NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
लखीमपुर नरसंहार : कई राज्यों में विरोध के बाद झुकी सरकार, मुआवज़े का दिया आश्वासन
दिनभर के विरोध प्रदर्शनों के बाद आख़िरकार किसानों की मांग के आगे सरकार झुकी और दोनों पक्षों में समझौता हुआ, जिसमें धारा 302 और 120B के तहत मंत्री के लड़के के ऊपर एफ़आईआर दर्ज की गई है। मृत किसानों को 45 लाख मुआवज़ा और सरकारी नौकरी देने और ज़ख़्मी किसानों को 10 लाख का मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया गया। साथ ही पूरे घटनाक्रम की हाईकोर्ट के जज से जांच कराने की बात भी कही गई है।
मुकुंद झा
04 Oct 2021
Protest

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का विरोध करने पर किसानों पर हुए जानलेवा हमले के ख़िलाफ़ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। इसी के तहत दिल्ली स्थित यूपी भवन पर दिल्ली के छात्र, नौजवान, महिला और सभ्य समाज के लोगों ने रोष प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में मुख्य तौर पर युवा कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और वाम दल से जुड़े जनसंगठनों ने हिस्सा लिया।

हालांकि पुलिस ने पूरे यूपी भवन को छावनी में बदल दिया था मगर उसके बाद भी अलग अलग जत्थे यूपी भवन तक पहुंचने में कामयाब रहे लेकिन पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को बसों भर लिया और उन्हें अलग अलग थानों में ले गए। प्रदर्शनकारी यूपी हमले के सभी आरोपियों की गिरफ़्तारी और पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने यूपी और केंद्र की बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और इस पूरे हमलें के लिए बीजेपी की सरकार और उसके मंत्री को दोषी बताया। प्रदर्षनकारियों ने कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना से बीजेपी सरकार का अंहकार सामने आया है।

दिनभर के विरोध प्रदर्शनों के बाद आख़िरकार किसानों की मांग के आगे सरकार झुकी और दोनों पक्षों में समझौता हुआ, जिसमें धारा 302 और 120B के तहत मंत्री के लड़के के ऊपर एफ़आईआर दर्ज की गई है। मृत किसानों को 45 लाख मुआवज़ा और सरकारी नौकरी देने और ज़ख़्मी किसानों को 10 लाख का मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया गया। साथ ही पूरे घटनाक्रम की हाईकोर्ट के जज से जांच कराने की बात भी कही गई है।

वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन के दिल्ली राजयसचिव प्रतिष मेनन ने कहा, "ये सरकार अंग्रेज़ी हुकूमत की तरह आंदोलनकरियों को मार देना चाहती है लेकिन ये भूल रहे हैं कि जब अंग्रेजी हुकूमत ने सोचा था कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देकर स्वाधीनता संग्राम रोक देंगे लेकिन हुआ इसके, विपरीत देश के लाखों लोगों ने सड़कों पे आकर अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें हिला दीं और अंत में उन्हें यहाँ से भागना पड़ा। हम यहाँ यही बताने आए हैं कि देश का युवा और छात्र इनको भी देश से खदेड़ देगा।"

भारत की जनवादी नौजवान सभा के दिल्ली राज्यसचिव अमन सैनी को भी पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया और उन्होंने कहा कि ये सरकार लाठी गोली से हमें डराना चाहती है लेकिन वो नहीं जानते वो एक की हत्या करेंगे और हम एक लाख आगे आएंगे। 

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार की अगुवाई में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने यहां भाजपा मुख्यालय के निकट प्रदर्शन किया।

अनिल कुमार ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में तानाशाह सरकार ने किसानों की आवाज उठाने पर प्रियंका जी को गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस किसानों की आवाज उठाती रहेगी। हम झुकने वाले नहीं हैं।’’

भारत की जनवादी महिला समिति की दिल्ली राज्य अध्यक्ष आशा शर्मा भी विरोध में शामिल थी, उन्हें भी पुलिस ने बलपूर्वक घसीटकर बस में डाल दिया। इस दौरान वो लगातार योगी और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं। उन्होंने मीडिया से कहा, "हम यहां न्याय के लिए आये हैं क्योंकि ये एक तानाशाह सरकार है और इसका जवाब हम सड़को पर उतरकर ही देंगे।"

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक क्रूर और अमानवीय हमला हुआ। किसानों का आरोप है कि भाजपा के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी, उनके बेटे, उनके चाचा और अन्य गुंडों से जुड़े वाहनों का काफ़िला कई प्रदर्शनकारियों को कुचल गया। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष (मोनू) मिश्रा ने एक किसान की गोली मार कर हत्या कर दी। इस घटना में कम से कम दो अन्य किसानों की भी मौत हो गई (एक मौके पर और दूसरा अस्पताल में) और करीब दस अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मिल रही जानकारी के मुताबिक़ 1. गुरविंदर सिंह पुत्र सुखविन्द्रर सिंह ग्राम मकरोनिया नानपारा  आयु  20 वर्ष 2. दलजीत सिंह पुत्र हरी सिंह ग्राम बनजारा ठठ्ठा नानपारा आयु 35 3. नक्षत्र सिंह पुत्र सुब्बा सिंह ग्राम नयापुरवा धौरहरा आयु 65 4.लवप्रीत सिंह पुत्र सतिनाम सिंह चौकड़ा फार्म पलियाकला आयु 20 और तराई किसान संगठन के नेता और एसकेएम नेता तजिंदर सिंह विर्क भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों और घायलों के बारे में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है। खबर है कि इस क्रूर हमले के बाद किसानों को जवाबी कार्रवाई के लिए उकसाया भी गया और भाजपा नेता के वाहनों को तोड़ दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसमें चार किसान के आलावा एक पत्रकार रमन कश्यप और अजय मिश्रा के ड्राइवर समेत कुल तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत पुष्टि हुई है।

किसान मौर्य के बनबीरपुर दौरे का विरोध कर रहे थे जो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और खीरी से सांसद अजय कुमार मिश्रा का पैतृक गांव है।  

जनवादी किसान सभा के नेता रजनीश भारती ने कहा, "योगी ने कहा था, भाजपा शासन में गुंडे यूपी छोड़ कर चले गए हैं मगर आये दिन हो रहे जघन्य अपराधों से जाहिर होता है कि गुण्डे खुद सरकार चला रहे हैं। जब गुण्डे साधू के भेष में होते हैं और सत्ता पर भी काबिज हो जाते हैं तो वे इसी तरह बड़े-बड़े दावे करते हैं कि गुण्डों ने प्रदेश छोड़ दिया है। मगर ये नहीं बताते कि गुण्डे सत्ता ऊंची-ऊंची कुर्सियों पर काबिज हैं।  लखीमपुर की घटना सरकारी गुण्डागर्दी का एक जीता-जागता ताजा उदाहरण है।"

संयुक्त किसान मोर्चा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है,

"इसी तरह एक पूरी तरह से अस्वीकार्य और आपत्तिजनक घटनाक्रम में, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक वीडियो क्लिप में (भाजपा-आरएसएस) कार्यकर्ताओं को लाठियों को उठाने और किसानों पर हमला करने के लिए, भले ही इसका मतलब कुछ महीनों के लिए जेलों में समाप्त होना ही क्यों न हो, प्रोत्साहित करते हुए सुना जा सकता है। यह स्पष्ट है कि आयुष सिन्हा जैसे अधिकारियों को यह छूट कहां से मिलती है। जबकि किसान आंदोलन ने शांति और अहिंसा को अपना मूल बना लिया है, यह स्पष्ट है कि सरकार अपने ही नागरिकों पर जानलेवा मंशा से व्यवहार कर रही है। एसकेएम भाजपा के मुख्यमंत्री के हिंसक इरादे की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि वह तुरंत माफी मांगे, और अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दें।"

Lakhimpur Kheri
Lakhimpur Kheri Update
kisan andolan
BJP
UttarPradesh
UP police
Yogi Adityanath
Lakhimpur massacre
Lakhimpur incident
SFI
AICCTU

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    उत्तर प्रदेश: पेपर लीक की रिपोर्ट करने वाले पत्रकार गिरफ्तार
    02 Apr 2022
    अमर उजाला के बलिया संस्करण ने जिस दिन दोपहर 2 बजे से परीक्षा होनी थी उस दिन सुबह लीक पेपर प्रकाशित किया था।
  • इलियट नेगिन
    समय है कि चार्ल्स कोच अपने जलवायु दुष्प्रचार अभियान के बारे में साक्ष्य प्रस्तुत करें
    02 Apr 2022
    दो दशकों से भी अधिक समय से कोच नियंत्रित फ़ाउंडेशनों ने जलवायु परिवर्तन पर सरकारी कार्यवाई को विफल बनाने के लिए 16 करोड़ डॉलर से भी अधिक की रकम ख़र्च की है।
  • DU
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक
    01 Apr 2022
    नई शिक्षा नीति के तहत UGC ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को कई कदम लागू करने के लिए कहा है. इनमें चार साल का स्नातक कोर्स, एक प्रवेश परीक्षा और संस्थान चलाने के लिए क़र्ज़ लेना शामिल है. इन नीतियों का…
  • रवि शंकर दुबे
    इस साल यूपी को ज़्यादा बिजली की ज़रूरत
    01 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश की गर्मी ने जहां बिजली की खपत में इज़ाफ़ा कर दिया है तो दूसरी ओर बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलन छेड़े हुए हैं। देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी के बीच कैसे समन्वय होता है।
  • सोनिया यादव
    राजस्थान: महिला डॉक्टर की आत्महत्या के पीछे पुलिस-प्रशासन और बीजेपी नेताओं की मिलीभगत!
    01 Apr 2022
    डॉक्टर अर्चना शर्मा आत्महत्या मामले में उनके पति डॉक्टर सुनीत उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि कुछ बीजेपी नेताओं के दबाव में पुलिस ने उनकी पत्नी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, जिसके चलते उनकी पत्नी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License