NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
महिलाएं
भारत
राजनीति
त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
सीमा आज़ाद
15 Mar 2022
hijab
Image courtesy : Hindustan Times

हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि "हिजाब इस्लाम की धार्मिक रीति का हिस्सा नहीं है, इसलिए ये अनिवार्य नहीं है।"

इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "

यह फैसला औरतों को धार्मिक जकड़न से आज़ाद करने की बजाय उसमें और बांधने वाला फैसला है।

हिजाब के खिलाफ जो बहस चली थी, उसमें सरकार और हिंदूवादी संगठन यह भी कह रहे थे कि, "मुस्लिम धर्म में कट्टरता है, उसमें औरतों को आज़ादी नहीं है।" ऐसा बोलने वाले लोग आज के फैसले से खुश हो रहे हैं। जबकि यह फैसला तो इसकी मुनादी कर रहा है कि इस्लाम धर्म कट्टर नहीं है, इसमें महिलाओं को बिना पर्दा रहने को छूट है।

दरअसल यह धर्म को संरक्षण देने वाला फैसला है। यह फैसला साफ साफ यह बोल रहा है कि " लड़कियों तुम्हारे चुनने का अधिकार नहीं, धार्मिक रीतियों का पालन ही राज्य के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। किसी भी धर्म की महिला हो उसे धार्मिक रिवाज़ों के अनुरूप ही व्यवहार करना चाहिए।"

फर्ज़ कीजिए अगर न्याय व्यवस्था को दिखता कि हिजाब इस्लाम धर्म का हिस्सा है तो वह उन लड़कियों पर भी इसे थोप देता, जो लड़कियां हिजाब नहीं पहनना चाहती हैं।

दरअसल कोर्ट में बहस जब इस पर केंद्रित हो गई कि 'हिजाब इस्लाम धर्म का हिस्सा है या नहीं', तभी समझ में आ गया था, जो भी फैसला आएगा वो महिला विरोधी ही होगा।

यह बहस लड़कियों की आजादी पर केंद्रित न करके जानबूझ कर इसे दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया। जहां से ऐसा ही फैसला आना था।

मामला धार्मिक आज़ादी से भी जुड़ा है। हिंदू मुसलमान और सभी धर्मों की रीतियां अलग अलग इलाकों की अलग अलग है। हिंदू धर्म में भी कहीं शादी के समय लड़कियों के सिर पर पल्लू होना ज़रूरी माना जाता है, तो कहीं नहीं। और यह धर्म का हिस्सा हो या नहीं पितृसत्तात्मक रीति रिवाजों के कारण ऐसे देश में कोर्ट कैसे ये तय करेगा कि ये धार्मिक रीति का हिस्सा है या नहीं? इसका फैसला केवल इसी आधार पर किया जा सकता है, कि वह महिला की आजादी में दखल देना है या नहीं।

हां, यह पूरा मामला लड़कियों की आजादी का था, जिसे कोर्ट ने धार्मिक चौहद्दी में बांधने का काम किया है। यह फैसला दरअसल यह बोलता है कि लड़कियों की आजादी का दायरा वहीं तक है, जहां तक उनका धर्म उन्हें इजाज़त देता है। और इस तरह यह फैसला सभी धर्मों और बेधर्मी यानी नास्तिक औरतों की आजादी पर हमला है। पितृसत्ता से आज़ादी चाहने वाली सभी औरतों को  इसकी मुखालफत करनी चाहिए।

(लेखिका एक सामाजिक कार्यकर्ता और दस्तक पत्रिका की संपादक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे पढ़ें: हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका

Karnataka High Court
Controversy over Hijab
Hijab case
Women Rights
patriarchal society
Religious Freedom

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़

परदे से आज़ादी-परदे की आज़ादी: धर्म और शिक्षा से आगे चला गया है हिजाब का सवाल

हिजाब मामले पर कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम महिलाओं के साथ ज़्यादतियों को देगा बढ़ावा

सोनी सोरी और बेला भाटिया: संघर्ष-ग्रस्त बस्तर में आदिवासियों-महिलाओं के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा


बाकी खबरें

  • पीपल्स डिस्पैच
    वेनेज़ुएला में विश्व के नेता साम्राज्यवाद-विरोधी, नवउदारवाद-विरोधी संघर्षों के लिए एकजुट
    25 Jun 2021
    विश्व भर के 600 से अधिक नेता, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट और प्रतिनिधि एक अंतरराष्ट्रीय मंच में भाग लेने के लिए काराकस में मिले जिसका उद्देश्य दुनिया भर में साम्राज्यवाद और नवउदारवाद के ख़िलाफ़ लोगों के…
  • Emergency
    अजय गुदावर्ती
    मोदी सरकार को जनता का संदेश: हमें हल्के में न लें
    25 Jun 2021
    लोगों को कमतर आंके जाने की प्रवृत्ति, उनके भरोसे को भोलेपन की तरह देखना कोई नयी बात नहीं है। हालांकि, भारत के लोगों ने पहले भी तानाशाही पर रोक लगायी है और वे ऐसा फिर कर सकते हैं।
  • jharkhand
    सुमेधा पॉल
    झारखण्ड: आदिवासियों का कहना है कि सरना की पूजा वाली भूमि पर पुलिस थाने के लिए अतिक्रमण किया गया
    25 Jun 2021
    झारखण्ड में तिलमा गांव के आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि उनकी पूजा के लिए आरक्षित पवित्र भूमि को पुलिस ने हथिया लिया है, जो कि उनके भूमि अधिकारों और पेसा अधिनियम का उल्लंघन है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्वाज़ीलैंड में अभूतपूर्व लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों से अफ़्रीका के अंतिम सम्राट परेशान
    25 Jun 2021
    24 जून को स्वाज़ीलैंड में राजा मस्वाती तृतीय की सरकार ने लोकतंत्र समर्थक और राजशाही-विरोधी प्रदर्शनों की एक अभूतपूर्व राष्ट्र
  • Indira and Modi
    अजय सिंह
    इंदिरा निरंकुशता से मोदी निरंकुशता तक
    25 Jun 2021
    इंदिरा निरंकुशता के ख़िलाफ़ लड़ाई इतिहास में दर्ज है। मोदी निरंकुशता के ख़िलाफ़ लड़ाई की शुरुआत के आसार दिख रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License