NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लॉकडाउन : दिल्ली सरकार के दावों के विपरीत मज़दूरों को नहीं मिल रहा राशन
सरकार दावा कर रही है कि वो राशन बाँट रही है। कुछ  लोगों को राशन मिल भी रहा है लेकिन अभी भी मज़दूरों की बड़ी आबादी सरकार की योजनाओं से बाहर है।
मुकुंद झा
11 Apr 2020
लॉकडाउन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक अप्रैल को घोषणा कर के कहा कि दिल्ली में उन सभी लोगों को राशन दिया जाएगा, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसके लिए उन्होंने लोगों से दिल्ली सरकार की ई-डिस्ट्रिक्ट वेबसाइट पर राशन कार्ड के लिए आवेदन करने का अनुरोध किया। इस घोषणा के बाद से ही लोगों ने सवाल खड़े किये थे कि इस लॉकडाउन के दौर में मज़दूर कैसे ऑनलाइन अप्लाई करेंगे। जिसकी आशंका जताई जा रही थी, अब घोषणा के दस दिन बाद वही हो रहा है।

सरकार भले ही यह दवा कर ले कि वो लाखों लोगों को राशन देगी लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि मज़दूर राशन पाने के लिए भटक रहा है और उसे राशन नहीं मिल रहा है। इस वजह से कई लोगों के सामने दो वक़्त के भोजन का भी संकट आ गया है। आप सरकार के दावों का इस से ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ऑनलाइन साईट जहाँ रजिस्ट्रेशन होना है वो पिछले कई दिनों से काम नहीं कर रही है। सरकार की ई-डिस्ट्रिक्ट वेबसाइट दो दिन में ही दम तोड़ती दिखी जिसके बाद सरकार ने एक अन्य पोर्टल https://ration.jantasamvad.org/ration/ को चालू किया। लेकिन लोगो का कहना है कि ये भी अब काम नहीं कर रहा है।

website.png

"मै पिछले दस दिनों से अपना राशन कार्ड बनवाने के लिए परेशान हूँ लेकिन अबतक नहीं बन पाया है। अब मेरे पास राशन ख़त्म हो गया है। कुछ पड़ोसी और अन्य लोगों ने मदद की है तब जाकर मैं और मेरा परिवार खाना खा रहे हैं।

ये कहना था राजेश का जोकि दिल्ली में सिलाई का काम करते थे लेकिन इस लॉकडाउन में उनका काम पूरी तरह से बंद पड़ गया है। मालिक ने भी किसी तरह की मदद नहीं की है। जब से दिल्ली सरकार ने घोषणा तबसे ही ये लगतार कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कार्ड बन नहीं पा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने हमें एक स्लिप दिखाई जो उन्होंने काफ़ी समय पहले राशन कार्ड के लिए ऑफ़लाइन फार्म भरा था लेकिन अभीतक उसका जवाब भी नहीं आया है।

राजेश कहते है कि "मेरे पास अपना परिवार है पिछले एक महीने से किसी भी तरह की कमाई नहीं हुई है। जो पैसे थे सब खत्म हो गए हैं। कोई दुकानदार उधार देने के लिए तैयार नहीं है। आप ही बताओ मैं अपना परिवार कैसे पालूं। हालत ऐसे हो गई है कि कभी मन करता है सबकुछ छोड़कर कहीं चला जाऊँ।

ये किसी एक राजेश की बात नहीं है। दिल्ली में ऐसे लोगों की संख्या हज़ारों में है जो लोग राशन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। ऐसे ही चांदबाग की परवीन हैं ,जिन्होंने बतया, "उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रशन तो कर दिया लेकिन राशन का कूपन नहीं मिला। जिस कारण हमे राशन नहीं मिल पा रहा है।"

निर्माण मज़दूर मुकेश यादव ने भी अपने परिवार के राशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी तरह का कोई कूपन नहीं आया है।

खजूरी में रहने वाले अरफ़्ता के मुताबिक़, "पिछले पांच दिन से ऑनलाइन पोर्टल चल ही नहीं रहा है। जिससे कोई भी ज़रूरत मंद आदमी फार्म भर ही नहीं पा रहे हैं। इसके साथ ही जिनका फार्म भरा जा चूका है उनका क्या स्ट्टेस है इसकी जानकारी भी नहीं मिल रही है।"

इसकी जाँच हमने भी और दिल्ली सरकार के उस लिंक पे क्लिक किया तो लिखा आ रहा था की 'सर्वर अंडर हेवी लोड प्लीज़ चेक आफ्टर सम टाइम'।

इसके साथ ही मज़दूरों के लिए इस ऑनलाइन व्यवस्था को समझना ही बहुत जटिल काम है।

इस दौरन उन्हें कई तरह की दिक़्क़तों का समाना करना पड़ रहा है।

कुछ समस्याएं जो मज़दूरों ने बातचीत में बताई हैं, वो देख लीजिए:

1. ऑनलाइन व्यवस्था ही समस्या है, क्योंकि ये मज़दूर इतने पढ़े लिखे तो हैं नहीं कि यह अपना फार्म ख़ुद भर लें, ऐसे में इन्हें किसी और की मदद लेनी पड़ेगी। इस लॉकडाउन के दौर में किसी व्यक्ति से मिलना और काम करना ही बहुत मुश्किल है। 

2. किसी सहायता केंद्र की व्यवस्था न होना ;  

3. रजिस्ट्रेशन के बाद फोन में मैसज का न आना;

4. स्मार्ट फोन की ज़रूरत ; सरकार ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपने फोन से इसे भर सकता है लेकिन हमे कई ऐसे मज़दूर मिले जिनके पास स्मार्ट फोन ही नहीं था।

5. बार बार वेबसाइट का ख़राब होना।

ये समस्याएं मोटे तौर पर मज़दूरों ने बताई हैं।

यह सभी बातें सरकार को घोषणा करने से पहले ही सोचनी चहिए थी। लेकिन लगता है सरकार ने हड़बड़ी में यह घोषणा कर दी, उनके पास इसका कोई ब्लू प्रिंट नहीं था।

इतनी गड़बड़ियों के बाद भी सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जो दिखाता है कि सरकार और मुख्यमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में तो मज़दूरों की चिंता करते हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनका पूरा तंत्र मज़दूरों की मदद करने में विफल हो रहा है।

COVID-19
Coronavirus
Corona Crisis
Lockdown
Arvind Kejriwal
AAP
Daily Wage Workers
poverty
Hunger Crisis
ration card
District website
Website Error
E-Rashan Card

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • मुकुल सरल
    विचार: क्या हम 2 पार्टी सिस्टम के पैरोकार होते जा रहे हैं?
    14 Mar 2022
    कला हो या संस्कृति या फिर राजनीति, मैं तो इसी बात का कायल हूं कि “सौ फूलों को खिलने दो—सौ विचारों में होड़ होने दो”, हां बस इसमें इतना और जोड़ना चाहूंगा कि...
  • परमजीत सिंह जज
    पंजाब में आप की जीत के बाद क्या होगा आगे का रास्ता?
    14 Mar 2022
    जब जीत का उत्साह कम हो जाएगा, तब सत्ता में पहुंचे नेताओं के सामने पंजाब में दिवालिया अर्थव्यवस्था, राजनीतिक पतन और लोगों की कम होती आय की क्रूर समस्याएं सामने खड़ी होंगी।
  • एम.ओबैद
    बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 
    14 Mar 2022
    "बिहार में 70 वर्षों से दबे-कुचले भूमिहीन परिवार ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हमारा भी एक दिन आएगा कि जिस चटाई पर हम सोएंगे उसके नीचे की ज़मीन हमारी होगी।।" 
  • शशि शेखर
    यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 
    14 Mar 2022
    यूपी चुनाव परिणाम ऐसे नेताओं के लिए दीर्घकालिक नुकसान का सबब बन सकता है, जिनका आधार वोट ही “माई(MY)” रहा है।
  • maths
    समीना खान
    इसलिए मैथ्स से बेदख़ल होती जा रही हैं लड़कियाँ
    14 Mar 2022
    आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा किये गए शोध में बताया गया है कि गणित पढ़ने में लैंगिक असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। क्या हैं इसकी वजहें?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License