NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
उत्पीड़न
मज़दूर-किसान
भारत
खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा एक सप्ताह में निगम खोरीवासियों को अस्थायी रूप से घर आवंटित करे
कोर्ट ने आदेश दिया कि बेदख़ल परिवारों की ओर से जो भी क्लेम या दस्तावेज़ नगर निगम को प्राप्त हुए हैं उन्हें देखकर पात्रता सुनिश्चित करे और बिना वेरिफिकेशन किए पहले आवेदन देने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से आश्रय प्रदान किया जाए। अगली सुनवाई अगले 20 सितंबर को है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Sep 2021
Khori village

फरीदाबाद के खोरी गांव  से उजाड़े गए मजदूर परिवारों के पुनर्वास के संबंध में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम से कहा कि खोरीवासियों को एक सप्ताह में अस्थायी रूप से घर आवंटित करे।  कोर्ट ने  खोरी गांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हरियाणा सरकार एवं सरीना सरकार बनाम हरियाणा सरकार के मामले में न्यायाधीश खानविलकर की बेंच ने ये फैसला दिया की बेदखल परिवारों की ओर से जो भी क्लेम या दस्तावेज नगर निगम को प्राप्त हुए हैं उन्हें देखकर पात्रता सुनिश्चित करे और बिना वेरिफिकेशन किए पहले आवेदन देने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से आश्रय प्रदान किया जाए अर्थात घर दिया जाए। यह कार्य नगर निगम को एक सप्ताह में पूर्ण करना है। अगली सुनवाई अगले 20 सितंबर को रखी गई है।

निर्मल गोराना ने बताया की मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्यों एवं मानवाधिकार अधिवक्ताओं की ओर से 13 सितंबर, 2021 को खोरी गांव, राधा स्वामी सत्संग हाल एवं डबुआ एवं बापू कॉलोनी का विजिट किया गया जहां सरकार की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई या काम होता हुआ नही दिखा। जबकि बेदखल परिवार भयंकर बारिश में एक पन्नी में अपने परिवार को समेटे मलबे के ढेर पर अपने जीवन की ‘शवयात्रा’ निकालते पाए गए।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव की सदस्य फुलवा देवी ने बताया की जिन मजदूर परिवारों के दस्तावेज दिल्ली के है उनको भी कोर्ट आवास के रूप मे पुनर्वास देकर सामाजिक न्याय दे। मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव ने दिल्ली की आईडी वाले पुनर्वास देने की मांग कर रहा है।  
 
आपको बता दें कि फरीदाबाद के खोरी गांव में तोड़े गए 10,000 घरों के पुनर्वास के संबंध में इससे पहले छह सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस खानविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की बेंच ने सुनवाई की थी। खोरी गांव की जमीन के मालिकाना हक से संबंधित इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से 4 सप्ताह का समय मांगा था।

उस सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट अरुण भारद्वाज ने बताया कि हमने एक कंबाइन रिप्लाई फाइल किया है जिसमे हमारा वक्तव्य है कि हमने अभी बेदखल किए गए परिवारों को स्थायी रूप से पुनर्वास नहीं दिया है किंतु अस्थायी रूप से भोजन एवं आश्रय की सुविधा प्रदान की जा रही है।

राज्य सरकार की बात को सुनकर सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत को सूचित किया की सामाजिक कार्यकर्ताओं व वकीलों की एक टीम ने उक्त मामले में जांच कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है जो हरियाणा सरकार के तमाम दावों को झूठा साबित करती है। उक्त मामले में पिछली सुनवाई के दौरान माननीय उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया था कि घर टूटने से विस्थापित हुए परिवारों को तात्कालिक अस्थायी रूप से रहने एवं खाने का इंतजाम किया जाए।

कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत को पूरी स्थिति का ब्योरा दिया कि 150 में से केवल 75 परिवारों को वो भी केवल एक समय भोजन दिया जा रहा है जिसके लिए रोजाना उनको आश्रम जाना पड़ता है जो कि कम-से-कम तीन समय मिलना चाहिए। वहीं पीने का पानी, पहनने के लिए कपड़े और बिजली तो नहीं है साथ ही शौचालयों की दुर्व्यवस्था ऐसी है कि कोई भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या खड़ी हो सकती है।

डॉ. गोंजाल्विस ने अदालत को यह भी बताया कि बेदखल परिवारों से बिजली बिल मांगा जा रहा है और नहीं प्रस्तुत करने पर उनको भगा दिया जा रहा है जबकि उनके घर तोड़ने के दौरान उनके अलमारी वगैरह सब टूट गए ऐसे में वे बिजली बिल कहां से पेश करेंगे? साथ ही पुलिस भी रात बिरात आकर उनको वहां से भाग जाने के लिए डरा रही है।

इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने अदालत से विस्थापितों के स्थायी पुनर्वास की मांग रखी।

सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी परिवारों का बारी बारी से स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए एवं किसी प्रकार का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।  

निर्मल गोराना ने बताया कि बेदखल परिवारों को भगवान भरोसे मलबे के ढेर के पास छोड़ देना और उनकी परवाह न करना हरियाणा सरकार के लिए अत्यंत शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अस्थायी रूप से आश्रय एवं भोजन की सुविधा मिलनी चाहिए थी जोकि बेदखल परिवारों को आज तक नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार फरीदाबाद नगर निगम को बेदखल परिवारों की ओर से प्राप्त क्लेम के अनुसार तत्काल पुनर्वास की राहत देनी है जिसका क्रियान्वयन करने में फरीदाबाद प्रशासन एवं हरियाणा सरकार को रुचि लेने की जरूरत है। साथ ही उचित दस्तावेज़ वालो को पुनर्वास देकर तत्काल राहत देनी चाहिए।  
साथ ही अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए फरीदाबाद नगर निगम को कहा कि अदालती कार्रवाई की समाप्ति के बाद निगम के क्रियाकलापों की स्वतंत्र जांच करवाई जायेगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

Khori village
Khori
Swachchh Bharat Abhiyan
Supreme Court
Rehabilitation

Related Stories

महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता

प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिशा निर्देश दिए?

क़ानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतारे जा रहे सफाईकर्मी

मध्यप्रदेश ओबीसी सीट मामला: सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अप्रत्याशित; पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा

ईडब्ल्यूएस आरक्षण की 8 लाख रुपये की आय सीमा का 'जनरल' और 'ओबीसी' श्रेणियों के बीच फ़र्क़ मिटाने वाला दावा भ्रामक

ओबीसी से जुड़े विधेयक का सभी दलों ने किया समर्थन, 50 फ़ीसद आरक्षण की सीमा हटाने की भी मांग  

"सरकार इंसाफ करें, नहीं तो हमें भी गटर में मार दे"

मराठा आरक्षण: उच्चतम न्यायालय ने अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राज्यों को नोटिस जारी किए

झारखंड: हेमंत सोरेन के "आदिवासी हिन्दू नहीं हैं" बयान पर विवाद, भाजपा परेशान!

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर बार बार उठते सवाल


बाकी खबरें

  • ganga
    सबरंग इंडिया
    गंगा मिशन चीफ ने माना- कोरोना की दूसरी लहर में लाशों से ‘पट’ गई थी गंगा, योगी सरकार करती रही इनकार
    27 Dec 2021
    कोरोना की विनाशकारी दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में गंगा नदी ‘लाशों को फेंकने की आसान जगह’ बन गई थी। ये दावा एक नई किताब में किया गया है जिसके लेखक नेशनल मिशन टू क्लीन गंगा के महानिदेशक और नमामि…
  • Adityanath and Yogi
    सुबोध वर्मा
    कितना प्रभावी है यूपी का 'डबल इंजन'? 
    27 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतक इस दावे को झूठा साबित करते हैं कि मोदी-योगी का 'डबल इंजन' शासन का मॉडल लोगों के लिए अच्छा है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,531 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 500 के पार पहुंचे 
    27 Dec 2021
    देश में ओमीक्रॉन का ख़तरा लगातार बढ़ता ही जा रहे है। ओमीक्रॉन देश के अब तक 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में फ़ैल चुका है, और कुल मामलों की संख्या बढ़कर 578 हो गयी है |
  • Narendra Singh Tomar
    अफ़ज़ल इमाम
    तोमर का बयान- एक तीर से दो निशाने !
    27 Dec 2021
    सूत्रों का मानना है कि किसानों की नई नवेली पार्टियों को मुद्दा थमाने के लिए तोमर ने यह बयान दिया है, ताकि इन दोनों राज्यों में उन्हें सक्रिय होने और जन समर्थन हासिल करने का मौका मिल सके।
  • Jammu and Kashmir
    द लीफलेट
    मुद्दा: जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग का प्रस्ताव आख़िर क्यों है विवादास्पद
    27 Dec 2021
    जहां जम्मू को छह नयी विधानसभा सीटें मिलेंगी,वहीं कश्मीर को महज़ एक और अतिरिक्त सीट से संतोष करना होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License