NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
समाज
भारत
राजनीति
कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का सच तब सामने आ गया जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे के बावजूद पड़ोस में कानपुर शहर में बवाल हो गया।
रवि शंकर दुबे
04 Jun 2022
kanpur

देश-प्रदेश की जनता ने सरकार के जिन नुमाइंदों को अपनी सुरक्षा के लिए चुना था, जिन दलों पर अपना विश्वास जताया था, उन्हीं के ज़हरीले बोल अब संप्रादायिक हिंसा का कारण बनते जा रहे हैं। एक के बाद एक नफ़रती बयानों से भर चुका गुब्बार अब फूट चुका है, जिसकी आंच में आम जन झुलसने पर मजबूर है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पहुंच चुकी इस नफ़रती आंच ने हज़ारों नागरिकों को एक साथ सड़कों पर ला खड़ा किया। लोगों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके, पुलिस वालों के साथ मारपीट की, जिसके जवाब में पुलिसकर्मियों ने भी हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोल छोड़े। इस बवाल में दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल भी हो गए हैं।

हैरान करने वाली बात ये है कि ये बवाल तब हुआ जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पड़ोस में ही कानपुर देहात में अपने पैतृक गांव पहुंचे हुए थे। सिर्फ़ राष्ट्रपति ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ख़ुद भी मौजूद थे। ऐसे में उसके पड़ोस में इस तरह का हंगामा और हिंसा ये बताने के लिए काफी है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था का बार-बार बखान करना एक शिगूफा मात्र है।

दरअसल ये पूरा बवाल शुक्रवार के दिन नमाज़ के बाद शुरू हुआ। कानपुर के बेकनगंज में परेड चौराहा पर देखते ही देखते हज़ारों लोग इकट्ठा हो गए। फिर शोर मचने लगा और पत्थरबाज़ी शुरू हो गई। जिसे काबू में करने के लिए करीब 12 थानों की पुलिस लगानी पड़ी। चार घंटे तक जमकर उपद्रव हुआ फिर हालात काबू में आए। इसके बाद पुलिस ने अबतक 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिसमें दंगों के लिए मुख्य आरोपी बनाए गए एमएम जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी भी शामिल हैं। हयात ज़फर हाशमी पर कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

क्योंकि कानपुर में लगातार तनाव बना हुआ था। इसलिए देर रात 2 बजे कानपुर के ज़िलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने फ्लैग मार्च किया। घरों में दबिश देकर संदिग्ध उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया। यानी अभी तक कुल गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 36 के पार जा चुकी है। वहीं 40 नामज़द और 1000 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

 इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी इस उकसावे की ज़िम्मेदार कही जा रहीं भाजपा की प्रवक्ता नुपूर शर्मा पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दरअसल नुपूर शर्मा ने एक टीवी डिबेट में पैगंबर मोहम्मद साहब पर टिप्पणी की थी। जमात रज़ा ए मुस्तफा के मीडिया प्रभारी समरान खान का आरोप है कि उस दौरान नुपुर शर्मा ने देश में सांप्रदायिक दंगा फैलाने और मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आशय से पैगम्बर हजरत मोहम्मद व हजरत आयशा की शान में गुस्ताखी करते हुए अपमानजनक शब्द बोले थे। जिससे करोड़ों मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों के पवित्र ग्रंथ कुरान के लिए भी गलत बोला था। उन्होंने कहा कि यह धर्म विशेष का अपमान था। इन्हीं सब से नाराज़ मुस्लिम समुदाय के लोग यतीमखाना की सद्भावना चौकी के पास बाजार बंद करा रहे थे। तभी दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए और पथराव शुरु हो गया।

बवाल वाले एरिया की बिजली कटी

इस बवाल के बाद यूपी में अलर्ट जारी किया गया है। खासतौर पर मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। कानपुर में बवाल होने के बाद देर शाम पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने फ्लैग मार्च किया। रात करीब 8 बजे बवाल वाले एरिया नई सड़क, यतीम खाना, बेकनगंज की बिजली भी काट दी गई।

वहीं दगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर पहुंचकर एक हाईलेवल बैठक की, जिसमें एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार भी शामिल हुए। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने व संपत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया गया। इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण भी मांगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिंसा सुनियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकती है। ऐसे में उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि शनिवार को राष्ट्रपति दो दिनों के दौरे पर गोरखपुर आ रहे हैं। यहां उनके कई प्रोग्राम लगे हैं। ऐसे में कानपुर में कानून व्यवस्था और शांति कायम रखने के साथ ही गोरखपुर में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ताकि इस तरह की साजिश दोहराई न जा सके।

कानपुर में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण ही बनी हुई है। यही कारण है कि 2011 बैच आईपीएस अजय पाल शर्मा को कानून व्यवस्था से संबंधित कार्यो को देखने के लिए कानपुर भेजने के निर्देश गए हैं। जिसका एक कारण राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का उत्तर प्रदेश दौरा भी है।

एक ओर कानपुर में पत्थर बरस रहे थे तो दूसरी ओर राजनीति को भी हवा मिल गई और विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा को गिरफ्तार करने की मांग कर दी। अखिलेश ने नूपुर पर सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान देने का आरोप लगाया।

महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नगर में रहते हुए भी पुलिस और ख़ुफ़िया-तंत्र की विफलता से भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान से, कानपुर में जो अशांति हुई है, उसके लिए भाजपा नेता को गिरफ़्तार किया जाए।

हमारी सभी से शांति बनाए रखने की अपील है।

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 3, 2022

 

समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद कांग्रेस ने भी इस मामले में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा की दुहाई देते हुए योगी सरकार पर हमला किया।

भाजपा ने भीड़तंत्र के रूप में जो भस्मासुर पाले हैं, अब वे रंग दिखा रहे हैं। कितनी गंभीर बात है कि देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सभी कानपुर में हैं, उसके बाद भी वहां हिंसा भड़क गई

यूपी में कानून का राज खत्म हो चुका है। आम जनता से अपील है कि कृपया शांति बनाएं रखें pic.twitter.com/Hsd6UNcqLC

— UP Congress (@INCUttarPradesh) June 3, 2022

 

कांग्रेस की ओर से पार्टी के विधायक वीरेंद्र चौधरी ने भी एक ट्वीट में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

कानपुर की घटना शर्मनाक है। जिस शहर में सीएम, पीएम और राष्ट्रपति मौजूद हैं वहां ऐसी घटना प्रदेश की फेल कानून व्यवस्था को दर्शाता है।

सभी से शांति की अपील है।

विधायक श्री @VirendraUPCC जी pic.twitter.com/PJnJycWJwG

— UP Congress (@INCUttarPradesh) June 3, 2022

 

अभिव्यक्ति की आज़ादी सभी को है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता और बहस या तर्क-वितर्क की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए, लेकिन कुतर्क या उकसावा और नफ़रती बयान में भी एक फ़र्क़ होता है। और यहां नूपुर शर्मा को लेकर इसलिए भी सवाल पूछा जा रहा है क्योंकि मोदी-योगी सरकार में एक सामान्य ट्वीट या सवाल पर भी लोगों को घर से उठा लिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में ट्वीट कर सवाल पूछने पर एक पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर पर एफआईआर दर्ज की गई है।

लेकिन भाजपा नेताओं के मामले में ऐसा नहीं है। उन्हें कुछ भी कहने बोलने की पूरी छूट और सुरक्षा कवच मिला हुआ है। शायद इसी बात को लेकर लोगों में ज़्यादा गुस्सा है।

KANPUR
president
PM MODI
CM Yogi Adityanath
Communal riots

Related Stories

मध्य प्रदेश : खरगोन हिंसा के एक महीने बाद नीमच में दो समुदायों के बीच टकराव

कानपुर: हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला, डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद

कानपुर: जय श्री राम नहीं बोलने पर टोपी पहने किशोर को पीटा


बाकी खबरें

  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • water pump
    शिवम चतुर्वेदी
    हरियाणा: आज़ादी के 75 साल बाद भी दलितों को नलों से पानी भरने की अनुमति नहीं
    22 Nov 2021
    रोहतक के ककराणा गांव के दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समाज के खेतों एवं अन्य जगह पर लगे नल से दलित वर्ग के लोगों को पानी भरने की अनुमति नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License