NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक : कोरोना की आड़ में श्रम कानूनों में बदलाव के विरुद्ध ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन
ट्रेड यूनियनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कहा कि दिन में आठ घंटे काम करने और स्थायी रोज़गार के अधिकार श्रमिकों द्वारा लंबे और कठिन संघर्ष के बाद मिले हैं। इन्हें ऐसे ही नहीं गंवाया जा सकता।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 May 2020
कर्नाटक

यूपी, एमपी, गुजरात के बाद पूरे देश में मालिकों के साथ मिलकर सरकारों ने मज़दूरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तो अब मज़दूर और उनकी यूनियन भी इसके विरोध के लिए कमर कस रही हैं।

कर्नाटक में श्रम कानूनों में छूट देने के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ सभी ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रुप से प्रदर्शन किया। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ़ सेंट्रल ट्रेड यूनियन (JCTU) के बैनर तले सोमवार को बेंगलुरू के श्रम आयुक्त कार्यालय सामने विरोध प्रदर्शन किया गया। राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने मालिकों  की मदद के लिए मौजूदा श्रम कानूनों में ढील देने की योजना बनाई है ताकि उन्हें कोरोना से हुए नुकसान को कम किया जा सके। इस तरह का ज्वाइंट फोरम बनकर देश के अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। ऐक्टू ने 12-13 मई दो दिन के देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है।

इससे पहले, एक विज्ञप्ति में, JCTU ने कहा : " कोरोना लॉकडाउन के बहाने, मालिकों का संगठन राज्य सरकार के साथ मिलकर दिन के 12 घंटे काम करने के लिए पैरवी कर रहे हैं।" विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि मालिक इस लॉकडाउन में मज़दूरों की बिना किसी अनुमति के छंटनी और सभी श्रम अनुबंधों के काम से छुट्टी देने की मांग की है।  इसके ख़िलाफ 18 मई को ट्रेड यूनियनों ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।

JCTU ने कहा कि दिन में आठ-घंटे काम करने और स्थायी रोजगार के अधिकार श्रमिकों द्वार लंबे और कठिन संघर्ष के बाद मिले हैं। इन्हें ऐसे ही नहीं गंवाया जा सकता।

8bf3971f-be10-4cdd-ab96-0a6688e1d912.jpg

ख़बरों के मुताबिक, बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार कर्नाटक में भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात की तरह ही कुछ प्रमुख श्रम कानूनों में ढील देने की तैयारी में है। ये कानून वो हैं, जो राज्य में श्रमिकों के हितों को संरक्षण करते हैं, इसमें सबसे अहम काम की समाप्ति, छंटनी और कंपनी बंद करना, यहां तक कि यह सब बिना हितधारकों से परामर्श के किया जा सके यह शामिल हैं।

कारखाना अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम, अनुबंध श्रम (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के कार्यान्वयन में परिवर्तन किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने द हिंदू को बताया कि इन कानूनों में बदलाव उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के तर्ज पर हो सकते हैं।

श्रम विभाग के एक सूत्र के हवाले से कहा गया, "हम प्रस्तावित बदलावों पर उद्योग निकायों और ट्रेड यूनियनों दोनों के साथ चर्चा कर रहे हैं।"

शनिवार को, हालांकि श्रमिक संघों के साथ निर्धारित बैठक को स्थगित कर दिया गया था, विभाग ने उद्योग के नेताओं के साथ बैठक की और  इनपुट भी मांगे  हैं। कहा जा रहा है कि सरकार प्रतिदिन 12 घंटे की शिफ्ट और सप्ताह में 72 घंटे काम का प्रावधान कर रही है।

शुक्रवार को, सीएम येदियुरप्पा और उद्योग मंत्री जगदीश शेट्टार, एक उद्योग निकाय, एफकेसीसीआई को एक पत्र में, राज्य में नए निवेश को आकर्षित करने के लिए तीन साल के लिए मौजूदा श्रम कानूनों को स्थगित करने की मांग की थी। यह भी बताया गया था कि। जब अन्य राज्यों ने पहले ही श्रम कानूनों को स्थगित कर दिया है, अगर ऐसा नहीं किया तो कर्नाटक अवसरों को खो सकता है।

89c803a7-7fe1-4df3-91e7-a590f2fe212d.jpg

इसे पढ़ें :महामारी की आड़ और मोदी की मंज़ूरी, राज्यों का मज़दूरों के ख़िलाफ़ मोर्चा 

इस बीच, सेंट्रल ट्रेड यूनियन और फ़ेडरेशन के संयुक्त मंच ने सोमवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा तीन साल की अवधि के लिए सभी स्थायी श्रम कानूनों के तहत नियोक्ताओं को उनके दायित्वों से दी गई छूटों की निंदा की। 

यूपी में पहले ही अध्यादेश लाया जा चुका है और मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही किया जा रहा है। गुजरात में भी 1200 दिनों की अवधि के लिए इसी तरह का प्रावधान किया जा चुका है।   

JCTU ने कहा कि “पिछले 45 दिनों के लॉकडाउन में मज़दूरों को न सरकार ने भोजन दिया न वेतन, इस दौरान मजूदरों को केवल कष्ट मिला है और वो अमानवीय हालात में रह रहे हैं। सरकार ने इन्हे अब बंधुआ मज़दूर और गुलाम बना रही है। जबकि दूसरी तरफ परेशान प्रवासी मज़दूर भूख और पैदल चलकर थकावट और दुर्घटनाओं के कारण रास्ते में अपनी जान गँवा रहे है। वो अपने घरों तक पहुंचने के लिए रेलवे पटरियों और जंगलों के माध्यम से कई सैकड़ों मील की दूरी के सफ़र पर पैदल ही चल रहे हैं। अब केंद्र की सरकार ने खुद इस तरह के मजदूर विरोधी और जनविरोधी निरंकुश कदम उठाने के बजाय राज्य सरकारों द्वारा मालिकों को छूट देने की रणनीति अपनाई है, कई अन्य राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वे इसका पालन करें।"

इससे पहले, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विभिन्न श्रम कानूनों जैसे कि फैक्ट्रीज़ एक्ट, मध्य प्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम, अनुबंध श्रम अधिनियम आदि के तहत नियोक्ताओं को उनके मूल दायित्वों से छूट देने के निर्णय की घोषणा की थी।   नियोक्ताओं को मध्य प्रदेश श्रम कल्याण बोर्ड को प्रति मजदूर 80 रुपये कम भुगतान की भी छूट दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने, तीन साल की अवधि के लिए राज्य में चार श्रमकानूनों को छोड़कर सभी 38 श्रम कानूनों से सभी प्रतिष्ठानों को छूट के लिए एक अध्यादेश जारी कर दिया है। 

INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC सहित केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा जारी बयान में आगे कहा गया है कि  “केंद्रीय ट्रेड यूनियन इन कदमों को मज़दूरों  पर अमानवीय अपराध और क्रूरता मानते हैं, इसके अलावा  फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन (ILO कन्वेंशन 87), सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार (ILO कन्वेंशन 98) और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत आठ घंटे के कार्य दिवस के अधिकारों का घोर उल्लंघन हैं। इन सभी को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कोर कन्वेंशनों द्वारा माना गया था ।”

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए बदलाव से मजदूर वर्ग में आक्रोश है इसको लेकर भी सोमवार को मध्यप्रदेश में मज़दूर संगठनों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि  कारपोरेट के दबाव तथा कोरोना महामारी के चलते श्रमिक मजदूरों के काम के घंटे 8 से बढा़कर 12 घंटे किया जा रहा। मज़दूर संगठनों ने   श्रम कानूनों में की गई छेड़छाड़ को वापस लेने और मजदूरों को गुलाम बनाने की नीतियों के खिलाफ तथा पलायन कर रहे मजदूरों को भोजन यात्रा की व्यवस्था किए जाने की भी मांग को लेकर अपना विरोध जताया।

इसे भी पढ़ें : श्रम कानूनों को कमज़ोर करने के ख़िलाफ़ सात राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा

Coronavirus
COVID-19
Lockdown
karnataka
INTUC
AITUC
hms
CITU
AIUTUC
TUCC
SEWA
AICCTU
LPF
UTUC

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,919 नए मामले, 470 मरीज़ों की मौत
    18 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.37 फ़ीसदी यानी 1 लाख 28 हज़ार 762 हो गयी है।
  • New Rail Agreements
    एम. के. भद्रकुमार
    नये रेल समझौतों में मध्य एशिया के तेज़ एकीकरण की रूपरेखा का संकेत
    18 Nov 2021
    चीन, उज़्बेकिस्तान और पाकिस्तान जैसे प्रमुख क्षेत्रीय किरदारों के बीच इस बात का पूरा-पूरा अहसास है कि अफ़ग़ानिस्तान में क्षेत्रीय संपर्क और दीर्घकालिक शांति और स्थिरता आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए…
  • SKM haryana
    रवि कौशल
    हरियाणा के किसानों ने किया हिसार, दिल्ली की सीमाओं पर व्यापक प्रदर्शन का ऐलान
    18 Nov 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा, हरियाणा ज़िला स्तर पर किसानों को इकट्ठा करने के लिए कमेटी बनाएगा।
  • public education in India
    शिरीष खरे
    इतना अहम क्यों हो गया है भारत में सार्वजनिक शिक्षा के लिए बजट 2021?
    18 Nov 2021
    सार्वजनिक शिक्षा पर बजट के बारे में बात करने से पहले हमें इसकी एक बुनियादी बात भी रेखांकित करनी चाहिए कि सरकारी स्कूलों में धन कैसे आवंटित और खर्च किया जाता है। वहीं, इस क्षेत्र में प्रभावी वित्तपोषण…
  • AajKiBaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनावी मौसम में नये एक्सप्रेस-वे पर मिराज-सुखोई-जगुआर
    18 Nov 2021
    यूपी का चुनाव सिर्फ़ एक प्रदेश का चुनाव नहीं है, इसे 2024 के राष्ट्रीय आम चुनाव का सेमीफाइनल समझा जा रहा है. जिस शिद्दत से सत्ताधारी दल इस सेमीफाइनल को जीतने में लगा है, वैसी जबर्दस्त कोशिश विपक्षी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License