NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लॉकडाउन संकट: ‘मन की बात’ बनाम मज़दूरों का पलायन
पलायन करने पर मजदूरों को दोषी ठहराया जा रहा है लेकिन क्या हमारी सरकारों ने समय रहते मजदूरों की फ़िक्र की थी? राजधानी दिल्ली तक में सरकार ने तब क़दम उठाया जब हालात बेकाबू हो गए।
मुकुंद झा
30 Mar 2020
lockdown

लॉकडाउन के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से ‘मन की बात’ की। उन्होंने लॉकडाउन से मज़दूरों को हुई दिक्क्तों के लिए माफ़ी भी मांगी। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बात की वो शायद उन्हीं के मन की बात थी। ये मज़दूरों के मन की बात तो कतई नहीं थी।

ऐसा इसलिए है कि अब तक लाखों मजदूर पलायन कर चुके हैं। सैकड़ों अब भी रास्ते में हैं। पूरे देश से जिस तरह से लोगों ने पलायन किया है, उसे रोकने के लिए उनके पास कोई विजन या ब्लू प्रिंट नहीं दिखा। अलग अलग स्रोतों से आई खबरों के मुताबिक अब तक इस लॉक डाउन में पैदल अपने घर जाते हुए 22 मज़दूरों की मौत हो गई है जबकि कोरोना से अब तक कुल 28 मौतें हुई हैं।

जिस तरह से देश की राजधानी दिल्ली से लाखों लोगों ने पलायन किया हैं, उसको लेकर कई लोग इन मज़दूरों को ही दोषी ठहरा रहे हैं। इसे इनकी मूर्खता बताने में लगे है लेकिन सवाल यह है कि क्या सही समय पर इन मज़दूरों को रोकने की कोशिश हमारी सरकारों ने की?

इसका जवाब है- नहीं। और अगर सरकार ने कुछ किया भी हो तो बहुत देरी से किया और वो भी आधी अधूरी तैयारी के साथ। दिल्ली से हुए पलायन की ही बात करते हैं और यहां की सरकार के राहत कार्यों पर एक नज़र डालते हैं। 

दिल्ली में जनता कर्फ्यू के अगले दिन यानी 23 मार्च से ही लॉकडाउन हो गया था। लोग इसका समर्थन भी कर रहे थे लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ जो लोगों ने शहर छोड़कर भागना शुरू कर दिया। दरअसल पहले यह लॉकडाउन मात्र 31 मार्च तक के लिए था तो मज़दूरों ने सोचा किसी तरह से सात दिन काट लेंगे लेकिन 24 मार्च को जब मोदी जी ने संपूर्ण देश में लॉकडाउन की बात कही तो यह मज़दूर घबरा गए।

प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा के समय मज़दूर वर्ग के लिए किसी भी तरह की कोई राहत की घोषणा नहीं की या ऐसी कोई बात नहीं कही जिससे मज़दूरों को सरकार पर विश्वास हो। इसके साथ केजरीवाल ने मज़दूरों के रहने के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था के नाम पर केवल आश्रय गृहों को ही खोला था जोकि कुछ समय में ही भर गए।

इसके विपरीत दुनिया के दूसरे देशों ने लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही मजदूरों के लिए आर्थिक मदद का भी ऐलान किया। दुर्भाग्य से हमारे यहां यह घोषणा भी देर से हुई।

इस बीच दिल्ली सरकार लगातार यह दावा करती रही कि वो लाखों लोगों को भोजन दे रही है लेकिन यह सब शायद मज़दूरों को विश्वास दिलाने में नाकाफ़ी था कि सरकार उनके लिए है।

इधर प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा की उधर मजदूर घर की ओर चलना शुरू कर दिए। शुरुआत में इसमें अधिकतर दिहाड़ी मजदूर थे जो रोज कमाते और खाते थे। इसके साथ ही वो मज़दूर भी थे जो फैक्ट्रियों में या अपने कार्य स्थल पर ही रहते थे। क्योंकि जिनके पास वो काम करते थे उन्होंने उन्हें जाने के लिए कह दिया था क्योंकि मालिकों को यह भय था कि अगर मज़दूर उनके पास रहेगा तो उनका खर्च उन्हें ही उठाना पड़ेगा। 

इसके साथ ही सरकार भी इन मज़दूरों तक पहुंचकर इन्हे विश्वास नहीं दिला पा रही थी। दरअसल सरकार की पहुंच इन मजदूरों के पास तक है ही नहीं। आपको बता दे बीते कई सालों में दिल्ली एनसीआर में यह सर्वे ही नहीं हुआ है कि कितनी फैक्ट्रियां चल रही हैं या बंद हो चुकी हैं।

ऐसे में जब सरकार को फैक्ट्रियों का ही नहीं पता तो मज़दूरों की जानकारी होना तो बड़ा सवाल है। आपको बता दें कि प्रवासी मज़दूरों का बड़ा हिस्सा किराया बचाने के लिए अपनी फैक्ट्रियों में ही रहता है।

दूसरी बात अगर सरकार को इनकी जानकारी थी तो भी इनके पास मदद नहीं पहुंची तो यह और गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल सच्चाई यही है कि दिल्ली सरकार के हज़ार दावों के बाद इन तक सरकारी मदद और भोजन नहीं पहुंच सका।

इसमें एक विकल्प यह हो सकता था कि सरकार की मदद मज़दूर संगठन कर सकते थे लेकिन केजरीवाल सरकार ने किसी भी मज़दूर संगठन से बातचीत करने की ज़हमत नहीं उठाई। यहां तक कि मजदूर संगठनों ने उन्हें पत्र भी लिखा लेकिन इसके बाद भी उन्होंने ऐसी कोई कोशिश ही नहीं की।

 एक बात और। दिल्ली सरकार कह रही है कि वो 70 लाख लोगों को राशन दे रही है। तो आपको बता दें कि यह सरकारी राशन कल यानी रविवार से मिलना शुरू हुआ है वो भी राशनकार्ड धारकों को। मज़दूर इसलिए भी भागे क्योंकि उनके पास कोई काग़जात नहीं है। अगर हैं भी तो वह उनके गृह नगर में हैं।

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
India Lockdown
mann ki baat
Narendra modi
Migrant workers
Daily Wage Workers
poverty

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • ald
    सरोजिनी बिष्ट
    आख़िर जनांदोलनों से इतना डर क्यों...
    17 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में, उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से सवाल करने का दम रखने वाली संघर्षशील ताकतें लगातार सड़कों पर उतर रही हैं तो उनके ख़िलाफ़ संविधान के विरुद्ध जाकर बेहद दमनात्मक…
  • press freedom
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ाद पत्रकारिता से सत्ता को हमेशा दिक्कत रही
    17 Oct 2021
    हाल के सालों में भारत में प्रेस की आज़ादी कमज़ोर होती गई हैI इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार मासूम मुरादाबादी और जयशंकर गुप्ता से खास चर्चा की जिसमें प्रेस की आज़ादी…
  • संदीपन तालुकदार
    चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास
    17 Oct 2021
    वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए पत्थरों के नमूनों के निष्कर्षों को साझा किया है, जिससे इसके कुछ आवश्यक पहलुओं के बारे में नई चीज़ें पता चली हैं।
  • अज़हर मोईदीन
    केरल बीजेपी में बदलाव से भी नहीं कम हुए बढ़ते फ़ासले
    17 Oct 2021
    हाल ही में संगठनात्मक नेतृत्व में फेरबदल और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा की केरल इकाई के भीतर दरार को और बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License