NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कानपुर: लड़कियों के सरकारी शेल्टर होम मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
कानपुर सरकारी बालिका गृह मामले में एनएचआरसी द्वारा उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव को नोटिस जारी करने के बाद जहां योगी आदित्यनाथ सरकार एक्शन मोड में नज़र आ रही है, तो वहीं विपक्ष और महिलावादी संगठन प्रशासन पर लगातार घोर लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। इस मामले की जांच अब हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग भी उठ रही है।
सोनिया यादव
24 Jun 2020
लड़कियों के सरकारी शेल्टर होम

कानपुर शेल्टर होम का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। 57 लड़कियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद प्रशासन और प्रबंधन पर घोर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है तो वहीं अब प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी एक्शन मोड में नज़र आ रही है।

मुख्यमंत्री के आदेश पर मंगलवार, 23 जून को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ सुचिता चतुर्वेदी पूरे घटनाक्रम की जांच करने लिए कानपुर पहुंची। उन्होंने राजकीय जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले का संज्ञान लिया।

जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा

मीडिया से बातचीत में डॉ सुचिता ने बताया, ‘जो चूक हुई है उसकी जांच के लिए मुझे भेजा गया है। अगर इन बच्चियों को पहले ही कहीं क्वारंटीन कर लिया जाता तो ठीक था। लेकिन अब इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।’

बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर लड़कियों की स्वास्थ्य स्थिति, उपचार और परामर्श को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

Capture1.JPG

‘जनसेवक पीड़ित लड़कियों को सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे’

आयोग ने एक बयान जारी कर कहा, ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया में आई उन खबरों का स्वत: संज्ञान लिया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सरकार द्वारा संचालित एक बाल आश्रयगृह में 57 नाबालिग लड़कियों के कोविड-19 संक्रमित पाए जाने के बारे में बताया गया है।’

आयोग ने पाया, ‘यदि मीडिया रिपोर्ट में आए तथ्य सत्य हैं तो प्रथमदृष्टया यह विश्वास करने लायक है कि जनसेवक पीड़ित लड़कियों को सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे हैं और साफ तौर पर राज्य के संरक्षण में उनके जीवन, स्वतंत्रता और सम्मान के अधिकार की रक्षा में लापरवाही बरती गई है।’

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरकारी बालिका गृह में रहने वाली 57 लड़कियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान सात लड़कियाँ गर्भवती भी पाई गईं जबकि एक एचआईवी संक्रमित बताई जा रही है। रविवार, 21 जून को इस घटना के सामने आने के बाद एक ओर प्रशासन जहां विपक्ष पर अनावश्यक तूल देने की बात कर रहा है तो वहीं महिलावादी संगठन और विपक्ष लगातार बालगृहों में गड़बड़ी की बातों को लेकर सरकार से सवाल कर रहा है।

आखिर पहले क्यों नहीं किया गया संवासिनियों को क्वारंटीन

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने इस मामले पर न्यूज़क्लिक को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “जहां 50 लड़कियों के रहने की जगह है वहां लगभग 200 लड़कियों को रखा जा रहा था। इस आश्रय गृह में केवल 9 टॉयलेट हैं, ऐसे में संक्रमण फैसने का खतरा सबसे ज्यादा है। बावजूद इसके प्रशासन ने 15 जून को पहला मामला सामने आने के बाद कोई कदम नहीं उठाया। 17 जून को कई और लड़कियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई लेकिन शेल्टर को सील और सैनिटाइज करने की बजाय लड़कियों को वहीं पर रखा गया। जब 57 लड़कियों के एक साथ संक्रमित होने की खबर सामने आई तब ये शेल्टर होम सील हुआ है और लड़कियों को क्वारंटीन सेंटर भेजा गया है। ये लापरवाही नहीं अपराध है।”

सुभाषिनी अली ने शेल्टर होम की कई और खांमियों को उजागर करते हुए बताया कि इस आश्रय गृह में कई मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़कियां अपने बच्चों के साथ रहती हैं। ऐसे में उन बच्चों का ध्यान दूसरी कम उम्र की नाबालिग लड़कियां रखती हैं। क्वारंटीन सेंटर में भी इन लड़कियों के यही हालात हैं।

बाल गृह में क्षमता से अधिक बालिकाएं क्यों हैं?

बाल गृह में क्षमता से अधिक बालिकाएं रखने पर सवाल उठाते यूपी बाल संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष व समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता जूही सिंह ने कहा कि बाल संरक्षण आयोग और संबंधित मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि पॉक्सो कोर्ट और संरक्षण गृह हर जिले में होने चाहिये। साथ ही पॉक्सो केस की सुनवाई निर्धारित समय सीमा में होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि इस व्यवस्था के लिए केंद्र ने पर्याप्त बजट का प्रावधान किया है जिसका इस्तेमाल होना चाहिए।

प्रशासन क्या कह रहा है?

शेल्टर होम में कुल सात लड़कियों के प्रेग्नेंट होने के मामले पर कानपुर प्रशासन ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि इन सभी लड़कियों को शेल्टर होम कब और कहां से लाया गया है।

प्रशासन के मुताबिक, सातों प्रेगनेंट लड़कियों में से सबसे पहली लड़की को कानपुर शेल्टर होम 30 नवंबर, 2019 के दिन लाया गया था। इस लड़की के केस में चार्जशीट कोर्ट में फाइल हो चुकी है।

दूसरी लड़की 3 दिसंबर, 2019 के दिन आगरा से कानपुर शेल्टर होम में आई थी। वह पॉक्सो एक्ट के तहत हुए एक अपराध से पीड़ित थी। इसके केस में भी कोर्ट में चार्जशीट जमा हो गई है। ये लड़की कोरोना पॉजिटिव भी है।

तीसरी और चौथी लड़कियां एटा से कानपुर शेल्टर होम लाई गई थीं। एक इस साल 23 जनवरी को तो दूसरी 23 फरवरी को आईं थी। दोनों प्रेगनेंट हैं, जबकि एक कोरोना पॉज़िटिव भी है। दोनों के मामलों में चार्जशीट कोर्ट में फाइल हो चुकी है।

पांचवी लड़की 19 दिसंबर, 2019 के दिन कन्नौज से कानपुर शेल्टर होम लाई गई थी। यौन पीड़ित है, जिसकी अब कोरोना रिपोर्ट भी पॉज़िटिव आई है। इस केस में मामला अभी भी कोर्ट में पेंडिंग है।

छठी लड़की को इस साल 16 फरवरी के दिन फिरोजाबाद से कानपुर शेल्टर होम लाया गया था। ये भी कोरोना पॉज़िटिव है। रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की अपहरण का शिकार हुई थी। इस केस में भी चार्जशीट फाइल हो गई है।

सातवीं लड़की 9 जून के दिन एक लड़की शेल्टर होम आई थी। इसके केस में मामला अभी कोर्ट में पेंडिंग है।

प्रशासन ने केवल दो लड़कियां कितने महीने की गर्भवती हैं, इसकी जानकारी दी है।

कोरोना संक्रमण के मामले पर जिला प्रोबेशन अधिकारी अजित कुमार का कहना है, ‘पिछले हफ्ते जब एक लड़की में कोरोना के लक्षण दिखे तो उसका टेस्ट कराया गया। टेस्ट पॉजिटिव आते ही कई और लड़कियों के टेस्ट कराए गए। पहले गुरुवार को 33 लड़कियों के पॉजिटिव आए फिर रविवार को ये संख्या बढ़कर 57 हो गई जिसके बाद सबको क्वारेंटाइन करके पूरा बालिका गृह ही सील कर दिया गया।’

अजित सिंह के मुताबिक कानपुर के इस बालिका गृह में कानपुर मंडल के अलावा आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट मंडल में चल रहे पॉक्सो एक्ट के मामलों से जुड़ी लड़कियों को भी रखा जा रहा है।

विपक्ष क्या कह रहा है?

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कानपुर सरकारी शेल्टर होम मामले में यूपी सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदेश में महिला सुरक्षा के मामले में सरकार उदासीन, लापरवाह और गैर जिम्मेदार है।

mayawati.PNG

यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने ट्वीट कर कहा, 'कानपुर राजकीय संरक्षण गृह में काफी बहन-बेटियों के कोरोना संक्रमित होने और कुछ के गर्भवती होने की खबर से सनसनी और चिन्ता की लहर दौड़ना स्वाभाविक ही है। यह फिर साबित करता है कि यूपी में महिला सम्मान तो दूर उनकी सुरक्षा के मामले में सरकार उदासीन, लापरवाह और गैर-जिम्मेदार बनी हुई है।'

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर चुके हैं। मंगलवार, 23 जून को कानपुर बालिका संरक्षण गृह मामले और पेट्रोल-डीजल के दाम में हो रही वृद्धि को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी किया।

इसके अलावा कांग्रेसी नेता अजय कुमार लल्लू और राज बब्बर ने भी ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, ‘कानपुर के राजकीय बाल संरक्षण गृह में 57 बच्चियों को कोरोना, दो बच्चियां गर्भवती और एक को एड्स पॉजिटिव होने का मामला सामने आया है। बिहार के मुजफ्फरपुर का मामला सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश के देवरिया में ऐसा ही मामला आ चुका है। ऐसे में पुनः इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति से साफ है कि सरकार ने सबक नहीं लिया। ‘किसी को बक्शा नहीं जाएगा’ जैसे जुमले बोल देने से व्यवस्था नहीं बदलती मुख्यमंत्री जी। देवरिया से कानपुर तक की घटनाओं में क्या बदला?’

राज बब्बर ने कहा, ‘सरकारी निगरानी में पल रही इन बच्चियों का ये ख़्याल रखा गया? सभी 57 बच्चियां संक्रमित। लेकिन कोरोना ने शोषण का जो भेद खोला वो असहनीय है। ऐसे अन्याय बिना रसूखदारों की संलिप्तता के संभव नहीं। कानपुर के संरक्षण गृह मामले में सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को संज्ञान लेना चाहिए।’

हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग

गौरतलब है कि प्रशासन और प्रबंधन पर कथित लापरवाही का ये मुद्दा अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉक्टर फारुख खान ने इस बाबत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक चिट्ठी भेजी है। उन्होंने इस चिट्ठी के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच कराए जाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। चीफ जस्टिस को लिखी गई चिट्ठी में लड़कियों के साथ हुए अन्याय को जुवेनाइल जस्टिस के विपरीत बताया है। इसके साथ ही, सरकार की देखरेख में चलाए जा रहे शेल्टर होम की व्यवस्थाओं पर भी पत्र में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

डॉक्टर फारुख ने हाईकोर्ट से इस चिट्ठी को पीआईएल के तौर पर लेते हुए सरकार और कानपुर प्रशासन को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाने की अपील की है। साथ हाईकोर्ट से इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर पूरे मामले की मॉनिटरिंग किए जाने की बात कही गई है।

इसे भी पढ़े : कानपुर: सरकारी शेल्टर होम में 7 गर्भवती बालिकाओं का मामला क्यों तूल पकड़ रहा है?

UttarPradesh
KANPUR
shelter home
Kanpur Shelter Home case
Coronavirus
yogi sarkar
Yogi Adityanath
MAYAWATI
Congress
Allahabad High Court
Subhashni Ali

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: सावित्री बाई फुले को याद करना, मतलब बुल्ली बाई की विकृत सोच पर हमला बोलना
    03 Jan 2022
    सवाल यह है कि जिन लोगों ने, सावित्री बाई फुले के ऊपर कीचड़ डाला था, उनके ख़िलाफ गंदी-अश्लील टिप्पणी की थी, वे 2022 में कहां हैं। वे पहले से अधिक खूंखार हो गये हैं, पहले से ज्यादा बड़े अपराधी—जिन्हें…
  • stop
    सोनिया यादव
    ‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
    03 Jan 2022
    मुस्लिम महिलाओं को ‘ट्रोल’ करने की कोशिश के बीच विपक्ष के साथ-साथ महिला संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सरकार और पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः एनएमसीएच के 84 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव, मरीज़ों में कोरोना चेन बनने का ख़तरा
    03 Jan 2022
    एनएमसीएच में डॉक्टरों समेत 194 लोगों का सैंपल लिया गया था। 84 डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आशंका बढ़ गई है कि अस्पताल के कई मेडिकल स्टॉफ भी चपेट में आ सकते हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : जारी है एचईसी मज़दूरों की हड़ताल, साथ आए सभी विपक्षी दल
    03 Jan 2022
    एचईसी के मज़दूरों के टूल डाउन और हड़ताल को एक महीना हो गया है और अभी भी वो जारी है, ऐसा एचईसी के इतिहास में पहली बार हुआ है।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    नहीं पूरा हुआ वयस्कों के पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य, केवल 63% को लगा कोरोना टीका
    03 Jan 2022
    पहले केंद्र ने दिसंबर 2021 के अंत तक भारत में सभी वयस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेने का लक्ष्य घोषित किया था। जबकि हकीकत यह है कि करीब 9.73 करोड़ वयस्कों को अभी भी दोनों खुराक दी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License