक नहीं दबने वाला है जब तक की हेमंत सरकार राज्य के मूलवासी छात्र युवाओं तथा राज्य हित में बदलाव नहीं करती है। यह एक मज़ाक ही बन गया है कि जिस सरकार को लाने में राज्य के छात्र युवाओं ने जबरदस्त भूमिका निभाई, उनके ही अधिकारों की हकमारी की जा रही है। 2016 में जब रघुवर दस की सरकार ने यहाँ के मूलवासियों की आकांक्षा विरोधी स्थानीयता नीति लायी थी तो पुरे राज्य में इसके खिलाफ एक उबाल आ गया था। उस विवादास्पद नीति से यहाँ के मूलवासियों के साथ साथ ओबीसी और एससी के खतियान आधारित जातीय आरक्षण में भी सेंधमारी की गयी थी। उस सरकार को हटाकर वर्तमान सरकार को लाकर लोगों ने सोचा था कि यह सरकार उनकी आकांक्षा को पूरा करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  इसीलिए आज जो राज्य की सड़कों पर युवाओं उबाल और आक्रोश दीखन रहा है, उसे देखे हुए हेमंत सरकार को चाहिए की ज़ल्द से ज़ल्द रघुवर दास सरकार द्वारा बनायीं गयी झारखण्ड विरोधी स्थानीयता नीति को रद्द करे। नयी नियोजन नीति का आधार राज्य की स्थानीयता को ही बनाए जैसा कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी लागू है।  

26 फ़रवरी को पार्टी अभियान में शामिल होने झारखण्ड के बोकारो थर्मल पहुंचे भाकपा माले के राष्ट्रिय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने भी प्रेस वार्ता कर कहा है कि- हेमंत सोरेन सरकार 1932 का खतियान लागू करे। जो यहाँ के मूल निवासियों की भाषा- संस्कृति की विशिष्ट पहचान का द्योतक है।  

राज्य के सभी वामपंथी दलों ने भी तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि– मसला भाषा विवाद का नहीं है बल्कि सही ‘स्थानीय व नियोजन नीति’ बनाने के साथ साथ राज्य के युवाओं को रोज़गार देने का है। वामपंथी छात्र-युवा संगठनों ने भी झारखंडी छात्र युवाओं के आन्दोलनों का समर्थन करते हुए ‘भाषा विवाद में मत उलझाओ, स्थानीयता आधारित नियोजन नीति बनाकर रोज़गार उपलब्ध कराओ’ जैसे नारों के साथ राज्यव्यापी अभियान संचालित किये हुए हैं। वहीँ , प्रदेश के  विभिन्न हिस्सों में विभिन्न झारखंडी सामाजिक जन संगठनों ने भी फिलहाल ‘ हमारी पहचान, 1932 का खतियान’ के केन्द्रीय आह्वान के साथ लगातार सड़कों पर बड़े प्रतिवाद कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखे हुए हैं।

उक्त प्रकरण में प्रदेश कांग्रेस की विरिष्ठ नेत्री एवं सत्ताधारी दल झामुमो के चर्चित पूर्व विधायक द्वारा अपनी पार्टी से इस्तीफा देकर राज्य में ’32 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति बनाने की मांग को लेकर सामाजिक मुहीम चलाना चर्चा का विषय बन गया है। इसी क्रम में प्रदेश के कई चर्चित वार्रिष्ठ आदिवासी राजनेता व झारखण्ड आन्दोलनकारी तथा वरिष्ठ आदिवासी बुद्धिजीवियों तथा आदिवासी सामाजिक जन संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में 28 फ़रवरी को राजधानी रांची में ‘मानव श्रृंखला’ का आयोजन किया गया। 

दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा वर्तमान प्रकरण के लिए हेमंत सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए लागातार विरोधी बयान जारी किये हुए हैं। 26 फ़रवरी को प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि राज्य की सरकार ने भाषा-विवाद को बढ़ाकर आपस में तनाव पैदा करने तथा सामाजिक समरसता तोड़ने का काम किया है। 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति व नियोजन नीति बनाए जाने की मांग का कड़ा विरोध करते हुए इसे समाज में समरसता तोड़ने वाला विषय कहा है। 

राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे अभी के भाजपा विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी जी का बयान लोगों को काफी विरोधाभासी लग रहा है। सन 2001 में इन्होंने अपनी सरकार द्वारा जब विवादास्पद ‘डोमिसाईल निति’ की घोषणा की थी तो पुरे राज्य में बलवा की स्थिति पैदा हो गयी थी। अनेकों जगहों पर ‘बाहरी बनाम भीतरी’ का हिंसक टकराव हुआ था जिसमें कई जानें भी गयी थी। बताया जाता है कि उसी के कारण बाबुलाल जी को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा था। आज वे ही वर्तमान भाषा-विवाद और स्थानीयता की निति लेकर जारी विवाद आन्दोलन को राज्य सरकार प्रायोजित करार दे रहें हैं। 28 फ़रवरी को सत्र के शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने स्थानीयता के मामले पर तीखे सवालों के बौछार शुरू कर दिए। जवाब में सत्ता पक्ष कि ओर से कहा गया कि अभी यह माला सरकार के विचाराधीन है। जिसपर भाजपा विधायकों ने सरकार पर गोलमटोल जवाब देने के आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। 

बहरहाल, ’खतियान आधारित स्थानीयता और नियोजन नीति’ के सवाल पर लगातार दो ध्रुवों पर सामाजिक विभाजन होने से एक चिंताजनक स्थिति बन रही है। इस पर एक व्यापक सम्यक लोकतान्त्रिक विमर्श ज़रूरी है। लेकिन उससे ज़्यादा अहम मुद्दा है कि क्या जिन आकांक्षाओं, ज़रूरतों और सपनों को लेकर सात दशकों से भी अधिक समय के आन्दोलन करने के उपरांत झारखण्ड राज्य का गठन संभव साकार हुआ, उनका क्या होगा? स्थानीयता का संवैधानिक अधिकार मांगना कैसे ‘सामाजिक समरसता’ तोड़ना है!

Jharkhand
Hemant Soren
BJP
Locality policy
Soren Government
CPI-ML

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License