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सरकार बनाने में विफल रहने के बाद लेबनान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री हरीरी का इस्तीफ़ा
केवल सात महीने सत्ता में रहे प्रधानमंत्री हसन दिआब द्वारा बेरूत विस्फोटों के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देने के बाद लेबनान में पिछले साल अगस्त से कार्यवाहक सरकार थी।
पीपल्स डिस्पैच
16 Jul 2021
सरकार बनाने में विफल रहने के बाद लेबनान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री हरीरी का इस्तीफ़ा

लेबनान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री साद हरीरी ने गुरुवार 15 जुलाई को बेरूत में राष्ट्रपति मिशेल औन से मुलाकात के बाद अपने इस्तीफे की घोषणा की। साद हरीरी ने कहा कि राष्ट्रपति मिशेल औन ने प्रस्तावित कैबिनेट मंत्रियों की उनकी सूची को मंजूरी नहीं दी।

हरीरी के इस्तीफे की घोषणा के बाद उनकी फ्यूचर मूवमेंट पार्टी के समर्थकों ने देश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतर आए और ब्लॉक कर दिया। राजधानी बेरूत में सुरक्षा बलों ने ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन पर रबर की गोलियां चलाईं।

गुरुवार को दिया गया इस्तीफा दो साल से भी कम समय में दूसरी बार होगा जब साद हरीरी को इस्तीफा देना पड़ा। वह अक्टूबर 2019 में सरकार का नेतृत्व कर रहे थे जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

साद हरीरी ने पिछले नौ महीनों में सरकार बनाने में अपनी विफलता के लिए माफी मांगी। बेरुत विस्फोट के बाद अगस्त में हसन दिआब के इस्तीफे के बाद उन्हें पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इस घटना में करीब 200 लोग मारे गए थे और शहर के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था।

लेबनान की आधिकारिक समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज़ एजेंसी (एनएनए) पर प्रकाशित एक बयान में हरीरी ने औन पर उनके द्वारा प्रस्तावित नामों की सूची में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए कैबिनेट गठन को रोकने का आरोप लगाया। औन ने पहले भी हरीरी के नामों की सूची को खारिज कर दिया था।

नई कैबिनेट की स्थिति को लेकर औन और हरीरी के बीच मतभेद पिछले कुछ समय से सामने आए थे। हरीरी ज्यादातर कथित "तकनीकी कैबिनेट" बनाना चाहते थे, जिसका मतलब है कि इसके अधिकांश सदस्य निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं होंगे और संवैधानिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधित्व से समझौता किया जाएगा। इस तरह के बदलाव देश में करीब दो साल से चल रहे विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी मांग रहे होंगे।

एक औपचारिक सरकार की कमी ने देश में आर्थिक और राजनीतिक संकट को और तेज कर दिया है। जीडीपी अनुपात में बहुत अधिक ऋण हो गया और इसकी स्थानीय मुद्रा अपना अधिकांश मूल्य खो रही है। लोगों के पास जो भी बचत है उसे कमजोर कर रही है। एनएनए की रिपोर्ट के अनुसार हरीरी के इस्तीफे के बाद अमेरिकी डॉलर का मूल्य खुले बाजार में 22,000 लेबनानी पाउंड के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू गया। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें, जिनमें से अधिकांश आयात की जाती हैं, वह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं। इसने देश को ईंधन और भोजन जैसी आवश्यक सब्सिडी को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया है जिससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है।

Lebnan
Saad Hariri

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License