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लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला संगठनों ने देश में बिगड़ते सम्प्रदायिक सौहार्द पर चिंता जताई हैं।
असद रिज़वी
20 Apr 2022
Hate
यूपी की राजधानी लखनऊ में हुआ प्रदर्शन

भगवा विचारधारा से प्रभावित हिन्दू बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज को लगातार निशाना बनाये जाने से नागरिक समाज में आक्रोश देखा जा रहा है। नागरिक समाज का कहना है कि देश में लगातार एक साजिश के तहत संविधान और एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला संगठनों ने देश में बिगड़ते सम्प्रदायिक सौहार्द पर चिंता जताई हैं। लखनऊ के शहीद स्मारक पर एक सभा में इन संगठनों की ओर से कहा गया कि नवरात्र, रामनवमी और हनुमान जयंती के अवसर पर मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाया गया और फिर उनकी दुकानों और मकानों को आग के हवाले कर दिया गया।

राजधानी में मंगलवार को हुई सभा में कहा गया कि भगवा विचारधारा से प्रभावित हिन्दुओं ने विभिन्न प्रदेशों में मस्जिदों में भगवा झंडे लगाये। इसके अलावा हथियारबंद भीड़ ने मुस्लिम इलाकों में भड़काऊ नारे लगाये और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

सभा में कहा गया कि देश में लगातार सांप्रदायिक सौहार्द ख़राब हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश बैठे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दंगा पीड़ितों के घर पर बुलडोज़र चलवा रहे हैं। इसके अलावा देश के नागरिकों के लोकतान्त्रिक और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। सभा में शामिल होने आये कुछ लोगो से न्यूज़क्लिक ने बात की…

अराजकता का डर

रंगकर्मी दीपक कबीर कहते हैं कि देश में नफरत की बुनियाद पर एक ऐसी भीड़ तैयार की जा रही है, जो अपने से कमजोरों के घरों पर हमला कर रही है। कबीर मानते हैं कि ये दुर्भाग्य है कि इस भीड़ में शामिल लोगो को सत्ता में बैठे लोग माला पहना कर सम्मानित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो देश में अराजकता का माहौल पैदा होने का डर है।

संस्थाएं सरकारी दफ्तरों में तब्दील

प्रो. रूपरेखा वर्मा, सचिव साझी दुनिया ने कहा- देश के हालत बहुत ख़राब हो चुके हैं, देश ने 1947 से लेकर 2014 तक जितनी उन्नति की थी, उससे ज्यादा पिछले 7 सालों में देश का नुकसान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हमारी सभी संस्थाएं लग-भग ख़त्म हो गई हैं। संस्थाएँ सरकारी दफ्तरों की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने कहा अब अदालतों को मुस्कुरा कर किये गए अपराध, ग़लत नहीं लगते हैं। जिसका अर्थ यह है कि हम मुस्कुरा कर हत्या करने के लिए आजाद हैं। प्रो. रूपरेखा वर्मा ने कहा कि समुदाय को निशाना बनाना न धर्म है और न राष्ट्रवाद, यह केवल भगवा गुंडागर्दी है।

आज़ादी में मुसलमानों की कुर्बानिया

संगीतकार कुलदीप सिंह कहते हैं कि देश में विभिन्न धर्म के मानने वालों का एक साथ रहना उनका आपसी भाईचारा ही भारत की पहचान है। लेकिन अब नफरतों को जन्म देकर इस भाईचारे को ख़त्म करने की कोशिश हो रही है। कुलदीप ने कहा कि “भजन” हिन्दू धर्म का हिस्सा है। लेकिन भारत में शकील बदायुनी इसको लिखते हैं, नौशाद इसका संगीत बनाते हैं, रफ़ी इसको गाते हैं और युसूफ खान (दलीप कुमार) पर फिल्माया जाता है। उन्होंने कहा इतना ही देश की आज़ादी में मुसलमानों ने भी कुर्बानिया दी है, इस लिए यह देश जितना एक हिन्दू का है उतना एक मुस्लिम का भी है।

बुलडोज़र और अदालत

अधिवक्ता अस्मा इज्ज़त मानती हैं कि 1947 से अब तक सब एकजुट होकर देश को प्रगति के पथ पर लेकर आये थे। लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुल्क को पीछे की तरफ धकेल रही है, जिससे देश 1947 से भी कई दशक पीछे जाता दिख रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश में मुस्लिमों के घरों को बुलडोज़र द्वारा तोड़े जाने पर कहा कि अदालतें सब देख रहीं हैं, मगर खामोश हैं, जबकि अदालत को इस पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए था।

नई प्रवृत्ति का जन्म

रिहाई मंच के राजीव यादव ने कहा कि एक नई प्रवृत्ति ने जन्म लिया है जिसमें भीड़ मुसलमानों की दुकानों और मकानों को आग के हवाले कर दे और उनकी मस्जिदों को निशना बनाये और बाद में मुसलमानों को ही दंगे का ज़िम्मेदार बता दिया जाये। उन्होंने कहा दिल्ली में  नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में  2019-20 हुई हिंसा में भी यही हुआ था। पहले मुसलमानों को निशाना बनाया गया और फिर दंगे का आरोप भी उन्हीं पर लगा कर, प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया गया।

हिन्दू पर्वों पर मुस्लिम निशाना

लेखिका तस्वीर नकवी कहती हैं कि हालात बहुत मायूस कर रहे हैं। वह कहती हैं- जिस तरह से हिन्दू पर्वों पर मुस्लिम समाज को निशाना बनाया जा रहा है, उससे लगता है कि सब कुछ सुनियोजित साजिश के तहत हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम ही नहीं दलित और ईसाई समाज को भी निशाना बनाया जा रहा है ताकि उनको दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया जा सके। तस्वीर नकवी कहती हैं कि उनको स्वयं से ज्यादा देश के बच्चों के भविष्य के बारे में चिंता है।

तानाशाही चल रही है

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की मधु गर्ग मानती हैं कि देश में लोकतंत्र नहीं तानाशाही चल रही है। देश को नफरत ने जकड़ लिया है। भारत में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और प्रेम की बात करना अपराध हो गया है। वह कहती हैं कि मुसलमानों के बहाने लोकतंत्र और संविधान को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को मिलकर इस नफरत के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। मधु गर्ग मानती हैं कि नफरत फ़ैलाने वालों को सत्तापक्ष का समर्थन हासिल है। यही कारण है कि लिंचिंग करने वाले जब जेल से आते हैं तो सरकार के मंत्री उनका स्वागत करते हैं और उनको फूलों की माला पहनते हैं।

प्रतिरोध की आवाज़

समाज सेवी परवीन सिंह ने कहा कि अब प्रतीकात्मक प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा। प्रतिरोध की आवाज़ को बढ़ना होगा, प्रगतिशील संगठनों, नवजवानों को खुलकर सामने आना होगा, ताकि सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज़ को मज़बूती से उठाया जा सके। सिंह कहते हैं कि लखनऊ को सम्प्रदियकता के खिलाफ लड़ाई का केंद्र बनाया जाये क्योंकि लखनऊ दुनिया भर में गंगा-जमनी तहज़ीब की मिसाल है। उन्होंने कहा यूनिवर्सिटियों से सरकारी दफ्तरों तक जा कर साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की आवाज़ उठानी होगी।

सभा की अध्यक्षता कर रहीं महिला फेडरेशन की अध्यक्ष आशा मिश्र ने न्यूज़क्लिक से कहा कि आज धर्म के नाम पर जो राजनीति हो रही है वह समाज को तोड़ने वाली है। उन्होंने कहा कि जब से फासीवादी ताक़ते सत्ता में आ गई हैं और तब से ही धर्म की आड़ में संविधान और लोकतंत्र पर भी हमला हो रहा है। असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए फासीवादी ताक़तों ने पूरी मीडिया को अपने कब्जे में ले लिया है। धरने-प्रदर्शन पर भी पाबंदी है ताकि असहमति का स्वर न उठ सके। इसीलिए अमन पसंद नागरिक इसका विरोध कर रहे हैं।

लोकतंत्र विरोधी अभियान

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर कहते हैं कि लखनऊ हमेशा से कौमी एकता की एक मिसाल रहा है। इस शहर ने सम्प्रदियकता के खिलाफ लड़ाई की शुरुवात कर दी है। लाल बहादुर मानते हैं कि जिस तरह की हिंसा देश भर में हो रही है वह सत्ता के सर्वोच्च स्तर से प्रायोजित लोकतंत्र-संविधान विरोधी एक अभियान है, और निशाने पर मुसलमान हैं।

वैचारिक विपक्ष नहीं है

आल इंडिया पीपुल फ्रंट के दिनकर कपूर ने कहा कि इस  सभा का उद्देश्य बीजेपी और आरएसएस द्वारा पैदा किये गए सांप्रदायिकता और मुस्लिम विरोधी दंगों के माहौल के खिलाफ आवाज़ उठाना है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस को ताक़त इसलिए मिली है क्योंकि उनके खिलाफ लड़ने वाला वैचारिक विपक्ष कही नज़र नहीं आ रहा है।

हिजाब से जेएनयू तक

नेता आयुष कहते हैं कि उन्होंने किताबों में फासीवाद के बारे में पढ़ा था आज अपने देश में देख रहे हैं। जो “हिजाब” का मुद्दा बीजेपी और आरएसएस द्वारा कर्नाटक से उठाया गया था अब वह नए-नए रंग लेता जा रहा है। रामनवमी को भी साम्प्रदायिक रंग दे दिया गया है। मुस्लिम समाज पर लगातार अत्याचार बढ़ रहे हैं।

आयुष कहते हैं कि शिक्षक संस्थान भी सांप्रदायिकता की भेट चढ़ रहे हैं। जिसका उद्धरण जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का वेज-नॉन वेज खाने का विवाद है। ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के आयुष कहते हैं बढ़ती सांप्रदायिकता देश के लिए बड़ी चुनौती है, और हर संभव कोशिश करनी होगी इसका विरोध करने के लिए।

ये भी पढ़ें: मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?

Hate Crime
Anti Muslim
anti-muslim propaganda
Politics of Hate
Lucknow

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