NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज
अतिक्रमण के नाम पर ग़रीबों के घऱ पर चलाए जा रहे बुलडोज़र के खिलाफ वामदलों के साथ तमाम संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल आवास के बाहर ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।
रवि शंकर दुबे, मुकुंद झा
11 May 2022
दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

देश के मुसलमानों, गरीबों, दलितों पर चल रहे सरकारी बुलडोज़र और सरकार की तानाशाही के खिलाफ राजधानी दिल्ली में तमाम वाम दलों के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं, और संघर्षशील संगठनों ने उपराज्यपराल अनिल बैजल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।

सभी प्रदर्शनकारी कश्मीरी गेट पर तिकोना पार्क के पास इकट्ठा हुए और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए उपराज्यपाल के घर की ओर बढ़े। इस दौरान तानाशाही से आज़ादी, बंद करो बुलडोज़र की राजनीति, अभी तो बस अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल अनिल बैजल के खिलाफ नारे लगे।

इस प्रदर्शन में सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई-एमएल, एआईएफबी, एडवा, आईसा, आआईएसएफ, एसएफआई, सीएसडब्ल्यू, डीटीएफ, डीवाईएफआई समेत कई संगठन शामिल हुए।

kashmere gate protest

इन सभी संगठनों ने मोदी सरकार पर देश में लगातार बढ़ रही बेरोज़गारी, लचर होती स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा की बदहाली, और महंगाई के मुद्दों को पीछे छोड़ देश में नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया। इस दौरान प्रदर्शन में पहुंची पूर्व राज्यसभा सांसद और सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने लोगों को संबोधित किया। वृंदा करात ने कहा कि मोदी सरकार सिर्फ देश में नफरत की राजनीति कर रही है। देश में जो मुद्दे सुलझाए जाने चाहिए उन्हें दरकिनार कर सिर्फ एक तबके को परेशान किया जा रहा है। वृंदा करात ने कहा कि ये सिर्फ नारे लगाने, और भाषण देने का वक्त नहीं है, बल्कि संघर्ष करने का समय है, अपने-अपने हकों के लिए लड़ने का वक्त है। ये वक्त है सरकार के खिलाफ डटकर खड़े होने का। वृंदा करात ने कहा कि सरकार का सरकारी बुलडोज़र सिर्फ चुनिंदा लोगों के घरों और दुकानों पर चलता है। राजधानी के अंदर एक तबके को टारगेट कर उनके घर और दुकाने तोड़ी जा रही हैं। उन्होंने शाहीन बाद के लोगों की तारीफ की और कहा कि शाहीन बाग के लोगों से सीखना चाहिए, सरकार का बेलगाम बुलडोज़र अपनी मनमानी करने आया तब वहां के लोग इकट्ठा हुए और सरकार को झुकना पड़ा।

brinda karat

वृंदा करात ने कहा कि सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि इस सरकार की नज़र दलितों, गरीबों और मज़लूमों पर है, फिर चाहे वो अमीर हो या फिर ग़रीब। वृंदा करात के भाषण के बाद लोगों के नारे और ज्यादा बुलंद हुए।

लोगों ने पुलिस की बेरिकेटिंग हटाकर उपराज्यपाल के घर पहुंचने की कोशिश की लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को दूर ही रोक दिया, हांलाकि प्रदर्शनकारियों ने समझदारी का परिचय देते हुए और किसी तरह का कोई उन्माद न फैले, इसके लिए बैरिकेडिंग के पास बैठकर ही घंटो तक प्रदर्शन किया।

144

न्यूज़क्लिक ने जब अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) की राज्य अध्यक्ष मैमूना मौल्ला से सरकारी बुलडोज़र की बेलगामी पर सवाल किए, तो उन्होंने कहा कि सरकार का मंसूबा साफ है कि अतिक्रमण के नाम पर ग़रीबों, दलितों और मुसलमानों को टारगेट किया जाए। मैमूना ने कहा कि सरकार के टारगेट पर सिर्फ मुस्लिम बस्तियां हैं, हालांकि ये कुछ ऐसे भी इलाकों में बुलडोज़र लेकर पहुंचते हैं जहा हिन्दू रहते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश वहां भी गरीब ही होते हैं। मैमूना ने कहा कि ये सरकार दरअसल बुलडोज़र के ज़रिए ये मैसेज़ देना चाहती है कि जब चाहे कुछ भी कर सकती है। मैमूना ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में बढ़ रही बेरोज़गारी, महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर काम करने के अलावा गरीबों के घऱों को तोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि आज वाम दलों के साथ-साथ छात्रों ने भी सरकार के खिलाफ आवाज़ा बुलंद करने का फैसला किया है।

protest

प्रदर्शन में सीआईटीयू के भी तमाम सदस्य पहुंचे, जिन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता, उपराज्यपाल अनिल बैजल, और भाजपा के बुलडोज़र के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान न्यूज़क्लिक ने सीआईटीयू के राज्य सचिव सिद्देश्वर शुक्ला से बात की। सिद्धेश्वर शुक्ला ने सरकार की इस बुलडोज़र की राजनीतिक को नफरत की राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को नफरत की राजनीति बंद कर देश के विकास की ओर ध्यान चाहिए।

सीपीआई-एमएल के राज्य सचिव रवि राय से जब न्यूज़क्लिक ने बात की तो उन्होंने कहा कि सरकार अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता सिर्फ एक चिट्ठी लिखते हैं और बुलडोज़र गरीबों का मकान तोड़ना शुरू कर देता है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी बुलडोज़र जहांगीरपुरी पहुंचा तब सरकारी नुमाइंदों के पास कोई काग़ज नहीं था। हालांकि जिनकी दुकानों और घर तोड़े जा रहे थे, उन्होंने बकायदा पर्चियां दिखाईं, जिसके ज़रिए एमसीडी को पैसे जाते हैं, इसके बावजूद गरीबों पर दया नहीं की गई। और दुकानें मकान बुलडोज़ कर दिए गए।

इस प्रदर्शन में वो महिलाएं भी शामिल हुईं जिनका जामियानगर धोबीघाट में घर तोड़ दिया गया था। जब न्यूज़क्लिक ने महिलाओं से उनके घर तोड़े जाने के बारे में सवाल किए तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। महिलाओं का कहना था कि बिना उनसे पूछे अचानक से उनका समान बाहर फेंक दिया गया, और उनके घरों को बुलडोज़ कर दिया गया। महिलाओं का कहना था कि घर टूटने के कारण भीषण गर्मी में वो पन्नियां तानकर रहने को मजबूर हैं।

इस प्रदर्शन के ज़रिए युवाओं, महिलाओं और शिक्षकों ने मोदी सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल को चेतावनी दी कि अगर गरीबों के खिलाफ ये अत्याचारी और अतिक्रमण के नाम पर उनका घर उजाड़ने का काम बंद नहीं हुआ तो ये प्रदर्शन आंदोलन में तब्दील होगा।

आपको बता दें कि इस प्रदर्शन में लोगों ने देश से जुड़े अन्य मुद्दों, जैसे, बेरोज़गारी, महंगाई, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए।

CPI
CPIML
BULDOZER POLITICS
DELHI GOV.
VRANDA KARAT
Anil Baijal
ADESH GUPTA
JAHANGEERPURI
SHAHINBAGH
left parties
SFI

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    लखीमपुर खीरी कांड : एसआईटी ने दाखिल किया 5000 पन्नों का आरोप पत्र
    03 Jan 2022
    आपको बता दें कि 3 अक्टूबर, 2021 को गाड़ियों से कुचलकर चार किसानों की जान लेने के मामले में एसआईटी को 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना था। आज आख़िरी ही दिन था। इसका स्वागत किया जाना चाहिए...हालांकि…
  • energy
    प्रबीर पुरकायस्थ
    यूरोप में गैस और बिजली के आसमान छूते दाम और भारत के लिए सबक़
    03 Jan 2022
    सर्दियों में यूरोपीय यूनियन में गैस के दाम आकाश छूने लगते हैं, जैसा कि पिछले साल हुआ था और इस बार फिर से हुआ है।
  • Savitribai Phule
    राज वाल्मीकि
    मौजूदा दौर में क्यों बार बार याद आती हैं सावित्री बाई फुले
    03 Jan 2022
    जयंती पर विशेष: आज सावित्री बाई को इसलिए भी याद किया जाना जरूरी है कि जिस मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़कर सावित्री बाई फुले ने औरतों के लिए जगह बनाई थी, वही आज दोबारा हावी हो रही है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    सावधान : देश में तीन महीने बाद कोरोना के 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए
    03 Jan 2022
    देश में कोरोना के मामलों में बहुत तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के 33,750 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वहीं ओमीक्रॉन के मामलो की संख्या बढ़कर 1,700 हो गयी है।
  • UNEMPLOYMENT
    सुबोध वर्मा
    बिना रोज़गार और आमदनी के ज़िंदा रहने को मजबूर कई परिवार
    03 Jan 2022
    नवीनतम सीएमआईई आंकड़ों से पता चलता है कि काम करने वाले दो सदस्यों वाले परिवारों की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है। इसका मतलब है कि लोग बहुत कम आय पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License