NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिख कर प्रत्यक्ष सुनवाई बहाल करने का किया अनुरोध
'यह बहुत प्रशंसनीय है कि इस माननीय न्यायालय ने इस देश के आम नागरिकों को न्याय तक निर्बाध पहुंच प्रदान करने के लिए वर्चुअल मोड अपनाने का विकल्प चुना है, हालांकि, कोर्ट सिस्टम की इस वर्चुअल कार्यप्रणाली के लाभों की तुलना में कमी अधिक हैं।'
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Jan 2021
SC

दिल्ली:  देश के  500 से अधिक वकीलों के एक समूह ने प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे को पत्र लिख कर अदालत में प्रत्यक्ष सुनवाई को बहाल करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि प्रभावी तरीके से न्याय प्रदान करने में डिजिटल तरीके से सुनवाई की व्यवस्था पूरी तरह खरा नहीं उतर पाई है।

उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि, ''यह बहुत प्रशंसनीय है कि माननीय न्यायालय ने इस देश के आम नागरिकों को न्याय तक निर्बाध पहुंच प्रदान करने के लिए वर्चुअल मोड अपनाने का विकल्प चुना है, हालांकि, कोर्ट सिस्टम की इस वर्चुअल कार्यप्रणाली के लाभों की तुलना में कमी अधिक हैं।''

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सदस्यों द्वारा भेजे एक पत्र में वकीलों ने कहा है कि इस महामारी के कारण पिछले 10 महीनों से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

डिजिटल तरीके से सुनवाई में फायदा के बजाए ज्यादा अड़चनों का जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया, ‘‘प्रभावी तरीके से न्याय प्रदान करने में डिजिटल तरीके से सुनवाई की व्यवस्था पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई है।’’

पत्र में कहा गया है, ‘‘यह कहने की जरूरत नहीं है कि कई न्यायाधीश भी इस प्रणाली के संबंध में परेशानी जाहिर कर चुके हैं।’’

पत्र में कहा गया कि एससीबीए के सदस्य खुद को बेबस पा रहे हैं क्योंकि अपनी चिंताएं जताने के लिए न्यायाधीशों तक उनकी पहुंच नहीं है, जैसा कि पहले होता था।

सदस्यों ने कहा है, ‘‘आप इस तथ्य से अवगत हैं कि इस अदालत में वकालत करने वाले अधिकतर सदस्य अलग-अलग राज्यों के हैं और यहां किराए पर रहते हैं लेकिन महामारी की स्थिति और अदालत की ऑनलाइन प्रणाली के कारण उनमें से कई सदस्यों को दिल्ली से जाना पड़ गया और वे वकालत भी नहीं कर पा रहे।’’

पत्र में नेटवर्क की दिक्कतें, डिजिटल तरीके से सुनवाई के संबंध में रजिस्ट्री द्वारा उचित प्रबंध नहीं किए जाने, बिना कोई कारण बताए जरूरी मामलों को सूचीबद्ध किए जाने से खारिज करने समेत कई अन्य मुद्दे भी बताए गए हैं।

पत्र में कहा गया है कि COVID19 प्रतिबंधों को सभी सरकारी और निजी क्षेत्रों में भी अब ढ़िलाई दे दी गई है। कई उच्च न्यायालयों ने नियमित फिजिकल मोड (वर्चुअल हियरिंग के साथ) पर काम करना शुरू कर दिया है और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री भी फिजिकल रूप से काम कर रही है।

बीच पत्र में मेंशनिंग और लिस्टिंग से संबंधित शिकायतों पर भी प्रकाश ड़ाला गया है।

कहा गया है कि, ''हम इस बार के सदस्य खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं क्योंकि मेंशनिंग ब्रांच दिन भर (काम के घंटों) में हमारे कॉल का जवाब नहीं देती है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण मामले लंबित रहते हैं और निष्फल हो जाते हैं, इस तथ्य से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि क्या ये मामले नए हैं या नोटिस के बाद सुनवाई पर आने वाले हैं। जमानत के मामलों सहित नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित कई मामलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, परंतु उन पर सुनवाई नहीं हो पाती है, जिस कारण मुविक्कलों और वकीलों के लिए असहाय स्थिति बन रही है।''

इस बिंदु पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि मंगलवार को ही सीजेआई ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, इस समय चल रही महामारी के दौरान फिजिकल सुनवाई फिर से शुरू करने के साथ जुड़े जोखिमों पर प्रकाश डाला था।

पूरा पत्र नीचे पढ़ सकते है।

(समाचार एजेंसी भाषा और लीगल साईट लाइव लॉ के इनपुट के साथ)

Supreme Court
lawyer
Justice Sharad Arvind Bobde
Supreme Court Bar Association
SCBA
COVID-19

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?


बाकी खबरें

  • J&K
    अनीस ज़रगर
    परिसीमन आयोग के जम्मू क्षेत्र पर ताजा मसौदे पर बढ़ता विवाद
    11 Feb 2022
    जम्मू के सुचेतगढ़ और आरएस पुरा इलाकों में पहले ही विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जा चुके हैं, जहाँ दो विधानसभा क्षेत्रों का विलय प्रस्तावित किया गया है।
  • hijab vivad
    भाषा
    हिजाब विवाद: कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ शीर्ष अदालत में याचिका दायर
    11 Feb 2022
    एक छात्र द्वारा दायर याचिका में हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के निर्देश के साथ ही तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। अपील में दावा…
  • गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    मोहम्मद ताहिर
    गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    11 Feb 2022
    "सरकार से कुछ सब्सिडी की मांग की थी। सरकार की तरफ से पांच हज़ार रूपये देने का वादा भी किया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।"
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 58,077 नए मामले, 657 मरीज़ों की मौत
    11 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.64 फ़ीसदी यानी 6 लाख 97 हज़ार 802 हो गयी है।
  • MNREGA
    दित्सा भट्टाचार्य
    विशेषज्ञों के हिसाब से मनरेगा के लिए बजट का आवंटन पर्याप्त नहीं
    11 Feb 2022
    पीपल्स एक्शन फ़ॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (PAEG) के मुताबिक़ वित्तीय साल 2022-23 के बजट में नरेगा के लिए जो राशि आवंटित की गयी है, उससे प्रति परिवार महज़ 21 श्रमदिवस का काम ही सृजित किया जा सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License