NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन अपडेट: छठे दौर की वार्ता के लिए सरकार और किसान बातचीत की टेबल पर
प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने बुधवार को दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित वार्ता के संबंध में मंगलवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखा और कहा कि चर्चा केवल तीन कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैध गारंटी देने पर ही होगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Dec 2020
किसान आंदोलन अपडेट: छठे दौर की वार्ता के लिए सरकार और किसान बातचीत की टेबल पर
फ़ाइल फोटो

दिल्ली : किसान पिछले एक महीने से अधिक से इस भीषण ठंड में सरकार द्वारा लाए गए तीन नए विवादित कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। लेकिन सरकार उनकी मांग मानाने को तैयार नहीं और किसान कानूनों की वापसी से कम पर तैयार नहीं। इसको लेकर दोनों पक्षों के बिच पांच दौर की वार्ता हो चुकी और सभी बेनतीजा रही हैं। ऐसे में आज, 30 दिसंबर को किसान और सरकार के बिच एकबार फिर से 22 दिनों के बाद बातचीत शुरू हो रही है। बुधवार दोपहर दो बजे से बातचीत हो रही है, इससे पहले ही किसानो ने सरकार को पत्र लिखकर वार्ता के एजेंडे को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि चर्चा केवल तीन कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैध गारंटी देने पर ही होगी।

सरकार भी किसानों के मसले को लेकर अपने मंथन कर रही है। इसी सिलसिले में देश के गृह मंत्री ने वार्ता में शामिल सभी मंत्रियो से वार्ता की है। इस बीच, केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने सरकार के साथ होने वाली बातचीत के मद्देनजर अपना प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च बृहस्पतिवार तक स्थगित कर दिया है।

किसानों ने केंद्र को लिखा पत्र, अपना एजेंडा स्पष्ट किया

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने बुधवार को दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित वार्ता के संबंध में मंगलवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखा और कहा कि चर्चा केवल तीन कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैध गारंटी देने पर ही होगी।

 साथ ही वार्ता बहाल करने के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में उठाए गए दो अन्य मुद्दों को भी प्रस्तावित वार्ता के दौरान शामिल करने की मांग की गई है।

40 किसान यूनियन का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि बैठक के एजेंडे में एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश में संशोधन को शामिल किया जाना चाहिये ताकि किसानों को दंडात्मक प्रावधानों से बाहर रखा जा सके।

पत्र में यह भी कहा गया कि किसानों के हितों की रक्षा के वास्ते बिजली संशोधन विधेयक 2020 को वापस लिए जाने का मुद्दा भी वार्ता के एजेंडे में शामिल होना चाहिए।

इससे पहले 26 दिसंबर को भी किसानों ने वार्ता की एजेंडा सूची के बाबत सरकार को पत्र लिखा था।

हालिया पत्र में मोर्चा ने 26 दिसंबर के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि तब उसने भूलवश 'वापसी' के बजाय बिजली संशोधन विधेयक में 'बदलाव' का जिक्र किया था।

किसानों के साथ वार्ता से पहले तोमर, गोयल ने की अमित शाह से मुलाकात

केंद्र और किसानों के बीच अगले दौर की वार्ता से एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों ने इस बैठक में इस बारे में चर्चा की कि बुधवार को किसानों के साथ होने वाली वार्ता में सरकार का क्या रुख रहेगा।

सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक हुई पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।

अब तक हुई पांच दौर की बातचीत में पिछले दौर की वार्ता पांच दिसंबर को हुई थी। छठे दौर की वार्ता नौ दिसंबर को होनी थी, लेकिन इससे पहले गृह मंत्री शाह और किसान संगठनों के कुछ नेताओं के बीच अनौपचारिक बैठक में कोई सफलता न मिलने पर इसे रद्द कर दिया गया था।

सरकार ने तीनों नए कृषि कानूनों को बड़े कृषि सुधार करार दिया है और कहा है कि इनसे किसानों की आय बढ़ेगी, लेकिन प्रदर्शनकारी किसान संगठनों का साफ कहना है कि इनकी वजह से न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी प्रणाली खत्म हो जाएगी तथा वे बड़े उद्योग घरानों की दया पर निर्भर हो जाएंगे।

किसान संगठन मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम के खिलाफ : बीकेयू एकता उग्रहां नेता

पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को कहा कि वे मोबाइल टावरों या अन्य सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे विभिन्न किसान संगठनों ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने को कहा है।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहां) के महासचिव सुखदेव सिंह ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन ऐसी चीजों के खिलाफ हैं। हम कभी भी ऐसी चीजों का समर्थन नहीं करते हैं, जहां कुछ लोग मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाते हैं या सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं।”

सरकार से बातचीत के मद्देनजर किसानों का ट्रैक्टर मार्च स्थगित

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने बुधवार को सरकार के साथ होने वाली बातचीत के मद्देनजर अपना प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च बृहस्पतिवार तक स्थगित कर दिया है।

इससे पहले, 40 किसान संगठनों के समूह ’संयुक्त किसान मोर्चा’ ने घोषणा की थी कि 30 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर से कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) राजमार्ग तक ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘सरकार के साथ बातचीत को देखते हुए हमने ट्रैक्टर मार्च टालने का फैसला किया है। अब किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ ये मार्च 31 दिसंबर को निकालेंगे।’’

पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई राज्यों से आए लाखों किसान दिल्ली के निकट सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, शाहजहांपुर बॉर्डर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

 

Kisan andolan update
bkp Government
farmers protest
kisan andolan

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

किसान आंदोलन ने देश को संघर्ष ही नहीं, बल्कि सेवा का भाव भी सिखाया


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License