NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
लखीमपुर हिंसा: अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी और गिरफ़्तारी की मांग को लेकर पीलीभीत में ‘न्याय महापंचायत’
बुधवार को लखीमपुर खीरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय में की जा रही सुनवाई का ज़िक्र करते हुए किसान नेताओं का आरोप था कि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज किये बग़ैर मामले की न्यायसंगत जांच हो पाना संदेहास्पद है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
16 Nov 2021
Lakhimpur Violence

लखनऊ: लखीमपुर खीरी कांड की निष्पक्ष जांच एवं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को उनके पद से बर्खास्त किये जाने की मांग को दोहराते हुए उत्तरप्रदेश के पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के हरसिंगपुर गांव में रविवार की दोपहर को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले ‘न्याय महापंचायत’ का आयोजन किया गया था।

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष की अगुआई कर रहे किसान यूनियनों के प्रमुख संगठन के तौर पर एसकेएम ने इस नरसंहार की निष्पक्ष जांच पर अपना संदेह व्यक्त किया है।

एसकेएम नेता गुरनाम सिंह चढूनी, जिनके द्वारा इस महापंचायत की अध्यक्षता की गई, ने कहा, “हम चार किसानों और एक पत्रकार की नृशंस हत्या की गहन जांच की अपनी मांग को दोहरात्ते हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय को हासिल कर पाना तब तक संभव नहीं है जब तक अजय मिश्रा ‘टेनी’ को केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनके पद पर बने रहते है। एसकेएम एक बार फिर से त्वरित न्याय की मांग करता है और इस बात को दोहराता है कि यह तभी संभव है जब अजय मिश्रा ‘टेनी’ को बर्खास्त किया जाये और गिरफ्तार कर लिया जाये।”

बुधवार को लखीमपुर खीरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय में जारी सुनवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज नहीं किया गया है।

किसानों की आर्थिक संकट के बारे में बात करते हुए उन्होंने अपने बयान में कहा “जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान विश्व व्यापार संगठन की शर्तों को लागू किया जा रहा था, तब मैंने इसका विरोध किया था, लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। डब्ल्यूटीओ की शर्तों का सीधा-सीधा लाभ अमेरिका के बिचौलियों ने उठाया। जब यहां के किसानों द्वारा दलहन और तिलहन का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद इनका विदेशों से आयात किया जाता है। इसके साथ ही तेल, दाल एवं अन्य वस्तुओं के उत्पादन के बावजूद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

चढूनी और किसान नेता तेजिंदर सिंह विर्क, जो लखीमपुर खीरी हिंसा के दौरान घायल हो गये थे, ने तिकुनिया में शहीद किसानों को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित की और चेतावनी दी कि यदि खीरी कांड में न्याय नहीं मिला तो पीलीभीत, लखीमपुर सहित तराई का समूचा इलाका किसानों के विरोध के मुख्य केंद्र के रूप में तब्दील हो जायेगा।

किसानों को संबोधित करते हुए अपने भाषण में चढूनी ने कहा “राज्य के प्रत्येक जिले के प्रशासनिक मुख्यालयों के सामने प्रदर्शनों का आयोजन किया जायेगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को उनके पद से बर्खास्त किये जाने की मांग के साथ सरकार को एक ज्ञापन सौंपा जायेगा।” उन्होंने आगे कहा कि योगी सरकार ने “बाहुबल” का इस्तेमाल करते हुए अपनी धृष्टता को प्रदर्शित करने का काम किया है।

चढूनी ने दावा किया “तिकुनिया घटना में सरकार ने अभी तक गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त नहीं किया है, जबकि हमारा समझौता उन्हें बर्खास्त किये जाने की मांग पर हुआ था। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो राज्य को मिश्रा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग पर निरंतर विरोध प्रदर्शनों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। पहले कहा गया था कि किसी भी किसान के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जायेगा, लेकिन मामला दर्ज होने के बाद से चार किसानों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसानों पर मंत्री के बेटे को जेल से बाहर निकाले जाने पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा सके। लेकिन किसान तब तक शांत नहीं बैठने वाले हैं जब तक कि तिकुनिया कांड के सभी दोषियों को गिरफ्तार करके उन्हें जेल नहीं भेज दिया जाता है।”

सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता तेजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि एक तरफ तो “केंद्र किसानों को हैरान-परेशान करने पर तुली हुई है और उनकी जायज मांगों को पूरा करने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है” वहीँ दूसरी तरफ “उत्तर प्रदेश सरकार और इसके मंत्री विरोध कर रहे किसानों को पीछे से कुचलकर मार डालने का काम कर रहे हैं। केंद्र को किसी भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है कि किसान अपनी मांगों से पीछे हट जायेंगे। हम यहां पर तब तक डटे रहेंगे जबतक कि हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।”

उत्तर प्रदेश में केंद्रीय मंत्री के पैतृक निवास लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर को एक एसयूवी के द्वारा कथित तौर पर कुचले जाने से चार किसानों की मौत हो गई थी। बाद में भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं सहित चार अन्य लोगों को पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) के द्वारा अभी तक मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा समेत एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा ने, जो कि 40 से अधिक किसान यूनियनों का सामूहिक स्वरूप है, जिसकी अगुआई में दिल्ली की सीमाओं पर तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन चल रहा है, ने 22 नवंबर को लखनऊ में ‘किसान महापंचायत’ करने की घोषणा की है।

लखनऊ महापंचायत के बारे में खबर साझा करते हुए भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा है, “22 नवंबर को होने जा रही किसान महापंचायत अपने आप में ऐतिहासिक होगी। यह किसान विरोधी सरकार और तीन काले कानूनों के ताबूत में आखिरी कील साबित होने जा रही है। अब पूर्वांचल में भी किसानों का आंदोलन तेज होने जा रहा है।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Lakhimpur Violence: 'Nyay Mahapanchat' Held in Pilibhit to Demand Dismissal, Arrest of Ajay Mishra

Pilibhit
Gurnam Singh Chaduni
Nyay Mahapanchayat
Ajay Mishra
lakhimpur kheri violence
farmers movement

Related Stories

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

यूपी चुनाव में भाजपा विपक्ष से नहीं, हारेगी तो सिर्फ जनता से!

एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’

पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए

वे तो शहीद हुए हैं, मरा तो कुछ और है!

जीत गया किसान, नफरत हार गई!

रेल रोको: आख़िर क्यों नहीं हो सकता आरोपी मंत्री बर्खास्त, पूछें किसान

लखीमपुर खीरी में किसानों के नरसंहार के ख़िलाफ़ झारखंड में भी प्रदर्शन 

कृषि कानूनों का एक साल, कैसे शुरू हुआ किसान आंदोलन


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License