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खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा एक सप्ताह में निगम खोरीवासियों को अस्थायी रूप से घर आवंटित करे
कोर्ट ने आदेश दिया कि बेदख़ल परिवारों की ओर से जो भी क्लेम या दस्तावेज़ नगर निगम को प्राप्त हुए हैं उन्हें देखकर पात्रता सुनिश्चित करे और बिना वेरिफिकेशन किए पहले आवेदन देने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से आश्रय प्रदान किया जाए। अगली सुनवाई अगले 20 सितंबर को है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Sep 2021
Khori village

फरीदाबाद के खोरी गांव  से उजाड़े गए मजदूर परिवारों के पुनर्वास के संबंध में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम से कहा कि खोरीवासियों को एक सप्ताह में अस्थायी रूप से घर आवंटित करे।  कोर्ट ने  खोरी गांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हरियाणा सरकार एवं सरीना सरकार बनाम हरियाणा सरकार के मामले में न्यायाधीश खानविलकर की बेंच ने ये फैसला दिया की बेदखल परिवारों की ओर से जो भी क्लेम या दस्तावेज नगर निगम को प्राप्त हुए हैं उन्हें देखकर पात्रता सुनिश्चित करे और बिना वेरिफिकेशन किए पहले आवेदन देने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से आश्रय प्रदान किया जाए अर्थात घर दिया जाए। यह कार्य नगर निगम को एक सप्ताह में पूर्ण करना है। अगली सुनवाई अगले 20 सितंबर को रखी गई है।

निर्मल गोराना ने बताया की मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्यों एवं मानवाधिकार अधिवक्ताओं की ओर से 13 सितंबर, 2021 को खोरी गांव, राधा स्वामी सत्संग हाल एवं डबुआ एवं बापू कॉलोनी का विजिट किया गया जहां सरकार की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई या काम होता हुआ नही दिखा। जबकि बेदखल परिवार भयंकर बारिश में एक पन्नी में अपने परिवार को समेटे मलबे के ढेर पर अपने जीवन की ‘शवयात्रा’ निकालते पाए गए।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव की सदस्य फुलवा देवी ने बताया की जिन मजदूर परिवारों के दस्तावेज दिल्ली के है उनको भी कोर्ट आवास के रूप मे पुनर्वास देकर सामाजिक न्याय दे। मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव ने दिल्ली की आईडी वाले पुनर्वास देने की मांग कर रहा है।  
 
आपको बता दें कि फरीदाबाद के खोरी गांव में तोड़े गए 10,000 घरों के पुनर्वास के संबंध में इससे पहले छह सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस खानविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की बेंच ने सुनवाई की थी। खोरी गांव की जमीन के मालिकाना हक से संबंधित इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से 4 सप्ताह का समय मांगा था।

उस सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट अरुण भारद्वाज ने बताया कि हमने एक कंबाइन रिप्लाई फाइल किया है जिसमे हमारा वक्तव्य है कि हमने अभी बेदखल किए गए परिवारों को स्थायी रूप से पुनर्वास नहीं दिया है किंतु अस्थायी रूप से भोजन एवं आश्रय की सुविधा प्रदान की जा रही है।

राज्य सरकार की बात को सुनकर सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत को सूचित किया की सामाजिक कार्यकर्ताओं व वकीलों की एक टीम ने उक्त मामले में जांच कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है जो हरियाणा सरकार के तमाम दावों को झूठा साबित करती है। उक्त मामले में पिछली सुनवाई के दौरान माननीय उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया था कि घर टूटने से विस्थापित हुए परिवारों को तात्कालिक अस्थायी रूप से रहने एवं खाने का इंतजाम किया जाए।

कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत को पूरी स्थिति का ब्योरा दिया कि 150 में से केवल 75 परिवारों को वो भी केवल एक समय भोजन दिया जा रहा है जिसके लिए रोजाना उनको आश्रम जाना पड़ता है जो कि कम-से-कम तीन समय मिलना चाहिए। वहीं पीने का पानी, पहनने के लिए कपड़े और बिजली तो नहीं है साथ ही शौचालयों की दुर्व्यवस्था ऐसी है कि कोई भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या खड़ी हो सकती है।

डॉ. गोंजाल्विस ने अदालत को यह भी बताया कि बेदखल परिवारों से बिजली बिल मांगा जा रहा है और नहीं प्रस्तुत करने पर उनको भगा दिया जा रहा है जबकि उनके घर तोड़ने के दौरान उनके अलमारी वगैरह सब टूट गए ऐसे में वे बिजली बिल कहां से पेश करेंगे? साथ ही पुलिस भी रात बिरात आकर उनको वहां से भाग जाने के लिए डरा रही है।

इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने अदालत से विस्थापितों के स्थायी पुनर्वास की मांग रखी।

सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी परिवारों का बारी बारी से स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए एवं किसी प्रकार का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।  

निर्मल गोराना ने बताया कि बेदखल परिवारों को भगवान भरोसे मलबे के ढेर के पास छोड़ देना और उनकी परवाह न करना हरियाणा सरकार के लिए अत्यंत शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अस्थायी रूप से आश्रय एवं भोजन की सुविधा मिलनी चाहिए थी जोकि बेदखल परिवारों को आज तक नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार फरीदाबाद नगर निगम को बेदखल परिवारों की ओर से प्राप्त क्लेम के अनुसार तत्काल पुनर्वास की राहत देनी है जिसका क्रियान्वयन करने में फरीदाबाद प्रशासन एवं हरियाणा सरकार को रुचि लेने की जरूरत है। साथ ही उचित दस्तावेज़ वालो को पुनर्वास देकर तत्काल राहत देनी चाहिए।  
साथ ही अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए फरीदाबाद नगर निगम को कहा कि अदालती कार्रवाई की समाप्ति के बाद निगम के क्रियाकलापों की स्वतंत्र जांच करवाई जायेगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

Khori village
Khori
Swachchh Bharat Abhiyan
Supreme Court
Rehabilitation

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