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इंसाफ़ या बदला! यूपी में आंदोलनकारियों को 50-50 लाख के मुचलके के नोटिस 
संभल में जिला प्रशासन ने 11 लोगों को 50-50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये हैं। उधर, ग़ाज़ीपुर के जेल में बंद 10सत्याग्रहियों को जमानत के लिए ढाई-ढाई लाख के दो बेल बॉन्ड और साथ ही गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारियों की ज़मानत मांगी गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Feb 2020
CAA
संभल के नखासा में सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन। फोटो साभार : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों से अभी तक बदले पर उतारू है। सम्भल जिले के नखासा क्षेत्र में सीएए और एनआरसी के खिलाफ पिछले20 दिनों से चल रहे धरना—प्रदर्शन के मामले में जिला प्रशासन ने 11 लोगों को उकसाने के आरोप में चिह्नित कर उन्हें 50—50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये हैं। उधर, ग़ाज़ीपुर के जिला कारागार में बंद 10सत्याग्रहियों को जमानत के लिए प्रति व्यक्ति ढाई-ढाई लाख के दो बेल बॉन्ड और साथ ही गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारियों की ज़मानत मांगी गई है।

पीटीआई-भाषा की ख़बर के अनुसार सीएए और एनआरसी के खिलाफ सम्भल के नखासा थाना क्षेत्र के पक्का बाग खेड़ा पर महिलाएं गत 24 जनवरी से धरना दे रही हैं।

सम्भल के उपजिलाधिकारी राजेश कुमार गुरुवार को बताया कि सम्भल के नखासा थाना क्षेत्र में हो रहे महिलाओं के धरने के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें उकसाने के लिये भड़काऊ बयान दिये थे। ऐसे 11 लोगों को हाल में चिह्नित कर अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 107/116 के तहत 50—50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये गये हैं।

उन्होंने बताया कि इस मुचलके के तहत उन चिह्नित लोगों को यह लिखकर देना होगा कि वे भविष्य में ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे, और अगर वे भविष्य में ऐसी हरकत करते हैं तो उनसे 50—50 लाख रुपये की वसूली की जाए।

उधर, पुलिस प्रशासन ने भी कार्यवाही करते हुए बुधवार को नौ महिलाओं समेत 75 लोगों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किए हैं। शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के मकसद से इन लोगों को नोटिस की तामील करायी गयी है।

उधर, ग़ाज़ीपुर से ख़बर है किचौरीचौरा गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी मंगलवार को ग़ाज़ीपुर पहुंची। जहां पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था। बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उन्होंने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया, वह अपने आप में बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला है।

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ग़ाज़ीपुर के जिला कारागार में बंद 10 सत्याग्रहियों के खिलाफ़ एसडीएम (सदर) ग़ाज़ीपुर ने ज़मानत की बहुत अजीब सी शर्त रखी है। इस शर्त के मुताबिक, जमानत के लिए प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानत दें। मालूम हो कि इन दस सत्याग्रहियों को आइपीसी की धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को जब बेल की अर्जी लगायी गयी तो एसडीएम ने इतनी सख्त शर्तें थोप दीं।

वकील बताते हैं कि, 'आज सबसे पहले महिला पत्रकार प्रदीपिका की जमानत के लिए बेल पेश किया गया, लेकिन यहाँ (एसडीएम ऑफिस) के बाबू ने कहा कि हम बेल नहीं ले पाएंगे, आप पहले अधिकारी से बात करिए, अगर वो आपके कागजात लेने के लिए कहेंगे तभी हम बेल ग्रांट करेंगे। वकील कहते हैं कि सीआरपीसी 111 में कंडीशन लगाया गया है कि, हर बंदी पर ढाई-ढाई लाख रुपए की दो श्योरिटीज और जमानत लेने वाले दो राजपत्रित अधिकारी होने चाहिए, जो कि बिलकुल इम्पॉसिबल है कि किसी भी व्यक्ति के लिए कोई राजपत्रित अधिकारी आकर उनकी जमानत ले। एसडीएम से बात करने पर एसडीएम ने कहा कि 111 सीआरपीसी को फुलफिल कर दीजिए तभी हम जमानत कर पाएंगे, जबकि 111 सीआरपीसी का फुलफिल होना संभव ही नहीं है क्योंकि कोई राजपत्रित अधिकारी जमानत देने को तैयार नहीं होगा।

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गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकतर बीएचयू के छात्र हैं, जिनमें प्रियेश पांडे, मुरारी कुमार, राज अभिषेक, अनंत प्रकाश शुक्ल, नीरज राय, अतुल यादव शामिल हैं। इनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शर्मा, शेष नारायण ओझा, रविंद्र कुमार रवि और जानी मानी महिला पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत भी शामिल हैं।

गिरफ्तार होने से पहले प्रदीपिका ने 10 फरवरी को फेसबुक पर लिखा था- 'कल शाम से लोकल इंटेलीजेंस और पुलिस यात्रियों के चक्कर काट रही है, तस्वीरें खींच रही है, वीडियो उतार रही है। स्टेट इतना डरा हुआ है कि चंद लोगों को शांति और सौहार्द की बात करते हुए नहीं देख पा रहा है। यह यात्रा एक पाठशाला है, जहां महज पैदल चलते हुए हम सीखते हैं कि कोई जगह कश्मीर कैसे बनती है।

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत चौरी-चौरा के शहीद स्मारक से गत 2 फरवरी 2020 को हुई थी। यात्रा का प्रथम चरण 16 फरवरी 2020 को बनारस में सम्पन्न होना तय था। पदयात्री विकास सिंह के अनुसार, यह यात्रा चौरी-चौरा से इसलिए शुरू की गई क्योंकि ‘यह वो जगह थी जहां 1922 में यानी लगभग सौ साल पहले अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के कारण गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। उस दिन ऐसे आज़ाद हिंदुस्तान की तासीर तय हो गई थी जहां हिंसा के लिए कोई जगह नहीं थी, फिर चाहे वो हमारा शोषक, हमारा दुश्मन ही क्यों न हो। विकास गिरफ्तारी से एक दिन पहले किसी जरूरी काम से यात्रा छोड़कर बनारस लौटे थे।

इस तरह के बेलबॉन्ड और शर्तों के बारे में जब ग़ाज़ीपुर जिले के एसडीएम का पक्ष नहीं मिल पाया है। कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के मुताबिक उनसे मिलने की कोशिश की गई तो वो बुधवार की देर शाम तक अपने ऑफिस में नहीं थे, बाबू से पूछने पर वो भी उनके बारे में नहीं बता पाये। एसडीएम को कई बार कॉल किया गया लेकिन उनका फोन नहीं लगा। इन सबके बाद ग़ाज़ीपुर ज़िले के जिलाधिकारी से बात करने और मिलने की कोशिश की गई, डीएम ने कहा कि वो बीजी हैं और नहीं मिल पाएंगे।

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