NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लखनऊ : अब घंटाघर और उजरियां में महिलाओं की जगह उनके दुपट्टे धरने पर
“हम सभी महिलाएं संकेत के रूप में अपने दुपट्टों को और बनाए हुए मंच यथास्थिति में छोड़कर जा रहे हैं। और प्रशासन से निवेदन करते हैं कि हमारे सांकेतिक धरने को यथास्थिति बनाए रखने में सहयोग प्रदान करे : प्रेषक- संघर्षशील महिलाएं”
असद रिज़वी
23 Mar 2020
Lucknow Protest

लखनऊ के घंटाघर (हुसैनाबाद) में संशोधित नगरिकता क़ानून के विरोध में दो महीने से चल रहा प्रदर्शन महिलाओं ने स्वयं फ़िलहाल स्थगित कर दिया है। महिलाओं ने प्रदर्शन स्थल पर अपना मंच और दुपट्टे छोड़ दिए हैं और चेतावनी दी है अगर इसको हटाया गया तो आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि अगर प्रशासन बर्बरता नहीं करता तो करोना  वायरस के प्रकोप को देखते हुए धरना पहले ही स्थगित हो गया होता।

इसी तरह लखनऊ के उजरियां में चल रहे धरने को भी स्थगित कर दिया गया है। वहां भी महिलाओं ने अपनी उपस्थिति बतौर अपने दुपट्टे और चप्पलें छोड़ दी हैं।

IMG-20200323-WA0021.jpg

नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुराने इलाक़े हुसैनाबाद में 17 जनवरी से शुरू हुआ धरना आज सुबह करोना वायरस के प्रकोप ख़त्म होने तक स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने 19 मार्च को बलपूर्वक धरना हटाने की कोशिश की लेकिन विफ़ल हो गया। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया और महिलाओं से अभद्रता की गई थी। लेकिन महिलाओं ने घंटाघर परिसर ख़ाली नहीं किया। महिलाओं का उस समय कहना था कि सरकार लाठी और बंदूक़ के बल पर संविधान कि रक्षा के लिए हो रहे आंदोलन को ख़त्म नहीं करा सकती है।

पुलिस बर्बरता की ख़बर फैलते ही बड़ी संख्या में महिलाएँ घंटाघर पर जमा हो गई थी। जिसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा था। कल 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित जनता कर्फ़्यू के दौरान भी बड़ी संख्या में महिलाएँ घंटाघर पर प्रदर्शन करती रहीं। हालाँकि पुलिस ने घंटाघर आने वाले सभी रास्तों को सुबह से ही बंद कर दिया था।

लेकिन कल रात जनता कर्फ़्यू के दौरान प्रशासन का रवैया कुछ नरम हुआ। आज से लखनऊ समते प्रदेश के 15 ज़िलों में लॉकडाउन भी शुरू हो गया है। इसी सबको देखते हुए महिलाओं ने आपस में प्रदर्शन को स्थगित करने पर विचार शुरू किया। प्रशासन के आला अधिकारियों ने महिलाओं से सम्पर्क किया और नरमी से  प्रदर्शन ख़त्म करने के लिए आग्रह किया। प्रशासन की महिलाओं के साथ बात आज सुबह होते तक जारी रही।

जिसके बात महिलाओं ने स्वयं ही प्रदर्शन स्थल ख़ाली करने का फ़ैसला लिया। लेकिन महिलाओं ने कहा की धरना ख़त्म नहीं हो रहा है बल्कि करोना वायरस के प्रकोप की वजह से कुछ समय के लिए स्थगित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि यह फ़ैसला देश हित में लिया जा रहा है। लेकिन करोना के साथ-साथ सीएए के विरुद्ध भी जंग जारी रहेगी। 

प्रदर्शनस्थल से जाते समय प्रदर्शनकारी महिलाएँ घंटाघर की सीढियों पर अपने द्वारा बनाया मंच छोड़ गई। इस के अलावा घंटाघर पर अपने दुपट्टे रख दिए हैं ताकि आंदोलन को ख़त्म नहीं माना जाए। महिलाओं ने प्रशासन को चेतावनी भरी एक चिट्ठी भी दी है, जिस में लिखा है कि अगर मंच या दुपट्टे हटाए गए तो प्रदर्शनकारी महिलाएँ तुरंत दोबारा जमा हो कर पुनः आंदोलन शुरू कर देगी। प्रशासन की तरफ़ से सहायक पुलिस ने इस चिट्ठी को प्राप्त कर लिया है।

780fef69-1b2d-4653-97a8-7e485f7d73e0.jpg

धरने में शामिल कुछ महिलाओं से न्यूज़क्लिक ने बात की तो उन्होंने कहा आंदोलन ख़त्म नहीं हुआ है, स्थगित किया गया है। घंटाघर पर मौजूद इरम कहती हैं, आंदोलन को इंसानियत के लिए स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा आंदोलन उस समय तक ही स्थगित है जब तक महिलाओं द्वारा घंटाघर पर छोड़ी गई चीज़ों को प्रशासन हाथ नहीं लगता है।

यही प्रक्रिया उजरियां के लिए भी अपनाई गई है। यहां भी धरने-प्रदर्शन को चलते दो महीने से ज़्यादा हो गए थे। यहां भी पुलिस को पत्र देकर धरना स्थल पर दुपट्टे और चप्पल इत्यादि छोड़ दी गईं हैं।

 IMG-20200323-WA0022.jpg

सीएए की मुखर विरोधी भी करोना को देखते प्रदर्शन को स्थगित करने को सही क़दम मान रहे हैं। सदफ़ जाफ़र जो सीएए का विरोध करने के लिए जेल जानी वाली पहली महिला हैं, कहती हैं कि सरकार तो घंटाघर पर बैठी महिलाओं को लेकर प्रारम्भ से संवेदनहीन रही है। शुरू से सर्दी -बारिश और प्रशासन की सख़्ती के बीच महिलाओं ने संघर्ष किया है। लेकिन इस समय देश के लिए प्रदर्शन को स्थगित करना ज़रूरी था। सदफ़ जाफ़र कहतीं हैं घंटाघर वापस लौटने तक संकेतिक प्रदर्शन के तौर पर सोशल मीडिया के ज़रिए बड़ी संख्या में लोगों को सीएए विरोधी आंदोलन से जोड़ा जायेगा।

महिलाओं का कहना है अब घरों से प्रदर्शन किया जायेगा।

सुमैया राना के अनुसार भारत हमारा मुल्क है, हमें इसको स्वस्थ भी रखना है और इसके संविधान की रक्षा भी करना है।

सुमैया राना के कहा करोना ख़त्म होने तक महिलाएँ अपने घर से सीएए का विरुद्ध काले ग़ुब्बारे छोड़ कर और बाल्कनी में शमाएँ (कैंडल) जला कर संकेतित प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने बताया की कल (रविवार) देर रात पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे ने महिलाओं से पहले फ़ोन और मिलकर धरना ख़त्म करने की बात की थी। लेकिन महिलाओं ने स्वयं प्रदर्शन स्थगित करने का फ़ैसला लिया है।

रविवार दोपहर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक़ ने भी सोशल मीडिया से प्रदर्शन  स्थगित करने की अपील की। बता दें कि डॉ कल्बे सादिक़ ने सबसे पहले घंटाघर जा कर सीएए के विरुद्ध धरने के समर्थन का ऐलान किया था। उनके बेटे डॉ. कल्बे सिब्तैन ‘नूरी’ के विरुद्ध सीएए का विरोध करने के लिए सख़्त धाराओं में मुक़दमे दर्ज हैं। डॉ. नूरी कि विवादित होर्डिंग पर तस्वीर भी है पर प्रशासन ने उनके घर पर वसूली का नोटिस भी चस्पा किया है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के  वरिष्ठ डॉक्टर क़ौसर उस्मान ने भी प्रदर्शंकरी महिलाओं से करोना का ख़तरा बताते हुए उन से प्रदर्शन स्थगित करने कि अपील की थी। सीएए का विरोध कर के जेल जाने वाले पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी ने भी सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थगित करने की अपील की थी।

Lucknow Protest
Lucknow Ghantaghar Protest
Ujariya Protest
Dupatta Protest
CAA
NRC
NPR
UP police
yogi sarkar
Yogi Adityanath
BJP
Coronavirus
novel coronavirus
COVID-19

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License