NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा
यासीन मलिक ऐसे कश्मीरी नेता हैं, जिनसे भारत के दो भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह मिलते रहे हैं और कश्मीर के मसले पर विचार-विमर्श करते रहे हैं। सवाल है, अगर यासीन मलिक इतने ही ‘ख़तरनाक’ रहे हैं, तो उनसे देश के दो-दो प्रधानमंत्री क्यों मिलते रहे? 
अजय सिंह
27 May 2022
Yasin Malik

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाये जाने पर सीपीआई-एम (माकपा) के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के भूतपूर्व विधायक यूसुफ़ तारीगामी ने सही कहाः ‘इससे कश्मीरियों का (भारत से) अलगाव और बढ़ेगा, अलगाववादी भावनाएं और जोर पकड़ेंगी।’

कश्मीर घाटी के कई राजनीतिक नेताओं ने इस सज़ा की निंदा की है और कहा है कि यासीन मलिक को उनके राजनीतिक विचार के लिए दंडित किया गया है। इससे कश्मीर में सिर्फ़ अशांति के माहौल को बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली के पटियाला हाउस परिसर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत ने 25 मई 2022 को यासीन मलिक को उम्रक़ैद की सज़ा सुनायी। जिस मामले में यह सज़ा सुनायी गयी, वह, एनआईए के मुताबिक, 2016-17 के ‘टेरर फ़ंडिंग’ (आतंक के लिए धन जुटाना) मामले से जुड़ा है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह का मुक़दमा चला/चलाया गया, उससे पहले ही यह तय हो गया था कि यासीन मलिक को या तो फांसी की सज़ा मिलेगी या उम्रक़ैद की। उनका कहना है कि इस सज़ा ने भारतीय लोकतंत्र और न्याय प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यासीन मलिक को 2019 में गिरफ़्तार किया गया था, और तबसे वह जेल में हैं। इसके पहले भी उन्हें कई बार गिरफ़्तार किया जा चुका है।

1994 में यासीन मलिक व उनके संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने कश्मीर की ‘भारत से आज़ादी’ और ‘कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार’ के लिए हिंसा का रास्ता छोड़ने और अहिंसक रास्ता अपनाने की घोषणा की। यासीन मलिक ने कहा कि 1994 के बाद से हमारे संघर्ष का रास्ता वही रहा है, जो (महात्मा) गांधी और (नेल्सन) मंडेला का था—यानी, संघर्ष का अहिंसक तौर-तरीक़ा। वह अपने को ‘गांधीवादी’ कहते हैं।

यासीन मलिक ऐसे कश्मीरी नेता हैं, जिनसे भारत के दो भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह मिलते रहे हैं और कश्मीर के मसले पर विचार-विमर्श करते रहे हैं। सवाल है, अगर यासीन मलिक इतने ही ‘ख़तरनाक’ रहे हैं, तो उनसे देश के दो-दो प्रधानमंत्री क्यों मिलते रहे? क्या वे (प्रधानमंत्री) बेवक़ूफ़ या अनजान थे? प्रधानमंत्री से अगर किसी व्यक्ति की ख़ास मुलाक़ात होती है, तो पूरी तैयारी की जाती है और संबंधित व्यक्ति के बारे में सारी ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा की जाती है।

यासीन मलिक के राजनीतिक विचार आज भी वही हैं, जो पहले थे। उन्हें इन्हीं राजनीतिक विचारों के लिए दंडित किया गया है। वह भारत से ‘कश्मीर की आज़ादी’ के पक्षधर हैं, ‘कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार’ की वकालत करते हैं, और चाहते हैं कि कश्मीर के मसले पर भारत, पाकिस्तान व कश्मीरी जनता के बीच (त्रिपक्षीय) बातचीत हो। वह ‘गांधीवादी’ तरीक़े से शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान चाहते हैं, और चाहते हैं कि भारत की सेना की बंदूक के बल पर नहीं, टेबुल पर आमने-सामने की राजनीतिक बातचीत से कश्मीर का मसला हल किया जाये।

सवाल है, जब उत्तर-पूर्व भारत में केंद्र सरकार नगा विद्रोहियों, कुकी विद्रोहियों, अन्य विद्रोही संगठनों से बीसियों साल से शांति वार्ताएं चलाती चली आ सकती है, तो कश्मीर में क्यों नहीं? उत्तर-पूर्व भारत में भी ‘टेरर फ़ंडिंग’/जबरन धन उगाही के कई मामले रहे हैं। लेकिन वहां तो ऐसी सरकारी ‘सक्रियता’ नहीं रही!

कश्मीर का मसला राजनीतिक समाधान मांगता है। यासीन मलिक को उम्रक़ैद की सज़ा सुना कर यह रास्ता बंद कर दिया गया है। भारतीय लोकतंत्र की विफलता का यह एक और नमूना है।

(लेखक कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Yasin Malik
Jammu and Kashmir

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर परिसीमन से नाराज़गी, प्रशांत की राजनीतिक आकांक्षा, चंदौली मे दमन

जम्मू-कश्मीर: बढ़ रहे हैं जबरन भूमि अधिग्रहण के मामले, नहीं मिल रहा उचित मुआवज़ा


बाकी खबरें

  • bihar protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल, आइएमए ने भी किया समर्थन
    28 Oct 2021
    इंटर्न डॉक्टरों ने पीएमसीएच प्रशासन के साथ-साथ सरकार को भी चेतावनी दी है कि अगर उनके स्टाइपेंड को बढ़ाने की तत्काल घोषणा नहीं की गई तो वे ओपीडी और वार्डों में इलाज रोक देंगे।
  • covid 19 vaccine
    मो. इमरान खान
    बिहारः तीन लोगों को मौत के बाद कोविड की दूसरी ख़ुराक
    28 Oct 2021
    एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, इसे अधिकारियों और निजी स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच के सांठ-गांठ का ही कमाल कहना चाहिए कि उनके द्वारा टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ तीन ही नहीं बल्कि ऐसे…
  • पूर्व सीएजी विनोद राय ने कांग्रेस नेता संजय निरुपम के खिलाफ अपनी टिप्पणी पर मांगी माफी ,2G स्पेक्ट्रम रिपोर्ट से जुड़ा है विवाद
    भाषा
    पूर्व सीएजी विनोद राय ने कांग्रेस नेता संजय निरुपम के खिलाफ अपनी टिप्पणी पर मांगी माफी ,2G स्पेक्ट्रम रिपोर्ट से जुड़ा है विवाद
    28 Oct 2021
    निरुपम ने कहा कि राय को 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रपटों को लेकर देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों ‘‘फर्जी’’ थीं। उन्होंने बाद में संवाददाताओं से कहा, ‘‘…
  • Sahba Hussain
    न्यूज़क्लिक टीम
    जेल के अंडा सेल में गौतम नवलखा, ज़िंदगी ख़तरे में होने का अंदेशा : सहबा
    28 Oct 2021
    वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखक गौतम नवलखा की जीवनसाथी सहबा हुसैन से। जिन्होंने हाल ही में गौतम की ज़िंदगी पर मंडरा रहे ख़तरे के बारे में एक पत्र लिखा है और उन्हें…
  • Tamil Nadu PSU Workers Protest
    नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु : पीएसयू कामगारों ने एकतरफा बोनस-घोषणा का विरोध किया
    28 Oct 2021
    सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों ने 25 फीसद बोनस की मांग की थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License