NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
झारखण्ड: बिना परीक्षा फेल किये हज़ारों छात्र, सड़कों पर नाराज छात्रों का प्रदर्शन जारी
29 जुलाई को झारखण्ड अकादमिक काउंसिल (जैक) ने  इन्टरमीडियेट और उसके पहले इस वर्ष के मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट घोषित किये। इसमें लगभग 34,243 छात्र-छात्राओं को इंटर में और 17,647 को मैट्रिक में फेल घोषित कर दिया गया है। 
अनिल अंशुमन
07 Aug 2021
झारखण्ड: बिना परीक्षा फेल किये हज़ारों छात्र, सड़कों पर नाराज छात्रों का प्रदर्शन जारी

हाल ही में झारखण्ड सरकार गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त प्रकरण से प्रदेश का सियासी माहौल काफी सरगर्म रहा था। एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर किये जाने की तथाकथित साजिश की चहुंओर निंदा हुई और हेमंत सोरेन सरकार को  सभी ओर से सहानुभूति मिली।

लेकिन वहीं जब झारखण्ड अकादमिक काउंसिल और बोर्ड ने हजारों छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा लिए और उचित कारण बताये फेल घोषित कर उनके शैक्षिक भविष्य के लिए अस्थिरता पैदा कर दी है। हैरानी की बात है कि इस पर सरकार चुप बैठी है। इसकी काफी आलोचना हो रही है। 

इतना ही नहीं, 6 अगस्त को धनबाद पहुंचे सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता से अपनी गुहार लगाने गयीं छात्राओं की पीड़ा सुनने की बजाय उन पर पुलिस की लाठीचार्ज की भी तीखी आलोचना हो रही है। मासस कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व विधायक (निरसा, धनबाद) ने विरोध प्रकट करते हुए मौके पर तैनात एसडीएम् द्वारा खुद लाठी चलाने की घटना की तीखी निंदा करते हुए उनपर कारवाई करने की मांग की गयी है। सोशल मीडिया से जारी खबरों में इनौस झारखण्ड समेत कई छात्र-युवा संगठनों के साथ-साथ मासस व भाकपा माले ने भी इस निंदनीय घटना के खिलाफ लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग को लेकर आंदोलन की घोषणा कर दी है।  

29 जुलाई को झारखण्ड अकादमिक काउंसिल (जैक) ने  इन्टरमीडियेट और उसके पहले बोर्ड का इस वर्ष के मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट घोषित किये। इसमें लगभग 34,243 छात्र-छात्राओं को इंटर में और 17,647 को मैट्रिक में फेल घोषित कर दिया गया। 

कोरोना माहामरी के मद्देनज़र राज्य में हुई लॉकडाउन बंदी (स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह) के कारण अन्य कई प्रदेशों की भांति झारखण्ड में भी मैट्रिक व इंटरमिडीएट के छात्र-छात्राओं का संस्थानगत पाठन पूरी तरह ठप्प रहा और पूर्व निर्धारित तिथियों पर परीक्षा भी नहीं हो सकी। इसलिए फेल घोषित किये गए सभी छात्र-छात्राएं जैक व सरकार के असंवेदनशील रवैये से काफी क्षुब्ध हैं कि बगैर उचित पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए तथा उनके मार्क्स सही ढंग से नहीं जोड़कर जबरन उन्हें फेल घोषित कर दिया गया।

3 अगस्त की दोपहर सैकड़ों छात्र-छात्राओं का जत्था आपसी सूचनाओं के जरिये इकट्ठे होकर राजधानी रांची स्थित शिक्षा मंत्री के आवास पर अपनी फ़रियाद सुनाने जा रहे थे तो पुलिस ने रस्ते में ही रोक लिया और वहांतक नहीं पहुँचने दिया। जिससे नाराज़ आंदोलनकारी छात्र, झारखण्ड हाईकोर्ट से सटे मेकॉन चौराहे पर अपनी मांगों की तख्तियां लेकर सड़क पर शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए। इसके बाद वहां उत्पन्न भीषण जाम को हटाने के लिए स्थानीय पुलिस ने किसी तरह से समझा बुझा कर आन्दोलनकारियों को हटाया। बाद में प्रदर्शनकारी छात्र जुलुस की शक्ल में वहां से आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें जबरन गाड़ियों में भरकर दूर ले जाकर छोड़ दिया। 

इसके पहले 2 अगस्त को भी पीड़ित छात्रों के साथ-साथ कई छात्र संगठनों ने जैक कार्यालय पर जाकर विरोध-हंगामा किया था, लेकिन किसी ने उनकी बात सुनने तक की जहमत नहीं उठायी। 

5 अगस्त को छात्र संगठन आइसा ने राज्यव्यापी प्रतिवाद के तहत अलबर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन कर फेल छात्रों के लिए इंसाफ की मांग उठायी। इस दौरान वहां पहले से ही अपनी मांगों की तख्तियां लेकर धरना दे रहे कुछ पीड़ित छात्र-छात्राएं को जब पुलिस ने जबरन वहांसे हटाना चाहा तो नाराज होकर सभी ने वहींआत्महत्या करनी की धमकी दे डाली। आनन्-फानन यहांसे भी सभी को पुलिस ने गाड़ियों में भरकर सदर थाना पहुंचा दिया, जहां से निजी मुचलका पर सबको छोड़ दिया गया। 

6 अगस्त को भी जैक रिजल्ट का विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं तथा आइसा व एसएफ़आई समेत कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने राजभवन पर संयुक्त प्रतिवाद धरना के माध्यम से ‘छात्रों की बात सुनने’ उनके शैक्षिक भविष्य की अस्थिरता दूर करने की मांग की है। राजधानी स्थित जैक कार्यलय के सामने फेल छात्र छात्राओं का जुटान हो रहा है, लेकिन न तो उनसे कोई वार्ता हो रही है और न ही कोई उनकी कुछ सुन रहा है। दूसरी ओर, प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के छात्र संगठन ने भी इसे प्रमुख एजेंडा बना लिया है। 

आंदोलनकारी छात्रों के एक समूह का यह भी कहना है कि सरकार चाहे तो उन्हें पास करने के लिए परीक्षा ले ले लेकिन कोरोना महामारी से तहस-नहस हुई उनकी शैक्षिक दुर्दशा को और न बढ़ाये। कुछ छात्रों का यह भी कहना है कि पड़ोसी राज्य बिहार समेत कई अन्य राज्यों की भांति झारखण्ड सरकार भी ग्रेस नंबर देकर सबको पास घोषित करे।

उक्त स्थितियों पर वरिष्ठ शिक्षाविद डा. रमेश शरण ने भी थोड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा है कि मेरी समझ में ही नहीं आ रहा है कि सरकार और जैक क्या चाहते हैं। महामारी ने जब सबको अस्तव्यस्त बनाया है तो छात्रों को भी उससे उबारने की जवाबदेही तो उन्हें लेनी ही चाहिए।  ज़ल्द से ज़ल्द कोई सम्यक उपाय निकालें और ज़रूरत लगे तो पूरक परीक्षा लेकर उन्हें पास करें, इसमें दिक्कत क्या है।

ताज़ा ख़बरों में जैक द्वारा जारी सूचना के तहत 7 अगस्त तक रिजल्ट पर आपत्तियां देने की घोषणा की थी। खबर है कि अब तक इस पर 6 हज़ार आवेदन आ चुके हैं। लेकिन सवाल है कि सिर्फ अखबारों में ही सूचना देने मात्र से 35 हज़ार छात्रों को सूचना मिल सकेगी? 

8 अगस्त को भी आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं ने राजधानी में बारिश में भींगते हुए अपना प्रतिवाद प्रदर्शित किया। पूछने पर सबका यही कहना है कि ‘कोई हमारी बात तो सुने..!’ आंदोलनकारी छात्राओं के साथ प्रदर्शन कर रही आइसा की नौरीन अख्तर ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा, “ये प्रदेश का दुर्भाग्य है कि एक ओर मुख्यमंत्री झारखण्ड की हॉकी ख़िलाड़ी बेटियों को इनाम देने की घोषणा कर रहें हैं, लेकिन दूसरी ओर सड़क पर अपने न्याय की गुहार लगा रही इंटर और मैट्रिक की बेटियों पर उनकी ही पुलिस लाठियां बरसा रही है, क्या इसी के लिए उन्हें जनादेश मिला है!”

Jharkhand
Jharkhand School Result
student protest
Jharkhand Academic Council
JHARKHAND POLICE
Hemant Soren

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

मेडिकल छात्रों की फीस को लेकर उत्तराखंड सरकार की अनदेखी

निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या काफी कम : रिपोर्ट

“इलेक्शन होगा, तो पढ़ाई भी होगा” सासाराम में भड़के छात्रों का नारा

सड़कों पर छात्र एवं शिक्षक क्यों हैं?

हरियाणा: निजी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने इच्छा मृत्यु के लिए आमरण अनशन शुरू किया

झारखंड : अबकी बार कुलपति ‘आतंकवादी’ करार!, नागरिक समाज में रोष 

झारखंड: बीफ से जुड़ी दो साल पुरानी फेसबुक पोस्ट के लिए आदिवासी शिक्षक गिरफ्तार


बाकी खबरें

  • CORONA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    23 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 15,102 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 67 हज़ार 31 हो गयी है।
  • cattle
    पीयूष शर्मा
    यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान
    23 Feb 2022
    20वीं पशुगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे प्रदेश में 11.84 लाख छुट्टा गोवंश है, जो सड़कों पर खुला घूम रहा है और यह संख्या पिछली 19वीं पशुगणना से 17.3 प्रतिशत बढ़ी है ।
  • Awadh
    लाल बहादुर सिंह
    अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत
    23 Feb 2022
    दरअसल चौथे-पांचवे चरण का कुरुक्षेत्र अवध अपने विशिष्ट इतिहास और सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण दक्षिणपंथी ताकतों के लिए सबसे उर्वर क्षेत्र रहा है। लेकिन इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना और समीकरणों में…
  • रश्मि सहगल
    लखनऊ : कौन जीतेगा यूपी का दिल?
    23 Feb 2022
    यूपी चुनाव के चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में हर पार्टी की गहरी हिस्सेदारी है।
  • Aasha workers
    वर्षा सिंह
    आशा कार्यकर्ताओं की मानसिक सेहत का सीधा असर देश की सेहत पर!
    23 Feb 2022
    “....क्या इस सबका असर हमारी दिमागी हालत पर नहीं पड़ेगा? हमसे हमारे घरवाले भी ख़ुश नहीं रहते। हमारे बच्चे तक पूछते हैं कि तुमको मिलता क्या है जो तुम इतनी मेहनत करती हो? सर्दी हो या गर्मी, हमें एक दिन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License