NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
इंसाफ़ या बदला! यूपी में आंदोलनकारियों को 50-50 लाख के मुचलके के नोटिस 
संभल में जिला प्रशासन ने 11 लोगों को 50-50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये हैं। उधर, ग़ाज़ीपुर के जेल में बंद 10सत्याग्रहियों को जमानत के लिए ढाई-ढाई लाख के दो बेल बॉन्ड और साथ ही गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारियों की ज़मानत मांगी गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Feb 2020
CAA
संभल के नखासा में सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन। फोटो साभार : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों से अभी तक बदले पर उतारू है। सम्भल जिले के नखासा क्षेत्र में सीएए और एनआरसी के खिलाफ पिछले20 दिनों से चल रहे धरना—प्रदर्शन के मामले में जिला प्रशासन ने 11 लोगों को उकसाने के आरोप में चिह्नित कर उन्हें 50—50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये हैं। उधर, ग़ाज़ीपुर के जिला कारागार में बंद 10सत्याग्रहियों को जमानत के लिए प्रति व्यक्ति ढाई-ढाई लाख के दो बेल बॉन्ड और साथ ही गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारियों की ज़मानत मांगी गई है।

पीटीआई-भाषा की ख़बर के अनुसार सीएए और एनआरसी के खिलाफ सम्भल के नखासा थाना क्षेत्र के पक्का बाग खेड़ा पर महिलाएं गत 24 जनवरी से धरना दे रही हैं।

सम्भल के उपजिलाधिकारी राजेश कुमार गुरुवार को बताया कि सम्भल के नखासा थाना क्षेत्र में हो रहे महिलाओं के धरने के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें उकसाने के लिये भड़काऊ बयान दिये थे। ऐसे 11 लोगों को हाल में चिह्नित कर अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 107/116 के तहत 50—50 लाख रुपये के मुचलके के नोटिस जारी किये गये हैं।

उन्होंने बताया कि इस मुचलके के तहत उन चिह्नित लोगों को यह लिखकर देना होगा कि वे भविष्य में ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे, और अगर वे भविष्य में ऐसी हरकत करते हैं तो उनसे 50—50 लाख रुपये की वसूली की जाए।

उधर, पुलिस प्रशासन ने भी कार्यवाही करते हुए बुधवार को नौ महिलाओं समेत 75 लोगों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किए हैं। शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के मकसद से इन लोगों को नोटिस की तामील करायी गयी है।

उधर, ग़ाज़ीपुर से ख़बर है किचौरीचौरा गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी मंगलवार को ग़ाज़ीपुर पहुंची। जहां पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था। बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उन्होंने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया, वह अपने आप में बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला है।

पदयात्री2_0.jpg

ग़ाज़ीपुर के जिला कारागार में बंद 10 सत्याग्रहियों के खिलाफ़ एसडीएम (सदर) ग़ाज़ीपुर ने ज़मानत की बहुत अजीब सी शर्त रखी है। इस शर्त के मुताबिक, जमानत के लिए प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानत दें। मालूम हो कि इन दस सत्याग्रहियों को आइपीसी की धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को जब बेल की अर्जी लगायी गयी तो एसडीएम ने इतनी सख्त शर्तें थोप दीं।

वकील बताते हैं कि, 'आज सबसे पहले महिला पत्रकार प्रदीपिका की जमानत के लिए बेल पेश किया गया, लेकिन यहाँ (एसडीएम ऑफिस) के बाबू ने कहा कि हम बेल नहीं ले पाएंगे, आप पहले अधिकारी से बात करिए, अगर वो आपके कागजात लेने के लिए कहेंगे तभी हम बेल ग्रांट करेंगे। वकील कहते हैं कि सीआरपीसी 111 में कंडीशन लगाया गया है कि, हर बंदी पर ढाई-ढाई लाख रुपए की दो श्योरिटीज और जमानत लेने वाले दो राजपत्रित अधिकारी होने चाहिए, जो कि बिलकुल इम्पॉसिबल है कि किसी भी व्यक्ति के लिए कोई राजपत्रित अधिकारी आकर उनकी जमानत ले। एसडीएम से बात करने पर एसडीएम ने कहा कि 111 सीआरपीसी को फुलफिल कर दीजिए तभी हम जमानत कर पाएंगे, जबकि 111 सीआरपीसी का फुलफिल होना संभव ही नहीं है क्योंकि कोई राजपत्रित अधिकारी जमानत देने को तैयार नहीं होगा।

letter_2.JPG

गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकतर बीएचयू के छात्र हैं, जिनमें प्रियेश पांडे, मुरारी कुमार, राज अभिषेक, अनंत प्रकाश शुक्ल, नीरज राय, अतुल यादव शामिल हैं। इनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शर्मा, शेष नारायण ओझा, रविंद्र कुमार रवि और जानी मानी महिला पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत भी शामिल हैं।

गिरफ्तार होने से पहले प्रदीपिका ने 10 फरवरी को फेसबुक पर लिखा था- 'कल शाम से लोकल इंटेलीजेंस और पुलिस यात्रियों के चक्कर काट रही है, तस्वीरें खींच रही है, वीडियो उतार रही है। स्टेट इतना डरा हुआ है कि चंद लोगों को शांति और सौहार्द की बात करते हुए नहीं देख पा रहा है। यह यात्रा एक पाठशाला है, जहां महज पैदल चलते हुए हम सीखते हैं कि कोई जगह कश्मीर कैसे बनती है।

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत चौरी-चौरा के शहीद स्मारक से गत 2 फरवरी 2020 को हुई थी। यात्रा का प्रथम चरण 16 फरवरी 2020 को बनारस में सम्पन्न होना तय था। पदयात्री विकास सिंह के अनुसार, यह यात्रा चौरी-चौरा से इसलिए शुरू की गई क्योंकि ‘यह वो जगह थी जहां 1922 में यानी लगभग सौ साल पहले अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के कारण गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। उस दिन ऐसे आज़ाद हिंदुस्तान की तासीर तय हो गई थी जहां हिंसा के लिए कोई जगह नहीं थी, फिर चाहे वो हमारा शोषक, हमारा दुश्मन ही क्यों न हो। विकास गिरफ्तारी से एक दिन पहले किसी जरूरी काम से यात्रा छोड़कर बनारस लौटे थे।

इस तरह के बेलबॉन्ड और शर्तों के बारे में जब ग़ाज़ीपुर जिले के एसडीएम का पक्ष नहीं मिल पाया है। कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के मुताबिक उनसे मिलने की कोशिश की गई तो वो बुधवार की देर शाम तक अपने ऑफिस में नहीं थे, बाबू से पूछने पर वो भी उनके बारे में नहीं बता पाये। एसडीएम को कई बार कॉल किया गया लेकिन उनका फोन नहीं लगा। इन सबके बाद ग़ाज़ीपुर ज़िले के जिलाधिकारी से बात करने और मिलने की कोशिश की गई, डीएम ने कहा कि वो बीजी हैं और नहीं मिल पाएंगे।

UttarPradesh
yogi sarkar
Yogi Adityanath
CAA
NRC
Protest against CAA
Protest against NRC
UP police
Sambhal
Ghazipur

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं


बाकी खबरें

  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर: हिजाब विवाद हो या नफ़रती भाषण, सब कुछ चुनाव के लिए कब तक
    12 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान में रख कर्नाटक से हुए हिजाब विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने…
  • goa elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्टः गोवा चुनावों में जोड़-तोड़ व हिंदुत्व ख़िलाफ क्या होगा बदलाव
    11 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने गोवा में चल रहे चुनावी समर का आकलन करते हुए जानने की कोशिश की इस बार क्या चल पाएगा हिंदुत्व का नफ़रती कार्ड या जनता के बुनियादी मुद्दों पर होगा मतदान।…
  • Sunderbans
    अयस्कांत दास
    सुंदरबन में अवैध रिसॉर्ट के मालिक की पहचान नहीं कर पा रही ममता सरकार
    11 Feb 2022
    पारिस्थितिक रूप से नाजुक सुंदरबन में कथित तौर पर केंद्र प्रायोजित मनरेगा योजना के धन का इस्तेमाल एक अवैध 'इको-टूरिज्म' रिसॉर्ट के निर्माण में किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
    11 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    प्यूर्टो रिको में शिक्षकों ने की वेतन और सुविधाओं की मांग के साथ देशव्यापी हड़ताल
    11 Feb 2022
    सरकार ने वेतन में बढ़ोतरी न करने के साथ साथ पेंशन में कटौती भी कर दी है, इसके ख़िलाफ़ शिक्षकों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License