NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल
देश भर में एलआईसी के क्लास 3 और 4 से संबंधित 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज करने के लिए दो घंटे तक काम रोके रखा।
रौनक छाबड़ा, निखिल करिअप्पा
05 May 2022
Translated by महेश कुमार
LIC
एलआईसी कर्मचारियों ने बुधवार को जीवन भारती बिल्डिंग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली के सामने किया विरोध प्रदर्शन। तस्वीर : रौनक छाबड़ा।

नई दिल्ली और बेंगलुरु: देश भर में जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शाखाओं और मंडल और जोनल कार्यालयों में "एलआईसी आईपीओ, डाउन, डाउन" के नारे गूंजते रहे क्योंकि बीमा कर्मचारियों ने बुधवार को आईपीओ लॉन्च के खिलाफ दो घंटे के लिए काम से वॉकआउट कर हड़ताल की थी।

अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी एसीसिएशन (एआईआईईए) और अखिल भारतीय एलआईसी कर्मचारी यूनियन द्वारा, संयुक्त रूप से बुलाई गई हड़ताल में, देश भर के विभिन्न कार्यालयों के लगभग 80,000 कर्मचारियों में से 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जो कि क्लास 3 और 4 से संबंधित हैं। 

नरेंद्र मोदी सरकार को तीन दिन की सब्स्क्रिप्शन के ज़रिए एलआईसी में 3.5 प्रतिशत  हिस्सेदारी को बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है।

बीमा कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि शेयर की बिक्री, जो एलआईसी के "निजीकरण की तरफ पहला कदम" है, न तो उसके "लाखों पॉलिसीधारकों" और न ही राष्ट्र के हित में है। यूनियनों ने आने वाले दिनों में पॉलिसीधारकों के बीच सार्वजनिक अभियान चलाकर और इस मामले पर सरकार के कदम को चुनौती देकर "एलआईसी को बचाने" के अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया है।

एआईआईईए के राष्ट्रीय महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने हैदराबाद से फोन पर न्यूज़क्लिक को बताया कि हड़ताल की कार्रवाई को "जबरदस्त समर्थन" मिला है। उनके अनुसार, एलआईसी की 2,048 शाखाएं हैं, साथ ही देश भर में 113 मंडल कार्यालय हैं और आठ जोनल कार्यालय हैं। "और, लगभग सभी कर्मचारियों ने लगभग दो घंटे की हड़ताल की और विरोध प्रदर्शन किया है।" 

दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित जीवन भारती भवन में एलआईसी के उत्तरी क्षेत्र के कार्यालय के लगभग सौ कर्मचारियों ने काम पर रोक लगा दी। मोदी सरकार द्वारा एलआईसी के मूल्यांकन को कम करने और शेयर को सस्ते में बेचने पर कर्मचारियों ने केंद्र को फटकार लगाई है- सार्वजनिक बीमाकर्ता का मूल्य पहले के अनुमान लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले अब  6 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

एआईआईईए के उपाध्यक्ष एके भटनागर ने हड़ताली कर्मचारियों से कहा, "एलआईसी के मूल्यांकन को कम करके, सरकार ने लाखों एलआईसी पॉलिसीधारकों को धोखा दिया है, जिन्होंने इस कंपनी को बनाने में वर्षों से योगदान दिया है।"

एआईआईईए के उपाध्यक्ष एके भटनागर, दिल्ली में हड़ताली एलआईसी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए। तस्वीर : रौनक छाबड़ा।

भटनागर ने बाद में न्यूज़क्लिक को बताया कि बीमा कर्मचारियों की "इतनी सारी चिंताओं" के बावजूद केंद्र द्वारा आईपीओ को लॉन्च करने से "बहुत दुखी" हैं। ये "मुद्दे न केवल कर्मचारियों द्वारा बल्कि राजनीतिक दलों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और अन्य क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा भी उठाए गए थे।"

मिश्रा ने कहा कि यह हड़ताल एक “प्रतीकात्मक” विरोध था और “एलआईसी को बचाने” का संघर्ष अभी जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया, "हम आम जनता को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाना चाहते हैं क्योंकि यह आईपीओ और कुछ नहीं बल्कि एलआईसी के पूरी तरह से निजीकरण का पहला कदम है।"

एआईआईईए, जो बीमा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी यूनियनों में से एक है, आने वाले हफ्तों में केरल के विभिन्न जिलों में “करीब 10,000” जनसभाएं करेगी। उन्होंने कहा, "हम उस राज्य में इस अभियान का प्रयोग कर रहे हैं और इसके सफल होने पर हम इसे अन्य राज्यों में भी दोहराएंगे।"

बेंगलुरु में, एलआईसी के मंडल कार्यालय के लगभग सौ कर्मचारियों ने दो घंटे का वाकआउट किया। “सरकार एलआईसी की उन संपत्तियों को सौंपने की कोशिश कर रही है, जिन्हें हमने सस्ते दर पर बनाया था। एलआईसी भवनों और संपत्तियों का निर्माण पॉलिसीधारकों के पैसे और एजेंटों और कर्मचारियों के पसीने और परिश्रम से किया गया था, “एआईआईईए के पूर्व अध्यक्ष अमानुल्ला खान ने विरोध जाताते हुए उक्त बातें बताई। "आप इसे किसी ऐसे व्यक्ति को कैसे सौंप सकते हैं जिसने इसके विकास में कोई योगदान नहीं दिया, सिर्फ इसलिए कि वे इससे लाभ कमा सकें?"

न्यूज़क्लिक ने इससे पहले एक लेख प्रकाशित किया था कि कैसे खुदरा और संस्थागत निवेशकों को लाभ पहुंचाने के लिए एलआईसी की कीमत को कम आंका गया है। एलआईसी के शेयरों का मूल्यांकन 1.1 के गुणन कारक को लागू करके किया गया है जबकि छोटी बीमा कंपनियों ने 3 या 4 के गुणन कारक को लागू किया है। गुणन कारक किसी भी कंपनी को भविष्य की कमाई के आधार पर खुद की लागत लगाने की अनुमति देता है जिससे कंपनी के विकास में मूल्य निर्धारण होता है। यह कंपनी को हिस्सेदारी बिक्री के माध्यम से अधिक धन जुटाने की अनुमति देता है।

एलआईसी कर्मचारी यूनियन (बेंगलुरु डिवीजन) के अध्यक्ष टीके परमेश्वर ने न्यूज़क्लिक को बताया, "केवल वही कंपनी, जो अच्छा व्यापार नहीं कर रही है या जिसे व्यवसाय के लिए धन जुटाने की जरूरत है, पूंजी बाजार में जाती है। लेकिन एलआईसी खुद अन्य निगमों को पैसा देने या अन्य उद्योगों को उबारने की स्थिति में है। एलआईसी ने पहले आईडीबीआई बैंक, आईएलएंडएफएस और अन्य जैसी कई कंपनियों के समर्थन में आई थी। 

परमेश्वर ने कहा, “पिछले वित्तीय वर्ष में, नई नीतियों के संदर्भ में बाजार की वृद्धि 3.5 प्रतिशत थी। एलआईसी की बढ़त 3.56 प्रतिशत रही थी। इतनी सारी निजी बीमा कंपनियों के आने के बावजूद एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी आज भी 64 फीसदी है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि लोग एलआईसी के साथ हैं।” 

विरोध करने वाले अधिकांश कर्मचारी यूनियन से जुड़े लिपिक कर्मचारी थे। छंटनी के खतरे के कारण अधिकांश अधिकारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। गीता एसके, जो 36 वर्षों से एलआईसी के साथ हैं, ने कहा, “पॉलिसीधारकों से जुटाए धन को सरकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पुनर्निवेश करती है। इससे जनता को फायदा होता है। हालाँकि, आईपीओ से आबादी के केवल एक छोटे प्रतिशत को ही लाभ हो सकता है। सरकार केवल अपनी विनिवेश नीति को लागू करना चाहती है, जनता की मदद नहीं करना चाहती है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित हुए इस आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:- 

LIC Employees Strike in Protest Against IPO Launch

LIC
IPO
Privatisation
All India Insurance Employees’ Association
All India LIC Employees’ Federation
Narendra modi
BJP
Stake Sale
Bengaluru
Delhi
AIIEA

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    क्या अब देश अघोषित से घोषित आपातकाल की और बढ़ रहा है!
    29 Nov 2021
    अपने शासन के खिलाफ बढ़ते  विरोध से मोदी परेशान हैं और उन्हें लगता है कि इन आंदोलनों को संविधान प्रदत्त अधिकारों से ताकत और वैधता हासिल हो रही है। इसीलिए अब वे इन अधिकारों के खिलाफ opinion building में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License