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किसान आंदोलन: पश्चिमी यूपी में तीन दिन में तीसरी महापंचायत, भाजपा को चेतावनी
शुक्रवार को मुज़फ़्फ़रनगर और शनिवार को मथुरा के बाद रविवार को बागपत के बड़ौत में किसानों की यह तीसरी महापंचायत थी। जिसमें ग़ाज़ीपुर बॉर्डर के प्रदर्शन को पूरा समर्थन दिया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
01 Feb 2021
किसान आंदोलन
बागपत के बड़ौत में महापंचायत। फोटो साभार : नवोदय टाइम्स 

बागपत (उत्तर प्रदेश), तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन का विस्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी तेज़ी से होता दिख रहा है जहां रविवार को बागपत में आयोजित महापंचायत में हजारों लोग शामिल हुए। इस क्षेत्र में तीन दिनों के अंदर यह ऐसा तीसरा आयोजन था। यह घटनाक्रम अपने आप में भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी ख़तरे की घंटी से कम नहीं है। क्योंकि इन इलाकों में भाजपा का अच्छा जनाधार माना जाता रहा है।

यहां बड़ौत तहसील मैदान पर हुई ‘सर्व खाप पंचायत’ में आसपास के जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर किसान बड़ी संख्या में पहुंचे। कई ट्रैक्टरों पर तो तेज आवाज में संगीत बज रहा था और बहुतों पर तिरंगे के साथ किसान यूनियनों का झंडा भी लगा था।

शुक्रवार को मुजफ्फरनगर और शनिवार को मथुरा के बाद यह क्षेत्र में किसानों की तीसरी महापंचायत थी। इन तीनों इलाकों में भाजपा के सांसद हैं। मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान, मथुरा से हेमामालिनी और बागपत से सत्यपाल सिंह सांसद हैं। इन इलाकों में किसानों की नाराज़गी ने बीजेपी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन तीनों महापंचायत में तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेतृत्व में होने वाले विरोध प्रदर्शन को समर्थन व्यक्त किया गया।

भाकियू नेता राजेंद्र चौधरी ने यहां मौजूद लोगों से कहा, ‘‘आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।’’

कार्यक्रम में शामिल हुए बड़ौत के एक स्थानीय निवासी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि महापंचायत में 26 जनवरी को बागपत जिले में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।

रविवार को हुई ‘सर्व खाप महापंचायत’ में पहुंचने वाले प्रमुख क्षेत्रीय किसान नेताओं में देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह और चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष सिंह शामिल थे। इसके अलावा अजीत सिंह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और आप के समर्थक भी महापंचायत में मौजूद थे।

शाम में महापंचायत की समाप्ति की घोषणा करने से पहले देश खाप के प्रमुख चौधरी सुरेंद्र सिंह ने भीड़ से कहा, ‘‘स्थिति को समझें और दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ना शुरू करें और गाजीपुर तथा सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन को पूर्ण समर्थन दें।’’

देश खाप के एक अन्य नेता ब्रजपाल चौधरी ने कहा कि अब लड़ाई किसानों के आत्मसम्मान की है।

उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस और प्रशासन बल से आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जब तक नए कानून वापस नहीं लिए जाते यह समाप्त नहीं होगा।’’

चौधरी हरिपाल सिंह ने महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों के एकत्र होने पर प्रसन्नता जतायी।

एक स्थानीय नेता ने मंच से भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘बेशक दिल्ली में पुलिस वालों ने किसानों को डंडे मारे हों, पर हम आज भी ‘जय जवान जय किसान’ बोलते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ भी हो उसका जवाब हम अहिंसा से देंगे, हिंसा से नहीं। प्रदर्शन स्थल पर हमारे नेता और हमारे पंच (पंचायत के नेता) फैसला करेंगे और हम उसका पालन करेंगे।’’

गणतंत्र दिवस पर ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हुई हिंसा जिसको लेकर सरकार की भूमिका पर भी सवाल है, के बाद बहुत लोग ये आशंका जता रहे थे, कि अब किसान आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। गाजीपुर बॉर्डर का मोर्चा ज़रूर कुछ कमज़ोर लगा लेकिन भाकियू नेता राकेश टिकैत की भावनात्मक अपील ने इसमें नई जान फूंक दी और गाजीपुर स्थित प्रदर्शन स्थल पर हजारों की संख्या में किसान जुट गए और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयोजित हो रही महापंचायतों में भी किसानों की काफी भीड़ जुट रही है।

ग़ाज़ियाबाद के भाजपा नेता ने पार्टी विधायक को निष्कासित करने की मांग की

गाजियाबाद में भाजपा में अंदरूनी कलह रविवार को तब सामने आयी जब एक स्थानीय नेता ने एक विधायक को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की। इस विधायक पर पिछले हफ्ते गाजीपुर प्रदर्शन स्थल पर किसानों को धमकाने का आरोप है।

लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर को निष्कासित करने की मांग भाजपा के स्थानीय नेता और लोनी नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष मनोज धामा ने की है।

नंद किशोर ने हालांकि आरोपों से इनकार किया है और कहा कि अगर उनके खिलाफ आरोप साबित हो जाएंगे तो वह इस्तीफा दे देंगे।

उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत पर उनका नाम लेकर झूठ बोलने और देश के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले धामा ने पीटीआई-भाषा से कहा, "वह (नंद किशोर) वहां गए थे, उन्होंने प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे किसानों को धमकाया जिससे तनाव बढ़ा।"

उन्होंने कहा, "सरकार और प्रशासन ने आंदोलन खत्म करने के वास्ते प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए कड़ी मशक्कत की थी। वहां जाकर उन्होंने क्या किया, हमारे प्रयासों को नुकसान पहुंचाया और पार्टी की छवि धूमिल की। मेरा मानना है कि पार्टी के खिलाफ काम करने वाले ऐसे व्यक्ति को निष्कासित कर देना चाहिए और पार्टी से बाहर कर देना चाहिए।"

धामा ने यह भी आरोप लगाया कि नंद किशोर ने उनके और अन्य के खिलाफ सामूहिक बलात्कार के आरोप में और एससी/एसटी अधिनियम में "झूठी" प्राथमिकियां दर्ज करा दीं। उनकी पत्नी को भी इन मामलों में फंसाया गया है।

धामा लोनी नगर निगम की मौजूदा अध्यक्ष रंजीता धामा के पति हैं।

भारतीय किसान यूनियन के एक सदस्य ने शुक्रवार को गाजियाबाद के कौशांबी थाने में शिकायत दर्ज कराके लोनी के विधायक और साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा पर किसानों को धमकाने का आरोप लगाया था।

लोकतंत्र का मज़ाक बनाए जाने के बाद किसान आंदोलन के लिए राजनीतिक समर्थन लिया : राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में राजनीतिक दलों को नहीं घुसने दिया था लेकिन प्रदर्शन स्थलों पर ‘‘लोकतंत्र का मजाक बनाए जाने’’ के बाद ही उसने राजनीतिक समर्थन लिया।

गाजीपुर में दिल्ली-मेरठ राजमार्ग पर प्रदर्शन स्थल पर सैकड़ों की संख्या में किसानों के जुटने की पृष्ठभूमि में टिकैत ने यह टिप्पणी की।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड से बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर सीमा पर जुट रहे हैं।

एक सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा, ‘‘संयुक्त किसान मोर्चा ने राजनीतिक दलों को अपने आंदोलन में प्रवेश नहीं करने दिया था क्योंकि हमारा आंदोलन गैर राजनीतिक है। प्रदर्शन को लेकर लोकतंत्र का मजाक बनाए जाने के बाद, राजनीतिक दलों से समर्थन लिया गया। इसके बावजूद, नेताओं को किसान आंदोलन के मंच से दूर रखा गया है।’’

गाजीपुर बॉर्डर पर टिकैत से मिलने आए शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा, ‘‘मोदी साब नु किसाना दी मन दी गल सुननी चाहिदी है।’’ शिअद कृषि कानूनों को लेकर केन्द्र में सत्तारूढ़ राजग से रिश्ता तोड़ चुका है।

सरकार इंटरनेट पर रोक लगाकर किसानों की आवाज़ दबाने पर आमादा है : कांग्रेस

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आंदोलन स्थलों के आसपास इंटरनेट सेवा पर रोक लगा कर किसानों की आवाज दबाने पर आमादा है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन को कुचलने के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई है। उन्होंने इंटरनेट सेवा बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि आम लोगों के साथ-साथ छात्रों को भी काफी परेशानी हो रही है जिनकी परीक्षाएं होने वाली हैं।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा सरकार लोकतंत्र की अनदेखी कर किसान आंदोलन को दबाने और नाकाम करने पर आमादा है। सरकार उन स्थानों के आसपास इंटरनेट कनेक्शनों पर रोक लगा रही है जहां आंदोलन चल रहे हैं।"

उन्होंने ट्वीट किया, " मैं हमारे अन्नदाताओं पर इस सरकार द्वारा इस तरह के अत्याचार का विरोध करता हूं। शर्म करो भाजपा। शेम, शेम।"

चौधरी ने दावा किया, " भाजपा आंसुओं से डर गई है। किसानों की आंखों से निकले आंसुओं की ताकत ने भाजपा को हिला दिया है जो हर मौके का इस्तेमाल घड़याली आंसू बहाने के लिए करती है।"

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन कानूनों पर 18 महीने के लिए रोक लगा दी गई है।

उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि संसदीय समिति को यह समय इन कानूनों का परीक्षण करने और संसद को रिपोर्ट करने के लिए क्यों नहीं दिया गया।

पार्टी के अन्य नेता विवेक तन्खा ने भी रमेश की बात का समर्थन किया।

उन्होंने ट्विटर पर कहा, " मोदी जी की मंशा पीछने हटने की नहीं है। हालांकि सरकार चिंतित है लेकिन उनका मकसद वार्ताओं आदि को विभाजित करना और किसानों को थकाना है। इस बार उन्होंने गलत नंबर मिला दिया है। "

शिअद ने सिंघु बॉर्डर पर स्वतंत्र पत्रकार की गिरफ्तारी की निंदा की

चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने सिंघु बॉर्डर पर स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया की गिरफ्तारी की रविवार को निंदा की और आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलकर तानाशाही रवैया अपना रही है।

मनदीप पुनिया को सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था। उनके ऊपर पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।

शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक बयान में कहा, "सभी अच्छे लोकतंत्र मीडिया को निडर होकर रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कई पत्रकारों ने जारी 'किसान आंदोलन' के दौरान ऐसा किया और दमनकारी कृत्यों के पीछे का सच सामने लाया। यह चौंकाने वाला है कि मामले में न्याय सुनिश्चित करने के बजाय, दिल्ली पुलिस ने पत्रकार मनदीप पुनिया को गिरफ्तार कर लिया जिन्होंने इस घटना को कवर किया और उन्हें जेल में बंद कर दिया गया।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ‘‘प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलकर तानाशाही रवैया अपना रही है।’’

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