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जॉर्डनः 2011 के विरोध प्रदर्शन की सालगिरह के मौके पर किए गए प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई
इन विरोध प्रदर्शनों का आह्वान राजशाही-विरोधी और लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन की 10 वीं वर्षगांठ के मौके पर किया गया था। ये प्रदर्शनकारी पिछले साल लागू किए गए आपातकालीन कानून को समाप्त करने की भी मांग कर रहे थे।
पीपल्स डिस्पैच
25 Mar 2021
जॉर्डन

जॉर्डन के सुरक्षा बलों ने बुधवार 24 मार्च को देश भर में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बड़े पैमाने पर बल प्रयोग किया जिससे कई लोग घायल हो गए। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया। लोगों के लिए व्यापक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग करते हुए 2011 के विरोध प्रदर्शन की सालगिरह के मौके पर ये विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

जॉर्डन की दंगा-रोधी पुलिस ने राजधानी अम्मान में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए उस समय लोगों को गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया जब उन्होंने शहर के दखिलिया के आस पास इकट्ठा होने की कोशिश की। इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देश के कई अन्य शहरों में किए गए। उधर सरकार ने कोरोनावायरस महामारी का हवाला देते हुए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

पिछले सप्ताह राजधानी अम्मान के निकट एक सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई नौ लोगों की मौत के बाद देश के विभिन्न शहरों में हुए विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी देश में रात के कर्फ्यू को समाप्त करने की मांग करते हुए इकट्ठा हुए थे। कार्रवाई में अधिकारियों ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था।

बुधवार को दाखिलिया के आसपास एक विशाल सभा होने की संभावना थी जो 2011 में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन का केंद्र था। इस दौरान तथाकथित अरब विद्रोह प्रदर्शन अधिकांश अरब देशों में व्यापक हो रहा था। हालांकि सरकार ने भारी पुलिस की तैनाती की और दाखिलिया के आसपास पहुंचने से पहले प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया। इन विरोध प्रदर्शनों का आह्वान वाम समूहों तथा अन्य समूहों द्वारा किया गया था।

जॉर्डन की राजनीतिक प्रणाली में संरचनात्मक बदलावों की मांग के अलावा ये प्रदर्शनकारी पिछले साल कोरोनवायरस महामारी को लेकर लागू किए गए रक्षा कानून नामक आपातकालीन कानूनों को हटाने की भी मांग कर रहे थे। नागरिक अधिकार समूह का कहना है कि ये कानून नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। क्रमिक सरकारों द्वारा जॉर्डन की अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन क चलते देश में ये विरोध प्रदर्शन लोकप्रिय हो रहे हैं। बदतर अर्थव्यवस्था ने देश बेरोजगारी और गरीबी को बढ़ा दिया है।

जॉर्डन में राजशाही व्यवस्था है जहां निर्वाचित संसद के बावजूद अधिकांश कार्यकारी और विधायी शक्तियां राजा के पास है। जॉर्डन समाज के विभिन्न वर्गों ने राजशाही की पूर्ण शक्तियों का विरोध किया है और लंबे समय से देश की राजनीतिक प्रणाली में व्यापक बदलाव की मांग की है।

Jordan
Jordon protest
COVID-19

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