NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
मज़दूर-किसान
विधानसभा चुनाव
समाज
भारत
राजनीति
यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाए नेता वोटरों का ध्रुवीकरण करने के लिए कैराना पलायन, दंगा और हिंदू-मुस्लिम पर ही बयानबाजी करते नजर आए।
एम.ओबैद
09 Feb 2022
Election
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनावों में ग्यारह जिलों की 58 सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होना है। इस तारीख को जिन सीटों पर मतदान होना है, वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र है जो देश की राजधानी दिल्ली से लगा हुआ है। केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को लेकर विशेष रुप से इस क्षेत्र के किसानों ने पुरजोर विरोध किया था और एक वर्ष का लंबा आंदोलन चलाया था। इस आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इन क्षेत्रों के किसान बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकार से बेहद नाराज हैं। ऐसे कई स्थानीय मुद्दे है जिसको लेकर भी लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाए नेता वोटरों का ध्रुवीकरण करने के लिए कैराना पलायन, दंगा और हिंदू-मुस्लिम पर ही बयानबाजी करते नजर आए।

स्थानीय मुद्दों को लेकर हुई बातचीत में मथुरा से सामाजिक कार्यकर्ता दिगंबर सिंह ने कहा कि "पिछली बार बीजेपी के श्रीकांत शर्मा जीतकर उर्जा मंत्री बने थे। उन्होंने यहां बिजली के मीटरों को तीन-तीन बार बदला और उपभोक्ताओं से भारी कमाई की गई। इतना ही नहीं उपभोक्ताओं के काफी ज्यादा बिल आते रहे हैं। इसको लेकर लोगों में काफी असंतोष है लेकिन सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कुछ भी नहीं किया। उन्होंने जनता के हित के लिए कोई काम नहीं किया है। यहां बीजेपी का मेयर, विधायक और सांसद भी है फिर भी यहां की स्थिति बदतर बनी हुई है। शहर में गंदगी, बजबाती नालियां, टूटी सड़कें इनके विकास की कहानी बताती हैं।"

उन्होंने कहा कि "कोरोना के दौरान मथुरा में बड़े पैमाने पर लोगों की मौत हुई है। भारी संख्या में इससे लोग प्रभावित हुए हैं लेकिन सरकार और प्रशासन पूरी तरह उदासीन रही है। लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया था। पीएम केयर फंड से करीब 35 वेंटिलटर मथुरा में आए थे जिसमें से पांच वेंटिलेटर तो कबाड़ में पड़े रहे और पंद्रह पंद्रह वेंटिलेटर को यहां के दो मेडिकल कॉलेज को दे दिए गए जबकि यहां तीन सरकारी अस्पताल हैं उन्हें कुछ मिला नहीं।" 

दिगंबर ने कहा कि "उन लोगों ने कुछ समय पहले सांप्रदायिक माहौल पैदा करने की कोशिश की थी लेकिन यहां की जनता ने काफी सूझबूझ के साथ काम किया और माहौल बिगड़ने नहीं दिया। यहां के हर समाज के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया और शांति कायम रखा।" 

उन्होंने आगे कहा कि "बलदेव विधानसभा क्षेत्र की जनता में काफी रोष है। इस बार बीजेपी के प्रत्याशी को लोग गांव में घुसने नहीं दे रहे हैं। इसका बड़ा कारण है कि यहां आवारा पशुओं की समस्या काफी ज्यादा है। ये पशु किसानों की फसलों को चौपट कर देते हैं जिससे उनको आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। योगी सरकार ने इन पशुओं का कोई सही इंतजाम नहीं किया। इससे लोग बेहद खफा हैं।" 

दिगंबर ने कहा कि "इस क्षेत्र में आलू भारी मात्रा में पैदा होती है। किसानों को इसकी उचित कीमत नहीं मिल पाती है। उनके सामने भंडारण की भी समस्या रहती है। सरकार आज तक इसका इंतजाम नहीं कर पाई है। पिछले पांच वर्षों में योगी सरकार ने बड़ी बड़ी बातें कीं लेकिन किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है। कोल्ड स्टोरेज में मनमाने तरीके से पैसा लिया जाता है जिसके चलते किसान उपज के समय में कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय विधायक ने कभी भी इसका समाधान निकालने की कोशिश नहीं की।" 

उन्होंने कहा कि. "इस क्षेत्र से गुजरने वाले यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहित की गई किसानों की जमीन का मुआवाजा किसानों को अब तक नहीं मिला है। अखिलेश सरकार ने 64.7 प्रतिशत का मुआवजा देने का एलान किया था लेकिन आठ साल गुजर चुका है और किसानों को यह मुआवजा अब तक नहीं मिल पाया है। इसके अलावा इस क्षेत्र के किसानों की फसल बरसात की वजह से बर्बाद हुई लेकिन सरकार ने किसानों को न तो मुआवजा ही दिया और न ही उन्हें बीमा का पैसा मिला।"

दिगंबर ने कहा कि, "यहां खेती किसानी रोजगार का मुख्य श्रोत है लेकिन यह पूरी तरह चौपट हो गई है। इसको लेकर इन इलाकों में भी बेरोजगारी ज्यादा है। बीते पांच वर्षों में रोजगार उत्पन्न करने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में हर एक वर्ग में बेहद निराशा है। युवा खास तौर पर योगी सरकार से नाराज हैं।" 

उन्होंने कहा कि "यहां की जो सड़कें बनी थीं वह बारिश के एक मौसम को भी नहीं झेल पाई हैं। पूरी की पूरी सड़कें टूट गईं। इलाके में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। सिंचाई की समस्या है। यहां बिजली के दो फीडर बना दिए गए हैं। एक घरेलू बिजली के लिए और दूसरा सिंचाई व्यवस्था के मशीनों के लिए। सिंचाई के लिए बने फीडर में काफी कम बिजली रहती है जिससे किसानों को खेतों में पानी देने की भी परेशानी होती है। इससे किसान मौजूदा सरकार से खफा हैं।" 

दिगंबर ने आगे कहा कि, "हरियाणा से लगे छाता विधानसभा क्षेत्र में एक मात्र शुगर मिल था जिसको बीएसपी के कार्यकाल के दौरान बंद कर दिया गया था। उस समय स्थानीय विधायक लक्ष्मीनारायण थे। इलाके के लोगों का मानना है कि उन्हीं की वजह से यह चीनी मिल बंद हुई है। पिछले चुनावों में छाता चीनी मिल मुद्दा बनता रहा है। पिछली बार के विधानसभा चुनावों के दौरान राजनाथ सिंह जनसभा को संबोधित करने के लिए आए थे। इस सभा में ऐलान किया गया था कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस चीनी मिल को चालू किया जाएगा। लेकिन ये मिल चालू नहीं हुई जिससे इलाके के लोगों में नाराजगी है। कुछ दिन पहले तक इसके चालू करने को लेकर आंदोलन चलता रहा है। स्थानीय लोग इस मामले को लेकर राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के पास भी गए लेकिन उनको इसके चालू किए जाने कोई संकेत नहीं मिला।" 

अलीगढ़ स्थानीय मुद्दों पर बात करते हुए जिला के सीपीआइएम के नेता राजकुमार ने न्यूजक्लि से बातचीत में कहा कि "यहां का मुख्य मुद्दा भी रोजगार का है। यहां पर केंद्र सरकार या राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह का कोई भी निवेश नहीं किया गया जिससे स्थानीय लोगों और युवाओं को रोजगार मिल सके। यहां सबसे ज्यादा ताले की फैक्ट्रियां हैं जो पूरी तरह उपेक्षित हो गई है। पहले बहुत सी फैक्ट्रियों में पे-रोल और न्यूनतम वेतन पर मजदूरों की भर्ती की जाती थी। आज पूरे अलीगढ़ के अंदर एक भी ऐसी फैक्ट्री नहीं है जहां न्यूनतम वेतन के हिसाब से श्रमिकों की भर्ती की जाए। अब न तो उनका कोई पीएफ अकाउंट होता है और न ही रिकॉर्ड मेंटेन किया जाता है। कारोबार की स्थिति पूरी तरह चौपट हो गई है।" 

उन्होंने कहा कि "शिक्षा का मुद्दा अहम है। यहां पर जितने भी राजकीय विद्यालय हैं उनकी स्थिति बदतर है। बदहाल होने के चलते माता-पिता अपने बच्चों को इन विद्यायलयों में भेजना पसंद नहीं करते हैं। यहां पर शौचालयों की उचित व्यवस्था नहीं हैं। इसकी साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी है। रिक्त पदों को भरा नहीं जा रहा है। कहीं कहीं तो केवल एक शिक्षक हैं और उन्हीं पर पांच पांच क्लासों के बच्चों के पढ़ाने का बोझ रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति तो और बदतर है। ऐसे स्कूल भी हैं जहां केवल एक-दो शिक्षिका हैं और उन्हीं पर बच्चों को पढ़ाने और खाना बंटवाने का जिम्मा रहता है। इसके अलावा भी उनको कई सारे सरकारी काम करने पड़ते हैं। पिछली सरकार में जो संविदा के जरिए शिक्षक रखे गए थे तो उनकी तनख्वाह तीस हजार रूपये के करीब थी लेकिन योगी की जब सरकार बनी तो इन्होंने सभी संविदा शिक्षकों की तनख्वाह ग्यारह हजार रूपये कर दी। ऐसे में कोई भी गांव देहात के अंदर इतने कम पैसों में इस पद पर काम करने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

इतना कम वेतन होने के चलते संविदा पर बहाल हुए शिक्षकों ने काम छोड़ दिया। इस तरह इनकी जगह पर भर्ती नहीं हुई जिससे विद्यालयों में पद खाली पड़े हैं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में कोई ऐसा प्राइमरी स्कूल नहीं है जो पांच सौ गज या एक हजार गज से ज्यादा का हो। सरकारी स्कूलों की जमीनों पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने अपना मकान बना लिया जिससे स्कूलों का क्षेत्र छोटा हो गया। इन स्कूलों मे छोटे बच्चों के लिए खेलने का कोई इंतजाम नहीं है। यहां पर इतनी व्यवस्था तक नहीं है कि बच्चों को बैडमिंटन तक खेलने की जगह बची हो। यहां सारा काम कागजों पर ही है, जमीन पर कुछ दिखता नहीं है।" 

मेरठ जिला के सीपीआइएम सचिव विजय शर्मा ने बातचीत में कहा कि कृषि क्षेत्र की अनदेखी, पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि से यहां के किसान तो बेहद नाराज हैं ही वहीं युवा वर्ग रोजगार की कमी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार से बेहद खफा हैं। इन इलाकों में केवल और केवल हिंदू मुस्लिम मुद्दा बना हुआ है। यहां विकास और रोजगार पर कोई भी बात करने को तैयार नहीं है। बीजेपी खासकर सांप्रदायिकता के मुद्दे को उछालती रहती है। सड़क, बिजली, पानी की स्थिति योगी सरकार के लाख दावों के बावजूद बदतर बनी हुई है। यहां नेताओं में केवल आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है लेकिन मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा है।

ये भी पढ़ें: यूपी चुनाव: क्या पश्चिमी यूपी कर सकता है भाजपा का गणित ख़राब?

UP Government
UP elections
Uttar Pradesh election 2022
Local issues

Related Stories

हार के बाद सपा-बसपा में दिशाहीनता और कांग्रेस खोजे सहारा

पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया

आज़मगढ़: फ़र्ज़ी एनकाउंटर, फ़र्ज़ी आतंकी मामलों को चुनावी मुद्दा बनाया राजीव यादव ने

यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 

यूपी का रणः उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबलियों का वर्चस्व, बढ़ गए दागी उम्मीदवार

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के 'मास्टर स्ट्रोक’ से बचने की तैयारी में जुटी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश चुनाव: 'कमंडल' पूरी तरीके से फ़ेल: विजय कृष्ण

यूपी चुनाव, पांचवां चरण: अयोध्या से लेकर अमेठी तक, राम मंदिर पर हावी होगा बेरोज़गारी का मुद्दा?


बाकी खबरें

  • संसद
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस स्पाइवेयर को लेकर संसद में गतिरोध, स्वतंत्र जांच के लिए वरिष्ठ पत्रकारों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया  
    27 Jul 2021
    प्रतिष्ठित पत्रकारों एन राम और शशि कुमार ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके अनुरोध किया है कि इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और…
  • साल के अंत तक इराक़ छोड़ देंगे सभी अमेरिकी सैनिक
    पीपल्स डिस्पैच
    साल के अंत तक इराक़ छोड़ देंगे सभी अमेरिकी सैनिक
    27 Jul 2021
    इराक़ में विपक्ष ने इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश से सभी विदेशी सैनिकों, लड़ाकू या ग़ैर-लड़ाकू की पूरी तरह से वापसी की दिशा में पहला क़दम है।
  • लेबनान के मनोनीत पीएम नजीब मिकाती ने सरकार बनाने के लिए संसदीय बहुमत हासिल किया
    पीपल्स डिस्पैच
    लेबनान के मनोनीत पीएम नजीब मिकाती ने सरकार बनाने के लिए संसदीय बहुमत हासिल किया
    27 Jul 2021
    सरकार बनाने में सफल रहे नजीब मिकाती को 2019 से देश में कहर बरपा रहे आर्थिक संकट से तत्काल निपटना होगा।
  • हिमाचल: एचआरटीसी कर्मियों की मांगों के समर्थन में सीटू ने किया प्रदर्शन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल: एचआरटीसी कर्मियों की मांगों के समर्थन में सीटू ने किया प्रदर्शन
    27 Jul 2021
    मज़दूर संगठन सीटू ने हिमाचल प्रदेश सरकार से एचआरटीसी कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने व क्षेत्रीय प्रबंधक का तबादला रद्द करने की मांग की है। सीटू ने ऐलान किया है कि अगर एचआरटीसी कर्मियों का आंदोलन आगे…
  • आजम खान की रिहाई के लिए एएमयू में मार्च
    भाषा
    आज़म ख़ान की रिहाई के लिए एएमयू में मार्च
    27 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के रामपुर से लोकसभा सदस्य और प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान को जमानत नहीं दिए जाने के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License